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कैसे लता मंगेशकर को गुरु मानते ही त!बाह हो गई इस सिंगर की जिंदगी

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फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज सिंगर सुमन कल्याणपुर जी का निधन हुआ। आज उनका अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों के साथ इस इंडस्ट्री ने उन्हें विदा किया। लेकिन सुमन कल्याणपुर जी की जिंदगी और उनकी मौत दोनों को देखकर लगता है कि इनके साथ जीते जी और मरने के बाद भी जस्टिस नहीं हुआ।

इतनी खूबसूरत आवाज अगर सही चांसेस मिलते तो बहुत बड़ा नाम होता। लेकिन अफसोस इस बात का है कि वो उस दौर में आई जब म्यूजिक इंडस्ट्री में फीमेल वॉइसेस को डोमिनेट करती थी लता मंगेशकर जी और आशा जी और सुमन कल्याणपुर जी पर अक्सर यह इल्जाम लगता कि वो लता जी को कॉपी करती है। जबकि सच्चाई तो यह है कि वो लता मंगेशकर की बड़ी फैन थी और उन्होंने सिंगिंग ही लता मंगेशकर के गाने सुनकर सीखी है। जिसे आप मेंटोर मानते हो, जिसे आप अपनी इंस्पिरेशन मानते हो, अगर उसकी गायकी का असर आपकी गायकी में है, तो इसमें आपकी गलती नहीं है। बट इंडस्ट्री ने उनके साथ बहुत भेदभाव किया।

जैसा वो टैलेंट रखती थी, बड़े-बड़े गाने उन्हें मिलने चाहिए थे। उन्होंने बड़े-बड़े गाने भी गाए लेकिन उनके साथ पॉलिटिक्स हुई। कभी उनका गाना रखा गया म्यूजिक एल्बम और फिल्म दोनों में तो उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया। उनकी जगह किसी और लेडी का नाम लिख दिया गया। रेडियो में भी उनकी आवाज के जब गाने बजते तो उनके नाम के बजाय किसी और का नाम लिया जाता और कई बार तो उनके गाने वो रिकॉर्ड करके आते लेकिन फिल्म में किसी और की आवाज में उन्हें सुनाई देता। इस तरह से पॉलिटिक्स का वो शिकार हुई।

उन्होंने अपने आखिरी इंटरव्यू में भी उनके साथ हुई इसी पॉलिटिक्स के बारे में जिक्र करते हुए कहा था कि मैंने कई गाने गाए लेकिन मुझे इस इंडस्ट्री ने ठीक से क्रेडिट नहीं दिया। हां, दुनिया उन्हें कहती रही कि यह लता मंगेशकर को कॉपी करती है, लेकिन यह लता मंगेशकर को भगवान मानती थी, अपना मेंटोर मानती थी और लता मंगेशकर से हमेशा आशीर्वाद लेती थी। सुमन कल्याणपुर जी इस गम के साथ चली गई कि इस इंडस्ट्री ने उनके साथ जस्टिस नहीं की और जब उनकी हुई तो डेथ पर भी उनका जो फ्यूनरल था, जो अंतिम विदाई थी, उतनी ग्रैंड नहीं हुई। जितनी ग्रैंड वह खुद आर्टिस्ट थे। बहुत ही सिंपल तरीके से बहुत ही कम लोगों के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी गई। कुछ वीडियोस सामने आए हैं जिसमें देखा जा सकता है कि एक स्ट्रिक्ट बजट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

अदरवाइज हमने देखा है कि जितने भी दिग्गज कलाकार हैं उनके लिए कांच का बॉक्स लाया जाता है। उन्हें पूरा फ्लावर्स से सजाया जाता है। और जब इस तरह की चीजें होती है तो फिर लगता है कि एसोसिएशन क्या कर रहा है? एसोसिएशन को थोड़ी फंडिंग करके एक ग्रैंड विदाई सुमन कल्याणपुर जी को देनी चाहिए। लेकिन एसोसिएशन दूसरी बातों में उलझा है। यही वजह है कि एक दिग्गज आर्टिस्ट अनसंग हीरो की तरह हमारे यहां से चला गया। खैर उनकी जिंदगी भी ऐसी थी।

उन्होंने एक सिंपल जिंदगी जी और उनकी अंतिम विदाई भी इसी सिंपल तरीके से हुई। सुमन कल्याणपुर जी के अंतिम समय में भी उन लोगों ने उनके साथ दगा ही

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