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सुशांत सिंह राजपूत के साथ इंडस्ट्री में क्या-क्या हुआ? जानिए पर्दे के पीछे का सच!

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क्या बॉलीवुड के सबसे बड़े दबंग सुपरस्टार ने एक हाई प्रोफाइल पार्टी में सुशांत सिंह राजपूत पर सरेआम हाथ उठाया था और थप्पड़ जड़ दिया था? क्या माया नगरी के सबसे रसूखदार डायरेक्टर्स और प्रोडक्शन हाउसेस ने मिलकर एक सीक्रेट बॉयकॉट की साजिश रची थी। क्यों एक ऐसा लड़का जो नासा के सपने देखता था और क्वांटम फिजिक्स की बातें करता था। बॉलीवुड के बड़े-बड़े कैंप्स की आंखों में खटकने लगा। दोस्तों 14 जून 2020 की वो मनहूस दोपहर आज भी हर उस इंसान के जहन में एक खौफनाक सन्नाटा छोड़ जाती है जिसने कभी सुशांत सिंह राजपूत की आंखों में तारों को छूने का सपना देखा था। मुंबई के बांद्रा वाले फ्लैट के एक बंद कमरे में जब सुशांत की सांसे हमेशा के लिए थम गई। तो उस दिन सिर्फ एक 32 33 साल के नौजवान की जान नहीं गई थी। बल्कि उस दिन बॉलीवुड के उस चमकीले और झूठे नकाब के चीथड़े उड़ गए थे जिसे दुनिया सालों से पूजती आ रही थी। सुशांत सिंह राजपूत कोई आम कलाकार नहीं थे। वो एक ऐसा तूफान थे जिसने टीवी के छोटे पर्दे से निकलकर सिल्वर स्क्रीन के बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छुड़ा दिए थे। लेकिन इस चमकती हुई दुनिया का दस्तूर यह है कि यहां आपका टैलेंट आपकी ढाल बनने से पहले आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। यह एक ऐसे लड़के की दास्तान है जो पटना की तंग गलियों से निकलकर इंजीनियरिंग के मोटे-मोटे फार्मूले छोड़कर सिर्फ अपने जुनून के दम पर बॉलीवुड के तख्त को हिलाने आया था। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस इंडस्ट्री को वह अपना मंदिर समझ रहा है, वहां टैलेंट की नहीं बल्कि चापलूसी, कैंबाजी और सरनेम की पूजा होती है। इस माया नगरी में जो झुकता नहीं, उसे झुकाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाती है और जो फिर भी डटा रहता है उसके चारों तरफ साजिशों का ऐसा चक्रव्यूह बुन दिया जाता है कि सांस लेना भी दुभ हो जाए। इस पूरे फसाने में सबसे ज्यादा सनसनी तब फैली जब हाल ही में सुशांत के पुराने और बेहद करीबी दोस्त गणेश शिवरकर ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा

किया जिसने पूरे इंटरनेट पर भूचाल ला दिया। गणेश शिवरकर ने उस दबे हुए राज को हवा दे दी जिसके बारे में सालों से बॉलीवुड के गलियारों में केवल कान्हा फूंसी हुआ करती थी। उन्होंने दावा किया कि सुशांत और बॉलीवुड के दबंग सलमान खान के बीच एक वक्त बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया था और यह बखेड़ा सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहा था बल्कि बात हाथापाई तक पहुंच गई थी। किस्सा कुछ यूं बताया जाता है कि बॉलीवुड की एक बेहद हाई प्रोफाइल और देर रात तक चलने वाली पार्टी में सुशांत सिंह राजपूत भी मौजूद थे। जहां शराब और सत्ता का नशा हवा में तैर रहा था। उसी पार्टी में मौजूद थे सूरज पंचोली। वही सूरज जिन्हें सलमान खान अपनी देखरेख में इंडस्ट्री में स्थापित करने की जी तोड़ कोशिश कर रहे थे। उस पार्टी में किसी बात को लेकर सुशांत और सूरज पंचोली के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सुशांत अपनी बेबाकी और आत्मसम्मान के लिए जाने जाते थे। वो उन लोगों में से नहीं थे जो किसी स्टार किट के सामने अपनी नजरें झुका लें। कहा जाता है कि बहस इतनी ज्यादा बढ़ गई कि दोनों के बीच तू तू मैंम होने लगी और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। जैसे ही यह खबर पार्टी में मौजूद सलमान खान के कानों तक पहुंची, बॉलीवुड के सुल्तान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। सलमान खान के बारे में यह बात पूरी इंडस्ट्री जानती है कि उनके चहीतों से टकराने की जरूरत कोई दूसरा नहीं कर सकता। चाहे गलती किसी की भी हो। चश्मदीदों के हवाले से उड़ने वाली उस गसिप के मुताबिक सलमान खान भारी गुस्से में सुशांत की तरफ बढ़े और उन्होंने ना केवल सुशांत को बेहद कड़े और अपमानजनक शब्दों में लताड़ा बल्कि तैश में आकर सुशांत को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। और जब सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा को पता चला कि वहां बैठे कुछ लोगों ने चुपके से इस पूरे मामले का वीडियो बना लिया है तो शेरा ने सबके फोन लेकर तोड़ डाले और बाद में सबको नए फोन गिफ्ट कर दिए। सोचिए एक ऐसा नौजवान जो अपनी मेहनत के बलबूते अपनी पहचान बना रहा था। भरी महफिल में जहां बॉलीवुड के तमाम बड़े चेहरे और कैमरे मौजूद थे उसके स्वाभिमान को सरेआम कुचल दिया गया। कहा तो यहां तक गया कि उस रात माहौल को शांत करने के लिए सुशांत पर दबाव बनाया गया कि वह सलमान से माफी मांगे और सुशांत को उस वक्त बेहद लाचारगी में हाथ जोड़कर पीछे हटना पड़ा। हालांकि जब सुशांत की मौत के बाद यह मामला आग की तरह सोशल मीडिया पर फैला तो सूरज पंचोली खुद मीडिया के सामने आए और उन्होंने इन तमाम बातों को पूरी तरह से बकवास और मनगढ़ंत करार दिया। सूरज ने अपनी सफाई में कहा कि सुशांत और उनके बीच कभी कोई दुश्मनी नहीं थी।

बल्कि वह तो एक दूसरे को भाई मानते थे और अक्सर साथ वक्त बिताया करते थे। लेकिन जनता इस सफाई को पचा नहीं पा रही थी। क्योंकि बॉलीवुड का इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जो भी सलमान खान के रास्ते में आया, उसका क्या हश्र हुआ। लोगों के जेहन में विवेक ओबरॉय की वह ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आज भी ताजा थी। जिसमें उन्होंने खुलेआम सलमान के खौफ की बात कही थी। लोगों को अरिजीत सिंह का वो Facebook पोस्ट याद था जिसमें उन्होंने सलमान से हाथ जोड़कर अपने गाने को फिल्म से ना हटाने की भीख मांगी थी। और निर्देशक अभिनव कश्यप का वह विस्फोटक बयान भी सबके सामने आ चुका था। जिसमें उन्होंने सलमान और उनके परिवार पर उनका करियर बर्बाद करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के संगीन आरोप लगाए थे। पूरे देश में गुस्से की ऐसी सुनामी आई कि बिहार के मुजफ्फरपुर कोर्ट में एक वकील ने सलमान खान, करण जौहर और एकता कपूर समेत कई दिग्गजों के खिलाफ सुशांत को खुदकुशी के लिए उकसाने का केस तक थोक दिया। पटना के कारगिल चौक पर सलमान खान के पुतले फूंके जाने लगे। उनकी फिल्मों के बॉयकॉट के नारे लगने लगे और Twitter पर हफ्तों तक सलमान के खिलाफ ट्रेंड्स चलते रहे। हालात इतने बिगड़ गए कि खुद सलमान खान को अपने पीआर के जरिए एक बेहद सधा हुआ ट्वीट करना पड़ा। जिसमें उन्होंने अपने फैंस से अपील की कि वह सुशांत के परिवार और उनके दुखी फैंस के साथ खड़े रहें और उनके गुस्से को समझें। लेकिन लोग समझ रहे थे कि यह सब केवल डैमेज कंट्रोल का एक हिस्सा था। लेकिन सलमान खान के इस कथित थप्पड़ और दुश्मनी की कहानी तो बस सतह पर तैरता हुआ एक पत्ता भर थी। असली खेल तो उस समंदर के भीतर चल रहा था। जहां बॉलीवुड की खामोश पीआर मशीनरी काम करती है।

जब मुंबई पुलिस ने इस केस की परतें उधेड़ना शुरू की तो उन्होंने बॉलीवुड की सबसे ताकतवर महिला मानी जाने वाली रेशमा शेट्टी को पूछताछ के लिए बांद्रा पुलिस स्टेशन तलब किया। रेशमा शेट्टी कोई मामूली नाम नहीं है। वो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी मैट्रिक्स की सर्वे सर्वा हैं। और एक जमाने में सलमान खान के डूबते करियर को बीइंग ह्यूमन की चमकती छवि देकर फिर से जिंदा करने वाली मास्टरमाइंड वही थी। रेशमा शेट्टी से करीब 4 से 5 घंटे तक बंद कमरे में तीखे सवाल पूछे गए कि आखिर बॉलीवुड की यह बड़ी एजेंसियां कैसे किसी कलाकार की किस्मत तय करती हैं। दरअसल सुशांत के करीबी दोस्तों ने पुलिस को बताया था कि सुशांत को पिछले कुछ सालों से ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई बहुत बड़ी अदृश्य ताकत उनके पीछे पड़ी है। हर दूसरे दिन फिल्मी गसिप पोर्टल्स और अखबारों में उनके नाम के बिना ब्लाइंड आइटम्स छापे जाते थे। जिनमें सुशांत को कभी घमंडी, कभी अपनी कोस्टार्स के साथ बदतमीजी करने वाला तो कभी किसी डायरेक्टर के साथ मारपीट करने वाला मानसिक रूप से बीमार इंसान साबित किया जाता था। यह एक ऐसा साइकोलॉजिकल वॉर था जिसने सुशांत की रातों की नींद छीन ली थी। जब भी सुशांत कोई अच्छी फिल्म साइन करते अचानक मीडिया में उनके नखरों की झूठी कहानियां छपने लगती थी। यह सब इतनी सफाई से किया जाता था कि सीधे किसी पर उंगली भी नहीं उठाई जा सकती थी। लेकिन सुशांत का नाम और उनकी साख धीरे-धीरे धूल में मिलाई जा रही थी। सुशांत अपने दोस्तों से अक्सर यह कहते थे कि कोई बहुत बड़ा सिंडिकेट है जो उन्हें बॉलीवुड से बाहर फेंकना चाहता है। जो चाहता है कि कोई भी बड़ा प्रोड्यूसर उन पर भरोसा ना करें। रेशमा शेट्टी से पुलिस की पूछताछ इसी बात के इर्द-गिर्द घूमी कि क्या बड़ी टैलेंट एजेंसियां और शक्तिशाली कैंप्स मिलकर बाहरी कलाकारों को ठिकाने लगाने के लिए इस तरह के पीआर कैंपेन चलाते हैं ताकि उनके अपने स्टार किड्स के रास्ते का हर कांटा साफ हो सके। लेकिन इस काले खेल के पन्ने तो उन कॉन्ट्रैक्ट्स में भी धंसे हुए थे जिन्हें देखकर कोई भी नया एक्टर अपनी किस्मत समझ बैठता है। और इसी कानूनी फंदे का सबसे बड़ा नाम था यशराज फिल्म्स। यानी वाईआरएफ का वो मशहूर तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट। जब एक नया लड़का मुंबई आता है और उसे यशराज फिल्म्स जैसे विशालकाय बैनर की तीन फिल्मों का ऑफर मिलता है तो उसे लगता है कि उसकी जिंदगी सवर गई। लेकिन हकीकत में वो सोने की जंजीरों में बंधने जैसा होता है। बांद्रा पुलिस ने जब यशराज फिल्म से सुशांत के उस कॉन्ट्रैक्ट की फाइलें मंगवाई तो जो सच सामने आया वो किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी था। सुशांत ने साल 2013 में शुद्ध देसी रोमांस की जिसके लिए उन्हें महज ₹ लाख दिए गए। फिल्म हिट रही। सुशांत की अदाकारी की जमकर तारीफ हुई। इसके बाद दूसरी फिल्म आई डिटेक्टिव बमकेश बक्शी जिसमें सुशांत ने अपनी जान झोंक दी थी और उन्हें ₹1 करोड़ का भुगतान किया गया। लेकिन इस पूरे खेल की सबसे दर्दनाक और रूह कपा देने वाली कड़ी थी वह तीसरी फिल्म जिसका नाम था पानी। पानी कोई आम फिल्म नहीं थी। वो मशहूर डायरेक्टर शेखर कपूर का एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट था, जो भविष्य के उस दौर की कहानी कहने वाला था, जब दुनिया पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाएगी। शेखर कपूर को इस किरदार के लिए सिर्फ और सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत नजर आए थे। सुशांत इस फिल्म को लेकर इस कदर जुनूनी हो चुके थे, कि उन्होंने दिन रात एक कर दिया था। वो महीनों तक शेखर कपूर के साथ वर्कशॉप्स करते रहे। उन्होंने अपने लुक्स पर काम किया। उस दुनिया को समझा और अपने करियर के सबसे सुनहरे दौर में बाकी तमाम डायरेक्टर्स के ऑफर्स को सीधे ठुकरा दिया। क्योंकि वाईआरएफ के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक वो बिना यशराज की इजाजत के बाहर कोई फिल्म नहीं कर सकते थे। सुशांत ने करीब डेढ़ से 2 साल केवल पानी की तैयारी में खपा दिए। लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। वाईआरएफ के मालिक आदित्य चोपड़ा और डायरेक्टर शेखर कपूर के बीच बजट और क्रिएटिविटी को लेकर मतभेद शुरू हो गए। एक दिन अचानक बिना सुशांत की मेहनत की परवाह किए बिना यह सोचे कि उस लड़के ने अपनी जवानी के दो सबसे कीमती साल इस प्रोजेक्ट के लिए दांव पर लगा दिए थे। आदित्य चोपड़ा ने एक झटके में पानी को हमेशा के लिए डिब्बे में बंद कर दिया। शेखर कपूर ने जब सुशांत को फोन करके बताया कि पानी अब कभी नहीं बनेगी तो सुशांत बच्चों की तरह फूट-फूट कर रोए थे। वो लड़का जो महीनों से उस किरदार को जी रहा था वो अचानक शून्य में आ गया।

एक तरफ बॉलीवुड के नवाबों और स्टार किड्स की फ्लॉप फिल्मों के बावजूद उन पर करोड़ों का सट्टा लगाया जाता रहता है। और दूसरी तरफ एक ऐसा टैलेंटेड नौजवान था जिसे कॉन्ट्रैक्ट की आड़ में ना सिर्फ घर बैठाया गया बल्कि उसके अंदर के कलाकार को तड़पाड़पा कर मार डाला गया। सुशांत को समझ आ गया था कि उन्हें एक ऐसे कमरे में बंद कर दिया गया है जिसकी चाबी किसी और की जेब में है। लेकिन यशराज के इस चक्रव्यूह ने सुशांत का जो सबसे बड़ा नुकसान किया उसकी गवाही खुद बॉलीवुड के सबसे बड़े शोमैन और डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने पुलिस के सामने दी। जब भंसाली सेंटाक्रूज़ पुलिस स्टेशन पहुंचे और उनसे करीब 3 घंटे तक पूछताछ हुई तो उन्होंने एक ऐसा खुलासा किया जिसने फिल्म इंडस्ट्री के नेपोटिज्म की जड़ों को हिला कर रख दिया। भंसाली ने पुलिस को साफ शब्दों में बताया कि वह सुशांत के टैलेंट के इतने बड़े दीवाने थे कि वह उन्हें अपनी एक दो नहीं बल्कि चार बड़ी फिल्मों में लीड रोल देना चाहते थे और इनमें सबसे पहली फिल्म थी साल 2013 की ब्लॉकबस्टर गोलियों की रासलीला रामलीला। भंसाली खुद सुशांत के पास राम का किरदार लेकर गए थे। सुशांत उस रोल को करने के लिए बेताब थे। वो जानते थे कि भंसाली की यह फिल्म उनके करियर को एक अलग ही बुलंदी पर पहुंचा देगी। सुशांत भागे-भागे यशराज फिल्म्स के दफ्तर पहुंचे। उन्होंने आदित्य चोपड़ा और वाईआरएफ की मैनेजमेंट टीम के आगे हाथ जोड़े, मिन्नतें की कि उन्हें भंसाली की यह फिल्म करने दी जाए। लेकिन वाईआरएफ ने अपनी तानाशाही दिखाते हुए साफ मना कर दिया। उन्होंने यह बहाना बनाया कि सुशांत के पास डेट्स नहीं है और वह यशराज की आने वाली फिल्मों और पानी की तैयारी में बिजी हैं। सुशांत बेबस थे। कॉन्ट्रैक्ट की कानूनी बेड़ियों ने उनके हाथ पैर बांध रखे थे। भारी मन से सुशांत को भंसाली की उस ब्लॉकबस्टर फिल्म को छोड़ना पड़ा। और फिर क्या हुआ? वही राम का किरदार रणवीर सिंह की झोली में चला गया और रणवीर सिंह उस एक फिल्म से रातोंरात सुपरस्टार बन गए। सुशांत के पूर्व मैनेजर उदय सिंह गौरी ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि सुशांत को पानी का जो सपना दिखाया गया था उसकी वजह से उनके हाथ से रामलीला जैसी ऐतिहासिक फिल्म निकल गई और सितम देखी। बाद में भंसाली ने बाजीराव मस्तानी और पद्मावत जैसी कालजई फिल्मों के लिए भी सुशांत के नाम पर गहराई से विचार किया था। लेकिन हर बार बॉलीवुड की अंदरूनी राजनीति और तारीखों के झूठे खेल ने सुशांत के रास्ते बंद कर दिए। सुशांत अपने कमरे में बैठकर देखते रहे कि जो मुकाम उनका हो सकता था, वह किसी और को सिर्फ इसलिए थाली में परोस कर दे दिया गया क्योंकि वह किसी खास कैंप का हिस्सा था। इस इंडस्ट्री में नए और बाहरी कलाकारों के साथ सिर्फ फिल्मों के छीने जाने का खेल ही नहीं खेला जाता बल्कि उनके साथ झूठे वादों और उम्मीदों का ऐसा मजाक भी किया जाता है जो उनके आत्मसम्मान को छल नहीं करते। इसका एक जीता जागता उदाहरण साल 2013 में तब देखने को मिला जब सुशांत की पहली फिल्म का पोचे रिलीज हुई थी और वो रातोंरात चर्चा में आ गए थे। उसी दौरान फिल्मी अखबारों के पहले पन्ने पर यह खबर जोर शोर से छपी कि बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर सुभाष घई अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए सुशांत सिंह राजपूत और सोनाक्षी सिन्हा को साइन करने जा रहे हैं। हर तरफ यह माहौल बना दिया गया कि सुशांत अब बड़े-बड़े बैनर्स की पहली पसंद बन चुके हैं। लेकिन इस खबर के बाजार में फैलते ही सुभाष घई ने अचानक एक बयान जारी करके इस पूरी खबर को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बेहद रूखे अंदाज में कहा कि उन्होंने सुशांत या सोनाक्षी को किसी फिल्म के लिए साइन नहीं किया है और उन्हें नहीं पता कि ऐसी बेबुनियाद अफवाहें कौन उड़ाता है। बाहर से देखने पर यह किसी को एक पीआर ड्रामा लग सकता है। लेकिन इंडस्ट्री के अंदर काम करने वाले लोग जानते हैं कि जब किसी उभरते हुए कलाकार के नाम पर ऐसी हवा बनाई जाती है और फिर कोई बड़ा मेकर सरेआम उसका खंडन करता है तो उस कलाकार की क्रेडिबिलिटी पर कितना गहरा बट्टा लगता है। लोग यह समझने लगते हैं कि शायद वो लड़का पब्लिसिटी का भूखा है और खुद ही अपने नाम की झूठी खबरें प्लांट करवा रहा है। सुशांत उस दौर में अपनी पहचान बनाने के लिए लड़ रहे थे और हर तरफ से उन पर ऐसे वार किए जा रहे थे जिनका उनके पास कोई जवाब नहीं था। बाद में सुशांत के जाने के बाद भले ही सुभाष घई ने उन्हें एक बेहद होनहार और हिम्मती सितारा बताकर अपनी श्रद्धांजलि दी। लेकिन हकीकत यह थी कि जीते जी सुशांत को इस इंडस्ट्री ने सिर्फ झूठी उम्मीदें और पीठ में छुरा ही दिया। जब यशराज के दरवाजे बंद हुए तो सुशांत को लगा कि शायद करण जौहर का धमा प्रोडक्शंस उन्हें वो सम्मान और वो मंच देगा जिसके वो हकदार हैं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि वह कुएं से निकल कर खाई में गिरने जा रहे हैं। करण जौहर ने सुशांत को जैकलन फर्नांडिस के साथ फिल्म ड्राइव के लिए साइन किया। जिसे दोस्ताना फेम तरुण मंसुखानी डायरेक्ट कर रहे थे। सुशांत ने इस एक्शन थ्रिलर फिल्म के लिए भी अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी। उन्होंने खतरनाक स्टंट्स किए, बॉडी बनाई और शूटिंग पूरी की। लेकिन जैसे ही फिल्म बनकर तैयार हुई, Dharma प्रोडक्शंस के दफ्तरों में एक अजीब सा खेल शुरू हो गया। करण जौहर को फिल्म का आउटपुट पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि फिल्म का वीएफएक्स बहुत घटिया है। फिल्म को दो बार दोबारा शूट कराया गया। रिलीज की तारीखें बार-बार आगे खिसकाई गई और हर देरी का ठीकरा सुशांत के सिर फोड़ा जाने लगा कि फिल्म बिक नहीं रही है। और फिर साल 2019 के अंत में करण जौहर ने वो फैसला लिया जिसने सुशांत के फिल्मी करियर और उनके आत्मसम्मान पर सबसे घातक चोट पहुंचाई। बिना सुशांत को भरोसे में लिए बिना उनसे कोई सलाम मशवरा किए करण जौहर ने ड्राइव को सिनेमाघरों में रिलीज़ करने से मना कर दिया और उसे सीधे Netflix पर डंप कर दिया। आज के दौर में ओटीटी पर किसी फिल्म का आना बहुत आम बात हो सकती है। लेकिन 2019 में किसी बड़े बजट के हिंदी फिल्म का थिएटर छोड़कर सीधे ओटीटी पर रिलीज होना उस फिल्म और उसके हीरो के लिए एक बहुत बड़ा अपमान यानी सीधा डिमोशन माना जाता था। सुशांत के मैनेजर ने पुलिस को बताया था कि सुशांत इस फैसले से अंदर तक हिल गए थे। वो कई रातों तक सो नहीं पाए थे। उन्हें साफ लग रहा था

कि करण जौहर जानबूझकर उनकी फिल्म को एक बी ग्रेड प्रोजेक्ट की तरह पेश कर रहे हैं और जब 1 नवंबर 2019 को ड्राइव Netflix पर आई तो वही हुआ जिसका सुशांत को डर था। फिल्म का वीएफएक्स इतना बचकाना था मानो 90 के दशक का कोई सस्ता वीडियो गेम चल रहा हो। सुशांत मीडिया पर सुशांत की इस फिल्म का जमकर मजाक उड़ाया गया। मीम्स बनाए गए। क्रिटिक्स ने इसे कूड़ा करार दिया। करण जौहर चाहते तो बेहतर पोस्ट प्रोडक्शन से इस फिल्म की इज्जत बचा सकते थे। लेकिन उन्होंने इस कचरे प्रोजेक्ट को जनता के सामने फेंक दिया ताकि सारा दोष सुशांत के खाते में चला जाए। और जब सुशांत इस दुनिया से चले गए तो वही करण जौहर अपने Instagram पर आंसू बहाते हुए एक लंबा चौड़ा गिल्ट से भरा पोस्ट लिखते हैं कि काश मैंने पिछले एक साल में तुमसे बात की होती। मुझे कई बार लगा कि तुम्हें किसी दोस्त की जरूरत है, लेकिन मैंने कभी पहल नहीं की। जनता इस घड़ियाली आंसू के पीछे के सच को अच्छी तरह समझ रही थी। कंगना रनौत ने इस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि करण जौहर जैसे लोग खुद को इस इंडस्ट्री का ठेकेदार समझते हैं जो पहले किसी का करियर बर्बाद करते हैं और फिर उसकी मौत पर शोक सभाएं आयोजित करके खुद को पाक साफ दिखाने का ढोंग करते हैं। साजिशों का यह खौफनाक मंजर सिर्फ सुशांत की प्रोफेशनल जिंदगी तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके निजी जीवन में भी ऐसे काले साए मंडराने लगे जिन्होंने पूरी कहानी को एक बेहद खतरनाक साइकोलॉजिकल थ्रिलर में तब्दील कर दिया। इस कहानी में एंट्री होती है महेश भट्ट और सुशांत की कथित गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की। सुशांत के बूढ़े पिता के के सिंह ने जब पटना के राजीव नगर थाने में रिया और उसके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई तो पूरे देश के पैरों तले से जमीन खिसक गई। आरोपों की लिस्ट इतनी लंबी थी कि सुनकर रूह कांप जाए। सुशांत को उनके परिवार और बहनों से पूरी तरह अलग-थलग कर देना, उन्हें मानसिक रूप से बीमार साबित करने के लिए डॉक्टरों के चक्कर कटवाना, भारी डिप्रेशन के दवाइयों का ओवरडोज देना और उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपयों की हेराफेरी करना। हालांकि बाद में पैसों के सीधे ट्रांसफर के पुख्ता सबूतों पर बहस चलती रही। लेकिन जो बात सबसे ज्यादा खटकने वाली थी वो थी इस पूरे मामले में 72 साल के महेश भट्ट की रहस्यमई मौजूदगी। जब मुंबई पुलिस ने महेश भट्ट को पूछताछ के लिए बुलाया तो उन्होंने बड़े भोलेपन से कहा कि वह अपनी पूरी जिंदगी में सुशांत से सिर्फ दो ही बार मिले थे। और उनका सुशांत की निजी जिंदगी से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी फिल्म सड़क दो तो हमेशा से संजय दत्त के लिए बनी थी और उन्होंने कभी सुशांत को इसके लिए अप्रोच नहीं किया था। लेकिन मीडिया के हाथ जब 8 जून 2020 के वो चौंकाने वाले WhatsApp चैट्स लगे तो महेश भट्ट के दावों की धज्जियां उड़ गई। 8 जून वही मनहूस दिन था जब रिया चक्रवर्ती सुशांत का घर,

उनका साथ और उन्हें उस हाल में छोड़कर हमेशा के लिए चली गई थी। उस दिन रिया ने महेश भट्ट को मैसेज भेजा था कि आयशा भारी मन और बहुत बड़े सुकून के साथ आगे बढ़ रही है सर। आपका आखिरी फोन मेरे लिए एक वेकअप कॉल था। और इसके जवाब में महेश भट्ट ने लिखा था कि अब पीछे मुड़कर मत देखना। तुमने जो किया उसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए थी। तुम्हारे पिता आज बहुत खुश होंगे। यह लीक हुए चैट्स जब टीवी स्क्रीन्स पर चले तो पूरे देश में गुस्से का एक ऐसा लावा फूटा जिसे संभालना नामुमकिन हो गया। लोगों ने खुलेआम सवाल पूछा कि आखिर महेश भट्ट एक 26 27 साल की लड़की को उसके लिविंग पार्टनर को छोड़ने के लिए क्यों उकसा रहे थे? क्या सुशांत को जानबूझकर उस फ्लैट में अकेला छोड़ा गया ताकि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट जाए। जनता का यह गुस्सा उस वक्त एक महा विस्फोट बन गया जब हॉटस्टार पर महेश भट्ट की फिल्म सड़क दो का ट्रेलर रिलीज हुआ। जिसमें उनकी बेटी आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में थी। सुशांत के जीजा के परिवार ने एक नेपोमीटर बनाया जिसने सड़क दो को 98% नेपोटिस्टिक घोषित किया और फिर भारतीय सिनेमा के इतिहास का वो सबसे बड़ा डिजिटल विद्रोह शुरू हुआ जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। सुशांत के न्याय की मांग कर रहे करोड़ों लोगों ने YouTube पर जाकर सड़क दो के ट्रेलर को इस कदर डिसलाइक किया कि देखते ही देखते डिसलाइक्स का आंकड़ा 1 करोड़ 20 लाख यानी 12 मिलियन के पार चला गया।

यह YouTube के पूरे इतिहास में दुनिया का सबसे ज्यादा नापसंद किया जाने वाला वीडियो बन गया। कमेंट सेक्शन में लाखों लोगों ने सिर्फ और सिर्फ सुशांत का नाम लिखकर बॉलीवुड के इस परिवारवाद और कैंपबाजी के मुंह पर एक करारा तमाचा जड़ दिया। लेकिन यह रहस्यमई जाल यहीं खत्म नहीं होता। इस दास्तान की सबसे खौफनाक और उलझी हुई गु्थी जुड़ी है दिशा सालियान की मौत से। सुशांत के जाने से ठीक छ दिन पहले यानी वहीं 8 जून जब रिया ने सुशांत का घर छोड़ा था। उसी रात मलाड की एक 14वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर दिशा सालियान की जान चली गई। दिशा वही थी जो कुछ समय के लिए सुशांत की सेलिब्रिटी मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी थी।

नेशनल टेलीविजन पर अर्नभ गोस्वामी और तमाम खोजी पत्रकारों ने जब इस मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू की, तो कई ऐसे सवाल खड़े हुए, जिनका जवाब आज तक किसी के पास नहीं है। उस रात मलाड के उस फ्लैट में कौन सी हाई प्रोफाइल पार्टी चल रही थी? उस पार्टी में बॉलीवुड और राजनीति से जुड़े कौन-कौन से रसूखदार चेहरे मौजूद थे? और सबसे अहम सवाल, क्या दिशा की मौत के पीछे कोई ऐसा भयानक राज छिपा था जिसे सुशांत जान चुके थे? इंटरनेट पर यह थ्योरी तेजी से फैली कि दिशा की मौत के बाद सुशांत बेहद डरे हुए और घबराए हुए थे। उनके घर पर काम करने वाले स्टाफ ने भी पुलिस और मीडिया को बताया था कि सुशांत 8 जून के बाद से लगातार अपना लैपटॉप खंगाल रहे थे। दिशा सालियान से जुड़ी हर खबर को बार-बार पढ़ रहे थे और उन्होंने अपने कमरे के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करवा दिए थे। सुशांत को डर सता रहा था कि कहीं कोई ताकतवर गिरोह दिशा के मामले में उनका नाम ना घसीट दे या उन्हें फंसा ना दे। और फिर 14 जून को सुशांत का अपने ही कमरे में बेजान पाया जाना। इन दोनों घटनाओं के बीच का फासला महज छ दिनों का था। जनता की भारी मांग और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान के मामले की जांच भी सीबीआई के हवाले करने के निर्देश दिए ताकि इस खौफनाक पहेली के हर उस राज से पर्दा उठ सके जिसे दबाने की कोशिश की गई

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