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धर्मेंद्र ने बर्बाद किया राजेश खन्ना का करियर? खुला बड़ा राज़,सच चौंका देगा।

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राजेश खन्ना उस जमाने के बहुत बड़े सुपरस्टार थे। उन पर हर कोई फिदा था। इनका ओरा इतना ज्यादा नायाब था कि कोई भी महिला या कोई भी पुरुष जब इन्हें देखता तो बस देखता ही रह जाता। राजेश खन्ना जब किसी फिल्म में मुस्कुरा दिया करते थे तो उल्हास में भरे लोगों की सीटियां और तालियों की आवाज सिनेमा हॉल के बाहर तक सुनाई दिया करती थी। कहा जाता है कि राजेश खन्ना की सफेद कार जब किसी पार्किंग में खड़ी की जाती थी.

तो लड़कियां इतनी ज्यादा उत्साहित हो जाती थी कि वह उनकी उस सफेद कार को चूम कर लाल कर दिया करती थी। उस जमाने में राजेश खन्ना का एक उपनाम हुआ करता था। उन्हें प्यार से लोग काका कहा करते थे और उन्हें लेकर उस जमाने में एक स्लोगन भी चला करता था। यह स्लोगन था ऊपर आका नीचे काका। इस दर्जे को हासिल करने वाले वह भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाते हैं। 1973 तक तो राजेश खन्ना के स्टारडम को छूने वाला कोई पैदा ही नहीं हुआ था। लेकिन कहते हैं ना वक्त बदलने की चीज है।

हमेशा एक जैसा वक्त कभी नहीं रहता। वो दौर भी आया जब राजेश खन्ना की शोहरत अब कम होने लगी थी। और तो और अब एक ऐसा समय भी आ गया जब राजेश खन्ना का साम्राज्य पूरी तरह पतन की ओर चल पड़ा था। राजेश खन्ना उस ऊंचाई से इस कदर गिरे कि वह फिर दोबारा कभी वापस ही नहीं लौट पाए। जिस तरह राजेश खन्ना के शोहरत का कोई दूसरा एग्जांपल नहीं है, उसी तरह राजेश खन्ना के पतन का भी कोई दूसरा एग्जांपल देखने को नहीं मिलता।

1973 वह साल था, जब सब कुछ एकदम सही चल रहा था। राजेश खन्ना और किशोर कुमार की जोड़ी पूरे भारत में छाई हुई थी और हर जगह राजेश खन्ना की आवाज किशोर कुमार बना करते थे। राजेश खन्ना और किशोर कुमार ने लंबे समय तक एक छत्र राज किया था जैसा कि नियति का खेल होता है कि हर समय एक जैसा नहीं रहता। कुछ ऐसा ही साल 1973 में हुआ। जब राजेश खन्ना की गुफा में सेंध लगाने का मौका मिला एक उभरते हुए सितारे को जो कि उस जमाने के हैंडसम हंक बन गए। यह कोई और नहीं यह थे धर्मेंद्र। जवानी के दिनों में धर्मेंद्र बेहद खूबसूरत थे। उन्हें हैंडसम हंक और ही मैन कहा जाता था।

यह वक्त ऐसा था जब सिर्फ दो सुपरस्टार्स, दो अभिनेताओं का ही मुकाबला नहीं होने वाला था। बल्कि भारत के दो बेहद कामयाब सिंगर्स का गायकों का मुकाबला भी होने वाला था। यह मुकाबला उन दोनों के बीच आपस में नहीं था बल्कि यह ऑडियंस पर छोड़ा गया था कि इन दोनों में से कौन बाजी मारेगा और कौन अपनी बादशाहत फिर से कायम करेगा।

1969 में आई फिल्म आराधना इस कदर सुपरहिट हुई थी कि इस फिल्म में राजेश खन्ना और किशोर कुमार की जोड़ी ने मानो कमाल कर दिखाया था। इस फिल्म के बाद तो लोग राजेश खन्ना और किशोर कुमार को हमेशा एक साथ देखना और सुनना चाहने लगे थे। इस फिल्म के गाने मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू ने इतना बड़ा भूचाल ला दिया था कि इस फिल्म के बाद राजेश खन्ना और किशोर कुमार के बंगलों के सामने प्रोड्यूसर्स की लंबी-लंबी लाइन लगा करती थी। बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स, बड़े-बड़े डायरेक्टर्स इन दोनों को अपनी फिल्मों में एक साथ लेना चाहते थे।

और दूसरी तरफ शहंशाह तरन्नुम मोहम्मद रफी के करियर को मानो ब्रेक लग गया था। कोई भी प्रोड्यूसर डायरेक्टर मोहम्मद रफी से गाने नहीं गवाना चाह रहा था। हर कोई उस दौर में अपनी फिल्म में हीरो के तौर पर राजेश खन्ना को चाहता था और सिंगर के तौर पर किशोर कुमार को चाहता था। आराधना फिल्म के बाद तो मानो एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्मों की लाइन लग गई। इन फिल्मों में राजेश खन्ना और किशोर कुमार की जोड़ी ही देखने को मिलती थी। चाहे वो बंधन फिल्म हो, कटी पतंग फिल्म हो या फिर आन मिलो सजना, सच्चा झूठा, आनंद, दुश्मन, अमर प्रेम। इन सभी फिल्मों के बाद राजेश खन्ना का करियर इतना ज्यादा ऊंचा उठ चुका था कि वो उस दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए थे। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उस दौर में राजेश खन्ना का जो स्टारडम था उसे आज तक कोई भी छू नहीं पाया है। लेकिन फिल्म आनंद के समय पर एक बहुत बड़ी समस्या आ गई थी। दरअसल आनंद फिल्म पहले धर्मेंद्र करने वाले थे।

दरअसल बात यह थी कि एक बार ऋषिकेश मुखर्जी ने इस फिल्म की कहानी एक फ्लाइट के दौरान धर्मेंद्र को सुनाई थी। लेकिन बाद में जब उन्होंने इस फिल्म को बनाना शुरू किया तो उन्होंने इस फिल्म में राजेश खन्ना को ले लिया। इस बात से धर्मेंद्र काफी ज्यादा नाराज हो गए थे। हालांकि उसी दौर में वह ऋषिकेश मुखर्जी की एक और फिल्म सत्य काम में काम कर रहे थे और यह फिल्म भी धर्मेंद्र के जीवन की एक बेहतरीन फिल्म मानी जाती है। दरअसल ऋषिकेश मुखर्जी चाहते तो थे धर्मेंद्र को ही लेना। लेकिन जब सत्य काम में धर्मेंद्र उनके साथ काम कर रहे थे तो उन्होंने सोचा कि आनंद जैसी अलग तरह की फिल्म में अगर वह धर्मेंद्र को लेते हैं तो इससे धर्मेंद्र की एक्टिंग पर प्रभाव पड़ेगा। लेकिन कहा जाता है कि धर्मेंद्र ऋषिकेश मुखर्जी से इस कदर नाराज हो गए थे कि वह पूरी रात ऋषिकेश को फोन करते रहे और उनसे इस बात को लेकर झगड़ते रहे कि मेरी जगह इस फिल्म में तुमने राजेश खन्ना को क्यों ले लिया। बहुत समझाने के बाद धर्मेंद्र समझ तो गए और यह विवाद भी सुलझ गया।

लेकिन एक बात और जो बेहद खास है कि धर्मेंद्र के जीवन की दो और बेहतरीन फिल्में एक गुड्डी और चुपके-चुपके ऋषिकेश मुखर्जी ने ही धर्मेंद्र के साथ बनाई थी। लेकिन कहा जाता है कि धर्मेंद्र के मन में इस बात की खलिश जिंदगी भर रह गई कि आनंद जैसी कालजई फिल्म में वह क्यों नहीं रहे। खैर इसके बाद भी धर्मेंद्र ने राजेश खन्ना के साथ मुकाबला जारी रखा और बेहतरीन फिल्में करने की होड़ में लगे रहे। दूसरी तरफ रफी साहब को सिर्फ लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ही गाना गाने के लिए बुला रहे थे। इनके अलावा कोई और इन्हें नहीं बुला रहा था।

लेकिन रफी साहब इस समय पर भी बहुत ज्यादा शांत रहे। ऐसा नहीं है कि राजेश खन्ना की आवाज रफी साहब कभी नहीं बने। बहुत सारे ऐसे गीत हैं जो रफी साहब ने राजेश खन्ना के लिए गाए हैं। यह दौर ही कुछ ऐसा था जब राजेश खन्ना की आवाज किशोर कुमार बन चुके थे और इस दौर में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के अलावा मदन मोहन के इक्केदुक्के गाने ही रफी साहब को मिल पा रहे थे। कोई और उन्हें काम नहीं दे रहा था। सबको लग रहा था कि मोहम्मद रफी का करियर अब खत्म हो चुका है। अब बड़े-बड़े संगीतकार उन्हें लेजेंड्री सिंगर कह कर रिटायर कर चुके थे। लेकिन जनता को रफी साहब की आवाज सुननी थी। संगीतकार मनमानी कर रहे थे और पूरे देश में उस दौर में किशोर कुमार के ही गाने बज रहे थे। इधर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल सोच रहे थे कि कहीं आराधना की सफलता के बाद किशोर कुमार की आंधी में मोहम्मद रफी को सब भूल ना जाएं।

और इसी वजह से उन्होंने आराधना फिल्म के बाद साल 1980 तक मोहम्मद रफी से 200 से भी ज्यादा गाने गवाए। उन्होंने बहुत लंबे समय तक इंतजार किया और इस बात का इंतजार किया कि जब राजेश खन्ना और किशोर कुमार की यह आंधी रुकेगी तब मोहम्मद रफी का दौर फिर से शुरू होगा। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ ही मोहम्मद रफी के जीवन के सबसे ज्यादा गीत आए। इन्होंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी के साथ करीब 384 गीत गाए। लेकिन फिर अचानक एक दौर ऐसा भी आया जब राजेश खन्ना की एक फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इस फिल्म का नाम था.

दिल दौलत दुनिया। इस फिल्म के फ्लॉप होने के बाद किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतना बड़ा सुपरस्टार इतनी जोर से धड़ाम से गिरेगा। लेकिन इसके बाद फिर एक फिल्म आई जिसका नाम था बाबरची और इस फिल्म ने फिर से राजेश खन्ना को स्टारडम के शिखर पर पहुंचा दिया। लेकिन सच्चाई यह है कि लोग अब उनकी मैनरिज्म वाली एक्टिंग से उक्ताने लगे थे। पर राजेश खन्ना के साथ कुछ ऐसा भी हो सकता है। इसको लेकर लोग अभी भी तैयार नहीं थे और मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे। मेरे जीवन साथी शाहजादा और जोरू का गुलाम जैसी फिल्में जब फ्लॉप हुई तब जाकर लोगों को यकीन होना शुरू हुआ कि अब स्टारडम ढल चुका है।

जब राजेश खन्ना धुंधले पड़ने लगे। तब जाकर दूसरे स्टार्स चमकने लगे और अब तो राजेश खन्ना की मदद किशोर कुमार की आवाज भी नहीं कर पा रही थी। जहां साल 1973 राजेश खन्ना के लिए बहुत भारी समय था। उसी समय धर्मेंद्र की लगातार सात फिल्में सुपरहिट हुई थी। लोफर, ब्लैकमेल, जुगनू, यादों की बारात, झील के उस पार।

यह फिल्में उस दौर की धर्मेंद्र की खूब ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में बन गई। जहां इन फिल्मों के बाद धर्मेंद्र सुपरस्टार की कुर्सी के नजदीक आ गए थे। तो वहीं राजेश खन्ना का सिंहासन अब डोलने लगा था। धर्मेंद्र की इन फिल्मों में रफी साहब की आवाज काम में ली गई थी और वह सफल रही थी। हालांकि राजेश खन्ना की आवाज बन चुके किशोर कुमार ने भी धर्मेंद्र के लिए गाने गाए और गलती यहीं पर हो गई। धर्मेंद्र की फिल्मों में लोग किशोर कुमार और रफी साहब दोनों के गाने सुन पा रहे थे और एक हीरो के तौर पर धर्मेंद्र को काफी ज्यादा पसंद भी किया जा रहा था।

धर्मेंद्र नई तरह की फिल्में कर रहे थे। तो वहीं राजेश खन्ना उसी पुराने ढर्रे पर चलते चले जा रहे थे और ऐसे में नयापन ना पाकर राजेश खन्ना से दर्शक धीरे-धीरे छिटकने लगे। 1973 में राजेश खन्ना के करियर पर सबसे बड़ा घाव लगाया धर्मेंद्र और मोहम्मद रफी की जोड़ी ने। मोहम्मद रफी का गाया और धर्मेंद्र पर फिल्माया एक गीत आया जिसका नाम था आज मौसम बड़ा बेईमान है। यह फिल्म इतनी ज्यादा हिट हुई और इसका यह गाना खासकर बहुत ज्यादा हिट रहा और इसके बाद काका के करियर का मौसम धड़ाम से नीचे गिर गया और धर्मेंद्र और रफी की जोड़ी कमाल कर गई। धर्मेंद्र के जीवन का मौसम खुशगवार हो गया और काका के करियर में पतझड़ आ गया। इधर यह सब कुछ हो ही रहा था कि इसी बीच अमिताभ बच्चन नाम का एक स्टार ऐसा उभरा कि वह राजेश खन्ना को पूरी तरह से मटिया मेट कर गया जो भी हुआ हो लेकिन यह बात भी पूरी तरह सच है कि राजेश खन्ना जैसा स्टारडम उसके बाद किसी ने नहीं देखा और यह बात भी हमेशा सच रही कि ऊपर आका नीचे काका धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन भी राजेश खन्ना के उस स्टारडम को कभी रिप्लेस नहीं कर पाए।

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