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कैप्टन स्मित को कैसे मिली मच्छर सरनेम?जानकर चौंक जाएंगे

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34,000 फीट की ऊंचाई पर आसमान में खौफनाक साजिश रची जाती है। कॉकपिट के भीतर अचानक हमला होता है। फ्लाइट तेजी से नीचे की तरफ गिरती है। मौत बेहद करीब खड़ी होती है। लेकिन उस भयानक घड़ी में लहूलुहान हालत में भी एक भारतीय कैप्टन मौत के सामने ढाल] बनकर खड़ा हो जाता है और 170 से ज्यादा मासूम जिंदगियों को बचा लेता है। हम बात कर रहे हैं फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मिथ मच्छर की। जैसे ही कैप्टन स्मिथ की बहादुरी की खबरें पूरी दुनिया की मीडिया की सुर्खियों में छाई वैसे ही लोगों के मन में गहरा और दिलचस्प सवाल कौंध गयामच्छर?

जी हां, आपने सही सुना। एक तरफ जहां कैप्टन स्मिथ ने शेर जैसी बहादुरी दिखाई वहीं दूसरी तरफ उनके नाम के आगे जुड़ा उपनाम मच्छर सोशल मीडिया पर भारी जिज्ञासा का केंद्र बन गया। लोग पूछने लगे कि इतना वीर योद्धा इतनी हिम्मत दिखाने वाला जांबाजलऔर सरनेम मच्छर यह सरनेम आया कहां से?

इसके पीछे का ऐतिहासिक सच क्या है? आज हम इस एक उपनाम के बहाने आपको ले चलेंगे गुजरात कीसांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा पर। आपको बताएंगे कि गुजरात की नामकरण परंपराएं कितनी समृद्ध, अनोखी और दिलचस्प रही हैं। दर्शकों कैप्टन स्मिथ मच्छर के इस उपनाम की परतें तब खुलनी शुरू हुई जब वरिष्ठ गुजराती पत्रकार शीलाभट्ट ने इस पर एक बेहद दिलचस्प और ज्ञानवर्धक पोस्ट किया।

शीला भट्ट ने जब कैप्टन स्मिथ के परिवार को दशकों से जानने वाले मुंबई नगर निगम के एक पूर्व सदस्य और भाजपा के गुजराती सेल के पूर्व प्रमुख से बात की तो एक बहुत बड़ा और प्रमाणिक सच सामने आया। उन्होंने बताया कैप्टन स्मिथ मच्छर गुजराती ब्रह्म क्षत्रिय समुदाय से आते हैं। अब आप पूछेंगे कि यह ब्रह्म क्षत्रिय समुदाय है क्या? दरअसल यह ब्रह्म क्षत्रिय समुदाय की हलारी शाखा है। इस समुदाय के बारे में कहा जाता है कि इनके पास नागर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का एक अनूठा और ऐतिहासिक मिश्रण है।

यानी एक तरफ ब्राह्मणों का ज्ञान और विद्या तो दूसरी तरफ क्षत्रियों का पराक्रम और युद्ध कौशल। और कैप्टन स्मिथ ने कॉकपिट के भीतर जो पराक्रम दिखाया उससे साबित कर दिया कि उनके खून में वही क्षत्रिय वीरता बह रही है। लेकिन असली मोड़ तब आता है जब हम गुजरात में सरनेम यानी उपनामों की अचरज भरी दुनिया में कदम रखते हैं। गुजराती संस्कृति की यही तो खूबसूरती है। अगर आप गुजरात के सामाजिक ताने-बानेको करीब से देखें तो वहां आपके ऐसे-ऐसे उपनाम यानी सरनेम्स मिलेंगे जो पहली बार सुनने में किसी को भी हैरान कर सकते हैं।

गुजरात में आपको ऐसे परिवार मिल जाएंगे जिनके सरनेम होते हैं हाथी, घोड़ा, मंकड़ यानी खटमल, पोपट यानी तोता और इसी कड़ी में एक स्थापित और ऐतिहासिक सरनेम है मच्छर। चौकिए मत। गुजराती समाज में मच्छर कोई हास्यास्पद नाम नहीं है बल्कि एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक उपनाम है। यह उपनाम केवल ब्रह्म क्षत्रिय समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि ये नागर ब्राह्मणों और लोहना समुदाय में भी बहुतायत हिस्से पाया जाता है। लोहना समुदाय जो ऐतिहासिक रूप से सिंध और कश्य इलाके से ताल्लुक रखनेवाला एक बेहद समृद्ध व्यापारी वर्ग रहा है। अब सवाल यह उठता है किसी परिवार का वंश का सरनेम मच्छर या पोपट कैसे पड़ गया? इसके पीछे की साइंस क्या है? इसके पीछे का इतिहास क्या कहता है? इस गु्थे को सुलझाने के लिए हमें इतिहास के पन्ने पलटने होंगे।

साल 1942 में गुजरात की जानीमानी साहित्यकार और शोधकर्ता प्रोफेसर विनोदिनी नीलकंठ ने एक लैंडमार्क किताब लिखी थी। गुजराती अटकनों इतिहास यानी गुजराती उपनामों का इतिहास। प्रोफेसर नीलकंठ ने अपनी इस किताब में हास्यव्यंग या किसी इंसान की खास शारीरिक व मानसिक विशेषताओं से उत्पन्न होने वाले उपनामों पर पूरा का पूरा एक समर्पितखंड लिखा है।

उन्होंने समझाया कि गुजरात के पुराने समाज में किसी व्यक्ति की कोई खास आदत, उसकी शारीरिक बनावट या उसकी बोलचाल की शैली के आधार पर लोग उसे प्यार से या व्यंग में कोई नाम दे देते थे। और वही व्यक्तिगत पहचान पीढ़ियों के गुजरने के साथ-साथ उस पूरे परिवार का स्थाई उपनाम यानी सरनेम बन जाती थी। अब कैप्टन स्मिथ के उपनाम मच्छर की सटीक उत्पत्ति को लेकर दो बेहद मजबूत सिद्धांत यानी थ्योरीज सामने आते हैं। पहला सिद्धांत प्रोफेसर विनोदिनी नीलकंठ का मानना है कि मच्छर शब्द दरअसल संस्कृत के मत्सर शब्द से निकला है। संस्कृत में मत्सर का अर्थ होता है जलन, ईर्ष्या या फिर किसी बात पर अड़ जाने की तीव्र लगन। समय बीतने के साथ सदियों के दौरान जब भाषा बोली के स्तर पर बदली तो प्राकृत और गुजराती उच्चारण में यही मत्सर धीरे-धीरे घिसकर और बदलकर मच्छर बन गया। दूसरा सिद्धांत। वहीं दूसरी तरफ लोक परंपरा यह भी मानती है कि हो सकता है सदियों पहले इस वंश के किसी पूर्वज का स्वभाव बेहदतीखा, फुर्तीला या ऐसा रहा हो जो किसी काम के पीछे हाथ धोकर पड़ जाता हो।

जैसे मच्छर अपनी बात पर डटा रहता है और वहीं तीखापन या फुर्ती बाद में इस परिवार की पहचान बन गई हो। पत्रकार शीला भट्ट ने अपनी पोस्ट में नागर और ब्रह्म क्षत्रिय समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को भी बहुत ही खूबसूरती से रेखांकित किया है। नागर ब्राह्मण समुदाय को गुजरात के इतिहास में एक अत्यंत शिक्षित विद्वान और प्रशासनिक रूप से निपुण समुदाय माना जाता रहा है। पुराने जमाने में राजा महाराजाओं के दरबार से लेकर आधुनिक प्रशासन और विद्या के क्षेत्रों तक इस समुदाय का गहरा प्रभाव रहा है। और अगर इस समुदाय के सबसे महान और पूजनीय प्रतीक की बात करें तो वो नाम है 15वीं सदी के महान गुजराती भक्त कवि नरसिंह मेहता का।

जी हां वही नरसिंह मेहता जिन्होंने वैष्णव जन तो ते ने कहिए जे पीड़ा पराई जाने रे जैसा अमर भजन रचा जिसे महात्मा गांधी अपना जीवन मंत्र मानते थे। सोचिए जिस गुजरात की धरती ने नरसिंह मेहता जैसे संत दिए जिस गुजरात ने कबीर और कृष्ण की भक्ति में लीन समाज दिया उसी सांस्कृतिक विरासत से यह अनोखी नामकरण परंपरा निकल कर आती है। जहां सरनेम भले ही प्रकृति जीव-जंतुओं या व्यंग से जुड़े हो लेकिन उनके पीछे छिपा इतिहास और ज्ञान बेहद समृद्ध है। तो दर्शकों आज आप कैप्टन स्मिथ मच्छर का नाम सुनते हैं तो आपको उस नाम के पीछे सिर्फ एक शब्द नहीं देखना चाहिए। उस नाम के पीछे छुपा है गुजरात की सदियों पुरानी सांस्कृतिकऔर सामाजिक विरासत। नामकरण की वह अनूठी परंपरा जो इंसान के स्वभाव और प्रकृति को सम्मान देती है और सबसे बढ़कर एकभारतीय जांबाज का वो बुलंद हौसला जिसने आसमान में भारत का सर गर्व से ऊंचा कर दिया। कॉकपिट में हमलावर के सामने खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मिथ मच्छर ने जो सूझबूझ और हिम्मत दिखाई उसने साबित कर दिया कि नाममें चाहे जो लिखा हो इंसान के कर्म ही उसकी असली पहचान बनाते हैं। गुजरात सरकार ने कैप्टन स्मिथ को विशिष्ट गुजरात गरिमा अवार्ड से सम्मानित करने का ऐलान कर दिया है और आज पूरा देश एक सुर में कह रहा है कि कैप्टन स्मिथ मच्छर हमें आपकी बहादुरी पर गर्व है।

फिलहाल स्मिथ के साले ने बहुत बड़ा बयान दिया है उनको लेकर। क्या कुछ कहा है यह आपको सुनवाते हैं। हमें तो जैसे न्यूज़ नोटिफिकेशन आया और उसी से पता चला कि ऐसेसे हुआ है। फिर बाय इवनिंग जब कॉल हुआ हमारा वहां पे दुबई कॉल किया मेरी बहन को तब पता चला कि ऐसे-ऐसे इंसिडेंट हो गया है। एंड जैसे-जैसे फिर थिंग्स प्रोसेस हुआ इंफॉर्मेशन और आती गई उनके हेल्थ के बारे में जब पता चला कि ही इज़ फाइन स्टेबल। नरेंद्र मोदी सर ने भी उनको कॉल किया तो बहुत रिअशोरेंस और बहुत अच्छा लगा वह चीज से भी एंड वी आर वेरी हैप्पी हाउ थिंग्स हैव टर्न आउट एंड वी जस्ट हम बस विश करते हैं कि उनको अच्छे से उनका ट्रीटमेंट हो जाए और वो जल्द घर वापस आ जाए।

उनके नेचर के बारे में थोड़ा सा जानना चाहेंगे। कैसा उनका रोया रहा है जब घर में रहते हैं उनका नेचर आपने देख लिया जो उन्होंने किया है उनका नेचर ऐसा ही है हम उनको बरसों से जानते हैं और ऐसे ही उन्होंने उनका ऐसे ही रहते हैं वो एकदम ही ब्रेव एकदम ही ऑनेस्ट और अपना जो प्रायोरिटी है वो हमेशा उन्होंने अपना वर्क प्रायोरिटी रखा है और प्रोटोकॉल्स को बहुत ज्यादा फॉलो करते हैं और उसी के वजह से आज हम देख रहे हैं कि उन्होंने जो चीज करके दिखाया प्रोटोकॉल को फॉलो करके सब चीज करके मेक श्योर किया कि लैंडिंग सेफली हो जाए और कोई भी प्रॉब्लम ना आए। घर में बातें होती है जो चीजें हुई है होती तो होंगी कि किस तरह का कुछ यादें भी उसमें आ जाती है बाद में कि भाई साहब ने हमारे साथ हम एक्चुअली यस यस ऑफ कोर्स वो मन में होती रहती है पर बातचीत के वक्त बस वही डिस्कस हो रहा होता है कि अपडेट्स क्या है? हेल्थ अपडेट्स क्या है?

किससे क्या कोऑर्डिनेशन हुआ है? लास्ट हेल्थ अपडेट क्या आया हुआ है? बाकी भी जो कोऑर्डिनेशन करने हैं, फैमिली मेंबर्स जो कॉल कर रहे हैं, उनको सब इंफॉर्मेशन देना कि उनकी तबीयत कैसी है और बस यही सब चीज चल रही है। हम भी प्रोसेस कर रहे हैं वन थिंग एट अ टाइम। और कोई टीम है दुबई में जिनसे कोऑर्डिनेशन चल रहा है या जो आप कह रहे हैं कि समय-समय की अपडेट कैसे? हमारे कोई ऐसी टीम तो नहीं है बट हमारी जो मेरी सिस्टर है उन्हीं से हम कॉल करते हैं। दिन में एक दो बार जब बात होती है तब उसी टाइम अपडेट आ जाती है कि सब ठीक है। सब सही है। बस उन्हीं से हम अपडेट ले रहे हैं अभी फिलहाल। अब इंतजार है कि मतलब भारत आए, घर आए। अब इंतजार तो पूरे भारत को है कि वो घर आए और हम उनको उनका जो भी उनको एक सेरेमनी करें और उनको ग्रैंड वेलकम करें। उस तरीके से कि लगे कि कोई हीरो आया है वापस अपने वतन। एक आखरी सवाल देश ने देखा है कि क्या कुछ हुआ। सिर्फ हमारे पीएम नहीं बल्कि इजराइल के पीएम भी जो है उनकी तारीफ करते नजर आ रहे हैं। जी तो उनका जो नेचर था आप लोग उनके साथ रहते हैं।

उनके साथ घूमे फिरे हैं। कुछ मैसेज होगा जो उन तक आप पहुंचाना चाहे जो आज तक नहीं भूल पाए होंगे जो उन्होंने कर दिखाया अपनी तरफ से। कि स्मिथ जी को आई थिंक हम तो अपने साइड से उन्हें हमें हम बातचीत चलती रहती है और वी आर वेरी प्राउड ऑफ व्हाटएवर ही हैज़ डन जो उन्होंने करके दिखाया है बहुत ही कम विंडो था बहुत ही शॉर्ट टाइम था उनके पास और उस टाइम में जो करके दिखाया और अगर मैं कहना चाहूंगा कि अगर और कोई भी होता तो शायद ये चीज नहीं कर पाता जो उन्होंने किया है। बिकॉज़ हम उनको पहचानते हैं उनका जो जिस प्रकार का नेचर है और जिस प्रकार से वो प्रोटोकॉल फॉलो करते हैं एंड उसी के वजह से आज ये चीज हो पाई है और मुमकिन है और उन्हें सलाम है उन्होंने जो चीज करके दिखाया है उसका अगर प्रोबेबिलिटी निकालने जाते हैं तो आई थिंक प्रोबेबिलिटी भी नहीं आएगा कि जो हिसाब से जो चीज जो इवेंट टर्न आउट हुआ एंड उनका जो सक्सेस होना तो बस यही बात है। बाकी तो पूरी दुनिया ने देख लिया है जो चीज़ जो घटना घटी है और जो जिस तरीके से फिर सब चीज़ ठीक हो गई है। इट्स इट्स जस्ट अ मिरेकल। ये एग्जांपल सेट हुआ है औरों के लिए क्योंकि ऐसी मुसीबत की घड़ी में कई लोग होते हैं जैसे आपने कहा कि करना मुश्किल हो जाता है।

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