Apple हर साल iPhone का नया मॉडल ल्च करता है और कई टेक शौकीनों की चाह होती है कि जैसे ही नया iPhone मार्केट में आए तो वो उसे जरूर खरीदें। अब जैसे यह है iPhone 15 और यह है 17 Pro। तो भैया यहां से यहां स्विच करने के लिए आपको देने पड़ेंगे करीब-करीब 70-80 और अगर आप पहली बार iPhone खरीद रहे हैं तो यह कीमत हो जाएगी करीब-करीब ₹1.5 लाख के आसपास।
फिर डिपेंड करता है कि आपका स्टोरेज कितना होगा। रैम कितनी होगी वगैरह-वगैरह। इसलिए कई बार iPhone यूज़र्स लेटेस्ट iPhone नहीं खरीद पाते हैं। लेकिन इस दिक्कत का भी समाधान आ चुका है। हर एक स्कीम है जिसके तहत अब आप बिल्कुल नया iPhone ले सकते हैं बिना किसी लाख, ₹1.5 लाख या ₹ लाख को खर्च किए। आप जब iPhone इस्तेमाल करते हैं तो अगले साल नया मॉडल आता है और अब आप पुराना फोन वापस देकर नया ले सकते हैं।
ना फोन बेचने का झंझट है, ना सेकंड हैंड वैल्यू की चिंता है और ना ही ईएमआई खत्म होने का इंतजार। यानी अब iPhone सिर्फ खरीदा नहीं जाएगा बल्कि किराए पर भी लिया जा सकता है। और इस स्कीम का नाम है Apple अपग्रेड। यह Apple अपग्रेड स्कीम क्या है? कैसे काम करती है? इसके लिए आपको कितना खर्च करना होगा? क्या हर Apple प्रोडक्ट इस स्कीम के तहत शामिल है? और सबसे जरूरी सवाल क्या Apple अपग्रेड स्कीम भारत में भी उपलब्ध है?
यह सारी जानकारी आपको आसान भाषा में मिलेगी आज के वीडियो में। तो पहले बात करते हैं Apple अपग्रेड के बारे में। Apple अपग्रेड एक नया लीजिंग प्रोग्राम है। इसे आसान भाषा में समझे तो यह किसी कार लीज की तरह काम करेगा। जैसे कई देशों में लोग कार खरीदने के बजाय हर महीने किराया देकर उसका इस्तेमाल करते हैं।
वैसे ही अब iPhone, MacBook, iPad और Apple वॉच भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इसमें ग्राहक पूरी कीमत एक साथ नहीं देगा बल्कि हर महीने एक तय रकम को चुकाएगा और लीज खत्म होने पर उसके पास कई सारे ऑप्शंस होंगे। जैसे कि या तो वो नया मॉडल ले ले या कुछ और रकम दे के उसी डिवाइस को अपना बना ले उसे खरीद ले या डिवाइस वापस कर दे। यानी पहली बार Apple अपने सबसे महंगे प्रोडक्ट्स को भी ओनरशिप से ज्यादा यूजेज के मॉडल में बदल रहा है। तो फिर Apple ये सब अभी क्यों कर रहा है? इस सवाल का जवाब बिजनेस स्ट्रेटजी में छिपा है।
आज Netflix फिल्में नहीं बेचता, स्पॉटिफाई गाने नहीं बेचता, AOबी अब सॉफ्टवेयर की सीढ़ियां नहीं बेचता। सब्सक्रिप्शन पे चल रहा है। क्यों? क्योंकि इससे हर महीने निश्चित कमाई होती है। Apple भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। ब्लूमबर्ग के टेक रिपोर्टर मार्क गवर्नमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक Apple लंबे समय से इस मॉडल पर काम कर रहा था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग Apple इकोसिस्टम में बने रह। यानी अगर ग्राहक हर महीने Apple को भुगतान करेगा तो उसके दूसरे प्रोडक्ट खरीदने की संभावना बढ़ जाएगी।
इसी वजह से Apple ने इस नए मॉडल का नाम भी Apple अपग्रेड रख दिया है। तो यह कैसे काम करेगा? मान लीजिए आपको नया iPhone चाहिए। लेकिन एक साथ आप ₹1 लाख या ₹1.5 लाख खर्च नहीं करना चाहते। अब Apple अपग्रेड के तहत आप आवेदन करेंगे। एक हल्काफुल्का क्रेडिट चेक होगा। अगर आवेदन मंजूर हो गया तो आप हर महीने एक तय रकम देकर फोन इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे। iPhone और Apple वॉच के लिए अलग-अलग अवधि के अलग-अलग विकल्प होंगे। जबकि मैक और iPad के लिए लंबी अवधि की लीज़ उपलब्ध है।
लीज़ खत्म होने पर आपके पास तीन ऑप्शन होंगे। पहला कि आप कोई नया मॉडल खरीद सकते हैं। उसको भी लीज़ पर। दूसरा बाकी भुगतान करके उसी डिवाइस को आप हमेशा के लिए अपना बना सकते हैं। और तीसरा डिवाइस आप कंपनी को वापस कर दीजिए और इस प्रोग्राम से बाहर निकल जाइए। यानी अब हर दो या 3 साल में नया iPhone लेने के लिए पुराना iPhone बेचने की जरूरत नहीं होगी।
अगर आपको लगता है कि यह बिल्कुल नया आईडिया है तो ऐसा नहीं है। दुनिया की कई ऑटोमोबाइल कंपनियां सालों से लीजिंग मॉडल पर काम कर रही हैं। लोग कार खरीदते नहीं है, लीज़ पर लेते हैं। समय पूरा होने पर नई कार ले लेते हैं। अब यही मॉडल धीरे-धीरे टेक इंडस्ट्री में भी यूज किया जा रहा है। हालांकि Samsung, Google और कई टेलीकॉम कंपनियां पहले भी ट्रेड इन और फाइनेंसिंग ऑफर देती रही हैं। लेकिन Apple इसे अपने पूरे इकोसिस्टम के साथ बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।
यही इस स्कीम को बाकी कंपनियों से अलग भी बनाता है। तो Apple खुद ग्राहकों को लोन नहीं दे रहा है। इसके लिए उसने दुनिया की मशहूर फinटेक कंपनी क्लारnना के साथ साझेदारी की है। Clarna का बिजनेस मॉडल बाय नाउ पे लेटर पर आधारित है। यह कंपनी दुनिया के करोड़ों ग्राहकों को आसान किश्तों में खरीददारी की सुविधा देती है। Apple अपग्रेड में भी यही कंपनी फाइनेंसिंग और भुगतान की प्रक्रिया संभालेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें सॉफ्ट क्रेडिट चेक होगा। जिससे आमतौर पर ग्राहक के क्रेडिट स्कोर को सीधा नुकसान नहीं होगा। पहली नजर में यह स्कीम शानदार लगती है? कम पैसे में iPhone, हर साल नया मॉडल और खरीदने की मजबूरी खत्म।
लेकिन क्या वाकई यह ग्राहक के लिए सस्ता सौदा है? क्या हर महीने कम पैसे देने का मतलब असल में कम खर्च होगा? अगर आपने बीच में स्कीम छोड़ दी तो क्या होगा? किन लोगों को यह सुविधा मिलेगी और किन्हें नहीं? सबसे बड़ा सवाल यही है। और क्या भारत में रहने वाले करोड़ों iPhone यूज़र्स को भी यह ऑप्शन मिलने वाला है? तो Apple द्वारा अमेरिका में घोषित शुरुआती प्लान के मुताबिक मासिक भुगतान डिवाइस के हिसाब से तय किया गया है। iPhone की शुरुआती मासिक कीमत लगभग $79.99 से शुरू होती है। Apple वॉच के लिए करीब $1.99 प्रति महीना देना होगा।
आईपैड के लिए शुरुआती कीमत लगभग $1.99 रखी गई है। जबकि मैक के लिए शुरुआती भुगतान 24.99 प्रति महीना बताया गया है। अगर ग्राहक के पास पहले से कोई पुराना Apple डिवाइस है तो वह Apple ट्रेड इन के जरिए उसे एक्सचेंज करके मासिक भुगतान और कम करा सकता है। और अगर ग्राहक Apple कार्ड से पे करता है तो उसे 3% डेली कैशबैक भी मिलेगा। लेकिन एक जरूरी बात यह कोई सामान्य ईएमआई नहीं है। ईएमआई में हर महीने किश्त भरते जाइए और आखिर में वह चीज या वो फोन आपका हो जाता है। लेकिन लीजिंग मॉडल अलग है।
यहां आप डिवाइस के मालिक तुरंत नहीं बनते हैं। आप उसके इस्तेमाल का अधिकार खरीदते हैं। समय पूरा होने पर आपको यह फैसला करना होगा कि क्या आपको नया मॉडल लेना है? क्या मौजूदा फोन खरीदना है या उसे कंपनी को वापस करना है। अगर आप हर 2 साल में फोन बदलते हैं तो लीजिंग मॉडल या लीजिंग स्कीम आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन अगर आप एक ही फोन चारप साल चलाते हैं तो फोन सीधा खरीदने में एक ही बार आपको ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। क्या हर Apple प्रोडक्ट इस स्कीम में शामिल होगा? यह अगला सवाल है। तो इसका जवाब है नहीं। यहीं पर Apple ने कुछ सीमाएं भी तय की है। रिपोर्ट्स और Apple की शुरुआती जानकारी के मुताबिक कुछ एंट्री लेवल डिवाइसेस इस स्कीम का हिस्सा नहीं होंगी। यानी हर एप्पल प्रोडक्ट लीज पर उपलब्ध नहीं होगा।
इसके अलावा बिजनेस, कस्टमर्स, एजुकेशनल इंस्टट्यूट्स और कुछ विशेष खरीदारी श्रेणियों में भी इस प्रोग्राम के दायरे से उनको बाहर रखा गया है। क्योंकि यह स्कीम मुख्य रूप से इंडिविजुअल कस्टमर्स को ध्यान में रखकर बनाई गई है। तो फिर Apple केयर का क्या होगा? अगर आपने पहले कभी iPhone खरीदा है तो Apple केयर के बारे में जरूर सुना होगा। यह Apple की एक्सटेंडेड वारंटी और डैमेज प्रोटेक्शन सर्विस है। पहले iPhone अपग्रेड प्रोग्राम में Apple C के शामिल रहती थी लेकिन Apple अपग्रेड में ऐसा नहीं है। अगर ग्राहक अपने डिवाइस की सुरक्षा चाहता है तो उसे Apple C के अलग से खरीदनी होगी। यानी मासिक किस्त जरूर कम होगी दिखेगी।
लेकिन अगर आप सुरक्षा भी चाहते हैं तो आपको थोड़ा सा खर्च बढ़ाना होगा। तो फिर Apple ने iPhone अपग्रेड प्रोग्राम क्यों बंद किया? Apple कई सालों से अमेरिका में iPhone अपग्रेड प्रोग्राम चला रही थी। उसमें ग्राहक हर साल नया iPhone ले सकते थे, लेकिन वो स्कीम सिर्फ iPhone तक सीमित थी। अब Apple ने उससे एक कदम आगे बढ़ते हुए पूरे इकोसिस्टम को एक ही प्लेटफार्म पर लाने का फैसला किया है। इसी वजह से कंपनी ने अमेरिका में नए ग्राहकों के लिए पुराने iPhone अपग्रेड प्रोग्राम और iPhone पेमेंट्स में नए एनरोलमेंट बंद करने का फैसला किया है। हालांकि जो ग्राहक पहले से पुराने प्रोग्राम में हैं वो चाहे तो बाद में Apple अपग्रेड में शिफ्ट हो सकते हैं। तो फिर क्या भारत में भी यह स्कीम आने वाली है? यही सवाल शायद सबसे ज्यादा भारतीय यूज़र्स के मन में भी होगा।
फिलहाल इसका जवाब है नहीं। Apple ने इस स्कीम की शुरुआत सिर्फ अमेरिका से की है। वजह भी साफ है। यह मॉडल क्लारना की फाइनेंसिंग व्यवस्था पर आधारित है और क्लारना की सेवाएं हर देश में एक जैसी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा हर देश में बैंकिंग नियम, क्रेडिट सिस्टम और कस्टमर लॉज़, उपभोक्ता कानून अलग-अलग होते हैं। यही कारण है कि Apple पहले अमेरिकी बाजार में इस मॉडल को परखेगा।
अगर इससे अच्छा रिस्पांस मिलता है तो भविष्य में दूसरे देशों में इसका विस्तार मुमकिन है। लेकिन भारत को लेकर फिलहाल Apple ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। तो चलते-चलते आपको बता देते हैं इस स्कीम के फायदे और नुकसान। Apple को इस स्कीम से कई फायदे होंगे। पहला हर महीने नियमित कमाई होगी। दूसरा फायदा ग्राहक Apple इकोसिस्टम में बना रहेगा। तीसरा पुराने डिवाइस वापस मिलना जिन्हें रिफर्बिश्ड मार्केट में दोबारा बेचा जा सकता है। चौथा हर नई iPhone सीरीज के साथ अपग्रेड रेट भी बढ़ जाएगा। यानी Apple सिर्फ फोन नहीं बेच रहा बल्कि पूरे कस्टमर लाइफ साइकिल को अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश कर रहा है। बात करें ग्राहकों की तो उनके लिए इस स्कीम में कुछ नुकसान भी है। जैसे कि अगर आप समय पर भुगतान नहीं करते हैं तो अतिरिक्त शुल्क आप पर लग सकता है। अगर डिवाइस को नुकसान पहुंचता है तो उसकी मरम्मत की लागत आपकी जेब से जाएगी। अगर आप बीच में स्कीम को छोड़ना चाहते हैं तो कुछ मामलों में आपको कुछ एक्स्ट्रा पे करना पड़ सकता है।
और सबसे बड़ी बात कई लोग सालों तक किराया देते रहते हैं लेकिन डिवाइस का वास्तविक मालिकाना हक उनके पास नहीं मिलता। यानी कम मासिक भुगतान देखकर फैसला ले लेने से पहले आप इस पूरी स्कीम को समझिए। अपने बजट से चेक कीजिए और यह भी देखिए कि क्या आपके लिए यह स्कीम फायदेमंद आपको लग रही है आपके पॉकेट के लिए। अगर हां, तभी इस स्कीम को अपनाइएगा।