यह हैं प्रतीक स्मिता पाटिल जो अब से कुछ समय पहले तक प्रतीक बब्बर के नाम से जाने जाते थे। लेकिन पिता से बेहिसब नफरत की वजह से इन्होंने अपने नाम के आगे से उनका सरनेम खुरच कर हटा दिया और मां के नाम को अपना सरनेम बना लिया जो इंडियन रिग्रेसिव पेट्रिय्कल सोसाइटी में कम ही देखने को मिलता है। ना मैं ना मैं बाप कहूं ना मैं मां का हूं मैं खुद कहूं। आई हैव नाउ एम्ब्रेस्ड माय मदर्स नेम फुल्ली। आई एम कॉल्ड प्रतीक स्मिता भट्टेड। मां-बाप के घटिया लाइफ डिसीजंस की वजह से इनका बचपन बर्बाद हो गया। यह कई बीमारियों के शिकार हो गए। कम उम्र में ही नशीली दवाइयों के एडिक्ट बन गए। रिहब सेंटर में लंबा वक्त गुजारा और बड़े होने पर भी उसका ऐसा असर रहा कि इनकी शादी टूट गई और करियर भी तबाह हो गया। लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की एक दमदार अभिनेत्री और फेमस अभिनेता और राजनेता के बेटे के साथ ऐसा क्यों हुआ? क्यों दोनों ने अपनी ही संतान को ऐसे दिन देखने पर मजबूर कर दिया जिसकी तपिश में यह हमेशा जलते रहे और फिर कैसे इस बेटे ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ करने का फैसला लिया और आज यह इंडस्ट्री में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। और मुझे खुशी है कि इसने खुद इन बातों को रिवील किया। जो पहले करता था वो सब मैंने छोड़ दिया है और उसकी वजह से आज इसकी इंडस्ट्री में इज्जत है और ये अच्छा काम भी करने वाला। तो आज के अपने इस एपिसोड में हम पेरेंट्स चाइल्ड के इस कॉम्प्लिकेटेड रिश्ते, मां-बाप की गलतियों और इससे जुड़े तमाम इंसिडेंट्स की डिटेल में चर्चा करेंगे। आप बने रहिए हमारे साथ।
[संगीत] नमस्कार दोस्तों, मैं हूं श्वेता जया और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें। दोस्तों, चलिए सबसे पहले जानते हैं कि इस कहानी की शुरुआत कहां से हुई थी। मच रे। अब यहां मन नहीं ना। वहां जाके कौन सा आकाश नाप लेगा तू? मजुरी तुझे यहां भी करनी है, वहां भी करनी है। यह थी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की एक बेहद शानदार फेमस एक्ट्रेस स्मिता पाटिल जिन्होंने उस दौर में वुमेन ओरिएंटेड फिल्मों में स्ट्रांग किरदारों को निभाकर खुद की पहचान बनाई जब ज्यादातर हीरोइनें फिल्मों में सिर्फ लटके, झटके और हुस्न के जलवे दिखाया करती थी। सुहाग का मतलब सिर्फ पति का दिया हुआ सिंदूर जेवर लत्ता और घर बार नहीं होता कबीर साहब। उसका मतलब होता है पति पत्नी के बीच का प्यार। ये एक मझी हुई कलाकार थी जो अपने सांवले रंग और गंभीर व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थी। मैं अपना जिस्म नहीं बेचना चाहती थी। आपने मुझे खरीद लिया। आप बिजनेसमैन थे। आदमी थे और आज शाकिर अली खान के चमचे। इन्होंने कमर्शियल सिनेमा के साथ-साथ लीक से हटकर पैरेलल फिल्मों में भी जबरदस्त काम किया। जिनमें किरदारों के मुताबिक बिना मेकअप, बिना स्टाइलिश आउटफिट के नजर आईं। फिर भी उस दौर की सभी ग्लैमरस हीरोइनों पर भारी पड़ी और ढेरों अवार्ड्स भी अपने नाम किए। तो जब मैं थक गई हूं। मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता। तुम चाहो तो मेरी जान ले लो। लेकिन ऐसे डरा डरा कर मुझसे बदला मत लो।
तो दूसरी तरफ थे राज बब्बर जो मेनली कमर्शियल फिल्मों के लिए जाने जाते थे। लेकिन हीरो से लेकर विलिलेन तक हर किरदार में फिट नजर आते। शादी तो तुमने शरीयत की रस्म पूरी करने के लिए की थी। और फिर इसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं। क्योंकि औरत अपने पहले प्यार को कभी नहीं भुला पाती। राज बब्बर ने भी दर्जनों हिट फिल्में दी। अपने दौर के फेमस एक्टर्स में शामिल रहे। साथ ही आगे चलकर एक चर्चित पॉलिटिशियन भी बने। देखो दंगे फसाद होते रहते हैं। लोग मरते रहते हैं। इसमें इतना जज्बाती होने की क्या जरूरत है? यू आर ए पुलिस ऑफिसर। लाइक ए पुलिस। लेकिन फिर क्यों महिला उत्थान के लिए काम करने वाली फेमिनिस्ट एक्ट्रेस स्मिता पाटिल ने एक औरत की गृहस्ती उजाड़ दी। उनके पति की दूसरी औरत बनकर रही और फिर जब अपने नाजायज रिश्ते से एक बच्चे को जन्म दिया और दुनिया छोड़कर चली गई तो उस बच्चे को हर कदम पर दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। देखो पूजा मेरी और इंद्र की शादी होने वाली है। किसी दूसरी औरत के मर्द के पास कैसे जा सकती है तुम? शर्म नहीं आती तुम्हें? क्यों स्मिता की डेथ के बाद राज बब्बर ने भी अपने बेटे को नहीं अपनाया और अपनी पहली वाइफ के पास चले गए। जिसके बाद बच्चे के नाना-नानी ने उसकी परवरिश का पूरा जिम्मा उठाया। चांदनी हमेशा के लिए बुझ गई है। हमेशा के लिए पिछड़ गई है। चांदनी बुझती नहीं। कभी-कभी घने बादलों में गुम जरूर हो जाती है। तो हुआ यह कि जब सस्मिता पाटिल और राज बब्बर दोनों ही अपने करियर की ऊंचाइयों पर थे। तभी इन दोनों ने सिसि मिश्रा की फिल्म भीगी पलके में साथ काम किया जो 1982 में रिलीज हुई थी और इसी की शूटिंग के दौरान दोनों की पहली बार मुलाकात हुई। जन्मजनम का साथ है तुम्हारा हमारा तुम्हारा। इसी फिल्म की शूटिंग से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई और इन्होंने और भी कई फिल्में साथ में साइन कर ली।
जिनमें 1981 में तजुर्बा, 1984 में आज की आवाज और हम दो हमारे दो और 1987 में आवाम जैसी फिल्में शामिल रहीं। ये रात ये बरसात ये तनहाई। इसी दौरान धीरे-धीरे राज बब्बर और स्मिता पाटिल करीब आ गए और एक दूसरे को डेट करने लगे। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि तब राज बब्बर पहले से शादीशुदा थे और दो बच्चों के पिता थे। उसमें भी आरनी यह कि राज बब्बर ने साल 1975 में करीब 23 साल की उम्र में एक मुस्लिम लड़की नादिरा से लव मैरिज की थी। जिनसे इनकी मुलाकात 1971 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में हुई थी। नादिरा एनएसटी से गोल्ड मेडलिस्ट थी जो आगे स्कॉलरशिप से जर्मनी पढ़ने गई थी। आगे वह जानीमानी थिएटर आर्टिस्ट, एक्ट्रेस और डायरेक्टर भी बनी। लेकिन अलग धर्म होने की वजह से उन्होंने अपने परिवार और मजहब के खिलाफ जाकर राज बब्बर से शादी रचाई थी और सबका विरोध झेला था। तब राज बब्बर की फैमिली ने उन्हें धर्म बदलने और अपना नाम निर्मला रखने के लिए प्रेशर भी डाला था। लेकिन राज बब्बर ने खुद तब अपनी पत्नी का साथ दिया था और दोनों के इश्क के खूब चर्चे भी हुआ करते थे। 5 साल में इन दोनों के दो बच्चे भी हुए। 1979 में जूही बब्बर और 1981 में आर्यन बब्बर का जन्म हुआ। सब कुछ जैसे पिक्चर परफेक्ट चल रहा था। लेकिन तभी शादी के कुछ ही साल बाद राज बब्बर का किसी और के प्यार में गिरफ्तार हो जाना किसी के भी समझ में नहीं आ रहा था। यही जरूरी है कि हर बात का फैसला खुद ही किया जाए। हम कुछ फैसले वक्त पर नहीं छोड़े जा सकते। वक्त पर भरोसा करके उम्मीद कमजोर नहीं पड़ जाती। वक्त के साथ-साथ बदलता भी तो बहुत कुछ है। कुछ करीबी बताते हैं कि तब राज बब्बर, नादिरा बब्बर और स्मिता पाटिल तीनों की ही फैमिली ने इन्हें समझाने-बुझाने की काफी कोशिशें की। लेकिन प्यार के दावे करने वाले यह दोनों जहीन कलाकार जैसे सब कुछ भूल गए थे। इन्होंने किसी की नहीं सुनी और तमाम रिश्ते नातों को दरकिनार करके लिव इन में रहने लगे। जाहिर है इससे राज बब्बर की धर्मपत्नी नादिरा को गहरा धक्का लगा क्योंकि तब उनके दोनों बच्चे काफी छोटे थे। आर्यन बब्बर की उम्र तो तब महज एक-दो साल की ही रही होगी। वहीं स्मिता पाटिल की मां भी इस रिश्ते के खिलाफ थी। राज की पत्नी ने स्मिता पर उनकी शादी तोड़ने का आरोप लगाया और हर जगह स्मिता पाटिल और राज बब्बर की इस हरकत को लेकर कड़ी आलोचना होने लगी। पर बताते हैं कि वुमेन ओरिएंटेड फिल्मों में झंडा बुलंद करने वाली महिला उत्थान के लिए काम करने वाली और अपने कड़े उसूलों के लिए जानी जाने वाली स्मिता पाटिल तब सब कुछ भूल गई और राज बब्बर की दूसरी औरत बनकर उनके साथ रहने लगी। तब अखबारों से लेकर फिल्मी मैगजीन सब इनकी तस्वीरों और खबरों से पटे रहते। वह इनके लिए कभी मिस्टर शब्द का प्रयोग करते तो कभी दूसरी औरत तो कभी होम ब्रेकर। तो कुछ ने स्मिता पाटिल को दोहरे चरित्र की महिला करार दिया। जिनकी कथनी करने में बहुत फर्क था और यह खुलेआम एक महिला की शादीशुदा जिंदगी बर्बाद कर रही थी। उनके बच्चों को पिता से दूर कर रही थी। साथ में राज बब्बर से भी खूब सवाल पूछे जाते। लेकिन 1984-85 के आसपास जब स्मिता पाटिल ने राज बब्बर पर शादी के लिए प्रेशर डालना शुरू किया तो राज पलट गए और कहा कि वह अपनी पहली पत्नी और बच्चों को नहीं छोड़ सकती।
शायद वो दोनों तरफ मजे लेने के मूड में थे। लेकिन मुझसे मेरी मंजिल तो ना छीनो। प्लीज। लेकिन इससे स्मिता पाटिल के साथ उनके झगड़े होने लगे। यह वो वक्त था जब स्मिता की जिंदगी में भारी भूचाल चल रहा था। उनकी अपनी फैमिली, उनके फ्रेंड्स सब उन्हें जज कर रहे थे। लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों वो राज बब्बर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। पूजा मैंने जानबूझकर तुम्हारा बुरा कभी नहीं चाहा। मैं इंद्र को चाहती थी। तुम्हारे पति को नहीं। मैं अपना घर बसाना चाहती थी। तुम्हारा घर जाना नहीं चाहती थी। बताया जाता है कि पत्नी से बिना डिवोर्स लिए 1985 में राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी कर ली। हालांकि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत यह शादी इललीगल थी। जिसकी कोई वैल्यू या कानूनी मान्यता नहीं थी। अब इन्होंने धर्मेंद्र हेमा मालिनी की तरह अपना मजहब बदलकर निकाह किया था या यूं ही मंदिर वगैरह में औपचारिकता के लिए शादी कर ली थी यह तो ठीक से पता नहीं लेकिन दोनों पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगे। इसी में सबको और ताज्जुब हुआ जब 1986 में स्मिता पाटिल प्रेग्नेंट हो गई और अपने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया। 28th नवंबर 1986 को प्रतीक का जन्म हुआ। लेकिन सूत्रों के मुताबिक तब तक स्मिता पाटिल ने राज बब्बर के साथ अपने इस रिश्ते की वजह से इतना कुछ झेल लिया था कि अपने बच्चे को जन्म देने के बाद उनसे अलग होने का मन बना रही थी। क्योंकि एक तो राज बब्बर अपनी पत्नी को तलाक देकर स्मिता को कानूनन अपनी पत्नी का दर्जा नहीं दे रहे थे तो वहीं दुनिया के सवालों और इल्जामों से भी वह तंग आ चुकी थी। इस तरह राज और स्मिता के रिश्तों में तब तक खटास काफी बढ़ चुकी थी। तब के कई मीडिया रिपोर्ट्स यह दावा करते हैं कि धीरे-धीरे स्मिता को अपने इस नाजायज रिश्ते के फ्यूचर का एहसास भी होने लगा था। वह तब शूटिंग पर हमेशा उदास और गुमसुम नजर आने लगी थी। जबकि पहले सबको खूब हंसाया करती और काफी नॉर्मल रहती थी। इसलिए स्मिता अब अपने बच्चे के साथ अकेले जीना चाहती थी। मदरहुड को एंजॉय करना चाहती थी और जिंदगी में थोड़ा सुकून चाहती थी। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। बच्चे को जन्म देने के बाद 12 13 दिन बाद ही उनके ब्रेन में इनफेक्शन हो गया और प्यूरपेरल सेप्सिस नामक बीमारी की वजह से स्मिता की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। अपना चेकअप करवा लो। प्लीज अच्छा बाबा। तब राज बब्बर ने उनकी कितनी देखभाल की यह तो पता नहीं क्योंकि वह ज्यादातर शूटिंग में ही बिजी रहते लेकिन स्मिता की मम्मी लगातार उनके साथ खड़ी रहीं। भले स्मिता ने उनकी बात माने बिना राज बब्बर से शादी की थी और उन्हें हर्ट किया था। लेकिन इस एक इंसिडेंट के अलावा उन्होंने हमेशा अपने माता-पिता की एक अच्छी संतान होने का फर्ज निभाया था और अपने काम से भी उनका सिर गर्व से ऊंचा रखा था। इसलिए महाराष्ट्र गवर्नमेंट में मंत्री रहे इनके पापा शिवाजीराव गिरधर पाटिल और सोशल वर्कर रही इनकी मम्मी विद्या पाटिल दोनों ने बेटी की गलतियों को भुलाकर इनकी बीमारी में और बच्चे को संभालने में इनका भरपूर साथ दिया। स्मिता को मुंबई के जसलोक अस्पताल में एडमिट किया गया।
लेकिन वहां कोई दवा, कोई ट्रीटमेंट काम नहीं आई और 13th दिसंबर 1986 को सिर्फ 31 साल की उम्र में स्मिता पाटिल की मौत हो गई और वह अपने 15 दिन के मासूम बच्चे को छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गई। स्मिता की मौत के बाद राज बब्बर ने वह किया जो किसी ने सोचा भी नहीं था। उन्होंने खूब तगड़मबाजियां की और अपनी धर्मपत्नी नादिरा से समझौता कर लिया। उनसे माफी मांगी और बच्चों का वास्ता देकर अपनी फैमिली के पास वापस लौट गए। जैसे कोई पॉलिटिशियन रंग बदलने के लिए जाना जाता है। बताते हैं कि इसके बाद राज और स्मिता के अनाथ मासूम बच्चे प्रतीक की जिम्मेदारी संभाली स्मिता के माता-पिता ने और उसे अपने साथ ले गए। कुछ रिपोर्ट्स दावा करते हैं कि राज बब्बर ने बच्चे की कस्टडी लेने की कोशिश की थी। लेकिन कोर्ट ने प्रतीक की कस्टडी उनके नाना नानी को दे दी थी। जिनसे राज बब्बर बाद में मिलने जाया करते थे। तो प्रतीक धीरे-धीरे बड़े होने लगे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता मां-बाप की पूरी दास्तान उन्हें पता चली और फिर कुछ ऐसा हुआ जो कोई भी मां जीते जी बर्दाश्त नहीं करेगी। दरअसल उनका बेटा उनसे नफरत करने लगा। वो मां-बाप के नाम से भी भड़क उठता था। तो वहीं उसके नाना नानी उसे मां के लिए समझाते रहते थे। लेकिन कोई खास फायदा नहीं होता। आई डेवलप्ड अ हेट फॉर हर एंड माय फादर बोथ माय पेरेंट्स बिकॉज़ यू नो देन बीइंग अनवेलेबल बीइंग अनवेलेबल एंड ग्रोइंग अप एंड जस्ट एवरीथिंग बीइंग डिफरेंट इन काफी समय तक प्रतीक अपनी मां के बारे में बात करने से भी कतराते थे यहां तक कि बताते हैं कि काफी बड़े होने तक इन्होंने कभी अपनी मां की कोई फिल्म भी नहीं देखी और एक अजीब से ड्रामा में जाने लगे। आई मीन लिसेन आल्सो इफ यू टॉक अबाउट इट वेरी जेनेरिकली या वेरी जेनेरिकली इन सरफेस लेवल इन आवर टीम्स वेदर वी हैड ट्रोमा ऑर नॉट ड्रामा वी एंड वी हेट अप्स या बिकॉज़ वेनेवर दे स्टॉप अस फ्रॉम डूइंग एनीथिंग और एनीवन हु स्टॉप्स अस फ्रॉम डूइंग एनीथिंग एंड लिटरली इट्स दैट एंड एंड द इमोशंस खैर काफी वक्त बाद अपने नाना नानी के समझाने पर प्रतीक का अपनी मां को लेकर नजरिया बदला लेकिन उन्होंने हमेशा अपने पिता राज बब्बर से दूरी बनाए रखी। वह कभी-कभी उनसे मिला जरूर करते थे, लेकिन दूरियों को पाटना इतना आसान नहीं था। साथ ही इन्हीं सब कारणों से बचपन में उन्हें कुछ बीमारियां भी हो गई। एडीएचडी हैव जस्ट पुटिंग इट आउट देयर।
आई वास डायग्नोस विथ अ चाइल्ड एडीएचडी दैट वाज़ नेवर दैट वाज़ नेवर ट्रीटेड एंड देन नाउ आई हैव एडल्ट एडल्ट एडीएचडी दैट आई ट्रीट। कभी इन्हें अपने स्कूल में बच्चों द्वारा बुली होना पड़ा तो कभी अकेलेपन से जूझना पड़ा। वहीं कई तरह के परेशानियों से लड़ते हुए इन्होंने बेहद छोटी उम्र में ही नशीली दवाइयों का सेवन करना भी शुरू कर दिया। और जब नाना नानी को इस बारे में पता चला तो इन्हें रिहब में रहने को भेज दिया गया। अल्कोहल सब्सटेंस अब्यूज अगेन आई मेड दैट डिसीजन। प्रतीक ने पढ़ाई पूरी की और बड़े होने के बाद यह भी एक एक्टर बने और कुछ फिल्मों में काम करना शुरू किया। लेकिन यहां भी इनकी पास्ट लाइफ ने इनका पीछा नहीं छोड़ा और यह जिस मुकाम को हासिल कर सकते थे वह नहीं हो सका। आई डीड आई आई अनफॉर्चूनेटली मेड वेरी बैड चॉइससेस। आई आई डीड यू नो व्हाट एंड आई आई वोंट से आई कुड हैव डन एनीथिंग डिफरेंटली बिकॉज़ आई वास गोइंग थ्रू समथिंग। जब बड़े होने के बाद इनकी शादी हुई, इनकी पास्ट लाइफ का असर उस पर भी हुआ और शादी टूट गई। आई मेंशंड दे ब्रीफली दैट बिकॉज़ आई हैड आई हैड अ फेल्ड मैरिज। आई वास आई वास आई वास सो एडममट अबाउट मैरिज एंड लव। प्रतीक ने जब फिल्मों में काम करना शुरू किया था तब स्क्रीन पर इनका नाम प्रतीक बब्बर लिखा आता था। लेकिन बाद में ऐसा कुछ हुआ कि इन्होंने अपने नाम के आगे से बब्बर हटा दिया और सिर्फ प्रतीक लिखने लगे। तब इनकी पीआर एजेंसी ने एक प्रेस नोट जारी कर इन्फॉर्म किया कि वह केवल प्रतीक के रूप में जाने जाना चाहते हैं और इसका अंक ज्योतिष से कोई लेना देना नहीं है। इसका क्या मतलब था समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। लेकिन बताते हैं कि तब नाना नानी के समझाने पर प्रतीक ने अपने बायोलॉजिकल फादर से रिश्ते ठीक करने की कोशिश भी की थी और कपिल शर्मा के शो पर यह राज बब्बर और अपने सौतेले भाई बहनों के साथ अच्छी बॉन्डिंग की कोशिश करते दिखे थे। सबसे छोटा हूं मैं तो आई थिंक वो जनरेशन का होना भी चाहिए सर। क्यों ना करें? अब पार्टी कर के छोड़ चुके हैं। बहुत बोर हो चुके हैं। अब मैं घर पे बैठता हूं। शो देखता हूं। साथ ही हाल के इंटरव्यूज में भी इस बारे में प्रतीक ने कई बातें बताई। बिकॉज़ आई नेवर आई नेवर शेयर द रिलेशनशिप। इवन आई हैव नेवर मेंशन दिस ऑन कैमरा बट यस वै ओके टू मेंशन। आई हैव नेवर शेयर यू नो वी मेड अंड्स एंड ट्राई ट्राई टू फॉर्म अ बॉन्ड एंड स्टफ लाइक दैट।
जस्ट ही लेकिन फिर समय बीता और हाल ही में इन्होंने अपना नाम प्रतीक से बदलकर प्रतीक स्मिता पाटिल रख लिया जिसके बारे में मई 2025 में एक पडकास्ट में खुलकर बातें की और दुनिया को इसकी वजह बताई बट आई थिंक फाइनली बिकॉज़ आई हैव आई हैव नाउ एम्ब्रेस्ड माय मदर्स नेम फुल्ली आई एम नाउ कॉल्ड प्रतीक स्मिता भट्ट प्रक भट्ट यस इट्स शी गव हर लाइफ फॉर मी शी्स इट उन लोग कहते हैं कि आपने अरे आपने बबल ड्रॉप किया नहीं बिल्कुल नहीं मैंने सिर्फ स्मिता पाटिल आजमाया है उसको मैंने इन्वेस किया यानी पहले पिता का सरनेम लगाया फिर कोई सरनेम नहीं लगाने का फैसला किया और फिर फाइनली मां का सरनेम लगा लिया प्रतीक बताते हैं कि इनकी जिंदगी में इनके पेरेंट्स की कमी तीन लोगों ने पूरी की इनके नाना नानी और शबाना आजमी ने जिन्होंने स्मिता पाटिल की मौत के बाद इन्हें अपने बच्चे जैसा प्यार दिया और इन्हें करियर में भी आगे बढ़ने में ढाल की तरह खड़ी रही। वह स्मिता पाटिल की कंपटीिट मानी जाती थी और दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम भी किया था। लेकिन स्मिता की डेथ के बाद वो इंडस्ट्री की इकलौती ऐसी शख्स रही जिन्होंने प्रतीक को कभी अकेला नहीं छोड़ा। देन आई मेट शबाना जी एंड देन शबाना जी का टूक मी अनो विंग एंड आई मीन आई नॉट मेट हर काइंड ऑफ़ रिकनेक्टेड इफ आई मे। हम एंड एंड देन शी वाज़ काइंड ऑफ़ ट्राइंग टू यू नो प्रैप मी अप टू बिकम एन एक्टर इनफ लाइक दैट इन खैर अब प्रतीक अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रहे हैं और कई वेब सीरीज और फिल्मों में देखे जाते हैं। इन्होंने दूसरी शादी कर ली है और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिशों में लगे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि यह अपनी पुरानी यादों को भूलकर और पेरेंट्स की गलतियों को माफ कर आगे बढ़ेंगे और एक हैप्पी लाइफ लीड करेंगे।
लेकिन साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि स्मिता पाटिल और राज बब्बर के लिए गए कुछ गलत फैसलों की वजह से जहां एक तरफ कई रिश्ते उलझ गए तो वहीं उनके मासूम बच्चे की जिंदगी पर हमेशा के लिए इसका इतना असर हुआ कि शायद यह आज भी उससे पूरी तरह से उभ नहीं पाए हैं। भले ही यह किसी शो पर या पब्लिकली सब कुछ नॉर्मल दिखाने की कोशिश करें या गुस्से में बार-बार अपना नाम बदलकर प्रतिकार दर्शाने की कोशिश करें। इनके यह कदम इन्हें भी हर्ट करते हैं और इनसे जुड़े इनके करीबियों को भी। बताया जाता है कि महेश भट्ट की फिल्म अर्थ स्मिता पाटिल की जिंदगी पर ही आधारित थी। जिसमें उन्होंने खुद अपनी असल जिंदगी जैसी ही दूसरी औरत का किरदार निभाया था और शूटिंग के दौरान खूब रोया करती थी। वह भले ही एक ग्रेट एक्ट्रेस और स्ट्रांग महिला के तौर पर जानी गई लेकिन अपनी पर्सनल लाइफ को सही तरीके से प्लान नहीं कर पाई जिससे उनकी जिंदगी दुखों, तकलीफों और आलोचनाओं की शिकार हो गई और उनका बेटा इसे कहीं ना कहीं आज भी झेल रहा है। दोस्तों, आप इस कहानी को किस नजरिए से देखते हैं? कमेंट बॉक्स में इस पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दीजिएगा। आप इस तरह की और कहानियां देखना चाहते हैं तो हमें YouTube के थैंक्स बटन के जरिए हमारे काम को सपोर्ट भी कर सकते हैं। मिलते हैं कुछ और नए किस्से कहानियों के साथ अगले एपिसोड में। फिलहाल मुझे दीजिए इजाजत। नमस्कार। [संगीत]