केतन अग्रवाल मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसे में एक और जहां दोनों आरोपियों को अब 29 जून तक पुलिस कस्टडी में भेज दी गई है। लेकिन वहीं दूसरी ओर आखिर सिया के पक्ष का क्या कहना है यह भी जानना जरूरी है। सिया के वकील आशुतोष श्रीवास्तव है।
एडवोकेट आपसे जानेंगे। सबसे पहले तो क्राइम हुआ है। यह बात आई है सामने। इसमें तथ्य कितने हैं और कितनी बातें जो है वो बनावटी हैं। जाहिर सी बात है सिया ने आपसे बताई होगी। सिया का क्या कहना है और अब तक जो बातें आपको पता है उसमें कितना सही है और कितना गलत है।
देखिए अभी तो यह पूरा मैटर इन्वेस्टिगेशन चल रहा है। हम लोग जानते हैं और जहां तक मेरी क्लाइंट हैं वो हर तरीके से पुलिस को कोपरेट कर रही हैं कि पुलिस एक प्रॉपर कंक्लूजन तक पहुंच सके और पुलिस भी मुझे लगता है कि इस पे काफी मेहनत कर रही है। अपना समय दे रही है और इसमें जो सच्चाई हो सकता है वह लाने की पूरी कोशिश कर रही है और हम सब इंतजार कर रहे हैं कि इसमें जो एक फैक्ट है जो सच्चाई है वो सामने आए। जहां तक हमने अभी देखा कि अभी तो चार्जशीट फाइल नहीं हुआ है तो हमारे पास कोई ऑफिशियल डॉक्यूमेंटेशन तो नहीं है।
और इस पे ज्यादा कमेंट करना मेरे लिए ठीक भी नहीं होगा। लेकिन जो हमें सुनने को आ रहा है, जो हम न्यूज़ में देख रहे हैं, जो समझ रहे हैं और जो बातें बताई जा रही है, उसमें मोस्ट ऑफ द थिंग्स जो है वो यह कहा जा रहा है कि यह जो है उसने पुलिस स्टेशन में यह बातें बताई हैं। अब देखिए अगर पुलिस स्टेशन में कोई बात बताई जाती है तो जो कानूनी जो पहलू है उसका वो है जैसे जो सेक्शन 25 था
इंडियन एविडेंस एक्ट का जो अभी नए कानून में जो है उसको बीएसए में सेक्शन 231 बोला जाता है। उसके तहत अगर कोई भी आरोपी एक्यूज़्ड अगर पुलिस डिटेंशन में कोई भी सबमिशन देता है, कंफेशन करता है या कोई भी ऐसी बात वो रखता है अपने अगेंस्ट में तो उसको जो है बिल्कुल भी एक एडमिटेड एविडेंस नहीं माना जा सकता है। यही कानून है। इसका कारण यह है.
कि किसी के में या पुलिस के डर से या एक कोरर्जन में अगर कोई भी एक्यूज़्ड ऐसा स्टेटमेंट दे दे तो उसको उस बेसिस पर प्रोसक्यूट नहीं किया जा सकता। और दूसरी बात है कि जो एक्यूज़्ड है वो अपने अगेंस्ट में खुद प्रेशराइज करके उसको विटनेस नहीं बनाया जा सकता। अब रहा बात कि कोई दूसरा विटनेस इसके अंदर है जो इस बात को प्रूफ करे तो वो हमें देखना होगा कि पुलिस इसके लिए क्या लेकर के आती है इन्वेस्टिगेशन में जिससे यह साबित हो सके कि उस सही में वो गिल्टी है क्योंकि जैसे मैं बताऊं आपको कि अलग-अलग कानून होते हैं.
जैसे एग्जांपल में अगर कोई का मामला है एनडी एनडीपीएस का तो इसमें गुनहगार को साबित करना पड़ता है कि वो इनोसेंट है या फिर जैसे का मामला होता है तो उसमें गुनहगार को साबित करना पड़ता है कि वो इनोसेंट है। लेकिन जहां हीनस जैसा मामला होता है .
तो वहां प्रोसीक्यूशन को साबित करना पड़ता है कि वह गिल्टी है। उसने यह क्राइम किया है। तो क्या प्रोसीक्यूशन के पास इतना पुख्ता सबूत है जो इस बात को साबित कर सके कि जो एक्यूज़्ड है जो मेरी क्लाइंट हैं सिया उन्होंने ऐसा कोई भी इनस क्राइम किया है। तो यह हमें देखना होगा। ये मुझे लगता है कि जब चार्जशीट फाइल होगा इन्वेस्टिगेशन के बाद तो हमारी टीम और हमें पूरी तरह से क्लेरिटी मिल पाएगी और सबको क्लेरिटी मिल पाएगी क्योंकि एक पब्लिक डॉक्यूमेंट होगा जिसमें मीडिया से लेकर हर एक इंडिविजुअल जो आज इस देश में इंतजार कर रहा है कि उसमें न्याय मिले जस्टिस मिले और जो है कोर्ट एक सच्चाई तक पहुंच सके और जो एक जस्टिस हो सकता है.
वो जस्टिस को दे सके और हमारी भी यही कोशिश है एज अ एज अ डिफेंस काउंसिल कि हम भी ट्रायल कोर्ट की हर तरह से हम असिस्टेंस उनको हम दें ताकि कोर्ट भी जो है एक सही कंक्लूजन पे पहुंच पाए और एक सही जस्टिस दे पाए। इस पूरे स्पीक अदरवाइज जैसा आपने बताया लेकिन परिवार का कहना है कि 14 जून को भी ये लोग लोहगढ़ गए थे।
21 मई को भी गए थे और 18 जून को भी गए थे और जो डिजिटल एविडेंसेस बरामद हो रहे हैं उसमें कई सारी बातें निकल कर सामने आ रही हैं। सीसीटीवी वीडियोस निकल कर सामने आ रहे हैं। तो कहीं ना कहीं आपको क्योंकि आपकी बात हुई होगी सिया से। कारण क्या रहा कि उसने इस प्रकार बिकॉज़ कहा जा रहा है विग नहीं पहनता था। विग पहनता था।
उस वजह से भी कहीं ना कहीं उसकी उसकी मन में इच्छा नहीं थी उससे शादी करने की। तो जो कुछ बातें आ रही हैं उसमें कहीं ना कहीं तथ्य तो होगा कि सिया उसके साथ रिश्ता नहीं रखना चाहती थी। देखिए ये दोनों दो अलग-अलग विषय हैं। रिश्ता रखना या नहीं रखना इसके बारे में सिया ने क्या स्टेटमेंट या उनके फैमिली ने क्या स्टेटमेंट दिया ये तो हम चार्जशीट में जरूर देखेंगे।
लेकिन इससे सीधा-सीधा यह कंक्लूड कर देना कि उसने इतना हिनस क्राइम किया है। यह दोनों तथ्य जरूरी नहीं है कि मैच हो सके। जहां तक आपने सीसीटीवी का बात किया तो सीसीटीवी की अगर मैं बात करूं तो सीसीटीवी में ऐसा कोई इंसिडेंस क्लियर नहीं सामने आया है जिसमें यह पता चल सके कि उसने ऐसा कोई जो है क्राइम कमिट किया है और जहां तक हम देखें तो एक वॉचमैन है उसका भी स्टेटमेंट है जिसको सबसे पहले वो चिल्लाई उसके गिरने के बाद और वो आया और उसने भी यही बोला कि उसने बोला कि वो नीचे गिर गया है.
तो जो इमीडिएट इंफॉर्मेशन होता है वो उसने दिया और यह कहना कि इतना बड़ा इंसिडेंस होते समय एक भी आसपा पास विटनेस नहीं था और उसी पर्टिकुलर पॉइंट ऑफ टाइम पे एक जो विक्टिम है वह उस जगह पे जाके खड़े होता है जहां पे कोई ना हो।
प्लान दोनों तरफ से तो नहीं हो सकता ना। प्लान तो एक तरफ से होगा जिनको ये करना होगा। तो क्या ये सारी प्रोबेबिलिटीज मैच होती हैं या हमारे पास कोई ऐसा विटनेस है जो ये बात को क्लेरिफाई कर सके कि सच में ऐसा हुआ था और जहां तक मैंने बताया कि सेल्फ कंफेशन जो है जो डिटेंशन में हर इंसान अंडर प्रेशर बहुत सारी बातों को बोलता है बताता है कबूल करता है लेकिन वो कानून उस बात को नहीं मानता है अनलेस अंटिल उसकी जो यह बात है वो दूसरे एविडेंस के साथ कोरबोरेट होती हो और वो जो दूसरे कॉनंक्रीट एविडेंस है इस बात को सपोर्ट करते हो कि ऐसा हुआ था।
तो इस पूरे मामले में जो है प्रोसीक्यूशन को गिल्ट जो है वह साबित करना है कोर्ट के अंदर और हमें भी देखना है कि हम कोर्ट को सही डायरेक्शन में असिस्ट कर पाए जिससे एक सही निर्णय जो है कोर्ट ले पाए। चेतन इस पूरे मामले में दूसरा आरोपी है। चेतन भी वहां पर उस सीसीटीवी में नजर आ रहा है। अब एक और जहां चेतन की चलिए बात तो है ही लेकिन चेतन और सिया दोनों ही एक दूसरे पर अब आरोप-प्र्यारोप करना शुरू कर चुके हैं.
कि नहीं चेतन ने मुझे कहा, सिया कह रही है नहीं कि चेतन कह रहा है नहीं सिया ने मुझे कहा। तो इसको लेकर क्या मामला है? यानी एक दूसरे पर ये ब्लेम गेम अब शुरू होता नजर आ रहा है। देखिए ये एक स्पेककुलेशन हो सकता है क्योंकि उनका जो भी स्टेटमेंट है वो तो पुलिस स्टेशन के बाहर नहीं है। वो तो जो भी बोल रहे हैं पब्लिकली तो नहीं बोल रहे हैं। वो जो भी उनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड हो रहा है पुलिस स्टेशन में हो रहा है या जो भी बातें हैं वो वहां तक हैं। तो इस बात को जो बताया जा रहा है.
यह खुद उनके अपने मुंह से तो हम लोग नहीं सुन रहे हैं। हम हमें यह सुनने को आ रहा है। ना ही यह चार्जशीट का हिस्सा अभी एट प्रेजेंट है। अगर वह चार्जशीट में कल हो के आता है तो हो सकता है कि इस विषय पे हम जरूर इसको क्लेरिटी हम दे पाएंगे।
लेकिन एट प्रेजेंट जैसे मैंने आपको बोला कि अगर वह ऐसी कोई भी बात वहां पे अगर कहा जा रहा है पुलिस स्टेशन में तो उसको हम एविडेंस के रूप में एटलीस्ट हम नहीं देख सकते हैं कानूनी तौर पे। तो मैंने जैसे बताया कि अगर इस बात को सपोर्ट करने के लिए दूसरे पुख्ता सबूत हैं जो आएंगे चार्जशीट के अंदर तो हम इस बात को जरूर हम कंसीडर कर पाएंगे या हम देख पाएंगे कि इसमें कि किस तरह से जो है डिफेंड किया जा सकता है या वैसे सिचुएशन में क्या सच्चाई जो है उसको कंक्लूड किया जा सकता है या कॉनंक्रीट एक जो है निष्कर्ष पे जो है पहुंचा जा सकता है वह देखना पड़ेगा।
केतन अग्रवाल के परिजन का कहना है कि ना सिर्फ सिया बल्कि उसके परिवार को भी इसमें उतना ही सह आरोपी बनाए जाने चाहिए। उसको लेकर क्या आप कहेंगे और साथ ही हम जान रहे हैं कि फिलहाल सिया सिया का भाई भी जो है पुलिस के घेरे में है। उनसे भी पूछताछ हो रही है।
जी देखिए पुलिस को पूरा ऑथॉरिटी है कि कोई भी केस में वो प्रॉपर डायरेक्शन में इन्वेस्टिगेट करें और अगर उन्होंने उसके भाई को पूछताछ के लिए बुलाया है और भाई को जाग के अगर कोपरेट कर रहे हैं इन्वेस्टिगेशन में तो इसमें मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत की बात है। और देखिए दोनों ही फैमिलीज हैं और आपको पता है कि एक शादी का रिलेशन जो बनने जा रहा था तो मुझे दोनों ही फैमिली के लिए मैं मुझे लगता है कि मैं संवेदनशील हूं। जहां तक लड़के का सवाल है तो देखिए एक बहुत बड़ा लॉस है फैमिली के लिए।
इसको कोई डिनाई नहीं कर सकता कि एक लड़के की जो है मौत हुई है और जो है फैमिली एक पूरी तरह से एक डिप्रेशन और शॉक के उससे दौर से गुजर रही है। बट अब इसमें यह देखना कि इसके लिए क्या वो एक्सीडेंट था? क्या इस एक्यूज़्ड का रोल था या कोई और थर्ड फैक्टर था जो पुलिस इन्वेस्टिगेशन के बाद सामने आता है।
यह इंपॉर्टेंट फैक्टर है। यह बात फैक्ट है कि लॉस तो फैमिली को जरूर हुआ है। बट यह लॉस क्या सिर्फ सिया के वजह से हुआ है या नहीं हुआ है? यह इन्वेस्टिगेशन का पार्ट है जो सामने आएगा और फर्दर जो है यह कोर्ट इस बात को डिसाइड करेगा।
जहां तक सिया की फैमिली का सवाल है वो तो हम देख रहे हैं कि ऑलरेडी फैमिली ने सारी बातें मीडिया में भी बोली कि भ अगर वो गिल्टी साबित होती है तो उसको जो भी पनिशमेंट मिलना चाहिए वो मिले और पूरा देश यह बात जानता है कि अगर गिल्टी प्रूव होती है तो ऑब्वियसली जो कानून है वो तो अपना काम करेगा ही करेगा और जहां तक उनके हेल्थ का सवाल है वो भी हम देख रहे हैं कि हॉस्पिटलाइज्ड है और ट्रीटमेंट एट प्रेजेंट चल रहा है।
तो मुझे लगता है कि अभी ऑलरेडी वो भी डिप्रेशन में ही चल रहे हैं। लड़की के जो फैमिली हैं। तो अब मुझे लगता है कि उनके बारे में मैं अभी ज्यादा ना बोलूं तो अच्छा होगा क्योंकि अभी तो मुझे सिर्फ इन्वेस्टिगेशन और जो एक्यूज़्ड हैं जिनको मैं रिप्रेजेंट कर रहा हूं। मैं सिर्फ उस काम पे ही अभी हमारा कंसंट्रेशन रहेगा और हमें पुलिस भी कोपरेट कर रही है ताकि हम भी कुछ इंफॉर्मेशन हमारे क्लाइंट से ले सकें। तो आप सिया को रिप्रेजेंट कर रहे हैं। उसके परिजन को रिप्रेजेंट नहीं कर रहे हैं। देखिए परिजन को तो मुझे नहीं लगता कि अभी कोई रिप्रेजेंटेशन की कोई जरूरत भी है। अ जहां तक सिया का सवाल है हां एफआईआर उसके ऊपर रजिस्टर्ड है और कानूनी तौर पे उसको तो प्रॉपर रिप्रेजेंटेशन की जरूरत है। कौन सी धाराएं लगाई गई? देखिए जो पहले तो एक्सीडेंटल डेथ का मामला रजिस्टर किया गया था। हम सब जानते हैं।
बाद में पुलिस को लगा कि इसमें जो है एक मर्डर का भी एंगल हो सकता है। तो जो है से रिलेटेड भी धाराएं लगाई गई हैं बीएएनएस की। तो अब जो है आगे इन्वेस्टिगेशन किस डायरेक्शन में जाता है क्योंकि पहले भी कुछ अलग पुलिस को लगा था। अब अभी ये बात लग रही है। हो सकता है कल जब इन्वेस्टिगेशन कंक्लूड हो तो कुछ और लगे। तो हमें ये देखना होगा कि ये किस तरह से कंक्लूड होता है ये इन्वेस्टिगेशन। 29 जून को इन दोनों की कस्टडी पूरी हो रही है। आप आपकी क्या दलीलें रहेंगी इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट में? जी हमारी सबसे पहले तो यही दलील होगी कि उसने हर तरीके से मेरे क्लाइंट ने कोपरेट किया है इन्वेस्टिगेशन में और मुझे लगता है कि सफिशिएंट टाइम दिया गया है एक तरह से इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी को कि वो अपना जो इन्वेस्टिगेशन है उसको कंप्लीट कर पाएं।
नाउ सो फार एज सीआई इज कंसर्न मुझे नहीं लगता कि उसकी फर्दर कस्टडी की जरूरत होनी चाहिए पुलिस को। हालांकि ये वो बता पाएंगे अगर उनको जरूरत है तो क्यों जरूरत है तो हम इसी बात को ऑब्जेक्ट करेंगे ताकि उसको एक जुडिशियल कस्टडी मिल सके और वो जो है नॉर्मल एक जेल में वहां पे जा सके ताकि हम फर्दर हमारा लीगल कोर्स ऑफ एक्शन हम शुरू कर पाएं। सरकार की तरफ से भी केतन अग्रवाल के परिवार को सबसे पहले तो यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। उज्जवल निगम को स्पेशल पब्लिक प्रोसकटर अपॉइंट किया गया है और परिवार का कहना है कि सिया को और आरोपी दूसरा आरोपी चेतन इन दोनों को फांसी की सजा होनी चाहिए। देखिए पहले तो यह कि जो फास्ट ट्रैक है यह मुझे लगता है कि एक्यूज़्ड के लिए भी अच्छा है। अगर एक्यूज़्ड का कोई रोल नहीं है। इसके अंदर यह साबित होता है तो ये उसके लिए भी उसका समय बचेगा और वो जल्दी इसका फैसला आ पाएगा।
तो मुझे लगता है ये दोनों ही पक्षों के लिए एक अच्छा मुझे लगता है गवर्नमेंट का मूव होगा। अगर ये फास्ट ट्रैक होता है तो। जहां तक उज्जवल निकम जी का सवाल है यह तो और भी अच्छी बात है। मुझे लगता है क्योंकि वो एक बहुत ही सीजन लॉयर हैं। काफी एक्सपीरियंस्ड हैं और मुझे लगता है कि वो कोर्ट को ज्यादा अच्छे से असिस्ट कर पाएंगे।
एक अह जो है जस्टिस तक पहुंचने के लिए एक सच्चाई तक पहुंचने के लिए प्रोसक्यूशन को भी हेल्प कर पाएंगे और हमारे लिए भी वह अच्छा होगा कि जो है सच्चाई और जो मैं कह सकता हूं कि जो एक सही जजमेंट है वह जो है कोर्ट पहुंच पाएगा और एक्सपीरियंस लॉयर प्रोसीक्यूशन की तरफ से भी अगर हो तो यह और भी अच्छी बात