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सरकार बनाने पहुंचे विजय गवर्नर ने उल्टे पांव लौटाया !

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तमिलनाडु में जीत के बावजूद थलपति विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए हैं। सूत्रों के मुताबिक आज थलपति ने गवर्नर से मुलाकात करी है जहां पर वह अपने बहुमत साबित करने में असमर्थ रहे। ऋतू एकदम सीधा सा गणित है कि टोटल 234 सीटें थी जिसमें से 108 सीटों पर टीवी ने विजय प्राप्त करी थी और विजय खुद दो सीटों पर जीते थे जिसमें से उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। माने बची 107 सीटें। लेकिन जीतने के लिए उन्हें जो जरूरत है वो है 118 विधायकों की टोटल।

तो अभी भी उनके पास 11 विधायकों की कमी है बेसिकली और जैसा कि हमने खबरों में सुनाई है कि कांग्रेस ने उनको समर्थन देने का फैसला किया है और कांग्रेस के पास है पांच विधायक यानी कुल अगर हम सारा गणित भी बैठा लें तब भी अभी छह विधायकों की कमी हो रही है टीबीके के पास तो आज गवर्नर से जब वो मुलाकात करने पहुंचे हैं तो वहां पर क्या हुआ है और कहां है जो यह पेज फंस रहा है जी तो आज हमने देखा कि सवा5 बजे के करीब वो गवर्नर से मुलाकात करने पहुंचे हैं उसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और करीब आधे घंटे उनकी मुलाकात वहां पर हुई और वहां पर उन्होंने सरकार बनाने के दावे को पेश किया। जहां पर वह 112 विधायकों के स्ट्रेंथ के साथ पहुंचे थे। मतलब 107 टीवी के विधायक और पांच कांग्रेस के विधायक। जहां पर गवर्नर ने उन्हें यह चीज कहा है

कि आप 118 विधायकों के साथ हमारे साथ आइए और सरकार बनाने का दावा पेश कीजिए। तो ये अभी तक इंफॉर्मेशन आई है कि कल ऐसा माना जा रहा था कि उनका शपथ समारोह हो सकता था लेकिन कल नहीं होगा क्योंकि वो अभी तक मेजॉरिटी प्रूफ नहीं कर पाए हैं। जी टीबीके के अलावा ऋतू अगर हम देखें तो जो बड़ी पार्टीज में नाम आता है वो डीएमके है एआईडीएमके है। अगर इनसे समर्थन लेते हैं विजय मतलब क्या प्रॉब्लम्स आ रही हैं इनसे समर्थन लेने में? जी, तो अभी आप देख सकते हैं कि डीएमके, जिसके खिलाफ उन्होंने पूरी कैंपेन की, और उसी के खिलाफ, कैंपेनिंग में ही उन्होंने एक पार्टी बनाई और उन्होंने बोला कि, जो पूरे तमिलनाडु में एंटी इनकंबेंसी है, वो डीएमके और एआईएडीएमके की वजह से है, क्योंकि 50 साल से यही दोनों पार्टी तमिलनाडु में रूल कर रही है। और यह डायनेस्टिक पॉलिटिक्स करते हैं। करप्शन के चार्जेस बहुत ज्यादा हैं। तो इस वजह से उन्होंने एक नया क्या कहते हैं?

नया थीम पेश किया तमिलनाडु के के आगे तो इस वजह से यह बोला जा रहा है कि वो डीएमके का सपोर्ट तो इसलिए नहीं लेंगे क्योंकि उसी के खिलाफ उन्होंने पार्टी बनाई और अपने पूरे कैंपेन पेश किया। दूसरा एआईएडीएमके की तरफ से यह कंफ्यूजन आ रही है क्योंकि वो बीजेपी के साथ है और उन्होंने बोला है कि बीजेपी से उनका आईडियोलॉजिकल फाइट है और एआईडीएमके उनके पॉलिटिकल राइवल है। तो ऐसी सिचुएशन में वह एआईडीएमके से भी सपोर्ट नहीं ले सकते हैं और कांग्रेस ने जो उनको अपना समर्थन दिया है वो इसी कंडीशनल सपोर्ट पे दिया है कि आप किसी भी कम्युनल फोर्सेस के साथ अलायंस नहीं करेंगे। अब कांग्रेस ने वहां पे किसी भी पर्टिकुलर पार्टी का नाम तो नहीं लिया है बट हो सकता है कि उनका मतलब एआईएडीएमके और बीजेपी हो। जी ठीक है। ऋतू जैसे कि अभी खबरें भी आ रही थी कि मतलब ये इतना दांव पेच फंसा हुआ है कि खबरों में ये दिखाया गया है कि टीवी ने अपने विधायकों को एक होटल में ठहरा रखा है ताकि कोई दलबदल या इस तरीके की चीजें ना हो।

और अब जहां तक ये समझ में आ रहा है कि टीवी के कांग्रेस तो सपोर्ट कर ही रही है उनको और वो लोकल पार्टीज पे ज्यादा निर्भर कर सकती हैं अगर वो उनको सहमत वो उनको अपना साथ देती हैं और उनके पास टोटल सीट्स हो जाती हैं। कांग्रेस को लेकर भी कई सवाल उठा रही हैं जो विपक्षी पार्टियां है वहां पर कि कांग्रेस ने भी धोखा दिया है उनको उस पर क्या आप जानकारी देना चाहेंगी? जी डीएमके की तरफ डीएमके की तरफ से ये एलिगेशन आया है कि कांग्रेस ने उनको बैकस्टेप किया है और उन्होंने बोला है कि बहुत सालों से हम लोग साथ में थे लेकिन अचानक से इन्होंने इंडिया अलायiंस को ब्रेक करके टीवी को समर्थन दे दिया है। तो उनको एक अपॉर्चुनिस्टिक तौर पर देखा जा रहा है। बट इसके जवाब में करती चिदंबरम और पवन खेड़ा दोनों कांग्रेस के लीडर हैं। उनके तरफ से जवाब आया है कि हमने कोई बैकस्टेबिंग नहीं की है। हम लोग लाइक माइंडेड पार्टीज के साथ सरकार बनाना चाह बनाना चाहते हैं। तो इसमें बुराई क्या है अगर दो लाइक माइंडेड पार्टीज मिलकर सरकार बनाए तो? तो ये कांग्रेस की तरफ से उस आरोप का जवाब आया है। कांग्रेस के नेताओं का यह बयान कई कल से सामने आ रहा था कि हम लोकतंत्र के लिए सरकार बना रहे हैं। ऋतू अगर सपोर्ट नहीं मिलता है

टीवी को अगर विजय तलपति सीएम नहीं बन पाते हैं या उनकी पार्टी सत्ता में नहीं आप मतलब जीतने के बाद भी बहुमत नहीं प्रूव कर पाती है तो आगे की मतलब आगे क्या होगा? जी। तो पहला ये चांस है कि इसके बहुत चांसेस कम लग रहे हैं। पर सपोज दैट क्योंकि अभी तक टीवी के जो चीफ हैं उन्होंने कांग्रेस से तो समर्थन ले ही लिया है पांच विधायकों का और उनको छह-सात विधायकों की जरूरत है। तो उन्होंने सीपीआईएम को भी अप्रोच किया है। सीपीआई को भी अप्रोच किया है। पीएम को भी अप्रोच किया है। वीसीके को भी अप्रोच किया है। तो ये सारी जो पार्टीज हैं जिनके पास दो से तीन दो से चार तक के विधायकों की स्ट्रेंथ है। तो अगर यह सारे पार्टीज मिलकर टीवी को समर्थन दे देंगे तो उनकी सरकार आराम से बन जाएगी और सपोज़ दैट इन एनी केस इन लोगों का आपस में नहीं बन पाया तो ऐसे में दो सिचुएशन होते हैं कि उसके बाद जो सेकंड लार्जेस्ट पार्टी है उसको गवर्नर कॉल करते हैं कि आप आके फ्लोर टेस्ट दीजिए और अपने मेजॉरिटी को प्रूफ कीजिए।

तो इस केस में डीएमके के पास सबसे ज्यादा स्ट्रेंथ है टीवी के बाद। तो शायद अगर ऐसा नहीं इनके बीच में बन पाया तो डीएमके को गवर्नर बुला सकते हैं और अगर डीएमके भी अपनी मेजॉरिटी प्रूफ नहीं कर पाती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है और उसके बाद देखा जा सकता है कि री इलेक्शन भी हो सकता है। तो ये सब पॉसिबिलिटीज हैं जो संविधान के आधार पर है। तो अभी देखते हैं कि क्या होता है आगे। कुल मिलाकर यह दाव पेच जो है मतलब कई जगह यह पेज फंसा हुआ है। तो जैसे कि हम देख रहे थे कि विजय को इतना सपोर्ट मिल रहा है तो इससे यही समझ में आता है कि एक अभिनेता होना एक अलग बात होती है और वहां सपोर्ट पाना एक अलग बात होती है। लेकिन जो राजनीति के जो दांव पेज हैं या सीएम की कुर्सी तक पहुंचना है इसके लिए एक अलग तरीके से आपको लड़ाई लड़नी पड़ती है। तो विजय यह लड़ाई लड़ पाएंगे या नहीं इस मामले पर जो भी अपडेट्स होंगे हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। हमारे साथ जानकारी साझा कर रही थी ऋतू। नमस्ते मेरा नाम रक्षा है। देखते रहिए दलन टॉप।

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