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शिमला हनीमून मना रही 19 साल की सिमरन की हुई खौ!फ़नाक कहानी रोंगटे खड़े कर देगी।

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22 फरवरी 2010 हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियों में उस दिन भी हजारों पर्यटक घूमने पहुंचे थे। शिमला से कुछ ही किलोमीटर दूर कुफरी जहां चारों तरफ पहाड़ देवदार के पेड़ और बर्फीली हवाएं लोगों को अपनी तरफ खींचती थी। इसी खूबसूरत जगह के बीच एक ऐसी घटना हुई जिसने एक परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। एक नई नवेली दुल्हन अपने पति के साथ हनीमून मनाने हिमाचल आई थी।

शादी को अभी सिर्फ कुछ ही हफ्ते हुए थे। परिवार ने सोचा था कि यह सफर उनके नए जीवन की पहली खूबसूरत याद बनेगा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसी महिला का कोई पता नहीं लगता। ना कोई फोन, ना कोई खबर, ना कोई सुराग। और जब पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की, तो कहानी सिर्फ एक गुमशुदगी की नहीं रह गई। क्योंकि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, एक के बाद एक कुछ ऐसी चीजें सामने आई जिसने इस पूरे मामले को उलझा दिया। यह कहानी है सिमरनजीत कौर और सिमरन पाल सिंह भुल्लर केस की।

एक ऐसा मामला जिसमें पुलिस के पास कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं था। ना किसी ने अपराध होते देखा ना किसी ने अपराधी को देखा। लेकिन फिर भी अदालत ने परिस्थितियों और सबूतों की एक ऐसी कड़ी देखी जिसके आधार पर एक व्यक्ति को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। तो आखिर उस दिन कुफरी की पहाड़ियों में हुआ क्या था? और कैसे एक हनीमून ट्रिप एक इन्वेस्टिगेशन में बदल गया। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक 17 जनवरी 2010 को पंजाब के रहने वाले सिमरन पाल सिंह और पंचकूला की रहने वाली सिमरनजीत कौर की शादी हुई। शादी के बाद परिवार में खुशी का माहौल था। नई जिंदगी की शुरुआत के लिए दोनों ने हिमाचल प्रदेश घूमने का फैसला किया। हनीमून के लिए चुना गया शिमला और कुफरी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों 21 फरवरी 2010 को कुफरी पहुंचे और वहां स्थित कुफरी हॉलिडे रिसोर्ट में ठहरे। होटल के रिकॉर्ड्स में दोनों की रुकने की जानकारी दर्ज थी। अगले दिन यानी 22 फरवरी 2010 को दोनों होटल से बाहर निकले।

होटल रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने करीब दोपहर 12:40 पर चेक आउट किया। इसके बाद दोनों कुफरी घूमते हैं। पुलिस जांच के मुताबिक 22 फरवरी की शाम तक दोनों साथ थे। लेकिन रात होते-होते स्थिति बदल चुकी थी। पति सिमरन पाल सिंह का दावा था कि उसकी पत्नी खुद कहीं चली गई थी। उसके मुताबिक 22 फरवरी की शाम करीब 7:30 बजे सिमरनजीत ने कहा कि वह थोड़ी देर घूमने के लिए बाहर जा रही है और वापस आ जाएगी। और इसके बाद उसका जो पति था वो होटल में ही रुका रहा। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद जब वह वापस नहीं लौटी तो उसने तलाशने की कोशिश की।

पति का कहना था कि उसने होटल के कर्मचारियों से मदद मांगी कि पत्नी को खोजे। लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली इसके बाद वह शिमला चला गया। अगले दिन यानी 23 फरवरी 2010 को वह शिमला से चंडीगढ़ वापस आ गया। यही वह समय था जब पुलिस के सामने पहला बड़ा सवाल आया।

अगर पत्नी अचानक गायब हो गई तो आखिर पति ने तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? वहीं सिमरनजीत कौर के परिवार के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं थी क्योंकि शादी को अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ था। जब बेटी से संपर्क नहीं हुआ तो परिवार ने सिमरन पाल और उसके परिवार से जानकारी लेने की कोशिश की। कोर्ट में दिए बयान के मुताबिक सिमरनजीत के पिता हरनेक सिंह ने बताया कि 22 फरवरी को उनकी बेटी से बात हुई थी। उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

उन्होंने कई बार फोन करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद परिवार ने तलाश शुरू की और जब हालात साफ नहीं हुए तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जांच में पुलिस के सामने एक और बात सामने आई जिसने शक को और ज्यादा गहरा कर दिया। कोर्ट रिकॉर्ड्स के अनुसार सिमरन पाल के पिता राजपाल ने बताया कि जब उन्होंने अपने बेटे से इस बारे में बात की तो बेटे ने कहा कि सिमरनजीत कहीं लंबी सैर पर गई थी और वहां से वापस नहीं लौटी। रजपाल सिंह ने यह भी बताया कि जब वह अपने बेटे से मिले तो उसके साथ एक वकील भी मौजूद था। मामला अब सिर्फ एक महिला के गायब होने का नहीं था।

पुलिस को शक था कि इस गुमशुदगी के पीछे कोई बड़ी साजिश है। जांच पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक पहुंची। पुलिस ने उस रास्ते को खंगालना शुरू किया जहां आखिरी बार दोनों को साथ देखा गया था। कुफरी, हसन वैली और शिमला के होटल। धीरे-धीरे जांचकर्ताओं को ऐसे सुराग मिलने लगे जो इस मामले को एक अलग ही दिशा की ओर ले जा रहे थे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी था। सिमरनजीत कौर आखिर गई कहां? क्या वह सच में कहीं चली गई? वो गायब है या फिर कुफरी की उन खामोश पहाड़ियों में उसके साथ कुछ ऐसा हुआ था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने सबसे पहले सिमरन पाल सिंह की गतिविधियों को खंगालना शुरू किया।

हिमाचल प्रदेश पुलिस के मुताबिक 22 फरवरी की रात सिमरनपाल सिंह शिमला पहुंचा। लेकिन यहां एक बात ने जांच अधिकारियों को थोड़ा सा चौंका दिया। वो अकेला था। कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक रात करीब 11:45 पर शिमला के होटल गुलम्ग रेजेंसी पहुंचता है। होटल के रजिस्टर में उसकी एंट्री अकेले व्यक्ति के तौर पर दर्ज थी। सबसे अहम बात यह थी कि उस रात उसने अपनी पत्नी के गायब होने की कोई सूचना होटल प्रबंधन या पुलिस को नहीं दी थी। अगली सुबह यानी 23 फरवरी 2010 को वो होटल से निकल गया। जांचकर्ताओं के लिए यह व्यवहार थोड़ा सा सामान्य नहीं था। क्योंकि अगर किसी व्यक्ति की पत्नी अचानक से कहीं गायब हो जाए, अनजान जगह चली जाए तो पहला कदम पुलिस को सूचना देना होता है।

लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस बीच सिमरनजीत के परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने सिमरन पाल सिंह से पूछताछ शुरू की। पंजाब पुलिस ने उसे तलाशना शुरू किया। आखिरकार उसे पंचकूला से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान सिमरन पाल सिंह ने अपनी पत्नी के गायब होने से जुड़ी एक बेहद अहम बात बताई। उसने स्वीकार किया कि 22 फरवरी को कुफरी के पास उसका अपनी पत्नी के साथ झगड़ा हो गया था। हालांकि बाद में बचाओ पक्ष ने इस बयान और पुलिस की कारवाही पर कई सवाल उठाए। लेकिन इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने उस जगह पर तलाश करनी शुरू करी जहां दोनों का झगड़ा हुआ था।

अब पुलिस को यह जानना था कि क्या झगड़े से नाराज होकर सिमरनजीत कहीं चली गई या वो अब इस दुनिया में है ही नहीं। हिमाचल प्रदेश पुलिस की टीम आरोपी को लेकर कुफरी के पास हसन वैली पहुंची। कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक आरोपी की निशानानदेही पर पुलिस और गवाहों की टीम उस जगह पहुंची जहां दोनों का झगड़ा हुआ था। आसपास ढूंढा गया। तभी पुलिस को झगड़े वाली जगह से करीब 40 मीटर नीचे जंगल में एक हरे रंग की चुन्नी दिखाई देती है। मतलब दुपट्टा। जब पुलिस उस दुपट्टे तक पहुंची तो वहां से थोड़ी ही दूर पर खाई में नीचे की ओर एक डेड बॉडी दिखाई। लाश। पुलिस ने खाई में उतर कर लाश को बरामद किया।

हालांकि की हालत बेहद खराब थी। देखने से लग रहा था कि वह लाश कई दिनों से वहां पड़ी हुई थी। जिस वजह से जंगली जानवरों ने शरीर को नुकसान पहुंचाया था। चेहरे का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो चुका था। इसलिए उसे देखकर कोई पहचान भी नहीं पा रहा था कि यह है कौन। लेकिन मौके पर मौजूद सिमरनजीत के पिता हरनेक सिंह और भाई रंजीत सिंह ने की पहचान की। कोर्ट में हरनेक सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को उसके गहनों से पहचाना। कोर्ट के रिकॉर्ड्स के मुताबिक शव से कुछ ही इस तरह की चीजें बरामद हुई। पहला शादी का चूड़ा, दो सोने की चूड़ियां, तीन सोने की अंगूठियां, सोने की चेन और पेंडेंट और साथ ही बालों की पिन। इन चीजों ने परिवार के लिए इस पहचान को मजबूत कर दिया कि वो उनकी पेटी ही है।

अब पुलिस के सामने एक बड़ा सवाल था। अगर यह सिमरनजीत का शव था तो उसकी मौत कैसे हुई? क्या यह सिर्फ एक हादसा था या उसके पति ने ही उसे रास्ते से हटा दिया क्योंकि शादी को तो कुछ ही हफ्ते हुए थे और इतनी जल्दी अरेंज मैरिज में तो कोई किसी का दुश्मन कैसे ही बन सकता है तो क्या कोई तीसरा व्यक्ति है जिसे अब तक पुलिस ढूंढ ही नहीं पा रही है। सिमरनजीत के शव को शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि गंभीर चोटों के कारण हुई थी। कोर्ट में मेडिकल विशेषज्ञ डॉक्टर पीयूष कपिला ने बताया कि महिला की सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुई थी और साथ ही उस पर भी दिखाई दिया।

उनके मुताबिक चोट इतनी ज्यादा गंभीर थी कि मौत लगभग तुरंत हो सकती थी। डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि फरवरी की कड़ाके की ठंड के कारण शरीर सामान्य तरीके से सड़ने के बजाय संरक्षित अवस्था में था। यानी मौसम की स्थिति ने शव को काफी हद तक सुरक्षित रखा था। प्रिजर्व करके रखा था। लेकिन पुलिस के हाथ सिर्फ शव नहीं लगा था। पुलिस ने सिमरन पाल के पास से एक Samsung मोबाइल फोन बरामद किया था। पहली नजर में यह सिर्फ एक सामान्य मोबाइल फोन था लेकिन इसी फोन के अंदर छिपा था वो सबूत। जिसने जांच की दिशा बदल दी। इस फोन की मेमोरी में मिली थी सात रिकॉर्डिंग्स कुछ बातचीतों की।

इन बातचीतों में पति और पत्नी के बीच हुए झगड़े की आवाजें थी और इन रिकॉर्डिंग से एक ऐसा शक सामने आया जो इस पूरे मामले की कथित वजह बन गया लेकिन पुलिस अब तक भी श्योर नहीं थी। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने फॉरेंसिक टेस्ट के लिए सिमरन पाल की आवाज का नमूना लिया। बाद में सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी सीएफएसएल पुणे ने जांच की। रिपोर्ट में आवाज की मिलान की पुष्टि हो गई। अब तक के सबूतों को देखकर अगर

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