कहते हैं प्यार की कोई जबान नहीं होती| यह सिर्फ दिल से जुड़े रिश्तों से बनता है। उत्तर प्रदेश के आगरा में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जहां एक पालतू तोते की गुमशुदगी ने पूरे शहर को बेचैन कर दिया। छ दिनों का लंबा इंतजार, शहर भर में लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स, ₹500 का इनाम और सैकड़ों फर्जी कॉल्स के बाद आखिरकार जब घर का लाडला तोता माऊ वापस लौटा तो परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।
घर में मौजूद बच्चे माऊ को देखकर बेहद खुश हुए। ऐसा लग रहा था जैसे सालों का बिछड़ा अचानक घर लौट कर आया हो। यह कहानी है आगरा के आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले आयकर अधिवक्ता सुनील सिंह के परिवार की। सुनील सिंह के परिवार के लिए माऊ सिर्फ एक पक्षी या पालतू तोता नहीं बल्कि घर का एक अहम सदस्य [संगीत] है। बिना पिंजरे के रहने वाला माऊ जिसके लिए घर में बाकायदा एसी कमरा बनाया गया है और जिसका जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया जाता है। वो माऊ 13 जुलाई की शाम अचानक तेज हवाओं के बीच उड़कर लापता हो गया था। माऊ के चले जाने से घर में सन्नाटा पसर गया। बच्चों ने खाना पीना छोड़ दिया। रो-रो कर बुरा हाल था। माऊ की तलाश में सुनील सिंह ने कोई कसर नहीं छोड़ी। शहर भर में ₹00 के इनाम वाले होर्डिंग्स लगवा दिए। हजारों पंपलेट बनवाए और सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ दी। लेकिन माऊ की तलाश इतनी आसान नहीं थी। होर्डिंग्स लगने के बाद परिवार को करीब 1500 कॉल्स आए। कोई एडवांस पैसे मांगकर फ्रॉड करने की कोशिश कर रहा था तो कोई दूसरे तोते दिखाकर इनाम बैठना चाहता था। इसी बीच सुनील सिंह के पास एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। उसने दावा किया कि माओ उसके पास है। वकील सुनील सिंह को जब यकीन नहीं हुआ तो उन्होंने वीडियो कॉल करने को कहा। जैसे ही वीडियो कॉल पर माऊ चेहरे के सामने आया सुनील सिंह ने अपने लाडले को तुरंत पहचान लिया।
इसके बाद सुनील सिंह शास्त्रीपुरम इलाके में बताई गई जगह पर पहुंचे। वहां मुंह पर कपड़ा बांधे एक अज्ञात व्यक्ति मिला। उस व्यक्ति ने ₹00 की इनामी राशि ली और माऊ को सुरक्षित परिवार के हवाले कर दिया। मेरे पास एक सज्जन आते हैं। वो इसका वीडियो अपने मोबाइल में ले आते हैं और दिखाते हैं।
तो मैंने इसकी पहचान कर ली और वीडियो कॉल से इसकी बात कराते हैं। अपने ही फोन से। जो मैंने देखा और मैंने इसकी पहचान करी कि ये हमारा ही माहू फिर उन्होंने हमें इंडस्ट्रियल एरिया में बुलाया। हम वहीं पर गए। उन्होंने लोकेशन दी। वहां पर उन्होंने इनाम की धनराशि हमसे ली। गिनने के बाद में उन्होंने हमारा माऊ हमें दे दिया। वो एक इतनी छोटे पिंजरे में था जो शायद ये ढंग से घूम भी नहीं पा रहा था।
जब हम वहां से उसे ले आए। हम उसे डॉक्टर के पास ले गए। हमने डॉक्टर से इसका को चेकअप कराया। डॉक्टर ने बताया कि इसके पैर काफी कमजोर हो चुके हैं और इसकी गर्दन भी थोड़ी सी सूखी हुई है। छ दिन बाद जैसे ही माऊ अपने घर पहुंचा मानो पूरे घर में कोई त्यौहार आ गया हो। माऊ अपनी मालकिन ममता सिंह के कंधे पर जा बैठा और बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह उनकी गोद में चिपक कर सो गया।
सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब माओं ने एक-एक कर परिवार के सभी सदस्यों के साथ जमकर मस्ती की। जैसे एक बच्चा खो जाता है ना मिल जाता है। वही खुशी है। एकदम आया है। किस तरह से जब से आया है मेरी गोद में ही सोया हुआ था। आपने देखा और सोया हुआ था। किसी पे जा भी नहीं रहा था। बिल्कुल एक मां की तरह जैसे बच्चा चिपक गया था।
इसी तरह से चिपका हुआ। बस सब खुश है। बेटी है मेरी जिसके चेहरे पर मुस्कान लौट रही है। सबसे ज्यादा उदासी बेटा वो भी खुश है। एकदम घर लौटने पर माओ का डॉक्टर से हेल्थ चेकअप कराया गया जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद माओ का स्वागत उसकी सबसे पसंदीदा डिश देसी घी के डोसे और ताजा फलों के साथ किया गया।
भले ही इसके लिए परिवार को भारीभरकम इनामी राशि और मेहनत मशक्कत करनी पड़ी हो लेकिन माओ के वापस आते ही परिवार के चेहरे पर जो मुस्कान लौटी है उसकी कीमतकिसी भी इनाम से कहीं ज्यादा बड़ी है।