Cli

इस एक फिल्म की वजह से श्रीदेवी खो सकती थी आंखो की रोशनी, वजह जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

Uncategorized

कि की थीम पर ढेरों फिल्में बनी हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो था आप श्रीदेवी की ने छोड़ी है उसके लिए श्रीदेवी ने अपनी आंखों को दांव पर लगा दिया था अब यह तो फिल्मी पर्दे पर कई बार सांप और की कहानियां दर्शाई गई लेकिन यकीन मानिए आज भी अगर कहीं बच्चे सुनाई दे जाए तो 1986 में आई इस विधि भी कि फिल्म नगीना की याद आ जाती है ऐसा लगता है जैसे श्रीदेवी से बेहतर का किरदार आज तक किसी ने नहीं निभाया है फिल्मी पर्दे पर नागिन वाली कहानी को निर्माताओं ने कई बार भुनाया।

लेकिन श्रीदेवी का तोड़ आज तक कोई हसीना नहीं कर पाई फिर चाहे रीना राय की ही ले लीजिए किसी ने सोचा नहीं था कि श्रीदेवी रीना राय को भी पछाड़ जाएंगी को एक 1986 में आई ने असल में को बड़े पर्दे पर कैसे देखना है यह तय किया श्रीदेवी ने बताया कि जहर सिर्फ रघु में ही नहीं बल्कि आंखों में भी हो सकता है इस बात की चीख श्रीदेवी ने आने वाली हसीनाओं को दी जो परदे पर नागिन बनने की इच्छा रखते थे।

फिल्म का गाना मैं तेरी दुश्मन इतने दशक बाद भी इतनी मजबूती से अपनी पकड़ बनाए हुए हैं कि बार-बार अगर आप लूपर देखेंगे तो बोर नहीं होंगे में श्रीदेवी की फिल्म नगीना ने दर्शकों को तो मनोरंजन दिया ही साथ यह फिल्म श्रीदेवी के करियर की भी बेमिसाल फिल्म साबित हुई और इस फिल्म ने श्रीदेवी को रात और रात एक चमकता सितारा बना दिया।

इस फिल्म में श्रीदेवी की एक्टिंग ने उन पैमानों को छू लिया जिसका मुकाबला बाद में कोई हीरोइन कर ही नहीं पाई बिना कोई डायलॉग बोले सिर्फ आंखों से ऐसे डरावने क्वेश्चन देना आम बात नहीं थी मजे की बात तो यह है कि उस दौरान ना ही कोई भी फैक्ट चलते थे ना ही हरा पढ़ता था तब कुछ एक्टर ही हाथ में था अपनी बड़ी बड़ी आंखों को डरावना बनाने के लिए श्रीदेवी ने पहने थे यह।

उनकी आंखों पर इस कदर प्रभाव कर रहे थे कि ने उन्हें चेतावनी दी थी कि उनकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है लेकिन श्रीदेवी अपने काम में इतनी मशगूल रहिए कि अपने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।

दरअसल नागिन के किरदार को शत-प्रतिशत निभाने के लिए श्रीदेवी बार-बार अपनी आंखों में लेंस बदल रही थी लिहाजा डॉक्टरों ने उन्हें ऐसा ना करने की सलाह दी थी अ ने बताया जाता है कि श्रीदेवी की आंखों को सही सलामत रखने के लिए उनकी आंखों में बार-बार ड्रॉप डाली जाती थी अ हां यही तो वजह है कि आज भी जब भी कभी फिल्मी की बात होती है तो श्रीदेवी का चेहरा अचानक ही बहन में आ जाता है बड़ी-बड़ी आंखें हाथों में पंख फैलाए सफेद ड्रेस में श्रीदेवी की तस्वीर उभर आती है ।

क्या इसके अलावा किसी का चेहरा जहन में आता है जरा सोचिए आपको यह भी बता दें इस फिल्म में श्रीदेवी से पहले जयप्रदा को काश करने का इरादा बनाया गया था जब फिल्म निर्माता जयप्रदा के पास पहुंचे और इस फिल्म की कहानी सुनाई तो जयप्रदा सांपों के साथ करने वाले तीन में घबरा गई और उन्होंने झट से इस फिल्म को करने से मना कर दिया इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने श्रीदेवी के घर का रुख किया।

जिन दिनों फिल्म निर्माता श्रीदेवी के पास पहुंचे उन दिनों वह काफी बीमार चल रही थी वह बुखार में थी उन्होंने ऊपरी तौर पर कहानी को पढ़ा और हामी भर दी है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि इस फिल्म में श्रीदेवी को टॉप हीरोइन के कैटेगिरी में पहुंचा दिया था 1985 में श्रीदेवी ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात को कबूल किया था उन्होंने बताया था कि इस फिल्म ने मुझे उन हीरोइन के कैटेगिरी में पहुंचा दिया था।

जो अपने कंधों पर फिल्म चला सकती थी इतना ही नहीं यह फिल्म उनके करियर की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है इस फिल्म में उनके करियर को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था जहां पहुंचना उनके दौर की हीरोइनों का सपना था श्रीदेवी के परफॉर्मेंस की तारीफ तो इस फिल्म के जरिए ही बॉक्स ऑफिस पर भी नगीना ने झंडे गाड़ दिए थे।

इस साल 1986 में आई के बाद जैसे श्रीदेवी की गाड़ी पटरी पर दौड़ने लगी श्रीदेवी ने इस फिल्म के बाद बहुत सारी सुपरहिट फिल्में दीं जिनमें मिस्टर इंडिया थे सोने पर सुहागा चांदनी चाल बाद जुदाई आदि और सफल हीरोइनों की लिस्ट में अपना नाम सबसे ऊपर बनाने में कामयाब रहे आज श्रीदेवी भले ही हमारे बीच नहीं है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *