भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर पानी को लेकर तनाव बढ़ गया है। कारण है पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा बयान। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसके हिस्से का पानी रोका जा रहा है तो हालत युद्ध तक पहुंच सकती है। सवाल है आखिर पानी को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हो गया और क्या सिंधु नदी का पानी अब दोनों देशों के रिश्ते में नया संकट बन रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई की वजह पहले भी कई रही है। लेकिन इस बार चर्चा सीमा या कश्मीर की नहीं बल्कि पानी की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने टीवी इंटरव्यू में कहा कि पानी पाकिस्तान की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है अगर और अगर इस पर खतरा आया तो
पाकिस्तान युद्ध का रास्ता भी चुन सकता है। ख्वाजा आसिफ ने यहां तक कहा कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित [संगीत] होती है तो प्रतिक्रिया निश्चित होगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया जब भारत में सिंधु नदी के पानी को लेकर नई योजनाओं और परियोजनाओं की चर्चा हो रही है। नदी और उससे जुड़ी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए बेहद अहम है। पाकिस्तान की खेती का बड़ा हिस्सा इसी पानी पर निर्भर करता है। देश के कई शहरों और गांव तक पानी पहुंचाने में इन नदियों की बड़ी भूमिका रहती है। यानी अगर पानी कम होता है तो उसका असर सीधा किसानों, फसलों और आम लोगों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को बेहद गंभीर मान रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से कहता रहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके पानी का स्रोत नहीं [संगीत] बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। लेकिन यह विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ है।
अप्रैल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोकने का फैसला लिया और साफ कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत का साफ कहना है जब तक सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक पुराने ढर्रे पर आगे बढ़ना मुश्किल है। यहीं से इन दोनों देशों के बीच पानी को लेकर तनाव बढ़ना शुरू हो गया। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल का एक बयान भी चर्चा में आया। बयान को पाकिस्तान में इस तरह देखा गया कि भारत भविष्य में अपने हिस्से के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहता है।
कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि भारत आने वाले वर्षों में ऐसी परियोजनाओं पर काम कर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के प्रभाव पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर जोर इस बात पर दिया [संगीत] गया कि वह अपने अधिकार वाले पानी का अधिकतम उपयोग करना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान में इन संकेतों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री ईशाक डार ने हाल ही में विषय पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश [संगीत] की। कहना है कि पानी के बहाव में किसी भी बड़े बदलाव का असर सीधे उसके करोड़ों नागरिकों पर पड़ेगा। यही भारत का कहना है
कि सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। यानी दोनों देशों से तर्क बिल्कुल अलग है और यही इस विवाद को और जटिल बनाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया में पानी सबसे अहम रणनीतिक मुद्दों में से एक बन सकता है। एक तरफ आबादी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण कई इलाकों में पानी का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सिंधु नदी को लेकर बड़ा तनाव सिर्फ भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा विषय बन चुका है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। इस पर आपकी क्या राय है हमें जरूर बताएं। आप देख रहे हैं वन [संगीत] इंडिया हिंदी। वन इंडिया को सब्सक्राइब करें और कोई भी अपडेट मिस ना करें। [संगीत] अभी वन इंडिया ऐप डाउनलोड करें।