पूरा मुल्क उसी की तरह जाहिल, नासमझ, नाकाबिल और बेरहम बने। इस वक्त मेरा दिल भी भरा हुआ है और मैं गुस्से से खौल भी रहा हूं ये देखकर कि हमारे इन बच्चों के साथ इस तरह जुल्म का बर्ताव किया जा रहा है। उन के हाथों। कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचा करो और यह भी सोचो कि तुम्हारा अंजाम तुम्हें भी एक दिन मिलेगा जरूर।
हिम्मत ना हारें। बहुत से लोगों की हमदर्दी आपके साथ है। बहुत से लोग आपके साथ हैं। और इस मुल्क की हुकूमत को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं सब याद रखा जाएगा। आदाब नमस्कार। मैं नसीरुद्दीन शाह दो बातें अर्ज करना चाहता हूं आप सबसे। पहली बात तो यह है कि अगर एक जाहिल इस मुल्क की रहनुमाई करे तो उसका दिल यही चाहेगा कि पूरा मुल्क उसी की तरह जाहिल, नासमझ, नाकाबिल और बेरहम बने।
अभिनय के दो अलग-अलग कोर्स राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और पू फिल्म इंस्टट्यूट में पूरे करने के बावजूद मैंने अभिनय के बारे में सबसे ज्यादा जो सीखा है वो उन बच्चों से उन तालबेलम से जिन्हें सिखाने की कोशिश मैंने की है। मेरी पूरी हमदर्दी उनके साथ है। मैं उन्हें हजार हर सांस के साथ दुआएं देता हूं और हर टीचर्स डे पर उन्हें सलाम करता हूं। इस वक्त मेरा दिल भी भरा हुआ है और मैं गुस्से से खौल भी रहा हूं यह देखकर कि हमारे इन बच्चों के साथ किस तरह जुल्म का बर्ताव किया जा रहा है। उन गुंडों के हाथों जो मुझे अमेरिका के आइस एजेंट्स की याद दिलाते हैं मुंह पे नकाब लगाए हुए हाथ में डंडा लिए हुए।
कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचा करो और यह भी सोचो कि तुम्हारा अंजाम तुम्हें भी एक दिन मिलेगा जरूर। इन सब बच्चों से मैं कहना चाहता हूं कि हिम्मत ना हारें। बहुत से लोगों की हमदर्दी आपके साथ है। बहुत से लोग आपके साथ हैं। आप लड़ते रहें। मुझे हमारे मुल्क की युवा पीढ़ी से हमेशा उम्मीद रही है और अब वो उम्मीद और उजागर हो गई है।
आप लोग अपनी लड़ाई लड़ते रहें। हम सब आपके साथ हैं और इस मुल्क की हुकूमत को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं सब याद रखा जाएगा।