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झाडू-पोंछा मारने को मजबूर सुपरस्टार!पेट भरने के लिए गलियों में नाचता….नाम चौंका देगा

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सोचिए एक ऐसा एक्टर जिसने अपनी एक्टिंग के लिए देश का सबसे बड़ा फिल्म सम्मान जीता हो जिसके नाम के आगे नेशनल अवार्ड विनर का टैग जुड़ गया हो लेकिन उसी एक्टर के पास अगले दिन का खाना खाने तक के पैसे ना हो। जिस शख्स ने पर्दे पर लाखों लोगों को अपने डांस से दीवाना बनाया, उसे कभी सिर्फ इसलिए पार्टियों में बुलाया जाता था कि वो डांस करेगा और बदले में उसे रात का खाना दिया जाएगा।

और कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कभी सड़क किनारे रात गुजारनी पड़ी तो कभी फुटपाथ पर सोना पड़ा और कभी गार्डन में रात काटनी पड़ी। और एक वक्त ऐसा भी आया जब मुंबई में रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये कहानी किसी आम स्ट्रगलिंग एक्टर की नहीं है।

यह कहानी उस शख्स की है जिसे आगे चलकर बॉलीवुड का एक ऐसा सितारा बनना था जिसकी एक झलक के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ती थी। लेकिनउस मुकाम तक पहुंचने से पहले उसे वो सब सहना पड़ा जिसे सुनकर आज भी यकीन करना मुश्किल है। [संगीत] ऐसे में आपके मन में भी अब ये सवाल उठ रहा होगा कि ऐसा कौन सा सितारा है जिसकी जिंदगी में शोहरत आने से पहले इतनी सारी मुश्किलें आई। तो ये कहानी है बॉलीवुड के डिस्को डांसर और महागुरु कहे जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती की। जी हां, वही मिथुन जिनके डांस स्टेप्स ने 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड का अंदाज ही बदल दिया था। लेकिन मिथुन की असली कहानी उनकी कामयाबी से कहीं ज्यादा उनके संघर्ष की कहानी है।

मिथुन चक्रवर्ती ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और 1976 की फिल्म मृग्या में अपने काम से ऐसी छाप छोड़ दी कि उन्हें नेशनल फिल्म अवार्ड भी मिल गया। सुनने में लगता है कि इसके बाद तो उनका करियर सीधा आसमान छूने लगा होगा। लेकिन रियल लाइफ में ऐसा कुछ नहीं हुआ। नेशनल अवार्ड मिलने के बावजूद उनके पास कोई काम नहीं था।

यानी कि एक तरफ देश ने उनके काम को सम्मान दे दिया था। लेकिन दूसरी तरफ फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए काम के दरवाजे वैसे नहीं खुल सके जैसे कोई सोच सकता है। और यही वो दौर था जब उन्हें अपने पेट को भरने के लिए संघर्ष करना पड़ा। हाल ही में कोरियोग्राफर फरा खान के साथ YouTube ब्लॉग बातचीत में मिथुन के स्ट्रगल के कई किस्से सामने आए हैं। फरा खान ने बताया कि उनके परिवार से जुड़े लोगों की पार्टियों में मिथुन डांस करने आया करते थे। वहां उनसे डांस करवाया जाता था और बदले में उन्हें खाना मिल जाता था। यानी कि जिस डांस ने बाद में करोड़ों लोगों का उन्हें स्टार बनाया उसी डांस को कभी उन्होंने सिर्फ पेट भरने के लिए किया था। लेकिन मिथुन की मुश्किलें सिर्फ खाने तक ही सीमित नहीं थी। मिथुन ने खुद बताया कि उन्होंने सड़क पर भी रातें गुजारी हैं। कभी फुटपाथ पर सोए, कभी गार्डन में सोए और कई बार तो चलते-चलते इतनी थकान हो गई कि फुटपाथ पर ही उन्हें नींद आ जाती थी। सुबह आंख खुलती तो खुद को उसी फुटपाथ पर पाते थे। और शायद इसीलिए जब आज लोग स्ट्रगल शब्द बहुत आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं तो मिथुन की कहानी उसका एक अलग ही मतलब समझाती है।

उनका स्ट्रगल सिर्फ फिल्मों में काम पाने का स्ट्रगल नहीं था। यह स्ट्रगल था खुद को जिंदा रखने का। यहां तक कि उनके पास रहने के लिए एक घर भी नहीं था। फरा के इस वॉग में मिथुन के बेटों ने फरा खान को उनकी पुरानी येलो कार भी दिखाई और बताया कि उनके पापा की पहली कार थी। लेकिन वो कार सिर्फ एक कार नहीं थी। एक समय में वही उनकी छत थी। मिथुन के बेटे के मुताबिक नेशनल अवार्ड जीतने के बाद भी जब हाथ में काम नहीं था और मुंबई में रहने का कोई ठिकाना नहीं था, तब मिथुन ने करीब 15 दिन इसी कार में गुजारे थे। सोचिए जिस स्टार के नाम पर बाद में बड़े-बड़े बंगले और करोड़ों की संपत्ति जुड़ी, उसने कभी एक कार को ही अपना घर बनाया था। और यहां एक और दिलचस्प बात सामने आती है।

मिथुन ने अपने स्ट्रगल के दौर में एक जिम में सफाई का काम भी किया था ताकि उन्हें वहां बाथरूम यूज करने की फैसिलिटी मिल पाए। यानी कि जिस इंसान को बाद में लोग स्क्रीन पर सुपरस्टार के रूप में देखते थे, उसके पीछे एक ऐसा दौर भी था जब जिंदगी की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें समझौते करने पड़ते थे। [संगीत] लेकिन शायद यही सब उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाता है। धीरे-धीरे फिल्मों में काम मिलने लगा और फिर आया वो दौर जिसने मिथुन को पूरे देश का डांसिंग स्टार बना दिया। सुरक्षा फिर डिस्को डांसर, डांस डांस, प्यार झुकता नहीं जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को एक नई ऊंचाई दे दी।

जिस इंसान ने कभी खाने के लिए पार्टियों में डांस किया था, वही इंसान बाद में पर्दे पर डांस का ऐसा चेहरा बन गया कि देश भर के लोग उनके स्टेप्स को कॉपी करने लगे। मिथुन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सिर्फ स्टारडम नहीं है। इसमें वो दौर भी है जब सपने बहुत बड़े थे, लेकिन जेब पूरी तरह खाली थी। आज मिथुन का नाम इंडियन सिनेमा के बड़े दिग्गज स्टारों में लिया जाता है। लेकिन उनकी जिंदगी का यह हिस्सा याद दिलाता है कि पर्दे पर दिखाई देने वाली चमक के पीछे कभी-कभी ऐसी रातें छिपी होती हैं जिनके बारे में दुनिया को बहुत बाद में पता चलता है और शायद यही वजह है कि मिथुन की कहानी सिर्फ एक सुपरस्टार की कहानी नहीं है। बल्कि उस इंसान की कहानी है जिसने गिरने के बाद भी खुद को उठाया और फिर ऐसी ऊंचाई हासिल की जहां पहुंचने का सपना हर कलाकार देखता है।

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