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राजेश खन्ना की मूवी को देखकर अमेरिका छोड़ कर मुंबई आके बना बॉलीवुड का मशहूर विलन?

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एक ऐसा गोरा चिट्टा विदेशी शख्स जो जब भी पर्दे पर आता था तो लोग उसे अंग्रेज समझते थे। लेकिन जैसे ही वह अपनी जुबान खोलता था तो शुद्ध हिंदी और मखमली उर्दू सुनकर बड़े-बड़े दिग्गज पानी भरने लगते थे। नीला रंग कोरी त्वचा लेकिन दिल पूरी तरह से हिंदुस्तानी। आज हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के सबसे अनोखे अभिनेता टॉम ऑल्टर की। इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा क्योंकि आज आपको टॉम साहब के जीवन के वह पन्ने जानने को मिलेंगे जो आपने कभी नहीं सुने होंगे। वीडियो के अंत तक बने रहने के लिए आपको इन चार सवालों के जवाब खुद में तलाशने होंगे। पहला सवाल एक खालिस अमेरिकी परिवार में जन्मे इस लड़के को आखिर उर्दू शायरी और गालिब से मोहब्बत कैसे हुई? राजेश खन्ना की वह कौन सी फिल्म थी जिसे देखने के बाद एक आम टीचर रातोंरात सब कुछ छोड़कर अभिनेता बनने के लिए मुंबई भाग आया। खेल पत्रकार के रूप में टॉम ऑल्टर ने दुनिया के किस सबसे महान क्रिकेटर का पहला वीडियो इंटरव्यू लिया था। जब वह सिर्फ 15 साल का बच्चा था। मुंबई की चकाचौंध में रहने वाले टॉम ऑल्टर ने अपनी जिंदगी के आखिरी दिन कहां बिताए? और आज भी उनका वह ऐतिहासिक घर किस रहस्य को समेटे हुए है? इन सभी सवालों के जवाब आपको इसी वीडियो में आगे मिलने वाले हैं। टॉम ऑल्टर का जन्म 22 जून 1950 को पहाड़ों की रानी मसूरी में हुआ था। उनका पूरा नाम थॉमस बीच ऑल्टर था। उनके दादा-दादी साल 1916 में अमेरिका के ओहायो से भारत आए थे। वे ईसाई मिशनरी थे और उन्होंने भारत को ही अपना घर बना लिया। टॉम के पिता का जन्म सियालकोट में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और मसूरी में बस गया।

टॉम का बचपन मसूरी की हसीन वादियों और देवदार के पेड़ों के बीच बीता। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मसूरी के मशहूर वुड स्टॉक स्कूल से की। घर में भले ही अमेरिकी माहौल था लेकिन घर के बाहर की दुनिया पूरी तरह हिंदुस्तानी थी। टॉम बचपन में स्थानीय बच्चों के साथ हिंदी और उर्दू में बातें करते हुए पड़े हुए। यही वजह थी कि उन्हें बचपन से ही भारत की मिट्टी और यहां की भाषाओं से गहरा लगाव हो गया था। टॉम के पिता एक पादरी थे और वे चाहते थे कि टॉम भी इसी राह पर चलें। पढ़ाई में बेहद तेज टॉम को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा गया। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। भारत की यादें उन्हें लगातार सता रही थी। वे सिर्फ डेढ़ साल में ही अमेरिका की पढ़ाई अधूरी छोड़कर भारत वापस लौट आए। उन्हें समझ आ गया था कि उनका वजूद और उनकी आत्मा सिर्फ भारत में ही बसती है। भारत लौटने के बाद टॉम ने हरियाणा के जगाधरी में स्थित सेंट थॉमस स्कूल में एक शिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया। वे वहां बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते थे और साथ ही खेलकूद के कोच भी थे। जिंदगी बेहद शांत और सामान्य चल रही थी। लेकिन साल 1970 में एक ऐसी घटना घटी जिसने टॉम की जिंदगी का रुख हमेशा के लिए मोड़ दिया। टॉम ने सिनेमाघर में जाकर सुपरस्टार राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की फिल्म आराधना देखी। फिल्म आराधना का टॉम के दिमाग पर ऐसा जादू चला कि उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें अब सिर्फ और सिर्फ अभिनेता बनना है। राजेश खन्ना की अदाकारी और फिल्म के गानों ने उन्हें दीवाना बना दिया था। एक गोरे अमेरिकी मूल के लड़के का भारतीय सिनेमा में अभिनेता बनने का सपना देखना उस दौर में पागलपन जैसा था। लेकिन टॉम के इरादे फौलादी थे। उन्होंने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़ दी और अभिनय सीखने का फैसला किया। साल 1972 में टॉम ऑल्टर ने पुणे के प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टट्यूट ओन ऑफ इंडिया एफडीआईआई में दाखिला ले लिया टॉम ऑल्टर। वहां उन्होंने 2 साल तक अभिनय की बारीकियों को सीखा। टॉम ऑल्टर।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एफडीआईआई में उनके बैचमेट्स में नसीरुद्दीन शाह, बेंजामिन गिलानी और शबाना आजमी जैसे महान कलाकार शामिल थे। नसीरुद्दीन शाह और टॉम ऑल्टर की दोस्ती यहीं से शुरू हुई जो जिंदगी के आखिरी दम तक कायम रही। टॉम ने संस्थान से गोल्ड मेडल के साथ अपना कोर्स पूरा किया। पुणे से पढ़ाई पूरी करने के बाद टॉम मुंबई आ गए जिसे उस वक्त मुंबई कहा जाता था। एक विदेशी चेहरे के लिए बॉलीवुड में काम मांगना बेहद चुनौतीपूर्ण था। निर्माता निर्देशक उन्हें देखकर हैरान रह जाते थे कि एक गोरा लड़का हिंदी फिल्मों में क्या करेगा। लेकिन जब टॉम उनके सामने साफ हिंदी और उर्दू में संवाद बोलते थे तो सामने वाला दंग रह जाता था। उन्हें पहला मौका मिला साल 1976 में आई फिल्म चरस में। निर्देशक रामानंद सागर की फिल्म चरस में टॉम ऑल्टर ने एक कस्टम अधिकारी चीफ कॉर्नर की भूमिका निभाई। फिल्म में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म में टॉम के अभिनय और उनकी साफ हिंदी की काफी तारीफ हुई। इसी साल उनकी एक और फिल्म आई जिसका नाम था परवरिश। मनमोहन देसाई की इस फिल्मी में भी उन्हें एक छोटी लेकिन प्रभावी भूमिका मिली। शुरुआत में उन्हें ज्यादातर ब्रिटिश अधिकारी, विदेशी तस्कर या किसी गोरे खलनायक के किरदार ही ऑफर होते थे। टॉम ऑल्टर के करियर का एक बड़ा मोड़ तब आया जब महान निर्देशक सत्यजीत रे ने उन्हें अपनी क्लासिक फिल्म शतरंज के खिलाड़ी 1977 के लिए चुना। इस फिल्म में टॉम ने कैप्टन वेस्टन की भूमिका निभाई थी जो वाजिद अली शाह के दरबार में ब्रिटिश रेजिडेंट जेम्स आउटराम रिचर्ड एटनाब्रो का सहयोगी होता है। इस फिल्म में टॉम को संजीव कुमार और सैयद जाफरी जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला। सत्यजीत रे जैसे जौहरी ने टॉम के भीतर छिपे असली कलाकार को पहचान लिया था। साल 1900 77 में ही टॉम ने मशहूर निर्देशक नासिर हुसैन की फिल्म हम किसी से कम नहीं में जैक की भूमिका निभाई। इसके तुरंत बाद वे देव आनंद की फिल्म देश परदेश 1978 और ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म नौकरी 1978 में नजर आए। जहां उन्हें अपने आदर्श राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला।

1981 में चेतन आनंद की फिल्म कुदरत में भी उन्होंने वकील की एक संजीदा भूमिका निभाई थी। 1980 का दशक टॉम ऑल्टर के लिए बेहद व्यस्त और सफल साबित हुआ। इस दशक में उन्होंने बॉलीवुड की कई बड़ी और व्यावसायिक फिल्मों में काम किया। साल 1981 में मनोज कुमार की देशभक्ति से ओथप्रोत फिल्म क्रांति रिलीज हुई। इस फिल्म में टॉम ने एक क्रूर ब्रिटिश अधिकारी मिस्टर ब्रिटिश की भूमिका निभाई। दिलीप कुमार, शशि कपूर और मनोज कुमार जैसे बड़े सितारों के बीच भी टॉम ने अपनी खलनायकी से दर्शकों के दिलों में नफरत और खौफ पैदा कर दिया। इसके बाद साल 1982 में हॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्म गांधी रिलीज हुई। जिसका निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था। इस वैश्विक फिल्म में टॉम ऑल्टर ने आगा खान पैलेस के डॉक्टर की एक छोटी सी भूमिका निभाई। हालांकि यह किरदार छोटा था लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिनेमा का हिस्सा बनना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। टॉम अब इंडस्ट्री में एक ऐसे भरोसेमंद अभिनेता बन चुके थे। जो किसी भी विदेशी किरदार को पूरी प्रामाणिकता के साथ पर्दे पर जी सकता था। इसी दशक में टॉम ने राज कपूर की आखिरी निर्देशित फिल्म राम तेरी गंगा मैली 1985 में भी काम किया। उन्होंने फिल्म में गंगा मंदाकिनी के भाई का किरदार निभाया था। इसके अलावा देश प्रेमी 1982, विधाता 1982, जस्टिस चौधरी 1983 और कर्मा 1986 जैसी सुपरहिट फिल्मों में टॉम ऑल्टर नजर आए। सुभाष घई की फिल्म कर्मा में उन्होंने विलेन डॉक्टर डैंग अनुपम खेर के खासमखास गुर्गे की भूमिका निभाई थी। जिसे आज भी लोग याद करते हैं। 1990 का दशक आते-आते टॉम ऑल्टर ने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन की दुनिया में भी अपने कदम जमा लिए थे। साल 1990 में आई महेश भट्ट की संगीतमय ब्लॉकबस्टर फिल्म आशिकी में उन्होंने बाल सुधार गृह के क्रूर इंचार्ज मिस्टर अरनी की भूमिका निभाई। उनकी बेहतरीन फिल्मों की सूची में परिंदा 1989 भी शामिल है। जिसमें उन्होंने मूसा भाई का किरदार निभाया था। इसके बाद सलीम लंगड़े पर मत रो। 1989 और केतन मेहता की सरदार 1993 जैसी ऑफ बीट फिल्मों में भी उनके अभिनय की खूब सराहना हुई। साल 1993 में आई फिल्म सरदार में टॉम ऑल्टर ने भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका को पर्दे पर जीवंत कर दिया। उनके अभिनय में जो शालीनता और कूटनीतिक गहराई थी। उसने इस ऐतिहासिक किरदार को अमर बना दिया। इसके अलावा उन्होंने सैनिक 1993, द्रोहकाल 1994 और ओ डार्लिंग यह है इंडिया 1995 जैसी विभिन्न शैलियों की फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। इसी दौर में उन्होंने 1996 में असमिया भाषा की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म अदाजिया में भी ब्रिटिश डॉक्टर की भूमिका निभाई थी।

लेकिन 90 के दशक के अंत में टॉम वाल्टर ने बच्चों के दिलों में जो जगह बनाई उसने उन्हें अमर कर दिया। साल 1997 में दूरदर्शन पर भारत का पहला सुपर हीरो शो शक्तिमान शुरू हुआ। इस धारावाहिक में टॉम ऑल्टर ने महागुरु का किरदार निभाया। शक्तिमान मुकेश खन्ना को उसकी शक्तियां और संस्कार सिखाते हैं। लंबी सफेद दाढ़ी, शांत चेहरा और ज्ञान से भरी बातें करने वाले महागुरु के रूप में टॉम ऑल्टर हर भारतीय बच्चे के पसंदीदा बन गए। टीवी पर उनके अन्य प्रमुख शोज़ में जुनून जवान संभाल के जिसमें उन्होंने चार्ल्स स्पेंसर नाम के ब्रिटिश छात्र का कॉमिक रोल किया था और हातिम शामिल हैं। दोस्तों अभिनेता टॉम ऑल्टर की वह कौन सी फिल्म है जिसे आप सबसे ज्यादा पसंद करते हैं? कमेंट में जरूर बताएं। साथ ही उनके टीवी सीरियल टीवी शो में उनके द्वारा निभाया गया वह कौन सा किरदार है जो आपका सबसे ज्यादा पसंदीदा है? कमेंट में आपका पसंदीदा किरदार जरूर बताएं जो आपका सबसे ज्यादा पसंदीदा है। नया दौर आने के बाद भी टॉम ऑल्टर की अभिनय की भूख शांत नहीं हुई। उन्होंने नए जमाने के निर्देशकों के साथ भी बेहतरीन काम किया। यह साल 1989 की बात है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक 15 साल का घुंघराले बालों वाला लड़का नेट पर बल्लेबाजी कर रहा था। टॉम ऑल्टर की पार की नजरों ने उस बच्चे के भीतर छिपे असाधारण टैलेंट को पहचान लिया। टॉम ने उस बच्चे का पहला वीडियो इंटरव्यू लिया। वह बच्चा कोई और नहीं बल्कि भविष्य के क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर थे।

उस इंटरव्यू में सचिन ने बेहद शर्मीले अंदाज में टॉम के सवालों के जवाब दिए थे। टॉम ऑल्टर की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने साल 1977 में अपनी पुरानी दोस्त कैरल ऑल्टर से शादी की थी। जो एक शिक्षिका थी। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा जेमी ऑल्टर और एक बेटी अफशा ऑल्टर। जेमी ऑल्टर आज एक जानेमाने स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट, यूबर और अभिनेता हैं। वे अक्सर कहते थे कि मुंबई मेरी कर्मभूमि है लेकिन मसूरी मेरी जन्मभूमि और मेरी आत्मा है। साल 2016 में टॉम ऑल्टर की सेहत बिगड़ने लगी। जांच के बाद पता चला कि उन्हें स्क्वमस सेल कार्सिनोमा स्क्वमस सेल कार्सिनोमा नाम का एक दुर्लभ प्रकार का त्वचा कैंसर स्किन कैंसर हो गया है। यह खबर उनके परिवार और फैंस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भी टॉम ने अपनी हिम्मत नहीं खोई। वे अपनी बीमारी से पूरी ताकत और सकारात्मकता के साथ लड़े। बीमारी के दौरान भी उनका काम के प्रति जज्बा कम नहीं हुआ। वे अस्पताल से छुट्टी मिलने पर हील चेयर पर बैठकर भी नाटकों के मंचन और शूटिंग के लिए पहुंच जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे कैंसर उनके पूरे शरीर में फैल गया और उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई। आखिरकार 29 सितंबर 2017 को मुंबई के सैफी अस्पताल में 67 वर्ष की आयु में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। मसूरी की हसीन वादियों में स्थित लैंडोर लैंडोर और राजपुर के इलाके में टॉम ऑल्टर का पुश्तैनी घर है। जिसे ऑल्टर हाउस, ऑल्टर हाउस या लैंडोर का कॉटेज कहा जाता है। यह घर 19वीं सदी की ब्रिटिश वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। जो देवदार, बांझ और ओक के घने जंगलों के बीच छिपा हुआ है। दोस्तों, ऐसे ही दिलचस्प वीडियो को देखने के लिए हमारे YouTube चैनल माय मेमोरी को सब्सक्राइब करना ना भूलें। मिलेंगे अगली वीडियो में। सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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