बेखुदी में सनम उठ गए जो कदम आ गए आज ये दास्ता है भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे और सुनहरे दौर की एक ऐसी अभिनेत्री की जिसकी खूबसूरती दिलकश अदाओं ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ पूरे विश्व को अपना दीवाना बनाया आओ हुजूर तुमको सितारों में ले च बला की खूबसूरत इस अभिनेत्री ने भारतीय हिंदी सिनेमा में अपनी खूबसूरती और मनमोहक अंदाज से सजे अभिनय के जादू से हिंदी सिनेमा का वो मुकाम हासिल किया जिसको आज तक इनके नाम से ही याद किया जाता है लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इतनी खूबसूरत और आकर्षित इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेत्री को अपने जीवन में प्यार करने की वो सजा मिली जिसकी वजह से यह अभिनेत्री जिंदगी भर तड़पती रही घर परिवार के लिए आओ मेरे गरीबा अब और ना तरसा दोस्तों जिस प्यार को हासिल करने के लिए इस अभिनेत्री को जिंदगी में अपना स्टारडम शोहरत रुतबा सब कुछ छोड़कर चुकानी पड़ी थी जिंदगी की व भारी कीमत जिसके दर्द से आज तक बाहर नहीं आ पाई है यह अभिनेत्री और क्या आप जानते हैं कि जिस प्रेमी के प्यार में पागल होकर यह अभिनेत्री भिड़ गई भारतीय हिंदी सिनेमा के उस परिवार से जिसकी बदौलत हिंदी सिनेमा का वजूद जिंदा है उसी प्रेमी ने इस खूबसूरत अभिनेत्री की जिंदगी को बना दिया जहन्नुम तुम अपने दिल को हल्का करने के लिए चाहो तो मुझे धोखेबाज वादे का झूठा खुदगर्ज जो जी मैं आया कह सकतीं मैं सुन लूंगा दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री ने कैसे कपूर खानदान में अपने प्यार की वो आग लगाई
कि इस परिवार की तीन पीढ़ी खड़ी हो गई एक दूसरे के सामने मुझे इस घर में कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा कोई तुम्हे स्वीकार करे या ना करे मैं तुम्हें स्वीकार करता हूं बदाश की भी एकद होती है मुझे किसी की परवा नहीं आओ क्यों इस परिवार में इस अभिनेत्री की खातिर दादा बाप बेटा हो गए एक दूसरे के खिलाफ अगर अगर इस लड़के ने अपनी मर्जी से उस लड़की के साथ शादी की तो मैं कह देता हूं मुझे घर छोड़कर जाऊंगा 19 साल अपने पति से दूर रहने वाली इस खूबसूरत और अभागन अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था के इस अभिनेत्री को अपनी दोनों बेटियों को हिंदी सिनेमा की हीरोइन बनाने के लिए लड़ना पड़ा अपने ही परिवार से इज्जत और बेइज्जती का युद्ध अब चले जाइए यहां से आप मेरी जिंदगी में आग लगाने आए हैं मुझे बदनाम करना चाहते हैं और क्यों आगे चलकर उन्हीं बेटियों के जीवन को बर्बाद कर दिया इस अभिनेत्री ने क्यों इस अभिनेत्री की बड़ी बेटी को नीलाम कर दिया गया सुहाग रात के दिन तो
दूसरी बेटी ने बदल लिया अपना धर्म बताएंगे और भी बहुत कुछ इस शानदार यादगार और किस्मत की मारी इस अभिनेत्री की जिंदगी के बारे में आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक अकेले हैं चले आओ जहां नमस्कार आदाब आभार दोस्तों आज हम अपने शो में बात करने जा रहे हैं एक ऐसी नायिका की जिसने हिंदी सिनेमा के रुपहले पर्दे पर अपने छोटे से फिल्मी सफर से वो छाप छोड़ी जिसको लोग आज तक याद करते हैं अपने लाजवाब अभिनय मनमोहक खूबसूरती दिलकश अदाओं के आकर्षण में इस अभिनेत्री ने हिंदी सिनेमा में वो नाम वो पहचान बनाई जिसको आज तक याद किया जाता है बबीता शिवदसानी यानी बबीता कपूर के नाम से तुमसे ओ दीवाने कभी मोहब्बत ना मैंने करनी थी तुमसे ओ दीवाने कौन थी बबीता शिवदसानी कहां से यह आई थी किस परिवार से इनका ताल्लुक रहा यह सब आपको मैं बताऊं उससे पहले हम एक नजर डाल लेते हैं बबीता के परिवार पढ़ाई लिखाई और शुरुआती जीवन पर फटू पे मात जी की आए हाए भीगी नमस्कार आप सभी का स्वागत है बॉलीवुड नोवल के इस एपिसोड में कजरा मोहब्बत वाला अखियों में ऐसा डाला कजरे ने बबीता शिवदसानी का जन्म 20 अप्रैल 1948 को पाकिस्तान के करांची में एक सिंधी परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम हरीश शिवदसानी था जो भारतीय हिंदी सिनेमा में एक जाना ना चेहरा रही हैं बबीता की मां का नाम बर्ब था जो कि एक ब्रिटिश ईसाई थी बर्ब ने दो बेटियों बबीता और मीना को जन्म दिया था जहां बबीता आगे चलकर खूबसूरत अभिनेत्री बनी तो दूसरी बहन एक फैशन डिजाइनर बनी तो वहीं मशहूर दूसरी सफल अभिनेत्री साधना जी रिश्ते में बबीता की चचेरी बहन लगती है तेरा मेरा प्यार अमर क्यों भारत पाकिस्तान विभाजन के दौरान इनके पिता पाकिस्तान को छोड़कर हिंदुस्तान चले आए थे चूंकि पिता सिनेमा से जुड़े हुए थे इसलिए हिंदुस्तान में भी हरि शिवदसानी हिंदी सिनेमा में अभिनय के क्षेत्र में लगातार काम करते रहे चूंकि पिता पहले से ही अभिनेता रहे इसलिए इनके घर पर अक्सर फिल्म अभिनेता
और फिल्म निर्माताओं का आना जाना लगा रहता था बबीता भी अपने पिता और चचेरी बहन को फिल्मी पर्दे पर काम करते हुए देखकर खुद भी हिंदी सिनेमा में जाने का मन बना चुकी थी और हिंदी सिनेमा में आने के लिए बबीता शिवदसानी को कभी भी कोई भी खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी और मात्र 18 साल की उम्र में बबीता को हिंदी सिनेमा में कदम रखने का मौका मिल गया दरअसल बबीता के घर पिता हरि शिवदसानी की वजह से अक्सर फिल्मी हस्तियां मिलने आया जाया करती थी और इसी मुलाकात के दौर में एक बार फिल्म निर्माता जीपी सिप्पी बबीता के घर आए और यहां जीपी सिप्पी की नजर पहली बार बबीता के ऊपर पड़ी बबीता के रंग रूप और खूबसूरती से जीपी सिप्पी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कुछ भी नहीं सोचा और बबीता को अपनी फिल्म राज के लिए राजेश खन्ना के साथ एक अभिनेत्री के तौर पर साइन कर लिया लेकिन दोस्तों राज फिल्म को बनने में कुछ समय ज्यादा लग गया था लिहाजा बबीता को इस फिल्म से पहले फिल्म 10 लाख में काम करने का मौका मिल गया गरीबों की सुन वो तुम्हारी सुनेगा गरीबों और साल 1966 में रिलीज हुई यही फिल्म बबीता के करियर की पहली फिल्म भी बनी हालांकि बबीता की यह फिल्म उनको वह पहचान नहीं दिला पाई जिसका सपना बबीता की आंखों में था लग जा गले दिल मा कहां रूट के चली इस फिल्म की असफलता के बाद 1968 में बबीता की पहली साइन की हुई फिल्म राज भी रिलीज हुई दिल संभाले संभलता नहीं आज को पास आने लेकिन दुर्भाग्यवश इस फिल्म का भी हाल पहली फिल्म जैसा ही रहा और यह फिल्म भी कोई कमाल नहीं दिखा पाई फिल्म भले ही नहीं चली लेकिन बबीता को और उन के अभिनय खूबसूरती को दर्शकों ने खूब पसंद किया मेरे हमराज मुझे तुमने वही लगातार दो फिल्मों की असफलता के बाद बबीता एक बार फिर से नजर आई फिल्म अभिनेता जितेंद्र के साथ फिल्म फर्ज में तुमसे ओ दीवाने कभी मोहब्बत मैंने करनी थी मगर मेरे दिल यह फिल्म उस दौर में एक सफल फिल्म बनी लेकिन इस फिम की कामयाबी का सारा श्रेय और वाहवाही जितेंद्र के सर चली गई थी मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहे यार करू चाहे गुलो के साथ लेकिन बबीता और जितेंद्र की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया जिसका नतीजा यह हुआ कि जितेंद्र और बबीता ने आगे चलकर भी कई फिल्मों में एक साथ काम किया हम तो तेरे आशिक है सदियों पुराने हम तो तेरे इधर अब बबीता को अब एक हीरोइन के तौर पर लोग पसंद करने लगे थे और इसी लोकप्रियता के चलते अब बबीता नजर आई
बॉलीवुड के सबसे खूबसूरत हैंडसम एक्टर शशि कपूर के साथ फिल्म हसीना मान जाएगी मैं तुम्हें रुकना पड़ेगा मेरी आवाज सुन इस फिल्म में बबीता ने अपने अभिनय की वो छाप छोड़ी जिसको आज तक लोग भुला नहीं पाए हैं बबीता ने इस फिल्म में शानदार और यादगार अभिनय किया था इस फिल्म के सभी गीत बेहद लोकप्रिय थे जिनको आज भी सुना जाता है ओ दिल भर जानि तेरे हैं हम तेरे यह फिल्म उस समय की उस साल की 10 सुपरहिट फिल्मों में से एक फिल्म थी इसके बाद बबीता के फिल्मी सफर में आई वो फिल्म जिसकी कामयाबी ने बबीता को हि सिनेमा की एक स्टार नायिका बना दिया था और वो फिल्म थी डोली डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के इस फिल्म में बबीता को एक बार फिर से साथ मिला था राजेश खन्ना का यह फिल्म बबीता के साथ-साथ राजेश खन्ना के शुरुआती दिनों की सोलो हिट फिल्म मानी जाती है इस फिल्म में बबीता की अदाकारी को खूब पसंद किया गया देखिए आप तो पढ़े लिखे नौजवान है सोचिए कि एक ना एक दिन यह पता चल ही जाएगा कि मेरे पिता बेगुनाह हैं फिर आप बड़ों की बातों में आकर मेरी खुशियों पर पानी फेर कर क्यों जा रहे हैं दोस्तों यह वही फिल्म है जिसमें पहली बार बबीता की बहन मीना को बतौर एक ड्रेस डिजाइनर के तौर पर काम करने का मौका मिला था इस फिल्म में बबीता ने जितनी भी ड्रेसेस पहनी थी व सभी इनकी बहन मीना के द्वारा ही बनाई गई थी और आगे भी भविष्य में मीना ने बबीता के लिए कई और फिल्मों में ड्रेस डिजाइनर का काम किया था डोली फिल्म की कामयाबी के बाद बबीता को अब कई और बड़े-बड़े फिल्म निर्माताओं की फिल्मों के ऑफर्स आ गए और उसी कड़ी में अब बबीता नजर आई हिंदी सिनेमा के आज तक के सबसे सफल अभिनेता जुबली सुपरस्टार राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म अनजाना में के गीत सावन गाए आए बबीता की जोड़ी राजेंद्र कुमार के साथ भी खूब पसंद की गई अब बबीता की फिल्म अच्छा खासा काम कर रही थी इनको फिल्म निर्माता अपनी-अपनी फिल्मों की हीरोइन बनाना चाहते थे जिसका नतीजा यह हुआ कि बबीता उस दौर के सभी मशहूर बड़े-बड़े फिल्म अभिनेताओं के साथ लीड रोल में अभिनय करते हुए देखी जाने लगी बबीता ने अपने समय में शमी कपूर राजेंद्र कुमार राजेश खन्ना शशि कपूर धर्मेंद्र जितेंद्र संजीव कुमार संजय खान जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और बबीता ने किस्मत तुमसे अच्छा कौन है हसीना मान जाएगी राज डोली एक हसीना दो दीवाने औलाद कल आज और कल बनफूल जैसी हिट और सुपरहिट फिल्म भारतीय हिंदी सिनेमा को दी जिसके लिए आज भी बबीता को याद किया जाता है क्यों ना हो जिस भगवान ने सूरत दी है उसने मिजाज भी दिया है दोस्तों फिल्मों की कामयाबी ने बबीता को स्टारडम शोहरत रुतबा सब कुछ बहुत जल्दी ही उनकी झोली में डाल दिया था बबीता के पास इतना काम था कि वह बड़ी-बड़ी फिल्मों के ऑफर्स को भी नकार दिया करती थी बबीता अब कामयाबी के सातवें आसमान पर थी बबीता को अब दुनिया जानने लगी थी अब बबीता की मेहनत का असर देखने लगा था सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन वो कहते हैं ना कि जो किस्मत की लकीरों में लि होता है होता वही है तो ऐसा ही कुछ खूबसूरत अभिनेत्री बबीता की जिंदगी में हुआ कि इनकी जिंदगी में सब कुछ एकदम से बदल गया तुम्हें क्या पता मेरे मन में भी कितने खाव है दरअसल साल 1971 बबीता के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था या आप यूं समझ लीजिए कि दोस्तों यह साल बबीता की जिंदगी की बर्बादी की शुरुआत लेकर आया था साल 1971 में बबीता ने मशहूर फिल्म अभिनेता
और कपूर खानदान के लड़के रणधीर कपूर के साथ एक फिल्म कल आज और कल में काम किया और कहा जाता है कि इसी फिल्म से शुरू हुई थी बबीता और रणधीर कपूर की प्रेम कहानी आई लव यू माय डार्लिंग आई लव यू मैं तुम्हें अपना जीवन साथी बनाना चाहता हूं इस फिल्म में बबीता और रणधीर कपूर के अलावा रणधीर कपूर के पिता राज कपूर और दादा पृथ्वीराज कपूर भी थे और इस फिल्म में इस तरह कपूर खानदान की तीन पीढ़ी एक साथ काम कर रही थी लेकिन किस्मत की मारी बबीता को क्या पता था कि आगे चलकर उनको इसी खानदान से लंबी लड़ाई लड़नी होगी इस फिल्म के दौरान बबीता रणधीर की नजदीकियां ऐसी बढ़ी कि दोनों ने हमेशा के लिए शादी के बंधन में बंधने का निश्चय कर लिया लेकिन यह शादी इतनी आसान नहीं थी क्योंकि बबीता सिंधी परिवार से आती थी और दूसरा कपूर खानदान के चिरागों की शादी किसी भी फिल्म अभिनेत्री से कराना पू खानदान की परंपराओं के खिलाफ था लेकिन रणधीर और बबीता तो तय कर चुके थे शादी की बात को ये दुनिया वालों की आवाज तो बंद करनी ही पड़ेगी अब बंद करने का एक ही रास्ता है क्या तेरी मेरी शादी अच्छा जी लिहाजा एक दिन रणधीर कपूर ने अपने रिश्ते और शादी की बात अपने पिता राज कपूर के सामने रख दी यह है मेरी गर्लफ्रेंड मोनिका जिसे मैं प्यार करता हूं और शादी करना चाहता हूं रणधीर कपूर की इस बात से पूरा परिवार बेहद नाराज हुआ उन्होंने रणधीर के इस फैसले को नकारते हुए कहा आज तक इस खानदान में किसी ने मोहब्बत की है जो तुम मोहब्बत करने चले हो शरीफ खानदान के लोग शादी करते हैं मोहब्बत नहीं करते किस परिवार में वही होगा जो इसकी परंपरा है हम बबीता को अपनी फिल्मों की हीरोइन तो बना सकते हैं लेकिन इस घर की बहू कभी नहीं और इस फरमान के साथ ही इस परिवार में शुरू हो गया परंपरा का युद्ध अगर अगर इस लड़के ने अपनी मर्जी से उस लड़की के साथ शादी की तो मैं कह देता हूं मैं ये घर छोड़कर चला जाऊंगा इधर बबीता भी रणधीर से अलग नहीं होना चाहती थी नहीं राजेश क्या फायदा मुझे जाने दो मुझे इस घर में कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा लिहाजा इन सभी बातों का अंजाम यह हुआ कि बबीता की खातिर कपूर खानदान में दादा बाप बेटा यह तीनों एक दूसरे के खिलाफ हो गए और बबीता के लिए इन तीनों के बीच नफरत और गुस्से की दीवार खड़ी हो गई जहां रणधीर प्यार की खातिर पूरे परिवार के खिलाफ अकेले ही लड़े थे और खड़े थे और परिवार का यह युद्ध काफी लंबे समय तक चलता रहा कोई तुम्हें स्वीकार करे या ना करे मैं तुम्हें स्वीकार करता हूं बदाश की भी एक हद होती है मुझे किसी की परवाह नहीं आओ लेकिन बाप और दादा कब तक पत्थर बने रहते लिहाजा एक दिन बाप और दादा अपने बेटे और पोते की जिद्द के आगे झुक गए और बबीता के साथ शादी करने की इजाजत दे दी गई लेकिन अभी यह शादी संपूर्ण नहीं हुई थी थी क्योंकि परिवार ने शादी कराने के लिए बबीता के आगे एक ऐसी शर्त रख दी जिसको सुनकर बबीता को बेहद दुख हुआ था कपूर खानदान ने बबीता से कहा कि रणधीर से शादी करने के लिए उनको हमेशा-हमेशा के लिए हिंदी सिनेमा को भूलना होगा वो कभी भी किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी किस्मत की मारी बबीता रणधीर से बेहद प्यार करती थी लिहाजा बबीता ने उनकी सभी शर्तों को मान लिया और हमेशा-हमेशा के लिए हिंदी सिनेमा को छोड़ने के लिए अलविदा कह दिया बबीता ने जिस वक्त यह फैसला लिया था उस वक्त बबीता करियर के टॉप पायदान और मशहूर लोकप्रिय अभिनेत्री के तौर पर प्रसिद्ध थी लेकिन बबीता ने प्यार की खातिर अपनी जिंदगी के फिल्मी सफर को यही छोड़ते हुए अंदरूनी दुखी मन के साथ 6 नवंबर 1971 को बबीता और रणधीर कपूर ने शादी कर ली और अब बबीता शिवदसानी से बन गई बबीता कपूर फूलों का चेहरा बांधने के लिए आज कपूर रणधीर कपूर को ला रहे हैं बेहद शानदार तरीके से यह शादी हुई इस शादी में हिंदी सिनेमा के कई नामी ग्रामी अभिनेता
और अभिनेत्रियां शरीक हुए बबीता ने अपने हिंदी सिनेमा के सफर में मात्र 19 फिल्में ही की और इसके बाद इनका फिल्मी सफर यहीं खत्म हो गया बबीता की आखिरी फिल्म सोने के हाथ थी जो साल 1973 में रिलीज हुई थी सहेली पूछू एक बहेली सहेली पूछो एक दोस्तों जिस प्यार और शादी के लिए बबीता ने अपना स्टारडम तक छोड़ दिया उसी प्यार और शादी के संबंध ने बबीता की जिंदगी में समस्याओं की एक गहरी नीव रखने का काम किया बबीता का हिंदी सिनेमा का फिल्मी सफर तो पहले ही अंधकार में डूब चुका था बबीता जिस उम्मीद के साथ कपूर खानदान की बहू बनी थी अब उन उम्मीदों के टूटने का समय नजदीक आ चुका था दोस्तों शादी के बाद बबीता को कभी भी पूर खानदान के पैथिक घर में नहीं रखा गया था उनको अलग एक घर में जगह दी गई थी रणधीर अक्सर देर रात पार्टीज करते और घर भी लेट आने जाने लगे लेकिन जब बबीता उनकी इन सब चीजों का विरोध करती तो बबीता और रणधीर के बीच झगड़े हो जाते थे और इस बात को खुद रणधीर कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में लोगों से साझा किया लेकिन सूत्रों की माने तो इस झगड़े की एक वजह यह भी रही थी कि बबीता अपने क्रिश्चियन धर्म के प्रति काफी कट्टर थी और लोगों का कहना था कि बबीता ने अपने पति रणधीर को भी अपने धर्म की तरफ धकेल दिया था और जब यह बात राज कपूर को पता चली तो उन्होंने रणधीर से दूरियां बना ली थी इधर रणधीर का फिल्मी सफर भी अब खास नहीं चल रहा था उनको फिल्में भी नहीं मिल रही थी लिहाजा रणधीर और बबीता के झगड़े बढ़ते चले गए और एक दिन रणधीर बबीता को अकेले छोड़कर अपने पिता राज कपूर के घर वापस लौट आए और बबीता इस तरह अकेली रहे ग जिस प्यार के लिए बबीता ने सब कुछ छोड़ा था उसी प्यार ने आज बबीता की यह हालत कर दी और बेहद दुख तकलीफ से भरे हालातों में उन्हें अकेला छोड़ दिया था तुम अपने दिल को हल्का करने के लिए चाहो तो मुझे धोखे बाज वादे का झूठा खुद गर्ज जो जी में आया कह सकती मैं सुन लूंगा इसके बाद रणधीर शराब के नशे में रहने लगे क्योंकि बबीता तो पहले ही हिंदी सिनेमा छोड़ चुकी थी और इधर रणधीर में रहने लगे तो घर में आर्थिक तंगी भी पैर पसारना शुरू कर चुकी थी और इसी तंगहाली में 25 जून साल 1974 में बबीता ने एक बेटी करिश्मा कपूर को जन्म दिया जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बनी नीली नीली आंखें मेरी मैं क्या करूं गोरे गोरे गाल मेरे मैं क्या पहली बेटी के जन्म के बाद बबीता ने 21 सितंबर साल 1980 को एक और बेटी करीना कपूर को जन्म दिया और इनकी ये बेटी भी आगे चलकर बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस बनी बेबो मैं बेबो दिल मेरा लेलो दिल देने आई लेलो बेटियां बड़ी हो रही थी लेकिन रणधीर कपूर की आदत नहीं बदली इधर बबीता बच्चों की किसी तरह परवरिश करने में जुटी हुई थी लेकिन बेटियों को एक अच्छी जिंदगी दे पाना संभव नहीं हो पा रहा था बबीता इन तकलीफ देह हालातों से टूट रही थी वो थक हार चुकी थी पति रणधीर के रवैए ने बबीता को अंदर तक तकलीफ में धकेल दिया था लिहाजा एक दिन बबीता ने रणधीर को घर से निकल जाने को कह दिया और साल 1988 को यह दोनों बिना तलाक दिए अलग हो गए बेहद दुखत जिंदगी में अब बबीता के सामने दोनों बेटियों की जिम्मेदारी थी बबीता अपनी दोनों बेटियों को हिंदी सिनेमा की टॉप अभिनेत्री बनते हुए देखना चाहती थी जबकि बबीता को पता था कि कपूर खानदान की कोई भी बेटी फिल्मों में काम नहीं कर सकती उसके बावजूद बबीता किसी की भी कोई परवाह किए बगैर इसी दिशा में काम करते हुए बबीता ने अपनी बड़ी बेटी करिश्मा कपूर को साल 1991
में फिल्म प्रेम कैदी से लोगों के सामने लॉन्च किया और आगे चलकर यही बेटी हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेस बनी सोना कितना सोना है सोने जैसा तेरा मन सुन जरा सुन क्या कह इसके बाद बबीता ने अपनी दूसरी बेटी करीना कपूर को भी फिल्म रिफ्यूजी के जरिए हिंदी सिनेमा में लॉन्च किया और करीना भी करिश्मा कपूर की तरह हिंदी सिनेमा की खूबसूरत और टॉप की हीरोइन बनी मैं हीरोइन हूं रो हू बबीता ने अपनी दोनों बेटियों के करियर को बनाने के लिए अकेले ही जी तोड़ मेहनत की थी बबीता नहीं चाहती थी कि उनकी बेटियां भी उनकी तरह अपने फिल्मी सफर को छोड़कर पाई पाई को मोहताज हो जाए दोस्तों यह कहा जाता है कि बबीता की ही हिम्मत थी उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी बेटियों को सफलता के शिखर पर पहुंचाया था लेकिन दोस्तों शायद बबीता की जिंदगी का दुख कम नहीं बल्कि और बढ़ने वाला था क्योंकि जैसे ही बबीता कपूर की खुद की निजी जिंदगी काफी खराब और दुख भरी चल रही थी वैसी ही जिंदगी इनकी बेटी की भी होने वाली थी वह भी खुद बबीता के एक गलत फैसले की वजह से दरअसल करिश्मा कपूर अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन से प्यार करती थी दोनों शादी करना चाहते थे और दोनों परिवार की रजामंदी के साथ इन दोनों की सगाई भी हो गई थी लेकिन रिश्ता इतना आगे बढ़ने के बाद बबीता के एक फैसले ने सब कुछ बर्बाद कर दिया दरअसल अमिताभ बच्चन का उन दिनों फिल्मों में अच्छा काम नहीं चल रहा था उनको व्यापार में काफी नुकसान हुआ था जिसकी वजह से अमिताभ बच्चन आर्थिक तंगी में आ गए थे और उधर अभिषेक बच्चन भी फिल्मों में वह नाम शोहरत हासिल नहीं कर पा रहे थे लिहाजा इन सब बातों को देखते हुए बबीता ने अंतिम समय में इस सगाई को तोड़ दिया हालांकि जया बच्चन और अमिताभ बच्चन ने इस रिश्ते को बनाए रखने की काफी कोशिशें की लेकिन शायद करिश्मा का जीवन तो अपनी मां के फैसले की भेंट चढ़ना लिखा था बबीता चाहती थी कि उनकी बेटी किसी रहीस खानदान दन में शादी करके आगे बढ़ जाए और हुआ भी कुछ ऐसा ही सगाई टूटने के बाद मात्र एक साल के अंदर ही मां की बात मानकर करिश्मा ने दिल्ली के एक बड़े बिजनेसमैन संजय कपूर से 29 सितंबर साल 2003 को शादी कर ली हालांकि करिश्मा कपूर के पति संजय कपूर की यह दूसरी शादी थी इस शादी से करिश्मा को बेटी समायरा और बेटा खिन हुए कुछ समय तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन कुछ सालों के बाद करिश्मा कपूर और संजय की बीच झगड़े की बात सामने आने लगी और यह बात इतनी बढ़ गई कि करिश्मा कपूर ने शादी के 13 साल बाद अपने पति संजय कपूर से तलाक ले लिया करिश्मा कपूर ने संजय कपूर के ऊपर कई गंभीर आरोप भी लगाए करिश्मा ने बताया कि उनके पति ने उनको सुहाग रात के दिन ही नशे में अपने दोस्तों के आगे नीलाम कर दिया था उन्होंने बताया कि उनके पति का किसी और महिला से संबंध है और करिश्मा ने यह भी
बताया कि उनके पति उनको मारते पीटते थे और मारपीट से मिले जख्मों को करिश्मा मेकअप के जरिए लोगों से छुपाती थी तो वहीं संजय कपूर ने भी करिश्मा कपूर और उनकी मां के ऊपर इल्जाम लगाए उन्होंने कहा कि मेरी सांस यानी कि बबीता कपूर उनकी निजी जिंदगी में ज्यादा हस्तक्षेप करती हैं संजय ने बताया कि बबीता अपने महंगे शौक और जरूरत सभी करिश्मा कपूर के पैसों पर पूरा किया करती थी और इन्हीं इल्जाम के बीच करिश्मा कपूर की जिंदगी अपने नी खुद की मां बबीता कपूर के गलत फैसले की भेंट चढ़ गई बबीता को अपने इस फैसले के लिए जिंदगी भर शायद अफसोस रहेगा अब चले जाइए यहां से आप मेरी जिंदगी में आग लगाने आए हैं मुझे बदनाम करना चाहते हैं तो वहीं बबीता की दूसरी बेटी करीना कपूर ने अपनी मर्जी से फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे सैफ अली खान से धर्म बदलकर शादी कर ली हालांकि सैफ अली खान करीना कपूर से उम्र में 13 साल बड़े हैं से नजर मिली तो ज बबीता कपूर की जिंदगी उनकी शादी के बाद से ही काफी दुख और तकलीफ में रही बबीता का हमेशा अपने ससुराल वालों के प्रति कई सालों तक कड़वाहट बनी रही कड़वाहट इतनी ज्यादा थी कि साल 2006 में बबीता के देवर यानी कि ऋषि कपूर की बेटी रिदमा की शादी हुई तो तब भी बबीता और उनकी दोनों बेटियां शादी में नहीं पहुंची दोस्तों बबीता ने जब रणधीर कपूर से शादी करने के दौरान अपनी चचेरी बहन साधना से भी अपने रिश्ते बिगाड़ लिए थे रिश्ते इतने खराब हुए कि साल 2015 में साधना जी का निधन हुआ तो उनके निधन पर बबीता या उनकी दोनों बेटियों में से कोई भी उनके घर नहीं था जबकि कपूर खानदान से सिर्फ ऋषि कपूर ही उनकी अंतिम यात्रा में शरीक हुए थे इन दोनों बहनों में यह लड़ाई क्यों थी यह हम आपको साधना जी की बायोग्राफी में बता चुके हैं हैं जिसका लिंक हमने अपने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दे दिया है दोस्तों समय के साथ-साथ कई गहरे जख्म सूख जाया करते हैं
धीरे-धीरे बबीता की भी कड़वाहट कम हुई साल 2007 में बबीता और रणधीर के बिगड़े रिश्तों में भी सुधार आया और यह दोनों एक बार फिर से सब कुछ भुलाकर एक साथ रहने लगे बबीता और रणधीर शादी के बाद लगभग 44 साल एक दूसरे से अलग-अलग रहे लेकिन गुजरते समय के साथ अब यह परिवार और इनके रिश्ते सुधर रहे हैं और अब बबीता कपूर और उनकी दोनों बेटियां भी पूरे कपूर खानदान के साथ दिखाई देती हैं और उनके सभी समारोह में भी नजर आती हैं इसका जीता जागता प्रमाण मिलता है ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी से जहां यह पूरा कपूर खानदान एक साथ तस्वीरों में कैद हुआ था तू नहीं जाएगा मैं कहती हूं चला जा नहीं तो बहुत पछताएगा जब पछताने का समय आएगा तो पछता लूंगा अभी तो बड़े मजे में हूं दोस्तों ये था बबीता कपूर का पूरा जीवन जिसको हमने आपके सामने रखा है यह वही बबीता कपूर थी जिन्होंने प्रेम की खातिर अपने सुख चैन में खुद ही आग लगा ली इसी प्रेम की खातिर कपूर खानदान की वर्षों पुरानी झूठी परंपरा को तोड़कर अपना घर बसाया लेकिन इसी घर को बबीता ठीक से संभाल नहीं पाई और बबीता की जिंदगी बेहद संघर्ष पूर्ण गुण और दुख तकलीफों से भर गई इसी जीवन में बबीता को कभी भी पति