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जब सुनील दत्त ने काट दिए अमिताभ के सारे डायलॉग !

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55 साल पहले हिंदी सिनेमा की वह फिल्म आई जिसमें सुनील दत्त ने अमिताभ बच्चन के सारे डायलॉग ही छीन लिए और उनके कैरेक्टर को गूंगा बना दिया। आइए दोस्तों जानते हैं इस कल्ट क्लासिक फिल्म का नाम। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन आज अपनी गहरी आवाज और दमदार डायलॉग डिलीवरी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक में उन्हें एक भी डायलॉग नहीं मिला था। अब हिंदी फिल्में और उनसे जुड़े किस्से कुछ अजब गजब तो होते ही हैं। यह किस्सा भी कुछ ऐसा ही है।

बात है 55 साल पुरानी फिल्म रेशमा और सेरा की जो 23 जुलाई 1971 को रिलीज हुई थी। [संगीत] इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने गूंगे किरदार का अभिनय किया था और उसके पीछे [संगीत] एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है। दरअसल सुनील दत्त एक फिल्म का निर्देशन कर रहे थे। इस फिल्म में लीड रोल में खुद सुनील दत्त और वहीदा रहमान थे। अमिताभ बच्चन को छोटू नाम के किरदार के लिए चुना गया। शुरुआत में उनके लिए 15 पेज का लंबा डायलॉग लिखा गया। अमिताभ सेट पर इन लाइनों को बार-बार रिहर्स करते थे। लेकिन रिहर्सल के दौरान वह बार-बार डायलॉग भूल जाते थे, और कई शब्द उन्हें याद नहीं रह पाते थे। जब सुनील दत्त ने देखा कि अमिताभ लाइनें सही से डिलीवर नहीं कर पा रहे हैं तो उन्होंने फैसला लिया सुनील दत्त ने अमिताभ के सभी डायलॉग हटा दिए और उनके किरदार को गूंगा बना दिया। स्क्रिप्ट को दोबारा लिखा गया और अमिताभ बिना एक भी शब्द बोले पूरी फिल्म में एक्टिंग करते नजर आए। उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज ने किरदार को जीवंत बना दिया। रेशमा और सेरा राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित ट्रैजिक लव स्टोरी है। इसमें दो परिवारों की दुश्मनी और प्रेम की कहानी दिखाई गई है। फिल्म में विनोद खन्ना, राखी, रंजीत, जयंत और अमरीश पुरी भी थे।

सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त भी बचपन में एक छोटे से रोल में नजर आए थे। रेशमा और सेरा रिलीज होने पर व्यासायिक रूप से सफल नहीं रही और सुनील दत्त को काफी नुकसान उठाना पड़ा। बाद में उन्हें अपनी कुछ संपत्ति गिरवी तक रखनी पड़ी लेकिन समय के साथ फिल्म को क्लासिक का दर्जा मिला। अमिताभ बच्चन के मूक अभिनय की खूब तारीफ हुई। [संगीत] खुद सुनील दत्त ने बाद में कहा था कि बिना एक शब्द बोले अमिताभ बच्चन ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दी थी। हालांकि दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी कि सुनील दत्त रेशमा और सेरा में अमिताभ बच्चन को कास्ट नहीं करना चाहते थे। उन्हें अमिताभ बच्चन की आवाज से सख्त नफरत थी। बताया जाता है कि इंदिरा गांधी की सिफारिश पर अमिताभ बच्चन को रेशमा और सेरा में लिया गया था। इंदिरा गांधी तब सुनील दत्त की पत्नी नरगिस की अच्छी दोस्त थी। नरगिस ने जब सुनील दत्त के सामने रेशमा और सेरा में अमिताभ को लेने की बात रखी, तो वह मना नहीं कर पाए। साथ ही इंदिरा गांधी अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन की भी गहरी दोस्त थी। इलाहाबाद के दिनों से उनकी दोस्ती थी। एक्ट्रेस शिवा आकाशदीप साबिर ने एक बार सिद्धार्थ कन को दिए इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन के बारे में सुनील से हुई अपनी बातचीत का जिक्र किया था। शिवा ने बताया था कि दरअसल दत्त साहब ने मुझसे कहा था कि हमें उनकी आवाज बिल्कुल पसंद नहीं थी। उनकी आवाज किसी रेडियो जॉकी जैसी लगती है। सुनील दत्त ने शुरू में प्लान किया था कि फिल्म की शूटिंग सिर्फ 15 दिनों में पूरी कर लेंगे लेकिन आखिर में पता चला कि ऐसा होना असंभव है।

लगभग 100 लोगों की टीम थी। सुनील ने जैसलमेर से 80 मील दूर पोचीना नाम के गांव में अपनी यूनिट के टेंट लगाए। 15 दिनों की शूटिंग आखिरकार 2 महीने से अधिक समय तक चली। जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट काफी बढ़ गया। पहले फिल्म को सुखदेव डायरेक्ट कर रहे थे। नरगिस ने जब फिल्म के रेसेस देखे तो कुछ उन्हें जमी नहीं। तब सुनील दत्त ने सुखदेव की जगह ली और फिल्म खुद डायरेक्ट की। हालांकि वह हर सीन में परफेक्शन चाह रहे थे। सुनील दत्त की बेटी नम्रता दत्त ने अपनी किताब मिस्टर एंड मिसेज दत्त मेमोरीज ऑफ आवर पेरेंट्स में बताया है

कि एक बार सुनील को एक शॉट के लिए 100 ऊंट चाहिए थे लेकिन उन्हें सिर्फ 99 ही मिल पाए। उन्होंने शूटिंग करने से मना कर दिया। राखी ने बताया कि पहले 15 दिनों तक सुनील चाहते [संगीत] थे कि वह स्थानीय लोगों को देखें और किरदार के भाव में डल जाए। लेकिन प्लानिंग की कमी के कारण खर्च बढ़ता चला गया। जिसकी वजह से सुनील दत्त को बांद्रा स्थित अपना बंगला गिरवी रखना पड़ा। गाड़ियां तक बिक गई। सुनील दत्त अन्य फिल्मों से होने वाली कमाई भी रेशमा सेरा पर लगा रहे थे। इसीलिए उनकी सारी संपत्ति दांव पर लग चुकी थी। लेकिन [संगीत] रिलीज के बाद आज यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक का दर्जा पा चुकी है। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर। हम्म।

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