साधना शिवदासानी के बारे में यह बात अक्सर कही जाती है कि वह किसी के निधन या में जाने से बचती थीं। हालांकि, इसे उनकी पक्की आदत या किसी एक घटना से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि इस दावे की विश्वसनीय पुष्टि सीमित है।
बताया जाता है कि साधना स्वभाव से बेहद निजी और अंतर्मुखी थीं। स्टारडम के दौर में भी वह अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखना पसंद करती थीं। फिल्मों से संन्यास लेने के बाद तो उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना लगभग छोड़ ही दिया था।
इसी वजह से उनके बारे में कई तरह की धारणाएं और किस्से बन गए।उनकी जिंदगी में बीमारी और निजी परेशानियों का दौर भी रहा। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लोगों से मेल-जोल काफी कम कर दिया था।
इसलिए जब फिल्म इंडस्ट्री की किसी हस्ती का निधन होता, तब भी उनके वहां दिखाई न देने को लोग उनकी पुरानी आदत से जोड़कर देखते थे।साधना की पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके रहस्यमयी और बेहद निजी स्वभाव से भी बनी।
‘लव इन शिमला’, ‘वो कौन थी?’ और ‘मेरा साया’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की यादगार अभिनेत्रियों में शामिल किया।इसलिए “साधना कभी किसी के निधन पर नहीं जाती थीं” क. तथ्य की बजाय उनके बारे में प्रचलित फिल्मी किस्सा मानना ज्यादा उचित है।