क्या आपको पता है सुधा चंद्रन की जिंदगी पर फिल्म तो बनी लेकिन उस फिल्म में उनकी कहानी निभाने के लिए किसी दूसरी अभिनेत्री को नहीं बल्कि खुद सुधा चंद्रन को ही चुन लिया गया था और हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में सुधा खुद यह फिल्म करना भी नहीं चाहती थी। दरअसल पैर गमवाने के बाद जयपुर फुट की मदद से सुधा ने दोबारा डांस करना शुरू किया और उनकी हिम्मत की कहानी धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचने लगी।
इसी दौरान मशहूर निर्माता रामोजी राव ने अखबार में सुधा की कहानी पढ़ी और फैसला किया कि इस लड़की की जिंदगी पर फिल्म बननी चाहिए। शुरुआत में योजना थी कि सुधा से उनकी पूरी कहानी सुनी जाएगी और उनका किरदार कोई मशहूर अभिनेत्री निभाएगी। लेकिन निर्देशक सिंतम श्रीनिवास राव ने कहा जब कहानी सुधा की है तो पर्दे पर सुधा खुद क्यों नहीं? यह सुनकर सुधा भी हैरान रह गई क्योंकि उन्होंने कभी फिल्मों में अभिनय करने के बारे में सोचा तक नहीं था। यहां तक कि जब वह शूटिंग के लिए हैदराबाद पहुंची
तो उनका मन अपने कॉलेज और दोस्तों में लगा हुआ था और वह वापस मुंबई जाना चाहती थी। लेकिन धीरे-धीरे कैमरे के सामने वही लड़की अपनी असली जिंदगी के दर्द और संघर्ष को दोबारा जीने लगी और 1985 में रिलीज हुई मयूरी ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। फिल्म को जबरदस्त पहचान मिली और सुधा चंद्रन को उनके अभिनय के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड में स्पेशल जरी अवार्ड से सम्मानित किया गया।
बाद में इसी कहानी को हिंदी में नाचे मयूरी के नाम से बनाया गया और उसमें भी सुधा ने खुद अपना किरदार निभाया। सोचिए जिस हादसे ने कभी उनका सपना छीनने की कोशिश की थी उसी संघर्ष की कहानी ने उन्हें बड़े पर्दे की अभिनेत्री बना दिया। शायद इसीलिए कहते हैं जिंदगी आपकी कहानी कब बदल दे कोई नहीं जानता। बस हिम्मत मत हारिए। अगर आपने नाचे मयूरी देखी है तो कमेंट में जरूर लिखिए। हां, मैंने देखी है। जी