25 अगस्त 2026 दिल्ली में भारी बारिश होती है और हमेशा की तरह देश की राजधानी के कई इलाके झील बनने लगते हैं। लूटियंस दिल्ली यानी का इलाका भी इससे अछूता नहीं रहा। लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ। यानी नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल के नए अध्यक्ष हैं मनोज कुमार द्विवेदी। उन्होंने भारी के अगले दिन सोशल मीडिया पर जनता से माफी मांगी।
स्वीकार किया कि का रिस्पांस पर्याप्त नहीं था। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, मैं क्षेत्र के उन सभी लोगों से माफी मांगता हूं जिन्हें 25 अगस्त 2026 को जल भराव के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मनोज कुमार द्विवेदी ने इसी महीने पदभार संभाला है।
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि पानी निकालने में हुई देरी कतई स्वीकार्य नहीं है। आगे बढ़ने से पहले संक्षेप में मनोज कुमार द्विवेदी की प्रोफाइल जान लीजिए। प्रशासनिक सेवा में करीब 30 साल का अनुभव है उनके पास। 1997 बैच के एजीएमयूटी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। का फुल फॉर्म है अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरिटरीज। मनोज कुमार द्विवेदी आईआईटी दिल्ली और बोर के एलुमिनाई हैं। अगस्त 2026 में ही गृह मंत्रालय ने उन्हें का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनसे पहले इस पद पर केशव चंद्रा थे। का चार्ज संभालने से पहले वह डीओपीटी यानी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में अतिरिक्त सचिव थे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं।
उन्हें ईमानदारी, निष्ठा और उत्कृष्ट सार्वजनिक सेवा के लिए जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल का गोल्ड मेडल मिल चुका है। यह वहां के सिविल सर्वेंट को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। अब जलभराव के मुद्दे पर लौटते हैं। सवाल है कि आखिर पानी निकालने में इतनी देर क्यों लगी? एनडीएमसी अध्यक्ष के मुताबिक 25 अगस्त को 2 घंटे से भी कम समय में 72 मि.मी. से ज्यादा बारिश हुई थी। उन्होंने कहा कि इतनी सी देर में इतना पानी बरसना अप्रत्याशित था। मनोज कुमार द्विवेदी ने दावा किया कि आमतौर पर एनडीएमसी 15 से 20 मिनट के भीतर जलभराव को साफ कर देती है। ज्यादा से ज्यादा 35 से 40 मिनट लगते हैं।
लेकिन इस बार कम से कम तीन-चार इलाके ऐसे थे जहां पानी निकालने में 1 घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। कौन से इलाके थे यह? मंदिर मार्ग, कनोट प्लेस, बाबा खड़क सिंह मार्ग और टाल कटोरा। इसकी वजह क्या थी? वजह थी कि कुछ नाले जाम हो गए थे और पानी निकालने के लिए दो-दो पंप लगाने पड़े। इसके अलावा पंचकैया रोड का पानी भी l एरिया में घुस आया था जिसे साफ करना पड़ा। का दावा है कि बाकी इलाकों को 20 मिनट से भी कम समय में साफ कर दिया गया था।
हालांकि एनडीएमसी अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि भारी बारिश कोई बहाना नहीं हो सकती। भविष्य के लिए व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा। इसके लिए ने शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजना तैयार की है। तीन मुख्य काम किए जा रहे हैं। पहला नालों की 24 घंटे डीसिल्टिंग यानी गाद की सफाई की जा रही है। पंपिंग कैपेसिटी को भी बढ़ाया गया है। दूसरा कदम है ड्रेनेज सिस्टम की समीक्षा की जाएगी और इसे दुरुस्त किया जाएगा।
नालों को दोबारा खोदकर उसमें काम किया जाएगा ताकि वह जाम ना हो। तीसरा कदम है रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी बारिश के पानी के भंडारण को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि जल भराव वाले इलाकों के पानी को कहीं और मोड़ा जा सके और इस्तेमाल किया जा सके कम ही होता है कि बिना किसी बड़े बवाल के अधिकारी खुद सामने आकर गलती माने। जनता को हुई परेशानी के लिए माफी मांगे और विभागीय चूक की बात स्वीकार करें।
इसलिए एनडीएमसी के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी की पोस्ट की चर्चा हो रही है। मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि अगर वह सिर्फ अपने जूनियर अफसरों की रिपोर्ट पर भरोसा करेंगे तो कभी भी जमीनी सच्चाई पता नहीं चलेगी। इसलिए उन्होंने इस मसले पर पोस्ट किया। उनके मुताबिक जवाबदेही उनकी है और एनडीएमसी का काम कैसा है इसका बेंचमार्क वहां रहने वाली जनता तय करेगी ना कि कोई अफसर या वह खुद। मनोज कुमार द्विवेदी ने जनता से सुधार के लिए सुझाव भी मांगे हैं। उन्होंने अपनी सोशल पोस्ट पर आए जनता के कई सुझावों और शिकायतों का जवाब भी दिया। हालांकि पोस्ट पर एक यूजर ने सवाल उठाया कि मनोज कुमार द्विवेदी ने अपनी माफी सिर्फ एनडीएमसी इलाके तक ही क्यों सीमित रखी? बाकी दिल्ली में हुए जल भराव पर बात क्यों नहीं कही? इस पर एनडीएमसी अध्यक्ष ने नपातुला जवाब दिया। लिखा कि वी ऑल हैव टू बी अकाउंटेबल।
यानी हम सबको जवाबदेह होना होगा। एनडीएमसी नई दिल्ली शहर की नगर पालिका परिषद है। इसके प्रशासन की परिधि में 42.7 कि.मी. का इलाका आता है। जिसे आमतौर पर लुटियंस दिल्ली कहा जाता है।
इस इलाके में देश के मुख्य राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र मौजूद हैं। मसलन संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और कनोट प्लेस जैसे बड़े व्यवसायिक केंद्र भी। ऐसे में सवाल लाजिम है कि वीआईपी इलाकों की चिंता तो ठीक है, लेकिन दिल्ली के बाकी इलाकों की सुध कौन लेगा?