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राघव चढ़ा को BJP ज्वाइन करते ही, राज्य सभा में कौन सा बड़ा पद मिल गया?

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ब्रॉट टू यू बाय कैंडिडेट कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर चार स्किन प्रॉब्लम्स का एक एक्सपर्ट सशन कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडिडेट राघव चड्ढा को राज्यसभा की कमेटी ऑन पिटीशंस का चेयरमैन बना दिया गया है। यह नियुक्ति राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने की है और नई समिति 20 मई से प्रभावी मानी जाएगी। आपके लिए यह वीडियो हम शूट कर रहे हैं 23 मई 2026 को लेकिन उससे पहले ही 20 मई से इसका प्रभाव जारी हो जाएगा यानी विद इफेक्ट फ्रॉम 20th मई यह लिखा हुआ था। लेकिन इस खबर की चर्चा सिर्फ इसलिए नहीं हो रही कि उन्हें एक नई जिम्मेदारी मिली है।

इसकी वजह यह भी है कि कुछ ही हफ्ते पहले राघव चड्डा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी जाइन की थी भारतीय जनता पार्टी और उसके बाद से उनकी राजनीति, उनकी इमेज और उनके सपोर्ट बेस तीनों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। लोगों के मन में सवाल थे कि राघव चड्ढा को आखिर वेलकम गिफ्ट के रूप में क्या दिया जाएगा? और इसी बीच आ गई एक नोटिफिकेशन। राज्यसभा की नोटिफिकेशन के मुताबिक कमेटी ऑन पिटीशंस को फिर से गठित किया गया है और इस पैनल में राघव चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन गुलाम अली शंभू शरण पटेल मयंक कुमार नायक मस्तान राव यादव बीड़ा जेबी माथेर हशाम शुभाशीष खुटिया रवंगवरा नारजारी और पी संतोष कुमार भी शामिल हैं।

अब यहां एक बात समझिए कमेटी ऑन पिटिशंस कोई छोटी या सिंबॉलिक कमेटी नहीं मानी जाती। इस कमेटी का काम होता है जनता और संस्थाओं से आने वाली पिटीशन यानी याचिकाओं को सुनना, शिकायतों और जनता की चिंताओं को लेकर जांचना, जांच करना और उन मामलों को संसद के सामने लाना यानी आसान भाषा में कहें तो यह आम लोगों और संसद के बीच के एक इंस्टीट्यूशनल विज की तरह काम करती है। लेकिन उस खबर का पॉलिटिकल एंगल उससे भी बड़ा है। क्योंकि 26 अप्रैल को राघव चड्डा और आम आदमी पार्टी के छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी। पार्टी छोड़ते वक्त उन्होंने सिर्फ इस्तीफा नहीं दिया था बल्कि पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप भी लगाए राघव चड्डा ने कहा था जो पार्टी भ्रष्टाचार मिटाने के गंभीर संकल्प के साथ बनी थी वह आज भ्रष्ट और समझौता कर चुके लोगों के हाथों में बुरी तरह चली गई है। उन्होंने आगे कहा था मैं करीब एक साल पहले ही उनसे दूरी बना चुका था क्योंकि मैं उनके गलत कामों में हिस्सा नहीं बनना चाहता था। यानी उन्होंने अपने फैसले को सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं

बल्कि प्रिंसिपल्स से जुड़ा फैसला बताया। इसके बाद बीजेपी में शामिल होने के साथ ही एक दूसरी कहानी शुरू हुई सोशल मीडिया की कहानी। सोशल मीडिया पर राघव चड्ढा खासे एक्टिव रहे हैं। आप जानते ही हैं। इसलिए उसी सोशल मीडिया पर राघव को ट्रोल करते हुए यह तंज कसा गया कि उन्हें बीजेपी जॉइ करने के बाद केंद्र सरकार में मिनिस्टर ऑफ इन्फ्लुएंसरर अफेयर्स बनाया जाएगा। ऐसा कोई मंत्रालय असल में तो एक्सिस्ट नहीं करता पर यह एक व्यंग जरूर था क्योंकि बीजेपी सत्तारूढ़ पार्टी है। अभी एनडीए की सरकार है। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि बीजेपी जॉइ करने के सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही राघव चड्डा ने Instagram पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स खो दिए थे। एक समय पर उन्हें ज्सजी पॉलिटिक्स का बड़ा चेहरा माना जाता रहा। लेकिन उनके फॉलोवरर्स 1 करोड़ 46 लाख थे। उससे घटकर वो 1 करोड़ 33 लाख तक पहुंच गए। और ये सिर्फ नंबर्स की गिरावट नहीं थी। इसका असर कमेंट्स सेक्शन में भी साफ दिखा। कुछ यूज़र्स ने लिखा हमने आप में भविष्य का प्रधानमंत्री देखा था। आपने अपने चाहने वालों को धोखा दिया। दूसरे ने लिखा राघव चड्ढा को अनफॉलो करने का वक्त आ गया है। इन्हें पढ़कर लगता है कि कई सपोर्टर्स के लिए यह सिर्फ पॉलिटिकल स्विच नहीं बल्कि भरोसे का मुद्दा भी बन गया और इसकी वजह भी थी। राघव चड्ढा ने लंबे समय तक अपनी एक अलग पॉलिटिकल आइडेंटिटी बनाई थी। वह संसद में अक्सर रोजमर्रा की समस्याओं पर बोलते दिखाई देते थे।

एयरपोर्ट पर महंगे खाने के दाम, मिडिल क्लास पर टैक्स बर्डन, डिलीवरी या गिग वर्कर्स की वर्किंग कंडीशंस, सिम और टेलीकॉम रिचार्ज करने की कॉस्ट, की कीमतें ऐसे मुद्दों पर वो लगातार सवाल उठाते रहे हैं, नजर आते रहे। सुर्खियों भी बटोरली उन्होंने। लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद एक और कंट्रोवर्सी सामने आई। आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि राघव चड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आलोचना वाली अपनी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दी है। सौरभ ने इसे राघव की पब्लिक इमेज बदलने की कोशिश में उठाया गया एक कदम बताया। हालांकि राघव चड्ढा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और अब उन्हें राज्यसभा में नई जिम्मेदारी भी मिल गई है और शायद यही वजह है कि फिलहाल चर्चा सिर्फ कमेटी ऑन पिटीशंस की नहीं है। चर्चा इस बात की भी है कि क्या बीजेपी में आने के बाद राघव चड्ढा की नई राजनीतिक यात्रा उनकी पुरानी पहचान से अलग रास्ता बनाएगी। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं। वीडियो लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। मैं हूं शेख नावेद। देखते रहिए लंडन टॉक।

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