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स्टंटमैन बनने आया ए लड़का बन गया बॉलीवुड का सुपरस्टार! पाकिस्तान ने किया था बैन?

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आंखों में गजब की कशिश चेहरे पर अलग सा आत्मविश्वास चाल ढाल में शेरों जैसा रोआ और इन सब के साथ मदमस्त कर देने वाली सुंदरता और रोबदार आवाज जी हां हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के पहले स्टाइल आइकॉन फिरोज खान साहब की तेरे चेहरे में वो जादू है बिन डोर खींचा जाता हूं चाहे मेरी जान न तोत ले ले चाहे ईमान तोत ले ले प्यार एक बार तो दे दे हैया हो हैया हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी भारतीय सिनेमा की दुनिया में लगभग 50 सालों तक अपने अलग अंदाज और कमाल के हुनर के चलते बड़े पर्दे पर करोड़ों सिनेमा प्रेमियों को अपना मुरीद बना देने वाले इस अभिनेता की जिंदगी का हर पहलू बेहद ही रोचक रहा है आज के इस वीडियो में हम बॉलीवुड फिल्मों के पहले काउ बॉय फिरोज खान साहब की जिंदगी पर विस्तार से चर्चा करेंगे और जानेंगे उनके जीवन से जुड़े हर दिलचस्प पहलू के बारे में तो फिर चैनल को सब्सक्राइब करके वीडियो के अंत तक बने रहिए 25 सितंबर 1939 को पराधीन भारत के बेंगलोर शहर में अफगानिस्तान के गजनी से संबंध रखने वाले पिता सादिक अली खान तानो और ईरान से संबंध रखने वाली मां फातिमा के घर में जुल्फिकार अली शाह खान यानी फिरोज खान का जन्म हुआ था फिरोज खान अपने पिता की सात संतानों में अपने चारों भाइयों और दोनों बहनों से बड़े थे इनके भाइयों के नाम शाह अब्बास खान यानी फेमस एक्टर संजय खान शाहरुख शाह अली खान समीर खान और अकबर खान थे और इनकी दोनों बहनों के नाम खुर्शीद शाह नवार और दिलशाद बेगम था फिरोज खान की

तरह उनके दो भाइयों अकबर खान और संजय खान ने भी फिल्मों को बतौर कैरियर चुना अकबर खान ने टीवी सीरियल अकबर दी ग्रेट में मुख्य भूमिका निभाने के अलावा इस सीरियल से डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़े आगे चलकर वह साल 2005 में अपनी मैग्नम ओपस ताजमहल एंड इंटरनेशनल लव स्टोरी फिल्म के भी डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रहे बात करें संजय खान की तो वह फिरोज खान के बाद अपने परिवार के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले अभिनेता रहे संजय ने एक फूल दो माली धुंद और नागिन जैसी बेहद ही लोकप्रिय फिल्मों में काम करने के अलावा 90 के हिट टीवी सीरियल जय हनुमान और द सर्ड ऑफ टीपू सुल्तान का निर्माण भी किया था चलिए अब चलते हैं इस वीडियो के मुख्य किरदार फिरोज खान की तरफ बात करें इनकी स्कूली जिंदगी के बारे में तो इन्होंने बैंगलोर के बिशप कॉटन बॉयज स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की और आगे सेंट जर्मन हाई स्कूल में अपनी आगे की की पढ़ाई जारी रखी कॉलेज आते-आते फिरोज को उनके दोस्तों और अन्य जानने वाले लोगों से उनके चाल ढाल लुक्स और ड्रेसिंग सेंस के कारण तारीफें मिलने लगी थी और उनके दोस्तों के बीच जब यह बातें चलने लगी कि उन्हें फिल्मों में काम करना चाहिए तो दिल के एक कोने में फिरोज को खुद पर विश्वास होने लगा और वह इस नई दुनिया के बारे में सोचने लगे इस तरह से आखिरकार वह 50 के दशक के मध्य में बंबई आ गए अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से अपनी प्रशंसा और तारीफ को सुनकर मायानगरी आए फिरोज खान भी हर किसी की तरह बॉलीवुड में हीरो बनने ही आए थे लेकिन अपने हिस्से का संघर्ष करने के बाद उनका कैरियर स्टंट फिल्मों से लेकर बी और सी ग्रेड की फिल्मों से शुरू हुआ सिनेमाई दुनिया में टिके रहने की सौगंध खाकर आए फिरोज खान ने ऐसी फिल्मों में काम करना इसलिए स्वीकारा क्योंकि कहीं ना कहीं उन्हें लग रहा था कि आगे उनका समय जरूर आएगा कम बजट और छोटे बैनर की फिल्मों को अपने उरूज की पहली सीढ़ी मान कर आगे बढ़ रहे फिरोज खान को हिंदी सिनेमा में अपना पहला काम साल 1956 में आई फिल्म हम सब चोर हैं मैं मिला इस फिल्म में वह कुछ पलों के लिए ड्राइवर के रोल में नजर आए थे बड़े-बड़े सितारों से सजी फिल्म हम सब चोर हैं में उनका किरदार काफी छोटा था लेकिन किसी तरह शुरुआत हो गई थी और अब फिरोज खान को यह सफर जारी रखने की जरूरत थी जिसके लिए उन्होंने जमाना और बड़े सरकार जैसी फिल्मों का सहारा लिया लेकिन पहचान अब भी दूर थी खैर साल 1959 में आई सुनील दत्त की फिल्म दीदी में फिरोज खान को नोटिस होने लायक रोल मिला इस फिल्म में बड़े-बड़े कलाकारों के बीच मधु नाम के नौकर के किरदार में उन्होंने कुछ समय के लिए ही सही पर अपनी जगह अवश्य बनाई घर से हीरो बनने चले फिरोज खान को कुछ सालों के संघर्ष के बाद साल 1960 में आई फिल्म घर की लाज में लीड किरदार निभाने का मौका मिला वीएम व्यास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में फिरोज खान के साथ निरूपा रॉय ने भी काम किया था लेकिन यहां

भी बजट और ऑडियंस ने फिरोज खान का साथ नहीं दिया और एक सशक्त किरदार में होने के बावजूद उनकी यह फिल्म भी पिछली बाकी फिल्मों की श्रेणी में ही शामिल होकर रह गई सफलता की तलाश में घूम रहे फिरोज खान को साल 1962 में हॉलीवुड फिल्म टर्जन गोज टू इंडिया में प्रिंस रघु कुमार का रोल निभाने का मौका मिला इस फिल्म में उनके साथ मुराद और सिमी ग्रेवाल जैसे अन्य भारतीय कलाकारों ने भी काम किया था इसी साल फिरोज खान को एक बार फिर फिल्म रिपोर्टर राजू में एक अच्छा किरदार मिला सफलता भले ही इस फिल्म में भी उनसे दूर रही लेकिन फिरोज खान खुश थे कि अब उन्हें एक अभिनेता के तौर पर लगातार अच्छा काम मिल रहा है भारतीय सिनेमा की स्टंड फिल्मों से लेकर हॉलीवुड तक अपनी मौजूदगी दर्ज करवा चुके फिरोज खान के करियर में 1965 का साल सबसे यादगार रहा इस साल उनके कैरियर की पहली बड़ी और सफल फिल्म ऊंचे लोग आई जिसमें उनके साथ उनके आइडल राजकुमार और अशोक कुमार काम कर रहे थे खैर इस फिल्म ने फिरोज को एक अलग ही स्तर की पहचान दिलाई और यहीं से उन्हें बड़े बैनर्स और बड़े बजट की फिल्में मिलने लगी इस तरह से फिरोज खान का फिल्मी कैरियर चल निकला इसी साल फिरोज खान को रामानंद सागर साहब की सुपरहिट फिल्म आरजू में भी काम करने का मौका मिला जो साल की चौथी सबसे सफल फिल्म रही इस फिल्म में फिरोज खान को रमेश नाम का किरदार किस तरह मिला इस बारे में भी एक काफी दिलचस्प किस्सा है दरअसल फिल्म आरजू में फिरोज खान के साथ काम करने वाले अभिनेता राजेंद्र कुमार ने उनको साल 1963 की फिल्म बहुरानी में देखा था और उन्हें फिरोज का काम बहुत पसंद आया था आरजू फिल्म के सेकंड लीड किरदार के लिए जब कुछ अभिनेताओं ने मना कर दिया तो राजेंद्र कुमार ने ही रामानंद सागर के सामने फिरोज खान का नाम रखा और सागर साहब उनकी यह बात मान भी गए थे इसी तरह एक किस्सा साल 1962 में आई फिल्म मैं शादी करने चला से भी जुड़ा हुआ है यह फिल्म पांच बहनों की कहानी है जिनके अपोजिट पांच अभिनेताओं को कास्ट करने की बात चल रही थी फिरोज खान को जब इस फिल्म के लिए फाइनल कर लिया गया था तो सेट पर एक दिन वह इस फिल्म में काम कर रही तबस्सुम के पास आए और कहा कि आप इस फिल्म लाइन में बहुत लंबे समय से काम कर रही हैं और इस फिल्म के डायरेक्टर रूप किशोरी से भी आपके बहुत अच्छे रिश्ते हैं तो आप उनसे बात करके मेरी जोड़ी आपके अपोजिट बनाने के लिए कह दीजिए तबस्सुम जी ने इसके लिए मना कर दिया क्योंकि उन्हें अपने डायरेक्टर से इस तरह की बात करना अच्छा नहीं लगता था तबस्सुम जी बताती हैं कि इस घटनाक्रम के बाद उनसे नाराज फिरोज साहब ने उनके साथ कभी काम नहीं किया इस साल एक तरफ जहां फिरोज खान का करियर तेजी से आगे बढ़ने लगा था तो वहीं इसी साल सुंदरी खान नाम की एक एयर हॉस्टेस से इन्होंने प्रेम विवाह कर लिया सुंदरी खान से फिरोज के दो संतानें हैं जिनका नाम है लैला खान और फर खान बहरहाल फिरोज खान का कैरियर अब साल दर साल ऊंचाइयों की तरफ बढ़ने लगा और इसी दौरान उन्हें साल 1967 में अपनी पसंदीदा अभिनेत्री नरगिस के साथ भी काम करने का मौका मिला इस फिल्म का नाम रात और दिन रहा जो नरगिस जी के कैरियर की आखिरी फिल्म साबित हुई खैर साल 1969 में यश चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी फिल्म आदमी और इंसान के लिए फिरोज खान को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर की कैटेगरी में फिल्म फेयर अवार्ड हासिल हुआ लेकिन इस समय तक विदेशी लोकेशंस और रेसिंग के शौकीन फिरोज समझ गए थे कि उन्हें दूसरे बैनर्स के तले वह सब कुछ करने का मौका नहीं मिलेगा जो वह इस अप्रतिम सिनेमाई दुनिया में करना चाहते हैं और इसलिए उन्होंने डायरेक्शन में हाथ आजमाने के लिए उसकी बारीकियां सीखनी शुरू कर दी और अप्रैल 1972 में इनके डायरेक्शन में पहली फिल्म अपराध रिलीज हुई जिससे यह प्रोड्यूसर के तौर पर भी जुड़े हुए थे रेसिंग सींस के साथ जर्मनी में शूट हुई इस इस फिल्म में फिरोज खान के अपोजिट मुमताज ने काम किया था फिर आया साल 1974 जिसमें इनकी छह फिल्में रिलीज हुई थी

जिसमें भगत धन्ना जाट नाम की पंजाबी फिल्म भी शामिल रही इसके अलावा खोटे सिक्के में इनके काऊबी किरदार को काफी पसंद किया गया इसके अगले ही साल 1975 में फिरोज खान के डायरेक्शन और प्रोडक्शन में बनी दूसरी फिल्म धर्मात्मा रिलीज हुई इस फिल्म से फिरोज खान ने बड़े कलाकारों के भव्य रूप से पर्दे पर लाने का जुनून सफल हुआ यह अफगानिस्तान में शूट हुई भारत की पहली फिल्म भी रही इस फिल्म में लीड एक्ट्रेस के रोल में नजर आई हेमा मालिनी की खूबसूरती को फिरोज खान ने पर्दे पर कुछ इस तरह से सामने रखा था कि उसे देखकर उस समय के दर्शक तो छोड़िए खुद कई दिग्गज प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी हैरान हो गए थे धर्मात्मा म्यूजिक सुपरहिट रही और यह फिरोज खान के प्रोडक्शन हाउस की पहली ब्लॉकबस्टर भी साबित हुई धर्मात्मा को मिले रिस्पांस को देखकर फिरोज साहब ने अपनी अगली फिल्म कुर्बानी की घोषणा कर दी जिसके लिए कहा जाता है कि फिल्म के सेकंड लीड का किरदार पहले अमिताभ बच्चन को दिया गया था लेकिन जब बात नहीं बनी तो फिरोज खान ने विनोद खन्ना को कास्ट कर लिया गौर तलब है कि विनोद खन्ना और फिरोज साहब की दोस्ती जो इस फिल्म से शुरू हुई थी वह आगे मरते दम तक बरकरार रही विनोद खन्ना और फिरोज खान की जिंदगी कुछ इत्तेफाक से भी जुड़ी रही जिनमें से एक यह है कि इन दोनों अभिनेताओं ने एक ही तारीख पर पर इस दुनिया को अलविदा कहा था बहरहाल लगभग 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म में फिरोज खान ने अपनी हर मंसा को मूर्त रूप दे दिया था इटालियन एक्शन क्राइम फिल्म द मास्टर टच पर आधारित इस फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा जिसके एक गीत आप जैसा कोई इंग्लिश म्यूजिशियन बिद्दू अपैया ने पाकिस्तानी सिंगर नाजिया हसन को बॉलीवुड में ब्रेक दिया था खैर इस दौरान फिरोज खान अपने बैनर की फिल्मों के लिए पैसा जुटाने हेतु अन्य बैनर की औसत फिल्मों में भी काम करते रहे आगे चलकर इन्होंने अपनी एक पुरानी कहानी में बदलाव करके उसे जांबाज के नाम से बनाया जो कि साल 1986 में रिलीज हुई लेकिन इस दौरान उनकी निजी जिंदगी में उथल-पुथल चल रही थी क्योंकि उनकी पत्नी सुंदरी ने उन्हें डिवोर्स दे दिया था गौरतलब है कि एक एयर हॉस्टेस से प्रेम विवाह के टूटने का कारण भी एक और एयर हॉस्टेस रही जिनका नाम ज्योतिका धनराज था इसके अलावा फिरोज खान का नाम समय दर समय उस दौर की कुछ अन्य बड़ी एक्ट्रेसेस के साथ भी जोड़ा गया था जिनमें मुमताज और जीनत अमान का नाम प्रमुखता से लिया जाता था खैर जमाज के बाद फिरोज खान ने अपनी अगली फिल्म यलगार पर काम शुरू कर दिया लेकिन इसी दौरान एक दिन उन्होंने साउथ इंडस्ट्री की मशहूर फिल्म नायकन्यक को छोड़कर नायकन्यक खान ने अपने जिगरी दोस्त विनोद खन्ना को

कास्ट किया सितंबर 19 1988 में रिलीज हुई यह फिल्म अपने संगीत अभिनय और उस दो मिनट के इंटीमेट सीन की वजह से आज भी चर्चाओं में बनी रहती है इस फिल्म के दो गाने आज फिर तुम पर प्यार आया है और चाहे मेरी जान तू ले ले को अरिजीत सिंह जो ब नौटियाल और तुलसी कुमार की आवाज में रीक्रिएट भी किया जा चुका है दयावान की सफलता के बाद फिरोज खान ने एक बार फिर से यलगार पर काम शुरू किया लेकिन इस बार कहानी और कास्ट बदल गई थी याद रहे कि इस फिल्म में मुकेश खन्ना ने फिरोज खान के पिता का किरदार निभाया था जो उम्र में फिरोज साहब से 21 साल छोटे हैं साल 1992 में आई फिल्म यलगार बॉक्स ऑफिस पर वो सफलता हासिल नहीं कर पाई जिसकी फिरोज खान को आदत पड़ गई थी लिहाजा उन्होंने इस फिल्म के बाद एक लंबा ब्रेक ले लिया लगभग 6 सालों तक फिल्मों से दूर रहने के बाद अपने बेटे फरदीन खान को लॉन्च करने के लिए फिरोज खान ने फिर से सिनेमा का रुख लिया लेकिन इस बार सिर्फ कैमरे के पी पीछे ही रहे यह फिल्म थी साल 1998 की प्रेम अगन हालांकि इसका भी हाल यलगार से जुदा नहीं रहा और फ्लॉप साबित हुई इसके बाद साल 2003 में उन्होंने अपने बेटे के करियर को संवारने के लिए आखिरी कोशिश के रूप में जा नशी का निर्माण किया लेकिन यहां भी सफलता उनसे कोसों दूर रही अपने आजाद खयाली और बेबाकी के लिए प्रसिद्ध फिरोज खान मई 2006 में उस समय खबरों में आ गए जब उन्होंने अपने भाई अकबर खां की फिल्म ताजमहल को प्रमोट करने के दौरान पाकिस्तानी मुस्लिमों के खिलाफ बयान दे दिया जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने भविष्य में उन्हें पाकिस्तान आने से बैन कर दिया था लंग कैंसर से जूझ रहे फिरोज खान की आखिरी फिल्म वेलकम रही जिसमें इनके किरदार आरडीएक्स को काफी पसंद किया गया था कहा जाता है कि फिरोज खान

अपने आखिरी दिनों में फिल्म कुर्बानी के सीक्वल की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे लेकिन स्क्रिप्ट पूरी होने से पहले ही 27 अप्रैल 2009 को उन्होंने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया और उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार बेंगलोर में उनकी मां की कब्र के पास ही उन्हें दफन कर दिया गया बात करें फिरोज खान को मिले पुरस्कारों की तो उन्हें साल 1971 में फिल्म आदमी और इंसान के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के फिल्म फेयर अवार्ड के साथ-साथ साल 2001 में फिल्म फेयर के द्वारा ही लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया इसके अलावा साल 2004 में जानाश फिल्म में उनके शानदार खल नायकी के लिए उन्हें आइफा के द द्वारा बेस्ट एक्टर इन नेगेटिव रोल का अवार्ड भी प्रदान किया गया इसके तकरीबन 4 साल बाद जी सिने अवार्ड्स की तरफ से भी फिरोज साहब को लाइफ टाइम अचीवमेंट से नवाजा गया था तो यह थी बॉलीवुड फिल्मों के पहले स्टाइल आइकॉन और हैंडसम काउ बॉय फिरोज खान पर हमारी एक विशेष प्रस्तुति उम्मीद है कि यह वीडियो आपको बेहद ही पसंद आई होगी अगर वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक और शेयर भी कर दें तथा ऐसे ही दिलचस्प वीडियोस की नोटिफिकेशन पाने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन में ऑल का बटन दबा दें धन्यवाद

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