दोस्तों, भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर सुंदरता और मैस्कुलिनिटी का कोई चेहरा था, तो वह थे विनोद खन्ना। एक ऐसा हीरो जिसकी एक मुस्कान पर 70 और 80 के दशक की हर लड़की अपना दिल हार बैठती थी। उनके पास सब कुछ था दौलत, शोहरत और एक ऐसा स्टारडम जो उस समय के शहंशाह अमिताभ बच्चन को भी टक्कर दे रहा था। लेकिन आज उनके गुजरने के सालों बाद उनके परिवार को देखकर एक बहुत ही अजीब और गहरा सवाल खड़ा होता है। विनोद खन्ना के तीन बेटे हैं। राहुल खन्ना, अक्षय खन्ना और साक्षी खन्ना। तीनों ही देखने में बेहद हैंडसम हैं। तीनों के पास अपने पिता की विरासत है। लेकिन तीनों में एक चीज बेहद डरावने तरीके से कॉमन है। तीनों आज तक कुंवारे हैं। जी हां, 50 साल के पार जा चुके राहुल हो, 49 साल के अक्षय या 30 पार कर चुके साक्षी। इनमें से किसी ने भी अपना घर नहीं बसाया। क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर यह किसी श्राप का नतीजा है? और अगर मैं आपसे कहूं कि इस अकेलेपन की कहानी आज की नहीं बल्कि 1982 की उस एक गलती से शुरू होती है जिसने इस परिवार को हमेशा के लिए तोड़कर रख दिया। यह वीडियो एक टूटे हुए घर की वो काली सच्चाई है जिसे ग्लैमर की चमक के पीछे छिपा दिया गया। आखिर क्यों अक्षय खन्ना कहते हैं कि वह मैरिज मटेरियल नहीं है? पता नहीं मेरे को एक ऐसा कोई मतलब ड्रीम नहीं है कि एक दिन मेरे इतने बच्चे होंगे और खेल रहे होंगे गार्डन में और मैं देखूंगा
और क्यों सबसे छोटे बेटे साक्षी का नाम ड्रग्स और डिप्रेशन से जुड़ा। इस कहानी की असली शुरुआत होती है साल 1982 से। यह वो दौर था जब विनोद खन्ना का सितारा बुलंदी पर था। फिल्म कुर्बानी की सफलता ने उन्हें बॉक्स ऑफिस का राजा बना दिया था और इंडस्ट्री में यह फुसफुसाहट थी कि वे जल्द ही अमिताभ बच्चन को पछाड़ कर नंबर वन बन जाएंगे। उनका परिवार भी एक आदर्श परिवार था। खूबसूरत पत्नी गीतांजलि तालियार खान और दो प्यारे बेटे राहुल और अक्षय सब कुछ किसी परी कथा जैसा लग रहा था लेकिन तभी एक ऐसी खबर आई जिसने बॉलीवुड ही नहीं पूरे देश को सन्न कर दिया। विनोद खन्ना ने अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी पत्नी और दोनों मासूम बच्चों को मुंबई में छोड़कर सन्यास लेने का ऐलान कर दिया। यह कोई फिल्म की शूटिंग नहीं थी और ना ही कोई छोटा-मोटा वेकेशन। उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि 10 साल के बेटे राहुल और महज 5 साल के छोटे से अक्षय को हमेशा के लिए पीछे छोड़ दिया। किसी दूसरी औरत के लिए नहीं बल्कि अपने आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश के लिए। जरा सोचिए उस मंजर के बारे में। विनोद खन्ना जो कल तक सिल्वर स्क्रीन पर विलेन को मार रहे थे। रातों-रात अमेरिका के ओरेगॉन में ओशो के कम्यून रजनीशपुरम चले गए। वहां जाकर यह सुपरस्टार फिल्मों में एक्टिंग नहीं कर रहा था बल्कि माली बनकर बगीचे में पानी दे रहा था। झूठे बर्तन धो रहा था और यहां तक कि आश्रम के टॉयलेट भी साफ कर रहा था। उन्हें वहां स्वामी विनोद भारती नाम दिया गया। लेकिन यहां भारत में उनके इस फैसले ने उनके परिवार पर जो कहर बरपाया, उसे अक्षय खन्ना ने बाद में अपनी जिंदगी का अर्थक्वेक कहा। 5 साल के नन्हे अक्षय के लिए यह समझना नामुमकिन था
कि उनके पिता जो उनके हीरो थे उन्हें छोड़कर क्यों चले गए। अक्षय ने अपने एक दर्दनाक इंटरव्यू में कहा था एक 5 साल के बच्चे के लिए यह समझना असंभव था कि किसी के पास सब कुछ होते हुए भी वह सन्यास क्यों ले लेगा। सन्यास का मतलब है सब कुछ त्याग देना और उस त्याग में हम परिवार भी शामिल थे। यह बच्चों के लिए सिर्फ पिता का जाना नहीं था बल्कि यह महसूस करना था कि वे अपने पिता को रोकने के लिए काफी नहीं थे। विनोद के जाने के बाद असली पहाड़ उनकी पत्नी गीतांजलि पर टूटा। गीतांजलि जो एक पारसी परिवार से थी और अपने जमाने की टॉप मॉडल रह चुकी थी। अचानक दो बच्चों के साथ बिल्कुल अकेली रह गई। समाज और मीडिया के ताने अलग थे। लोग उनसे पूछते थे कि तुम्हारे पति साधु के साथ क्यों भाग गए? लेकिन गीतांजलि ने हार नहीं मानी। उन्होंने 1982 से 1985 तक यानी पूरे 3 साल तक विनोद का इंतजार किया। उन्हें उम्मीद थी कि शायद बच्चों की याद उन्हें वापस ले आएगी। वे फोन पर विनोद से बात करती। उन्हें घर की याद दिलाती लेकिन दूसरी तरफ से खामोशी मिलती। जब 3 साल के इंतजार के बाद भी विनोद वापस नहीं आए और उन्होंने आश्रम को ही अपनी दुनिया मान लिया तो गीतांजलि का सब्र टूट गया। उन्होंने समझ लिया कि अब वे और बच्चे विनोद की प्राथमिकता नहीं है। आखिरकार 1985 में उन्होंने भारी मन से तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। इन तीन-चार सालों में नन्हे अक्षय और राहुल ने अपनी मां को हर रोज पिता के इंतजार में घुटते और फिर अकेले संघर्ष करते देखा। यही वो समय था जब इन दोनों भाइयों के मन में यह बात गहरे तक बैठ गई कि शादी का मतलब सिर्फ दर्द और इंतजार होता है। पिता का वो सन्यास उनके बेटों के लिए अजन्म कुंवारेपन की वजह बन गया। अगर विनोद खन्ना के सन्यास ने परिवार की नींव हिलाई थी तो उस टूटन का सबसे गहरा असर उनके छोटे बेटे अक्षय खन्ना के दिमाग पर हुआ। आज 50 की उम्र में अक्षय खन्ना खुलेआम कहते हैं कि वह मैरिज मटेरियल नहीं है और यह कोई मजाक नहीं बल्कि एक बहुत सोचा समझा कड़वा सच है। अक्षय का मानना है कि शादी का मतलब है अपनी आजादी का गला घंटना। एक पुराने वायरल इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा था मुझे जिम्मेदारी पसंद नहीं है। बीवी और बच्चों से बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं होती और मैं उस बोझ को उठाने के लिए तैयार नहीं हूं। मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जिस बच्चे ने 5 साल की उम्र में देखा हो कि परिवार की जिम्मेदारी ने उसके पिता को इतना घुटने पर मजबूर कर दिया कि वह सब कुछ छोड़कर भाग गए। उस बच्चे के लिए शादी एक पिंजरे जैसा बन गई। अक्षय ने सबकॉन्शियस माइंड में यह मान लिया कि अगर वह शादी करेंगे तो या तो वो अपने पिता की तरह भाग जाएंगे या फिर अपनी पत्नी को वही दर्द देंगे जो उनकी मां गीतांजलि ने सहा। इसलिए किसी और को बर्बाद करने से बेहतर उन्होंने खुद को अकेला रखना सही समझा। लेकिन दोस्तों कहानी सिर्फ इतनी सीधी नहीं है कि अक्षय को कभी प्यार नहीं हुआ। 2000 के दशक की शुरुआत में एक ऐसा वक्त आया था जब खन्ना परिवार में शहनाई बजने ही वाली थी, और दुल्हन कोई और नहीं बल्कि कपूर खानदान की लाडली करिश्मा कपूर बनने वाली थी। यह बॉलीवुड का एक ऐसा सीक्रेट है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करिश्मा कपूर और अक्षय खन्ना एक मैगजीन फोटोशूट के दौरान करीब आए थे, और दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी। उस वक्त करिश्मा का अजय देवगन से ब्रेकअप हुआ था और उन्हें अक्षय के शांत स्वभाव में सुकून दिखा।
बात इतनी आगे बढ़ गई थी कि करिश्मा के पिता रणधीर कपूर खुद इस रिश्ते को लेकर बेहद उत्साहित थे। रणधीर कपूर को अक्षय खन्ना बहुत पसंद थे, और उन्होंने खुद विनोद खन्ना के पास शादी का प्रस्ताव भेजा था। खन्ना और कपूर परिवार के बीच सब कुछ तय हो चुका था। यहां तक कि बॉलीवुड के गलियारों में शादी की तारीखों की अटकलें भी शुरू हो गई थी। मगर फिर एंट्री हुई इस कहानी के विलेन की करिश्मा की मां बबीता कपूर। जहां रणधीर कपूर इस रिश्ते के लिए राजी थे, वहीं बबीता ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए इस शादी को होने से रोक दिया। बबीता को लगता था कि करिश्मा उस वक्त अपने करियर के पीक पर हैं और अक्षय खन्ना का करियर बहुत डावाडोल चल रहा था। साथ ही अक्षय का स्वभाव बहुत इंट्रोवर्ट था जो बबीता को अपनी बेटी के लिए सुरक्षित नहीं लगा। बबीता एक स्टेबल और अमीर दामाद चाहती थी। इसलिए उन्होंने अक्षय को रिजेक्ट कर दिया और बाद में करिश्मा की शादी दिल्ली के बिजनेसमैन, संजय कपूर से करवा दी। विडंबना आयरनी देखिए। संजय कपूर के साथ करिश्मा की शादी एक डिजास्टर साबित हुई। जिसमें उन्हें मानसिक प्रताड़ना और एक गंदे तलाक से गुजरना पड़ा। जबकि अक्षय खन्ना आज भी अकेले होकर सुकून की जिंदगी जी रहे हैं। इस घटना ने अक्षय को इतना गहरा जख्म दिया कि उन्होंने अपने दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर लिए। उन्होंने देख लिया कि रिश्तों में प्यार से ज्यादा स्टेटस और पॉलिटिक्स मायने रखती है। इसके बाद अक्षय ने मुंबई की भीड़भाड़ से दूर अलीबाग में अपना ठिकाना बना लिया। जहां वो आज अपनी शर्तों पर बिना किसी जिम्मेदारी के एक राजा की तरह अकेले रहते हैं। अगर अक्षय खन्ना ने अपने अकेलेपन को अलीबाग की शांति में छिपाया है तो उनके बड़े भाई राहुल खन्ना ने अपने अकेलेपन को एक बहुत ही खूबसूरत और महंगे पर्दे के पीछे ढक रखा है। राहुल खन्ना को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह शख्स अंदर से अकेला है। सोशल मीडिया पर उनकी जिंदगी किसी हॉलीवुड राजकुमार जैसी लगती है। महंगे इटालियन सूट, लंदन और न्यूयॉर्क की आलीशान छुट्टियां और शानदार लाइफस्ट। लेकिन गौर से देखें तो राहुल खन्ना एक ब्यूटी क्लोनर की जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने खुद को एक बुटीक एक्टर के रूप में ब्रांड किया है। यानी वो काम बहुत कम करते हैं। लेकिन सिर्फ वो जो क्लासी हो। उनका Instagram अकाउंट गवाह है कि उनकी दुनिया में अगर किसी के लिए जगह है तो वो हैं उनके पालतू कुत्ते। वहां ना कोई जीवन साथी दिखता है ना ही परिवार का कोई शोरशराबा। राहुल ने अपने पिता के बिखरे हुए घर से यह सबक लिया कि अगर जिंदगी को परफेक्ट और साफ सुथरा रखना है तो उसमें किसी इंसान पत्नी की एंट्री मत होने दो। उनका अकेलापन उदासी भरा नहीं बल्कि एक सजाई हुई दुकान जैसा है जहां एंट्री बंद है। हैरानी की बात यह है कि जब अक्षय खन्ना को दृश्यम दो या धुरंधर जैसी फिल्मों के लिए वाहवाही मिलती है तो राहुल के सोशल मीडिया पर एक अजीब सन्नाटा रहता है। यह इशारा करता है कि भाइयों के बीच भी वह गर्मजशी नहीं है जो एक सामान्य परिवार में होती है।
दोनों ने अपनी-अपनी अलग दुनिया बसा ली है जहां वे एक दूसरे को भी दखल नहीं देने देते। वहीं दूसरी तरफ खन्ना परिवार का सबसे छोटा चिराग साक्षी खन्ना विनोद खन्ना और उनकी दूसरी पत्नी कविता के बेटे एक बिल्कुल अलग और भयानक अकेलेपन से जूझ रहा है। साक्षी की कहानी ग्लैमर की नहीं बल्कि संघर्ष और अंधेरे की है। 2011 में जब साक्षी सिर्फ 20 साल के थे उनका नाम एक बहुत बड़े ड्रग स्कैंडल में आया था जिसने पूरे खन्ना परिवार की इज्जत दांव पर लगा दी थी। रायगढ़ पुलिस ने एक रेव पार्टी पर छापा मारा था। जहां 290 लोग मौजूद थे और मेडिकल टेस्ट में साक्षी खन्ना को ड्रग्स लेने का दोषी पाया गया था। रातोंरात विनोद खन्ना का बेटा एक बिगड़ैल ड्रग एडिक्ट के रूप में बदनाम हो गया। इस एक दाग ने उनके करियर को शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया। खबरें आई थी कि संजय लीला भंसाली उन्हें बाजीराव मस्तानी के समय असिस्ट कर रहे थे और लॉन्च करने वाले थे। लेकिन इस विवाद के बाद भंसाली ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए। मिलन लुथरिया ने भी उन्हें लॉन्च करने का वादा किया। लेकिन वो प्रोजेक्ट कभी जमीन पर नहीं उतरा। बार-बार रिजेक्ट होने और स्टार किड होने के बावजूद काम ना मिलने ने साक्षी को डिप्रेशन और अकेलेपन की ओर धकेल दिया। आज साक्षी जुगाड़ मोशन पिक्चर्स नाम की कंपनी चलाकर कैमरे के पीछे अपनी पहचान बना रहे हैं और रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे अब बहुत ज्यादा स्पिरिचुअल हो गए हैं। विडंबना देखिए जिस आध्यात्मिकता ओशो ने उनके पिता को परिवार से तोड़ा था। आज वही आध्यात्मिकता साक्षी को सहारा दे रही है। लेकिन कीमत वही है अकेलापन। इस पूरे पारिवारिक नाटक का क्लाइमेक्स और शायद सबसे दुखद अध्याय 27 अप्रैल 2017 को लिखा गया। जब विनोद खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कहा। एक सुपरस्टार की मौत पर पूरा बॉलीवुड रो रहा था। लेकिन वर्ली के श्मशान घाट पर जो नजारा दिखा उसने वहां मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया। हिंदू धर्म की सदियों पुरानी परंपरा और शास्त्र कहते हैं कि पिता की चिता को मुखाग्नि अंतिम संस्कार की अग्नि देने का पहला अधिकार उसके सबसे बड़े बेटे का होता है। इस लिहाज से यह हक राहुल खन्ना का था जो विनोद के सबसे बड़े पुत्र हैं। पूरी मीडिया और वहां मौजूद लोग यही उम्मीद कर रहे थे कि राहुल आगे आएंगे और अपने पिता की अंतिम रस्में निभाएंगे।
लेकिन वहां एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला उलटफेर हुआ। चिता के पास राहुल खन्ना नहीं बल्कि विनोद खन्ना के सबसे छोटे बेटे साक्षी खन्ना, दूसरी पत्नी कविता के बेटे आगे आए और उन्होंने ही अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह महज एक रस्म नहीं थी बल्कि यह दुनिया के सामने एक खामोश ऐलान था कि विनोद खन्ना का असली परिवार अब कौन था। उस दिन की तस्वीरों और वीडियो को अगर आप गौर से देखें तो एक बहुत ही अजीब और दिल तोड़ने वाला मंजर दिखाई देता है। राहुल और अक्षय खन्ना वहां मौजूद तो थे लेकिन वे किसी बेटे की तरह नहीं बल्कि साइलेंट स्पेक्टेटर्स की तरह एक कोने में खड़े थे। उनके चेहरों पर दुख था लेकिन वो अधिकार वाला भाव नहीं था जो एक बेटे का अपने पिता पर होता है। उन्होंने चुपचाप अपने छोटे सौतेले भाई को वो रस्म करते देखा जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार था। बॉलीवुड के गसिप गलियारों में दबी जुबान में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह विनोद खन्ना की आखिरी इच्छा थी? क्या उन्होंने अपनी वसीयत में या अपने अंतिम दिनों में यह साफ कर दिया था कि उनका असली जुड़ाव अब सिर्फ उनके दूसरे परिवार कविता साक्षी और श्रद्धा के साथ है या फिर राहुल और अक्षय ने खुद ही पीछे हटकर यह संदेश दिया कि जिस पिता ने उन्हें बचपन में त्याग दिया था, उस पिता पर अब उनका कोई हक नहीं बचा। कारण चाहे जो भी हो, उस जलती हुई चिता की लपटों ने यह साबित कर दिया कि 1982 में जो परिवार टूटा था, वह मौत के बाद भी नहीं जुड़ पाया। विनोद खन्ना का जाना राहुल और अक्षय के लिए सिर्फ एक पिता का जाना नहीं था, बल्कि उस आखिरी उम्मीद का भी टूट जाना था कि शायद कभी सब कुछ ठीक हो जाएगा। उस दिन श्मशान में सिर्फ विनोद खन्ना का शरीर नहीं जला बल्कि उन
रिश्तों की बची खुची राख भी हमेशा के लिए ठंडी हो गई। तो दोस्तों विनोद खन्ना के तीनों बेटों 50 साल के राहुल, 49 साल के अक्षय और 33 साल के साक्षी का आज तक अविवाहित रहना बॉलीवुड की सबसे दिलचस्प और साथ ही सबसे दुखद कहानियों में से एक है। यह कहानी हमें सिखाती है कि माता-पिता के फैसले बच्चों के भविष्य पर कैसा गहरा असर डालते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ओशो रजनीश जिनके लिए विनोद खन्ना ने अपना परिवार त्यागा था। उनका दर्शन था कि परिवार एक मोह माया है और बच्चों पर माता-पिता का कोई अधिकार नहीं होता। अनजाने में ही सही विनोद खन्ना के तीनों बेटों ने अपने पिता के गुरु के इस दर्शन को अपनी जिंदगी का सच बना लिया है। विनोद ने परिवार बनाने के बाद उसे त्याग दिया था। लेकिन उनके बेटों ने परिवार बनाया ही नहीं ताकि उन्हें कभी उसे छोड़ने या टूटने का दर्द ना सहना पड़े। आज खन्ना ब्रदर्स के पास करोड़ों की दौलत है। नाम है लेकिन वो एक चीज नहीं है जिसे घर कहते हैं। अक्षय का जिम्मेदारी से डरना, राहुल का परफेक्शन में छिपना और साक्षी का अंधेरे में खो जाना। यह सब अलग-अलग रास्ते हैं। लेकिन इनकी मंजिल एक ही है।
अकेलापन यह खन्ना परिवार की वो कीमत है जो उन्होंने उस 1982 के भूकंप के बदले चुकाई है। शायद उन्होंने यह कसम खाई है कि वे अपने पिता के इतिहास को दोबारा नहीं दोहराएंगे। भले ही इसके लिए उन्हें अपनी खुशियों की कुर्बानी ही क्यों ना देनी पड़े? अब सवाल आपके लिए है और यह बहुत जरूरी सवाल है। आपको क्या लगता है? क्या अक्षय खन्ना का शादी ना करने और जिम्मेदारी ना लेने का फैसला सही है या यह सिर्फ उनके बचपन का डर है जो उन्हें आज भी डरा रहा है? क्या एक पिता की गलती बच्चों की पूरी जिंदगी तय कर सकती है? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में खुलकर लिखें क्योंकि हम हर कमेंट पढ़ते हैं और अगर आपको बॉलीवुड के इन अनकही कहानियों और गहरे राजों को जानना पसंद है तो अभी इस वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना ना भूलें ताकि अगला फिल्मी गॉसिप सबसे पहले आप तक पहुंचे। मिलते हैं अगली वीडियो में एक और बड़े खुलासे के