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कोर्ट ने दिए ये 2 विकल्प उल्टी पड़ गई सोनम रघुवंशी की चाल, मचा बवाल !

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बहुचर्चित राजा रघुवंशी में आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती नजर आ रही है। मेघालय सरकार की ओर से उसकी जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा संकेत दिया है जिसे जानने वाले दिनों में मामले की दिशा बदल सकती है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के सामने दो विकल्प रखे।

अदालत ने कहा कि या तो वह सरेंडर कर दे और ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत के लिए आवेदन करें या फिर अदालत मेघालय सरकार की याचिका पर मामले के मेरिट के आधार पर फैसला सुनाएगी। अब मामले की अगली सुनवाई अब 23 जुलाई को होगी। लेट अस डू वन थिंग अलर्ट वी मे फाइल ए कंपाइलेशन इन टाइप कॉपी दैट वुड बी बेटर एंड देयर जस्ट जस्ट गिव द डिटेल्स ऑफ व्हाट वास द एक्सैक्ट इन प्रोवाइड एंड योर लॉर्डशिप मे टेक इट दैट रिटर्न ग्राउंड्स आर सप्लाई ओनली थिंग आई हैव लॉस्ट ऑन इज दैट देयर इज अ टाइपोग्राफिकल एरर इन वन सेक्शन मिस्टर व्हाट व्हाट यू गेट इट डन इज यू जस्ट गेट दी फोटोकॉपी ऑफ़ द ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स व्हिच यू प्रोवाइडेड टू द एक्यूरेट जस्ट फोटोकॉपी लेजिबल फोटोकॉपी सो दैट वी आर इन अ पोजीशन टू अंडरस्टैंड व्हाट वास सप्लाई इट मे नॉट बी इट इट मे नॉट बी दैट सिंपल फॉर अस इट इज सप्लाइड बट व्हाट हैज़ हैपेंड इज देयर इज नो डिस्प्यूट देयर हैस बीन नो डिस्प्यूट थ्रू आउट दैट आई एम नॉट सप्लाइड शी फाइल्स

द बेल एप्लीकेशन द कोर्ट गोज़ इन टू द मेरिट्स एंड सेज़ दैट यू आर अ फ्लाइट रिस्क आई रिजेक्ट इट थ्राइस द सेम लर्नड जज रिजेक्ट्स द बेल पिटीशन नो नो दैट इज़ दैट इज़ दैट इज़ अनदर एस्पेक्ट व्हिच वी मे हैव टू कंसीडर बट वी हैव टू फर्स्ट मीट दिस ग्राउंड वेदर दिस ग्राउंड इज़ सस्टेनेबल ऑर नॉट इफ दिस ग्राउंड इज़ नॉट सस्टेनेबल देन दी बेल ऑर्डर ग्राउंड सस्टेनेबल देन वी हैव टू कंसीडर अदर ग्राउंड काइंडली हैव इट ऑन ट्यूसडे समजेंसी बिकॉज़ दिस इज अ वेरी वेरीरी सीरियस ऑफेंस ऑलराइट इट्स अ सीरियस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील से कहा कि यदि वह चाहते तो स्वेच्छा से सरेंडर कर सकती है। इसके बाद जब ट्रायल के दौरान प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो जाएंगे तब वह दोबारा जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।

अगर सोनम इस विकल्प को नहीं चुनती है तो सुप्रीम कोर्ट मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की याचिका पर उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों के आधार पर फैसला करेगी। यानी अब फैसला पूरी तरीके से सोनम रघुवंशी और उसके कानूनी पक्ष पर निर्भर करेगा कि वह कौन सा रास्ता अपनाती है। मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि मामला बेहद गंभीर है और आरोपी के बाहर रहने से ट्रायल और गवाहों पर असर पड़ सकता है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की सुनी है और फिलहाल कोई अंतिम आदेश देने के बजाय सोनम को दो विकल्प दिए। अब इस मामले में दो संभावनाएं हैं। पहली यदि सोनम रघुवंशी सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के अनुसार सरेंडर करती है तो उसे न्यायिक हिरासत में जाना होगा। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान पर पूरे होने के बाद वह दोबारा जमानत की मांग कर सकती है। दूसरी यदि वह सरेंडर नहीं करती तो सुप्रीम कोर्ट मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की याचिका पर मेरिट के आधार पर फैसला सुनाएगा। ऐसे में अदालत उसकी जमानत बरकरार कर सकती है या उसे रद्द भी कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की है। माना जा रहा है कि इस दौरान यह साफ हो जाएगा कि सोनम रघुवंशी अदालत के सुझाव पर सरेंडर करती है या नहीं। इसके बाद ही अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लेगी। राजा रघुवंशी हत्याकांड देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में सोनम रघुवंशी आरोपी है और उसके खिलाफ हत्या की साजिश समेत कई गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। देखो खतरा क्यों नहीं होगा? कहा जो कातिल लोग हैं मतलब जब वो मेरे बच्चे के साथ ऐसा कर सकते हैं तो हम किसी के साथ भी कर सकते हैं वो लोग। क्योंकि है ना हमारा तो यही विश्वास था कि हमको इंसाफ मिलेगा।

हमको तो आज इंसाफ नहीं मिला। तो हमारा तो भरोसा हट गया ना। क्योंकि वो मार के फिर से चले जाएंगे। फिर से छूट जाएंगे वो तो। जमानत मिल गई उसको सोनम को। अब आगे क्या आप लोग कहां तक लड़ाई लड़ने की तैयारी? हम तो है ना सरकार से एक ही निवेदन चाहते हैं कि हमको है ना सीबीआई जांच चाहिए कि जो भूल हुई है वो सीबीआई जांच में वापस से लिख ले। मतलब कि सोनम बाहर आई तो आई कैसे मतलब जब उसने इतना बड़ा गुनाह करा और उसको सरकार ने छोड़ा तो छोड़ा कैसा? क्योंकि वो मेरे बच्चे की इतनी बड़ी थी। इसके बाद भी आज मेरे बच्चा तो मेरे को मिला नहीं और उसको देखो तो मतलब सोनम आई तो आई कैसी? आज मेरे घर पल दिनों की खुशियां आई थी। मैं आज वो खुशियों में थोड़ा सा वो थी बिजी कि चलो मेरे यहां खुशी आई है और आज वापस से मेरे को अचानक से ये सुनने को मिलता कि सोनम को जमानत मिल गई तो मेरे को कितना बड़ा दुख हुआ। मेरे को ऐसा झटका लगा कि मैं खुद जानती नहीं।

मेघालय पुलिस की जो जांच है उस पर आप सवाल उठा रहे हैं। गलत जांच करी। उन्होंने अच्छे से जांच नहीं करी। देखो स्टार्टिंग में सब मेघालय ने पुलिस ने जांच अच्छी करी थी। मगर बाद में है ना अब हमको ऐसा लग रहा है कि जांच में कोई चूक हुई है या तो मतलब है ना मतलब कुछ ना कुछ तो गड़बड़ हुई है। अब वो गड़बड़ कैसे हुई है? यह कुछ समझ नहीं आ रही हमको। अभी प्रधानमंत्री से, गृह मंत्री अमित शाह जी से क्या मांग करना चाहेंगे? हम एक ही मांग करना चाहते हैं। हमें सीबीआई जांच चाहिए और है ना हमको इंसाफ नहीं मिला है। तो हम इंसाफ के लिए फिर से खड़े होंगे और हम फिर से लड़ना चाहते हैं कि हमको इंसाफ क्यों नहीं मिला? एक मां आस लगा के बैठी थी कि मेरे को इंसाफ मिलेगा। मगर वो मां का भरोसा तोड़ दिया।

अच्छा इनकी शादी कितनी तारीख को हुई थी? 11 मई को हुई थी। और साल भर होने से पहले उसको जमानत मिल गई। 10 महीने में मात्र हां 10 महीने में उसको बाहर आई तो आई कैसे मेरे को तो यही समझ नहीं आ रही बस इसी बीच उसे मिली जमानत को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। अब सबकी नजरें 23 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है। यह सुनवाई तय करेगी कि सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रहती है या उसकी कानूनी मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। सोनम रघुवंशी पर मई 2025 में पूर्वी घासी हिल्स में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रखने का आरोप है। सोनम को जून 2025 में ही गिरफ्तार किया गया और बाद में हत्या सहित कई अपराधों के खिलाफ उसके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। फिलहाल मुकदमा चल चल रहा है।

इसमें देखिए इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो है आज 14 तारीख की सुनवाई के लिए इसमें जो अपील की गई थी इसके अंदर उस तारीख को आगे तारीख बढ़ गई है इसमें क्योंकि उसमें भी कुछ अपडेट नहीं हुआ इसमें और उसको अगली तारीख दी गई है 17 तारीख जो कि हम लोग अपने ऑनलाइन इसमें देख रहा है तो हमको ऑनलाइन 17 तारीख इसमें दिखा रही है इसमें सुनवाई 17 को हुई है क्योंकि इसमें क्या है अभी जो तारीख दिखा रहा है इसमें है ऑनलाइन तो उसमें तारीख 17 तारीख दिखा इसमें है और आगे जो है इसमें आगे 17 तारीख को क्या फैसला आता है इसमें है उसका इंतजार उसमें है और हमें सुप्रीम कोर्ट में भरोसा सब हो रहा है तो सुप्रीम कोर्ट जो है इसमें हमें न्याय दिलाएगा संदार और राजा राजवंशी को जो है न्याय दिलाएगा शानदार क्योंकि सोनम जैसी लड़की जो है लंबे समय तक जमानत बाहर रहती है कभी है तो इसमें आगे होते जाएंगे क्योंकि सोनम को देखते हुए जो है सीए ने जो मर्डर करा है सीए ने भी उसकी WhatsApp चैट में जो दिखाई जा रहा है सोनम ने जो है सोनम को देखते हुए जो है सीए ने उसको पढ़ते हुए जो है आगे उसको करा था और सेम टू सेम वैसे ही जो है मर्डर अभी झारखंड में हुआ है। झारखंड में भी जो मर्डर हुआ है वो सोनम को पढ़ते हुए ही उसने मर्डर करा है क्योंकि सोनम को कहीं ना कहीं सोनम को उसमें उसका गुरु माना गया सोनम देखिए हमें तो इसमें सुप्रीम कोर्ट ऊपर भरोसा है सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसमें जो भी फैसला सुनाया जाएगा अंदर उसमें सोनम सिंह के लिए सख्त से सख्त कारवाई की जाएगी .

इस अंदर और दूसरी बात इसमें ये भी है तो शिवम में जो सुरेश राणा जी वकील साहब जो है उनके बिहाफ से मैंने कुछ गलत शब्दों का मुझे उनको लगा होगा उनको मैंने कुछ गलत शब्द उनके बारे में बोले कुछ कभी तो मैं उनसे अह सभा प्राप्त हूं। सोनम रघुवंशी पर मई 2025 में पूर्वी खासी हिल्स में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। सोनम को जून 2025 में गिरफ्तार किया गया और बाद में हत्या सहित कई अपराधों के लिए उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। फिलहाल मुकदमा चल रहा है। अप्रैल 2026 में पूर्वी खासी हिल स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोनम को जमानत दे दी थी। इसके बाद मेघालय सरकार ने उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। हालांकि 29 जून 2026 को मेघालय उच्च न्यायालय में जमानत देने के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद राज्य ने सोनम की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मेघालय सरकार की ओर से पेश होते ही सॉलसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि सोनम ने अपने पति की की साजिश रची थी।

उसने हनीमून के दौरान उसे मेघालय के एक सुनशान स्थान पर बुलाया। जहां कृतिक तौर पर उसके प्रेमी के माध्यम से भाड़े के तीन लोगों ने उसकी हत्या कर दी और फिर उसके शव को एक खाई में फेंक दिया। पिछले साल मई में राजा रघुवंशी के कत्ल के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम समेत कुल पांच लोगों के गिरफ्तार कर लिया था। इसमें तीन किराए के कातिल थे और एक सोनम का प्रेमी। बाद में मेघालय पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की और सोनम को अपने ही पति के कत्ल के इल्जाम में आरोपी नंबर वन बनाया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में मुकदमा शुरू हो गया है। मुकदमा शुरू होते ही सोनम ने श्रीलांग की निचली अदालत में जमानत की अर्जी लगा दी।

असल में 1 जुलाई 2024 से देश में अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा सीआरपीसी और आईपीसी में बड़े बदलाव करते हुए ना सिर्फ इनके नाम बदल दिए गए बल्कि बहुत सी धाराएं या तो हटा दी गई या फिर कई धाराओं को एक साथ जोड़ दी गई। अब आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोर्ट या भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता यानी कि बीएएनएस का जन्म हो चुका है। सोनम के केस में गलती यह हुई कि मेघालय पुलिस ने बीएएनएस की धारा 103 यानी मर्डर के केस की जगह 403 लिख दिया। अबकि बीएएनएस की धारा 358 पर आकर खत्म हो जाती है। तो जाहिर है कानून की किताब में 403 नंबर की धारा हो ही नहीं सकती।

बस इसी एक गलती को शिलांग की निचली अदालत ने पकड़ लिया। कोर्ट का कहना था कि जब धारा 403 है ही नहीं तो उन्हें कैसे पता चलेगा कि सोनम को किस जुर्म में पकड़ा गया है। यानी इस हिसाब से सोनम का भी उसका जुर्म पुलिस ने नहीं बताया होगा।

इसलिए निचली अदालत ने इसी साल 27 अप्रैल को सोनम को जमानत पर रिहा कर दिया। अब देखना होगा कि केस आगे क्या रुख लेता है। l

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