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अमिताभ और राजीव वर्मा का क्या रिश्ता है? अभिषेक-श्वेता क्यों मौसा कहके बुलाते थे?

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आप अपने तबस्सुम टॉकीज़ को जरूर कीजिए सब्सक्राइब और बेल आइकॉन दबाना ना भूलिएगा। आदाब नमस्कार सत श्री अकाल दोस्तों मैं हूं गोगल आपकी अपनी तबस्सुम जी का बेटा और आप देख रहे हैं तबस्सुम टॉकीज़। [संगीत] तुम्हारा दिमाग तो लिया बाकी। क्या चाहते हो तुम लोग? अखबारों की सुर्खियों में यह लिखा जाए कि सेठ दुर्गेश महेश्वरी की बेटी एक दो टके के लौंडे के साथ भाग गई। सारे शहर में मेरी इज्जत का तमाशा बने। दोस्तों आज जिस एक्टर के बारे में मैं आपको बताने वाला हूं वो जैसे फिल्म के पर्दे पर दिखते हैं वैसे जाती जिंदगी में भी दिखते हैं। यानी सोबर, संजीदा और शायस्ता।

वो कहते हैं यह सारी खूबियां मेरे लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह यह मैं नहीं जानता। क्योंकि मुझे एक ही जैसे रोल मिले पिता के जो मैंने बखूबी निभाए लेकिन मैं अलग-अलग किस्म के रोल्स करना चाहता था जो मैं नहीं कर पाया जिसका मुझे बेहद अफसोस है और वो हैं बहुत ही उम्दा कलाकार राजीव वर्मा ये तो इस शहर में ₹300 लेकर आया था मेरी हथेली पर तो सिर्फ तीन लकीरें थी और फिर यह जरूरी तो नहीं कि प्यार का इम्तिहान हमेशा तुम ही दो। इसे भी तो यह साबित करना चाहिए कि आखिर यह तुम्हें कितना प्यार करता है। बेटे वक्त बिच्छू की फितरत से डंक मारना, कौवे की फितरत से चालाकी और इंसान की फितरत से डर और लालच को कहीं बदल सका है? नहीं। इसी तरह कुछ चीजें नहीं भी बदलती। 28th जून 1949 में पैदा हुए थे राजीव जी होशंगाबाद में जो मध्य प्रदेश में है। जब वो बहुत छोटे थे तब उनका पूरा परिवार भोपाल शिफ्ट हो गया। राजीव जी के पिता का नाम था बाबूलाल वर्मा और वो एक फ्रीडम फाइटर थे।

लेकिन अफसोस जब राजीव जी बहुत छोटे थे तब उनके पिता इस दुनिया को छोड़कर चले गए। राजीव जी की मां एक हाउसवाइफ थीं और उन्होंने मां और पिता का दोनों का प्यार राजीव जी को दिया। राजीव जी की एजुकेशन भोपाल में हुई और उन्होंने मौलाना आजाद नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की। बचपन में राजीव जी गांव में रामलीला देखने जाते थे और वह सब कैरेक्टर से बहुत इंप्रेस थे। उन्होंने देखा कि रामलीला के सारे एक्टर्स को बहुत मान सम्मान और इज्जत मिलती थी। इसलिए उन्होंने अपनी फैमिली को कहा कि वह भी एक एक्टर बनना चाहते हैं। लेकिन फैमिली ने साफ इंकार कर दिया। उनकी फैमिली ने उन्हें समझाया कि एक्टिंग से कुछ नहीं होगा। तुम पढ़ाई लिखाई अपनी कंप्लीट करो और उसके बाद एक सरकारी नौकरी करो। चुनांचे उन्होंने आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल कर ली और उसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी भी कर ली। नौकरी करने के दौरान अपना एक्टिंग का शौक पूरा करने के लिए उन्होंने थिएटर जॉइ कर लिया जिसमें उन्होंने प्लेस भी किए और प्लेस डायरेक्ट भी किए। कुछ वक्त बाद वह भोपाल से दिल्ली गए अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल करने और दिल्ली में भी उन्होंने थिएटर जॉइ किया और प्लेस करने लगे। उसी दौरान उन्हें दूरदर्शन से एक सीरियल की ऑफर आई। यह सीरियल एजुकेशन सिस्टम पे था। सीरियल का नाम था चुनौती जो आया था 1987 में और इस सीरियल में राजीव जी ने प्रिंसिपल का रोल प्ले किया था। यह सीरियल बहुत कामयाब रहा और इसके बाद उन्हें फिल्मों की ऑफर्स आने लगी।

उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और उनकी पहली फिल्म थी राष्ट्रीय बैनर की जिसका नाम था मैंने प्यार किया और इस फिल्म में राजीव जी ने हीरो के पिता का रोल प्ले किया था। हीरो थे सलमान खान, हीरोइन थी भाग्यश्री। ये फिल्म आई थी 1989 में। क्या-क्या सीखोगे प्रेम? तुम्हें तो सीखना तक नहीं आता। प्यार सब कुछ सिखा देता है पापा। कौशल्या इसके पहले कि मैं और कोई कदम उठाऊं इसे रोको। इसने अपने बाप की इज्जत तो नहीं रखी। कम से कम अपनी मां की ममता की लाश तो रखेगा। रोको इसे। यह फिल्म सुपर डुपर हिट रही और इसके बाद उन्हें ढेर सारी फिल्मों की ऑफर्स आने लगी। लेकिन वो टाइप कास्ट हो गए और उन्हें पिता के ही रोल मिलने लगे। उनमें से कुछ फिल्में थी दीदार, बाल ब्रह्मचारी अंदाज। हम साथ-साथ हैं बीवी नंबर वन। हम दिल दे चुके सनम, कोई मिल गया और भी कई और। बेटा तुम किसी लड़के के बारे में बता रही थी ना जो दिमागी तौर पर अभी तक बच्चा है? हां जी। देखो इंटरनेट पर एक बहुत अच्छा आर्टिकल है। मैंने प्रिंट आउट निकाल लिया है। इसमें लिखा है कि ऐसे लोगों के साथ बड़े प्यार और हमदर्दी से पेश आना चाहिए। यही उनका इलाज है। बेटी हमने तुझे कितना समझाया था कि प्रेम तेरे लायक नहीं है। लेकिन तूने हमें अपना दुश्मन समझा। लेकिन घबराना नहीं। अभी तेरे मम्मी पापा जिंदा है। चल चल अपने घर और कहां? राजीव जी ने पॉजिटिव रोल्स भी किए और उसके साथ-साथ उन्होंने नेगेटिव रोल्स भी किए। और वो फिल्में थी निश्चय परदेसी बाबू हिम्मत वाला। दुर्गेश महेश्वरी की बेटी और अपनी बेइज्जती सहकर चली है। जो एक दिन के लिए अपनी मिले और फैक्ट्रियां बंद कर दे तो इस शहर की आधी आबादी भूखी मर जाए।

अरे गला दबा देती है उसका। गोली मार देती है। अपनी कार के नीचे कुचल देती है। कोर्ट, कचहरी और पुलिस को हम देख लेते हैं। राजीव जी को लोगों ने पॉजिटिव रोल्स में बहुत पसंद किया लेकिन नेगेटिव रोल्स में नापसंद किया। इसलिए राजीव जी ने पॉजिटिव रोल्स ही किए। फिल्मों के साथ-साथ राजीव जी ने टेलीविज़ सीरियल्स में काम करना जारी रखा और वो सीरियल्स से मुजरिम हाजिर, हिना, मिली, संजीवनी, छोटी बहू, इम्तिहान और प्यार हो गया। और भी कई सीरियल्स। जिद नहीं मां परंपरा। हिंदुस्तान हमसे जरूर छूट गया है लेकिन परंपराएं तो हमसे नहीं छूटी ना। हम हिंदुस्तान से दूर जरूर हो गए हैं लेकिन हिंदुस्तान हमसे दूर नहीं हुआ है। ये म्यूजिक क्या है भाई? कुछ अरसे बाद राजीव जी एक ही जैसे रोल्स करते-करते बोर हो गए। इसलिए उन्होंने फिल्में और टीवी छोड़ दिया और फुल फ्लेजेड थिएटर पे कंसंट्रेट करने लगे।

आज वह भोपाल में रहते हैं अपने परिवार के साथ और बहुत खुश हैं। दोस्तों, हम आपको यह बताएं कि राजीव जी की पत्नी का नाम है रीटा भादुरी जो मशहूर एक्ट्रेस जय भादुरी की सगी बहन है। यानी श्री अमिताभ बच्चन राजीव जी के ब्रदर इन लॉ हैं। राजीव जी के दो बेटे हैं। बड़े बेटे का नाम है डॉक्टर शीलादित्य। वह एक थिएटर एक्टर हैं, राइटर हैं और बहुत अच्छे पेंटर हैं। राजीव जी के छोटे बेटे का नाम है तथागत और वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। राजीव जी के दोनों बेटों की शादी हो चुकी है और राजीव जी दादा भी बन चुके हैं। राजीव जी आज भी थिएटर करते हैं और कहते हैं कि थिएटर एक बहुत अच्छा माध्यम है किसी भी एक्टर की पर्सनालिटी को निखारने के लिए। क्या बात है। तो दोस्तों, ऐसी बातें भी मैं आपके साथ शेयर करता रहूंगा। आप बस देखते रहिए तबसस्सुम टॉकीज़। करते रहिए लाइक, शेयर और सब्सक्राइब।

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