[संगीत] जून का महीना आधा से ज्यादा बीत चुका है। सूरज आग उगल रहा है और पूरा देश बस एक ही प्रार्थना कर रहा है। हे भगवान बस एक बार अच्छी बारिश करा दो। लेकिन इस साल मानसून ने जैसे हम सबसे दूरी ही बना ली है। देश के कई हिस्सों में पानी के लिए हाहाकार सा मचा हुआ है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की हालत तो यह है कि वहां की झीलों में सिर्फ 9% पानी बचा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों इस साल मानसून हमें इस तरह तरसा रहा है और इस सब के पीछे अलनीनो का क्या चक्कर है? आज की इस वीडियो में हम बेहद आसान भाषा में इस जल संकट की पूरी कहानी को समझेंगे। नमस्कार, मैं हूं आदित्य। भारत फैक्ट्स के आज के एपिसोड में आपका स्वागत है। सबसे पहले बात करते हैं मुंबई की। मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली सात प्रमुख झीलें लगभग खाली होने की कगार पर है। झीलों में सिर्फ 9% पानी बचा हुआ है।
जनता इस वाटर क्राइसिस की स्थिति से बेहद त्रस्त है। जल संकट की वजह से पानी की तो किल्लत है ही साथ ही पावर कट की वजह से लोगों की जिंदगी कठिन होती जा रही है। जनरली इस समय तक मुंबई, बेंगलुरु और भारत के पश्चिमी तटीय इलाकों में बारिश शुरू हो जाती थी। समय पर मानसून की दस्तक से चीजें बैलेंस रहती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। मुंबई की बात करें तो इसकी झीलों में 10% से कम पानी होने का मतलब है कि अगर अगले कुछ दिनों में भारी बारिश नहीं हुई तो मुंबई में पानी को लेकर त्राहिमाम तय है। और यह कहानी सिर्फ मुंबई की नहीं है। देश के कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र के बाकी हिस्से मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण भारत के कई इलाकों में ग्राउंड वाटर का लेवल एकदम नीचे चला गया है। किसान परेशान है क्योंकि उनकी खरीफ की फसलों की बुवाई रुकी हुई है। यही स्थिति रही तो भारत एक विकराल सूखे की जद में आ जाएगा। हालात 1979 और 87 जैसे हो सकते हैं।
जब अलनो की वजह से देश में भयानक सूखा पड़ा था और कृषि और अर्थव्यवस्था चरबरा गई थी। अब आते हैं सबसे बड़े विलेन पर जिसका नाम है अलनीनो। अखबारों और न्यूज़ चैनलों पर आपने यह नाम बार-बार सुना होगा। आखिर यह क्या बला है? बहुत आसान शब्दों में कहें तो अलनो एक प्राकृतिक घटना है जो भारत से हजारों किलोमीटर दूर पेसिफिक ओशियन में होती है। जब वहां समुद्र की सतह का पानी जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। अब आप सोचेंगे कि वहां का पानी गर्म होने से हमारे भारत के मानसून का क्या लेना देना। दरअसल जब प्रशांत महासागर गर्म होता है तो वह हवाओं के रुख को बदल देता है। जो मानसूनी हवाएं समंदर से नमी लेकर भारत की तरफ आ रही होती हैं। अलनीनो उन्हें कमजोर कर देता है। हवा कमजोर होगी तो बादल कम बनेंगे और बारिश में देरी होगी। इस साल भी यही अलनीनो हमारे मानसून का रास्ता रोके खड़ा है। बादल मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के ऊपर से बिना बरसे ही निकल जा रहे हैं।
लेकिन साथियों सारा दोष हम अकेले अलनीनो के सिर पर नहीं मड़ सकते। असली कसूरवार तो हम खुद भी हैं। क्लाइमेट चेंज की वजह से मौसम का पूरा चक्र ही बिगड़ चुका है। अब या तो इतनी गर्मी पड़ती है कि सब कुछ सूख जाता है या फिर जब बारिश होती है तो एक ही दिन में इतनी बाढ़ आ जाती है कि पानी संभल नहीं पाता। इसे वैज्ञानिक भाषा में एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स कहते हैं। इसके अलावा हमारे शहरों की बनावट ऐसी हो गई है कि बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय नालों से बहकर बर्बाद हो जाता है। हमने तालाबों, कोखों और झीलों को पाटकर वहां बड़ी-बड़ी सोसाइटियां और मॉल खड़े कर दिए हैं। जब पानी को रोकने की जगह ही नहीं बचेगी तो संकट तो आएगा ही। इस स्थिति से निपटने के लिए हमें और सरकारों को भी एक्टिव स्टेप्स उठाने होंगे। शायद आज भी देश के कुछ हिस्सों में लोगों को लगे कि अरे हमारे घर में तो 24 घंटे पानी आता है।
हमें क्या फर्क पड़ता है? तो भाई साहब फर्क आपको पड़ेगा। पहला सर्फ कि जब पानी नहीं होगा तो फसलें खराब होंगी। इससे अनाज, दाल और सब्जियों के दाम आसमान छुएंगे। यानी आपकी जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा। दूसरा असर कि पानी की कमी से कई फैक्ट्रियां और पावर प्लांट्स बंद करने पड़ते हैं। तो क्या इस समस्या का कोई समाधान नहीं है? बिल्कुल है। सरकारें तो अपने स्तर पर बांध और नीतियां बना रही हैं जिसे और भी प्रभावी तरीके से इंप्लीमेंट करना होगा। वहीं एक सजग नागरिक के तौर पर हमें भी जागना होगा। हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी बारिश के पानी को सहेजने को एक आंदोलन बनाना होगा। अपने घरों में पानी की हर एक बूंद की कीमत समझनी होगी। गाड़ी धोने, ब्रश करते समय नल खुला छोड़ने जैसी छोटी-छोटी आदतों को बदलना होगा। याद रखिए अगर आज पानी नहीं बचाया तो कल की पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। इस मुद्दे पर आपको क्या लगता है? आप अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए india.com के साथ। शुक्रिया। [संगीत]