ओह माय गॉड बॉबी देओल अपनी प्रोफेशनल लाइफ पर तो काफी बातें करते हैं लेकिन अपने पापा की दो शादियों पर हमेशा चुप्पी साध लेते हैं। खासतौर से पेरेंट्स की लाइफ उनकी सौतेली मां है मालिनी और सौतेली बहन ईशा को लेकर वो बहुत ज्यादा बातें नहीं करते। सारा मोर्चा सनी देओल संभाल कर रखते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे दोनों भाई मैच्योर होते जा रहे हैं, बॉबी देओल भी धीरे-धीरे अपने परिवार के बारे में खुलकर बातें करने लग गए हैं। अभी हाल ही में एक पॉडकास्ट में बॉबी देओल ने काफी सारी बातें ऐसी कही जिससे धर्मेंद्र और उनकी पहली पत्नी के बीच की केमिस्ट्री का खुलासा होता है।
बॉबी के अकॉर्डिंग उनके पिता धर्मेंद्र ने अपने हिसाब से लाइफ जी है। उन्होंने कभी भी दूसरों की परवाह नहीं की। हमेशा वह अपने शौक, अपनी लाइफ, अपने मौत से आगे बढ़ते रहे जिसके चलते उनके पूरे परिवार को काफी खामियाजा भुगतना पड़ा। खासतौर से उनकी मां प्रकाश कौर ने हर बार धर्मेंद्र का सपोर्ट किया। हर बार कंप्रोमाइज किया। उसके बावजूद उनके परिवार में दूसरी औरत आ ही गई। बॉबी के अकॉर्डिंग पूरे परिवार की जो भी बॉन्ड बनी है उसमें मेरे डैड का नहीं बल्कि मेरे मां और दादी का कंट्रीब्यूशन था।
अगर मेरी मां चाहती तो परिवार को आराम से तोड़ सकती थी। लेकिन उन्होंने बच्चों के पालन पोषण के लिए पूरे परिवार को जोड़कर रखा। इसके साथ वो अपनी पत्नी को भी पूरे परिवार को जोड़कर रखने का क्रेट देते हैं। बॉबी के अकॉर्डिंग उनकी मां हमेशा अकेली रही। फिर भी बच्चों को कभी अकेलेपन का खलने नहीं दिया और हमेशा पापा के साथ भी खड़ी रही। पापा करियर के बिल्कुल हाई पिच पर थे। अपनी तरह से फिल्में कर रहे थे। घर से बाहर रहते थे। ऐसे में मां ने पूरा परिवार संभाला। इसलिए वो हमेशा मां के बेहद करीब रहते हैं। धर्मेंद्र के दूसरे बेटे सनी भी अपनी मां को बहुत क्लोज मानते हैं। बिकॉज़ मां ने ही दोनों बेटों को पाला। धर्मेंद्र तो हिम्मत से मैरिज करके अपनी दोनों बेटियों के साथ काफी वक्त बिता रहे थे।
क्योंकि धर्मेंद्र की पहली शादी प्रकाश कौर के साथ हुई थी। इस शादी से चार बच्चे भी हुए थे। जहां पर सनी बॉबी के अलावा दो बहनें भी हैं। इसके बावजूद उन्होंने हेमा मालिनी से मैरिज की और दो बेटियां हुई। धर्मेंद्र ने प्रकाश को तलाक दिए बिना धर्म बदलकर हेमा शादी की थी। जिसको लेकर उस टाइम 90ज में काफी मैगजीनों में कंट्रोवर्शियल लेख भी छपे थे। बहाल बॉबी देवराज खुलकर इस बात को एक्सेप्ट करते हैं कि पिता से वो कम क्लोज रहे। इसलिए अपनी जवानी के टीनएज के दिनों में वो बहुत रेवल थे और अपने पापा की बहुत सारी बातों को अनसुना करते थे। बिकॉज़ कहीं ना कहीं उनके अंदर एक एंगर था कि उन्होंने सौतेला परिवार उनके परिवार के साथ क्यों शामिल किया।
अगर वो सगे से प्यार करते थे तो सौरों की जरूरत क्या थी? ये बात बॉबी को काफी देर बाद समझ में आई कि लोग अपनी लाइफ के लिए बहुत इंडिपेंडेंट होते हैं। उनका हर डिसीजन उनकी लाइफ के साथ होता है। अब बॉबी क्योंकि खुद परिवार में रहते हैं इसलिए अच्छे बुरे की समझ रखते हैं। ना तो आज अपने पिता के खिलाफ कोई बात करते हैं ना अपनी मां के खिलाफ। बस इतना बोलते हैं कि उनके पिता ने अपनी लाइफ अपनी शर्तों पर जी और उनकी मां ने भी अपने पूरे परिवार को एक अच्छी पत्नी के तौर पर संभाला जो कि उनके परिवार की आज हकीकत है। फिर चाहे वो सघों के साथ हो या फिर सौतेलों के साथ।