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क्या एक गलत एड के कारण ‘अर्श से फर्श’ पर आ गई सब की पसंद निरमा?

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दोस्तों आपको 90 के दशक के गाने याद हो ना हो [संगीत] लेकिन टीवी में आने वाली निरमा की यह धुन आपने कभी ना कभी तो जरूर सुनी होगी। सफेदी [संगीत] निर्मा कपड़ा के तिल मिल जाए वाशिंग निर्माण [संगीत] साल 1969 गुजरात में 24 साल के कर्सन भाई पटेल साइकिल पर गांव-गांव के घर-घर जाकर अपना पीला डिटर्जेंट पाउडर बेचते थे। नाम था NMA वाशिंग पाउडर जो 90 के दशक आते-आते इतना मशहूर हो गया कि भारत के हर 100 में से 60 घरों में कपड़े धोने के लिए सिर्फ निरमा का ही इस्तेमाल होता था। यानी 60% मार्केट शेयर और हजारों करोड़ का व्यापार। निरमा के टीवी विज्ञापनों में जब संगीता बिजलानी, हेमा मालिनी, सोलानी बेंद्रे, श्रीदेवी और रीना रॉय जैसी खूबसूरत अभिनेत्रियां अपनी अदाओं का जलवा बिखेरती दिखी तब देश की हर हाउसवाइफ उनसे कनेक्ट करने लगी। NMA [संगीत] NMA वाशिंग पाउडर NMA एक दौर में Nirma की दीवानगी इतनी बढ़ गई कि उसके सामने सर्फ एक्सेल एरियल और टाइट जैसी कंपनियां टिक नहीं पाई। लेकिन फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस निर्मा की बिक्री अचानक गिरने लगी और देखते ही देखते करसन भाई पटेल का 17000 करोड़ का साम्राज्य डूब जाता है जानेंगे इस वीडियो में लेकिन उसके पहले प्लीज आप वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिए।

इस कहानी की शुरुआत होती है साल 1969 से जब गुजरात के कर्सन भाई पटेल डिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग में केमिस्ट की सरकारी नौकरी करते थे। लेकिन उस दौर में पूरा देश आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और कर्सन भाई के लिए सिर्फ तनख्वाह से अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देना मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान उनका ध्यान अपने गांव में तालाब किनारे कपड़े धो रही महिलाओं पर गया जो अक्सर राख या नमक या सोडा का इस्तेमाल करके कपड़े धोती थी क्योंकि उस वक्त हिंदुस्तान लीवर का सिर्फ ₹15 प्रति किलो सर्फ बिकता था जो ज्यादातर परिवारों के लिए खरीदना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। वहीं मार्केट में ₹4 की साबुन की टिकियां मिलती थी। लेकिन उसमें झाग ना के बराबर होती थी और जिद्दी दाग भी नहीं हटते थे। तभी करसन भाई ने समस्या का समाधान निकालने का सपना देखा और रोज शाम नौकरी से घर लौटकर वो सस्ते में वाशिंग पाउडर बनाने के लिए फार्मूले पर काम करने लगे। मगर फिर आया एक ऐसा काला दिन जब उनका जीवन हमेशा हमेशा के लिए बदल गया। दरअसल उसी साल एक दिन जब कर्सन भाई की बेटी निरुपमा स्कूल से लौट रही थी तभी एक गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी और निरुपमा की मौके पर ही मौत हो गई। अपनी लाडली बेटी निरुपमा की मौत का कर्सन भाई पटेल पर काफी गहरा असर पड़ा था। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी के नाम हमेशा के लिए

अमर बनाने का फैसला किया। जिसे ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में याद किया जाएगा। इसलिए कर्सन भाई पटेल ने वाशिंग पाउडर बनाने के लिए मेहनत तेज कर दी और कई बार फेल हुए। मगर कुछ ही दिनों में एक ऐसा डिटर्जेंट बनकर तैयार किया जो जिद्दी से ज़िद्दी दाग को चुटकियों में गायब कर दे। और तो और वह पाउडर फास्फेट फ्री था। यानी हाथों के लिए भी बिल्कुल सुरक्षित। जिसके बाद कर्स भाई ने अपने इस वाशिंग पाउडर को निरमा का नाम दिया क्योंकि वह अपनी बेटी निरूपमा को प्यार से निरमा कहकर बुलाते थे। अब बारी थी इसे बेचने की। तो शुरुआत में दुकानदारों को यकीन नहीं होता था कि इतना सस्ता पाउडर सच में कपड़े साफ कर सकता है। इसलिए किसी रिटेलर ने निरमा वाशिंग पाउडर खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। मगर यह कर्सन भाई की ज़िद कहो अपने प्रोडक्ट पर भरोसा कहो या बेटी निरपमा के लिए प्यार। उन्होंने अपनी साइकिल पर गांव-गांव के घर-घर जाकर अपना पाउडर बेचना शुरू किया। वह सबसे पहले अपने दोस्त और मोहल्ले वालों को फ्री में निरमा के पैकेट बांटने लगे। फिर उन्होंने आसपोस के गांव के गृहिणीयों को नरमा पाउडर दिया और जब इन औरतों ने देखा कि यह पाउडर ना सिर्फ झाग भी खूब देता है

बल्कि मुश्किल दाग भी हटा देता है तो धीरे-धीरे इसका नाम चारों तरफ फैलने लगा। इसका वर्ड ऑफ माउथ इतना जबरदस्त तरीके से चला कि कुछ ही महीने में निरमा पूरे इलाके में मशहूर हो गया। लोग दुकानदार के पास जाकर निरमा वाशिंग पाउडर की मांग करने लगे और इस तरह रिटेलर्स ने भी निरमा को अपनाकर बेचना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह पीला पाउडर गुजरात से निकलकर महाराष्ट्र, राजस्थान, फिर पूरे उत्तर भारत में छा गया। जहां सर्फ जैसे ब्रांड मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लिए लग्जरी थे, वहीं निर्मा उनके लिए एक उम्मीद बन चुका था। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब कर्सन भाई ने टीवी विज्ञापन का सहारा लिया। 70 के दशक के आखिरी और 80ज की शुरुआत में हर घर के ब्लैक एंड वाइट टीवी पर वो जंगल गूंजने लगा वाशिंग पाउडर निर्माण। सफेद फ्रॉक पहने एक मासूम सी लड़की घूमती फिरती नजर आती थी और यह इमेज हर भारतीय परिवार के दिल में बस गई। यह लड़की दरअसल उनकी बेटी निरुपमा का ही सिंबल थाई जो अब हमेशा हमेशा के लिए हर घर में जिंदा रहने वाली थी। वाशिंग पाउडर निर्मा [संगीत] वाशिंग पाउडर निर्मा ऐसा माना जाता है कि उस दौर में अगर किसी के घर में शादी होती थी और दहेज में कुछ भेजा जाता था तो उसमें निर्मा का पैकेट होना लगभग जरूरी माना जाने लगा क्योंकि यह सिर्फ एक डिटर्जेंट नहीं था बल्कि एक स्टेटस सिंबल बन चुका था कि घर वाले समझदार भी हैं और मॉडर्न भी। ऊपर से टीवी विज्ञापनों में हेमा, रेखा, जया और सुषमा वाला विज्ञापन सुपरहिट हो गया। हेमा [संगीत] सुषमा सबकी पसंद। [संगीत] 80 का दशक आते-आते निरमा ने अपने साम्राज्य को और भी बढ़ाया। अब सिर्फ पाउडर ही नहीं बल्कि Nirma साबुन के बाद Nirma ब्यूटी सोप भी मार्केट में उतर गए। मान गए? किसे? आपकी पार की नजर और Nirma सुपर दोनों को अब NMA सुपर धुलाई का सुपर [संगीत] दम दम हैवी कम हर जगह वो साथ गुनगुनाने को मजबूर करने वाले मजेदार जंगल्स बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों की अदाएं

और निर्मा की सफेदी छाने लगी। हेमा मालिनी श्रीदेवी रीना रॉय सोनी राजदान और बाद में सोनाली बेंद्रे तक सभी निर्मा की चमक दिखाते नजर आए। जिस्म परी [संगीत] तू जाने जहां तू सबसे तू सबसे जवान [संगीत] और यही वो दौर था जब निर्मा अपने शिखर पर था। साल 1990 आते-आते भारत के हर 100 में से 60 घर में कपड़े धोने के लिए सिर्फ और सिर्फ निरमा का इस्तेमाल होता था। 60% मार्केट शेयर, हजारों करोड़ का व्यापार और पूरे देश में गजब की ब्रांड लॉयल्टी यानी वाशिंग पाउडर खरीदना है तो निरमा ही चाहिए ऐसा भरोसा। दोस्तों 90 का दशक निर्मा के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उस समय तक निर्मा देश का नंबर वन वाशिंग पाउडर था। लेकिन कहते हैं ना सफलता जब सिर चढ़कर बोलने लगे तभी असली इम्तिहान शुरू होता है और निरमा का इम्तिहान शुरू हुआ उदारीकरण की लहर से। जब विदेशी कंपनियां भारत के मार्केट में कदम रखने लगी। Hindstan Unilever Limited जो पहले प्रीमियम वाशिंग पाउडर सर्फ बेचती थी

और NMA को अपना कंपटीशन ही नहीं मानती थी। उसने अपनी स्ट्रेटजी बदल दी। कंपनी ने तय किया कि ग्राहकों को हर प्राइस पॉइंट पर कैप्चर करना है। तो हाई क्लास कस्टमर्स के लिए सर्फ एक्सेल मिडिल क्लास के लिए रन और लो इनकम फैमिलीज के लिए व्हील ल्च किया गया है। नया एक्टिव व्हील दाग छूटेगा धब्बा छूटेगा [संगीत] कपड़े धोने में अब पसीना नहीं छूटेगा। एक्टिव व्हील मेहनत से आजादी। अब यहां पर सबसे बड़ा खेल यह था। ग्राहक चाहे कोई भी डिटर्जेंट खरीदे। असली मालिक तो एक ही कंपनी है। [संगीत] यही है असली मार्केटिंग का जादू। अलग नाम, अलग पैकेजिंग, अलग टीवी विज्ञापन लेकिन एक ही कंपनी का पूरा खेल। सबसे पहले एचयएल ने मशहूर अभिनेत्री कविता चौधरी से सर्फ एक्सेल की ऐड करवाई। जिसमें निरमा को टारगेट करके कहा गया हर सस्ती चीज अच्छी नहीं होती। लेकिन दाम? भाई साहब, सस्ती चीज में और अच्छी चीज में फर्क होता है। सर्फ के फायदे भी तो देखिए। सबसे सफेद धुलाई और कपड़े सही सलामत। इसलिए सर्फ की खरीदारी में ही समझदारी है। जिसके बाद कंपनी ने मिडिल क्लास परिवारों के लिए नया व्हील डिटर्जेंट पाउडर ल्च किया और निरमा के सामने बहुत ही स्मार्ट तरीके से पोजीशन किया। विज्ञापनों में बताया गया कि व्हील जेंटल है।

त्वचा के लिए सुरक्षित है। जबकि लोगों के दिमाग में धीरे-धीरे बिठा दिया गया कि निरमा हाथों की त्वचा को सूखी और बेजान बना देता है और कीमत वही निर्मा जितनी। इसलिए काफी ग्राहक NMA की जगह व्हील चुनने लगे। लेकिन फॉरेन कंपनीज़ यहीं नहीं रुकी। प्रॉटर एंड Gamble PNG ने एरियल और टाइड उतार दिए। नाम अलग-अलग, पैकेजिंग अलग-अलग, कैंपेन भी अलग-अलग लेकिन मालिक एक ही। यानी ग्राहक को लग रहा था कि उसके पास कई ऑप्शंस हैं। लेकिन प्रॉफिट एक ही कंपनी की जेब में जा रहा था। हालांकि यह सब हो रहा था प्रीमियम और मिडिल सेगमेंट में। अब सोचिए देश की ज्यादातर जनता यानी गरीब और लोअर मिडिल क्लास वाले बड़े वाशिंग पाउडर मार्केट में क्या हो रहा होगा? तो उसी मार्केट में उतरने के लिए 1987 में कानपुर की आरएसपीएल ग्रुप ने लॉन्च किया घड़ी डिटर्जेंट। हम बनाए कुछ बेहतर और बेहतर और ज्यादा बेहतर। घड़ी डिटर्जेंट पाउडर और केक। इस्तेमाल करें। [संगीत] इसका नारा सीधा था। सस्ता भी अच्छा भी कीमत निरमा से भी कम और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क इतना मजबूत कि गांव-गांव में इसकी पकड़ बनने लगी तो ऊपर से एरियल सर्फ एक्सेल और रिन नीचे व्हील और घड़ी और बीच में निरमा फंस गया। अब कर्स भाई पटेल ने हाथ पर हाथ रखकर हार नहीं मानी बल्कि उन्होंने सोचा प्रीमियम मार्केट में उतरने के लिए नया प्रोडक्ट ल्च किया जाए और इस तरह आया nma सुपर ब्लू। शुरुआत में 2 साल तक यह प्रोडक्ट चला भी लेकिन कस्टमर्स के दिमाग में Nirma यानी सस्ता डिटर्जेंट वाली छवि मिट नहीं पाई। सुपर ब्लू भी लोगों को वही पुरानी पहचान वाला NMA लगा। यही कॉम्पिटिटर्स ने गेम पलट दिया। उन्होंने विज्ञापन पर पानी की तरह पैसा बहाया।

सर्फ एक्सेल का कैंपेन दाग अच्छे हैं। एकदम अलग इमोशनल और फ्रेश था। सॉरी बोल रहे हैं। दाग लगने से अगर कुछ अच्छा होता है तो दाग अच्छे हैं ना? सर्फ एक्सेल दाग अच्छे हैं। एरियल विज्ञापन पर आधारित मुश्किल से मुश्किल दाग निकालने वाला विज्ञापन ले आया और टाइड ने मॉडर्न फैमिलीज की चॉइस बनकर खुद को पेश किया। अरे पूरी मेहनत नहीं लगाऊंगी तो सफेदी कैसे पाउंगी वही तो। चौक गई चमेली एंड फ्रेंड्स पेश है बेस्ट एवरटाइड प्लस ऑरेंज रिंग्स के साथ जो दे आधी मेहनत में शानदार सफेदी। शानदार वाइट हो तो टाइड हो। उधर निर्मा वही पुराने जिंगल, वही सालों पुरानी पैकेजिंग और वही पुरानी टेक्नोलॉजी लेकर ग्राहकों को बोरियत महसूस करवाने लगा था। कस्टमर्स के लिए NMA अब एक मॉडर्न नहीं बल्कि पुराना और आउटडेटेड लगने लगा। यही निरमा की सबसे बड़ी गलती थी। लेकिन सालों पुराना भरोसा इतना जल्दी टूट जाए वो भी मुमकिन नहीं। तो और गलतियां आखिर हुई कहां? चलिए जानते हैं। निर्मा के डाउनफॉल का दूसरा बड़ा कारण था कर्सन भाई पटेल का ध्यान डिटर्जेंट बिजनेस से हट जाना। दरअसल 90 के दशक के अंत तक निरमा ने कई बिजनेसेस में हाथ डाल दिया। सीमेंट, टॉयलेट ट्रीज, टूथपेस्ट, शैंपू यहां तक कि फर्टिलाइजर तक। एजुकेशन सेक्टर में NMA यूनिवर्सिटी और कई इंस्टीटशंस भी शुरू कर दिए गए। यानी निर्मा का साम्राज्य तो बढ़ता गया लेकिन मुख्य व्यापार यानी डिटर्जेंट का फोकस खोता चला गया। नतीजा यह हुआ कि प्रतिद्वंदियों ने उसी जगह चोट की जहां से निर्मा की पहचान बनी थी। व्हील ने लो इनकम मार्केट पर कब्जा कर लिया। घड़ी ने रूलर इंडिया पर और एरवी सर्फ एक्सेल और टाइड ने प्रीमियम सेगमेंट पूरी तरह से छीन लिए। इसके अलावा निर्मा के विज्ञापन जो उसकी पहचान थे वो भी समय के साथ फीके पड़ने लगे। जहां बॉलीवुड की अभिनेत्रियां निर्मा का विज्ञापन करती थी।

दिमाग में फिट हो जाने वाले जिंगल बनते थे। वहीं कुछ नया करने के चक्कर में निर्मा ने रतिक रोशन के साथ विज्ञापन बनाया। अब सुनने में तो यह काफी दिलचस्प लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री का सबसे हिट एक्टर नाचते हुए अपने कपड़े धोए। लेकिन इस विज्ञापन से वाशिंग पाउडर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाली भारतीय महिलाएं कनेक्ट नहीं कर पाई और धीरे-धीरे निरमा की एय्स टीवी से गायब होने लगी। [संगीत] निर्माण नए जमाने के जिद्दीदारों के लिए निर्वाण मांस। इस तरह साल 2010 आते-आते निरमा मार्केट शेयर 60% से गिरकर आधे से भी कम हो गया और 2019 में यह सिर्फ 6% ही रह गया। इस तरह एक समय पर 17,000 करोड़ का साम्राज्य बना चुका निर्मा डूब गया। हालांकि आज भी निरमा ग्रुप एक बहुत बड़ा साम्राज्य है लेकिन उस मुकाम पर नहीं जहां वह पहले था। तो दोस्तों क्या 90 के दशक में आपके घर में भी Nirma वाशिंग पाउडर का बोलबाला था और आज आप कौन सी ब्रांड का वाशिंग पाउडर इस्तेमाल करते हैं? कमेंट्स में बताइए। अगर आपको आसान शब्दों में बताई गई और समझाई गई यह बिजनेस केस स्टडी पसंद आई तो वीडियो को लाइक और शेयर करके 9999 लाइक जरूर करवा दीजिए। और ऐसी दिलचस्प वीडियोस के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके पास वाली घंटी जरूर बजा दीजिए। जय हिंद, जय भारत।

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