यार इमेजिन करो 1995 दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे रिलीज होती है लेकिन राज का रोल एसआरके नहीं कर रहा। कोई और है काजोल वही है सिमरन वही है। लेकिन राज अलग इंसान है। क्या वो फिल्म वही आइकॉनिक होती? क्या पलट-पलट वाला सीन सेम फील करता? क्या मराठा मंदिर में आज भी चलती? शायद नहीं यार। लेकिन यह ऑलमोस्ट हुआ था। एसआरके ने चार बार मना किया था। चार बार टॉम क्रूस को कंसीडर किया गया था। सैफ अली खान के पास ऑफर गया था। सलमान का नाम था और एसआरके वो बार-बार एक ही बात कह रहे थे। मैं रोमांटिक हीरो नहीं बनूंगा। आदित्य चोपड़ा तीन हफ्ते तक उनसे मिलने जाते रहे। रोज समझाया रोज रिक्वेस्ट की।
एसआरके नहीं माने और फिर एक रात यश चोपड़ा खुद एसआरके के घर गए। अकेले बिना किसी टीम के, बिना किसी स्क्रिप्ट के बस एक बात कहने के लिए और उस रात के बाद एसआरके ने हां कह दिया। वो लाइन क्या थी? वो रात क्या थी? और यश चोपड़ा और एसआरके के बीच ऐसा क्या हुआ कि तीन हफ्तों की मीटिंग्स में जो नहीं हुआ वो एक झटके में हो [संगीत] गया। आज वही कहानी मैं तुम्हें सुनाने वाली हूं। तुझे देखा तो ये सनम पहले समझो 1984 में एसआरके कहां थे? यह कॉन्टेक्स्ट बहुत जरूरी है। [संगीत] 1984 में एसआरके बॉलीवुड का विलेन किंग था। बाजीगर में उसने अपनी गर्लफ्रेंड को बिल्डिंग से धकेल दिया था। डर में एक ऑब्सेसिव साइको लवर बना था और पूरा इंडिया उनसे डर भी रहा था और प्यार भी कर रहा था। एसआरके ने खुद डीडीएलजे की मेकिंग डॉक्यूमेंट्री में कहा है कि मैं कभी रोमांटिक रोल नहीं करना चाहता था। मैं जब तक फिल्म में आया मैं 26 साल का था। रोमांटिक फिल्म्स का मतलब है
कॉलेज से शुरू करो, प्यार करो, लड़की के साथ भागो, सुसाइड करो। मुझे लगता था कि मैं इसके लिए बहुत बड़ा हो चुका हूं। है ना? यार सोचो एक एक्टर जो बाजीगर और डर्ब की डार्क इंटेंसी से सुपरस्टार बना था उसके लिए रोमांटिक हीरो बनना क्या आसान था या उसके लिए यह वीकनेस थी। एसआरके को लगता था कि अगर रोमांटिक हीरो वाला रोल किया तो उनकी वो डेंजरस अनप्रिडिक्टेबल इमेज खत्म हो जाएगी। ऑडियंस [संगीत] मुझे सीरियसली नहीं लेगी और उसी डर में उन्होंने चार बार ना कहा। आदित्य चोपड़ा की वो तीन हफ्तों की कोशिश। आदित्य चोपड़ा उस वक्त एक फर्स्ट टाइम डायरेक्टर थे। यह उनकी पहली फिल्म थी और उनके दिमाग में एक विजन था। एक एनआरआई लड़का, एक इंडियन लड़की, यूरोप की खूबसूरत लोकेशनेशंस और एक लव स्टोरी जो पूरी दुनिया याद रखे। उन्होंने एसआरके से मिलना शुरू किया। एकद बार बात हुई, मना किया। तीन हफ्तों तक लगातार बात होती रही। एसआरके मना करते रहे। आदित्य ने हर एंगल से समझाया यह रोल तुम्हारी इमेज बदलेगा। यह फिल्म कुछ अलग है। एक बार स्क्रिप्ट पढ़ो। एसआरके नहीं माने। और एक पॉइंट पर
आदित्य चोपड़ा ने लगभग हार मान ली। उन्होंने सैफ अली खान को कंसीडर करना शुरू कर दिया। और फिर कुछ हुआ। आदित्य चोपड़ा ने अपने पापा को बताया यश चोपड़ा को वो [संगीत] रात जब आदित्य चोपड़ा खुद वहां गए यहां एक और बात समझनी पड़ेगी। यश चोपड़ा उस वक्त बॉलीवुड के सबसे बड़े डायरेक्टर्स में से एक थे। दीवार कभी-कभी सिलसिला, चांदनी, डर यह सब उनकी फिल्म्स थी और एसआरके एसआर के डर में काम कर चुके थे। यश चोपड़ा के साथ उनके बीच फादर सन जैसा रिश्ता था। यश चोपड़ा को पता था कि आदित्य चोपड़ा की मीटिंग्स काम नहीं कर रही तो वह खुद गए। कोई बड़ी मीटिंग नहीं, कोई प्रेजेंटेशन नहीं, कोई टीम नहीं। बस यश चोपड़ा और एसआर के और वहां यश चोपड़ा ने एक बात कही तुम्हें रोमांटिक रोल्स लेने होंगे अगर इस इंडस्ट्री में सर्वाइव करना है बस इतना वो लाइन धमकी थी प्यार था यही सबसे इंटरेस्टिंग सवाल है यह लाइन सुनो फिर से तुम्हें रोमांटिक रोल्स लेने होंगे अगर इस इंडस्ट्री में सर्वाइव [संगीत] करना है एक एंगल देखो यह धमकी है एक बड़े डायरेक्टर की वार्निंग है अगर मेरी बात नहीं मानी तो खत्म हो जाओगे दूसरे एंगल से देखो यह एक बाप का अपने बेटे को एडवाइस देना है जो उसके करियर की सच्चाई को बता रहा है जो
उसे ट्रुथ बोल रहा है जो कोई नहीं बोलता। यश चोपड़ा जानते थे कि एसआरके में क्या है। उन्होंने डर में देखा था। उन्होंने उसकी आंखों में सॉफ्टनेस देखी थी जो विलेन के किरदार में छुपी थी। उन्हें पता था अगर यह लड़का सिर्फ विलंस के रोल करता रहा तो एक दिन ऑडियंस बोर हो जाएगी। लेकिन अगर यह रोमांटिक हीरो बन गया तो कुछ और हो सकता है। एसआरके ने हां क्यों कहा? खैर तीन हफ्तों की मीटिंग्स में आदित्य चोपड़ा नहीं मना पाए। लेकिन यश चोपड़ा ने एक ही रात में वो काम कर दिया। क्यों? क्योंकि आदित्य चोपड़ा एक डायरेक्टर थे जो एक एक्टर को कन्विंस करने के लिए गए थे। लेकिन यश चोपड़ा एक ऐसे इंसान थे जिन पर एसआरके को ब्लाइंडली ट्रस्ट था। एसआरके के पापा का जल्दी इंतकाल हो गया था। दिल्ली से मुंबई आए थे अकेले। कोई गॉड फादर नहीं था। कोई बैक किंग नहीं थी। यश चोपड़ा उन लोगों में से थे जिन्होंने एसआरके को जेनुइनली बिलीव किया था। डर में विलेन का रोल दिया था और वह भी तब जब कोई हीरो विलेन नहीं बनता था। तो यश चोपड़ा ने कहा रोमांटिक रोल्स लो। एसआरके को लगा कि यह करियर एडवाइस नहीं है। यह उस इंसान की बात है जो उसे जेन्युइनली जानता है। जो उसके पोटेंशियल को जानता है। और उस रात एसआरके ने हां कह दिया और हां का बटरफ्लाई इफेक्ट देखो यार। उस एक रात के बाद क्या हुआ? वो बॉलीवुड की हिस्ट्री बन गए। 20 अक्टूबर 1995 डीएल रिलीज होती है।
पलट-पलट पलट और सरसों के खेत बड़े-बड़े देशों में छोटी-छोटी बातें होती रहती है। सनी रेटा मराठा मंदिर में वह फिल्म चलना हजारों तक 1000 हफ्ते। एसआर के रोमांटिक हीरो बने और विलन इमेज वो गई नहीं बल्कि उसमें एक नया डायमेंशन ऐड हो गया। कुछ-कुछ होता है मोहब्बतें कभी खुशी कभी गम कल हो ना हो एक के बाद एक सब यश चोपड़ा की उस रात की वजह से और आदित्य चोपड़ा उनकी पहली फिल्म इतनी बड़ी सुपरहिट हुई। आज उनका नाम बॉलीवुड के सबसे बड़े डायरेक्टर्स में से गिना जाता है। खाजोल एसआरके के साथ उनकी जोड़ी सबसे आइकॉनिक जोड़ी बनी और टॉम क्रूस वो राज बनते बनते रह गए। शुक्रिया यश चोपड़ा ने मना कर दिया। यार इस पूरी कहानी में मुझे एक बात सबसे ज्यादा हेट करती है। तीन हफ्ते रोज मीटिंग्स, हर एंगल से कन्विंस करने की कोशिश कुछ नहीं हुआ। एक रात, एक लाइन और सब कुछ हो गया। क्योंकि कन्विंस करने वाला और ट्रस्ट करने वाले दो अलग-अलग इंसान थे। आदित्य चोपड़ा एक डायरेक्टर थे जो एसआरके को एक रोल के लिए चाहते थे। यश चोपड़ा एक ऐसे इंसान थे जिन पर एसआरके का पूरा यकीन था। और उनकी जिंदगी में जब कोई ऐसा इंसान उन्हें ब्लाइंडली ट्रस्ट करता है और वो उनसे कुछ कहने आता है तो एसआर के मान जाते हैं। यह उनके मानने की वजह से हमें राज मिला है ना? तो दोस्तों एक सवाल तुम्हारे लिए क्या तुम्हारी जिंदगी में कोई ऐसा इंसान है जिसकी बात तुम बिना सोचे समझे मान लेते हो? कमेंट में जरूर बताना। सुहानी तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलेगी। तब तक के लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लो। वीडियो को लाइक और शेयर कर लो और प्लीज बेल आइकॉन दबाना मत भूलना।