क्या भारत अमेरिका से डर गया है? क्या पीएम मोदी भी डोन्ड ट्रंप से डर गए हैं? सोशल मीडिया पर ऐसे सवाल उठाते हुए आपको कई इन्फ्लुएंसर्स मिल जाएंगे? कांग्रेस पार्टी समेत कई विपक्षी दल भी यही सवाल उठा रहे हैं। लेकिन क्या इस बार सच में पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप से डर गए हैं?
इसका सच जब हम आपको बताएंगे तो आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी। भारत और पीएम मोदी के खिलाफ इस नैरेटिव के बीच पहली बार इजराइल ने अमेरिका और डॉन्ड ट्रंप के सरेआम परखच्चे उड़ा दिए हैं। अब कई लोगों का कहना है कि भारत को भी ट्रंप के खिलाफ इजराइल जैसा एक्शन लेना चाहिए।
सबसे पहले देखिए कि इजराइल ने क्या किया है। दरअसल डॉन्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि वह ईरान के साथ सीज फायर कर रहे हैं। पीस डील का ऐलान हो गया है। अमेरिका ने अपने आप यह भी बोल दिया कि इजराइल अब लेबनान पर भी हमले नहीं करेगा। इतना सुनते ही इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बिन ग्वीर ने सीधे-सीधे कहा कि ट्रंप का समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता।
इजराइल अमेरिका के अधीन नहीं है। हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं। हमारा फर्ज इजराइल के नागरिकों, इजराइल की सेना और यहूदियों के प्रति है। जब भी हमने इजराइल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके हैं। हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। हम अमेरिका से प्यार जरूर करते हैं। डॉनल्ड ट्रंप की भी इज्जत करते हैं। लेकिन इजराइल कोई बनाना रिपब्लिक या कमजोर देश नहीं है।
बहरहाल, इजराइल का यह जवाब सुनकर अब भारत में बैठे कई लोगों ने यह बोलना शुरू कर दिया है कि पीएम मोदी को भी इजराइल जैसे जवाब देना चाहिए था। अमेरिका ने हमारे तीन नाविकों को मार दिया। क्या पीएम मोदी डर गए हैं? ऐसे में हम यहां पर सवाल पूछना चाहते हैं कि अमेरिका ने तो तीन नाविकों को मारा।
लेकिन ईरान के मिडिल ईस्ट पर किए गए हमलों में भी पांच से छह भारतीय लोगों की हो गई। ईरान ने भी भारतीय लोगों को मारा। लेकिन उस समय किसी ने ईरान की तरफ उंगली नहीं उठाई बल्कि ईरान के समर्थन में चंदा जमा करना शुरू कर दिया। अगर इस जंग में अमेरिका ने भारतीयों को मारा है तो ईरान ने भी मारा है। बहरहाल आजकल हर चौराहे पर खड़ा व्यक्ति जिओपॉलिटिक्स पर वीडियो बना रहा है।
यह लोग बोल रहे हैं कि पीएम मोदी अमेरिका से क्यों नहीं लड़ रहे? चलिए एक बार पीएम मोदी इनकी बात मानकर अमेरिका से शुरू कर देते हैं। अब बताइए कि अगर भारत अमेरिका के साथ जंग में उतर गया तो कितने लोग पीएम मोदी के साथ खड़े होंगे? भारत की अर्थव्यवस्था इस वक्त ऐसी ऊंचाई पर है कि कई देश यह चाहते हैं कि पीएम मोदी किसी में उलझ जाए। पीएम मोदी पिछले कई सालों से देश से अपील कर रहे हैं कि स्वदेशी प्रोडक्ट्स खरीदें। इतना तो लोग कर नहीं रहे। ऐसे में अगर पीएम मोदी ने अमेरिका से शुरू कर दी तो कितने लोग पीएम मोदी का साथ देंगे? जो विपक्षी दल आज यह बोल रहे हैं कि पीएम मोदी डर गए हैं क्या वह अमेरिका के साथ में पीएम मोदी के साथ खड़े होंगे।
पूरी दुनिया चाहती है कि भारत किसी बड़े देश के साथ जंग में उलझे। भारत अगर एक बार किसी जंग में फंस गया तो 10 सालों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। भविष्य भी अंधकार में चला जाएगा। रूस ने 2022 में जंग शुरू करने की गलती कर दी थी। आज तक वो जंग खत्म नहीं हुई है। रूस अभी तक इस में इसीलिए टिका है क्योंकि वहां की जनता पुतिन के साथ खड़ी है। यहां पर तो पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की प्लानिंग तक होती रहती है।
जिओपॉलिटिक्स में अगर कोई देश कीचड़ उछाल रहा है तो चुप रहने में ही समझदारी है। चुप रहने का मतलब डरना नहीं होता। अगर देश अमेरिका से लड़ने के लिए पीएम मोदी के साथ खड़ा है। विपक्षी दल अगर समर्थन देते हैं कि अमेरिका के साथ में वह पीएम मोदी के साथ खड़े रहेंगे और ऐसी स्थिति में पीएम मोदी नहीं लड़ते तब कहिएगा कि पीएम मोदी डर गए। राजनीति करने का कोई फायदा नहीं है। आखिर में हम आपको बता दें कि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार अगर पीएम मोदी डॉन्ड ट्रंप से मिलते हैं तो वह भी डॉन्ड ट्रंप को उनकी हैसियत याद दिलाएंगे। वैसे दिलचस्प बात यह है कि अभी तक सिर्फ वाइट हाउस ने कंफर्म किया है कि पीएम मोदी और डॉन्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो रही है। भारत की तरफ से इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। पीएम मोदी इस बार डॉन्ड ट्रंप से भारत के अपमान का बदला लेंगे।
खबरें हैं कि भारत और अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील फंसी है उस पर अमेरिका से नाक रगड़वाई जाएगी। ईलॉन मस्क की स्टारलिंग कंपनी को आसानी से भारत में घुसने नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा भारत आने वाले दिनों में कानून में बदलाव करने जा रहा है। जिसके बाद अमेरिका के लिए भारत में एनजीओस को फंडिंग देना बेहद मुश्किल हो जाएगा।