नाना पाटेकर को क्यों नहीं बचाया जा सका? सीपीआर से भी क्यों नहीं बची नाना पाटेकर की जान? 45 मिनट तक दिया गया था सीपीआर फिर भी क्यों नहीं आया काम? नाना पाटेकर को करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया। लेकिन क्या वजह थी कि उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। जबकि यह कहा जाता है कि सीपीआर तुरंत देना बहुत इफेक्टिव होता है। दरअसल सीपीआर को हम और आप जैसा जानते हैं, यह ठीक वैसा है नहीं। हम जानते तो हैं, हमने सुना तो है लेकिन हम समझते नहीं हैं। मेडिकल टीम ने लगातार 45 मिनट तक नाना पाटेकर को सीपीआर दिया।
उनकी सांसे वापस लाने की हर मुमकिन कोशिश की गई लेकिन दुर्भाग्य उन्हें बचाया नहीं जा सका। सीपीआर को कहते हैं कार्डियोपल्मोनरी रेसिस्टेशन और यह एक इमरजेंसी प्रोसेस है जिसे उस वक्त दिया जाता है जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद हो जाता है या वो नॉर्मल तरीके से सांस नहीं ले रहा होता। इसमें खासतौर पर छाती को हाई प्रेशर से दबाया जाता है ताकि शरीर में खून का बहाव कुछ वक्त तक बना रहे। जब किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट के बाद 45 मिनट या उससे ज्यादा समय तक सीपीआर देने पर भी जान नहीं बचती तो इसके पीछे मेन वजह है सीपीआर देने में देरी और शरीर के भीतर हुई गंभीर क्षति।
कार्डियक अरेस्ट के दौरान जब दिल धड़कना बंद कर देता है तो दिमाग तक ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचना तुरंत रुक जाता है। दिल रुकने के 4 से 6 मिनट के भीतर मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं। 45 मिनट का वक्त मस्तिष्क के लिए बहुत लंबा वक्त होता है। सीपीआर कोई जादू नहीं है। सीपीआर कोई जादुई इलाज नहीं है। यह केवल छाती को दबाकर दिल का काम आर्टिफिशियली रूप से थोड़ा बहुत चलाने की कोशिश करने का है। ताकि दिमाग तक कुछ ऑक्सीजन पहुंचता रहे। असली इलाज के लिए डिफिब्रिलेटर यानी इलेक्ट्रिक शॉक या एडवांस मेडिकल सपोर्ट की जरूरत होती है। जैसा आपने फिल्मों में भी देखा होगा दो आयरन जैसी चीजें होती हैं और बार-बार उन्हें छाती के पास ऐसे दबाया जाता है। वो भी एक प्रोसेस है सीपीआर का।
अगर दिल रुकने और पहला सीपीआर या अस्पताल पहुंचने के बीच बहुत लंबा गैप है या बहुत टाइम बीत चुका है जैसे सोते समय या अकेले में यह कार्डियक अरेस्ट होना तो शरीर के दूसरे इंपॉर्टेंट जो पार्ट्स हैं जैसे लिवर, किडनी, मस्तिष्क वो पूरी तरीके से डैमेज हो चुके होते हैं। अगर दिल की नसें पूरी तरह ब्लॉक हो या दिल की मांसपेशियां बहुत कमजोर जैसे उसकी पंपिंग क्षमता 40% से कम हो चुकी हो तो 45 मिनट की कार्डियक मसाज के बावजूद दिल की खुद की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी दोबारा शुरू नहीं हो पाती। तो सीपीआर दिया कब जाता है? हर बेहोश इंसान को सीपीआर नहीं दिया जा सकता। अगर कोई इंसान अचानक गिर गया है, पुकारने या हिलाने पर भी वह कोई रिएक्ट नहीं कर रहा और उसकी सांसे भी नॉर्मल तरीके से नहीं चल रही तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका हो सकती है। ऐसी स्थिति में फौरन स्थानीय इमरजेंसी सेवा को फोन करना चाहिए। इसके साथ ही आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगिए। अगर एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिएटर मौजूद है तो उसे मंगवाइए। मदद आने तक सीपीआर शुरू रखिए। हालांकि इस बात का भी ध्यान रखें कि कार्डियक अरेस्ट में कई बार इंसान नॉर्मल तरीके से सांस लेने के बजाय सिर्फ हाफ्ता है। लेकिन इसे नॉर्मल सांस में नहीं माना जाता। सीपीआर में एक बहुत बड़ी गलती होती है। पता है क्या है? सीपीआर में सबसे बड़ी गलती मदद करने में देर करना हो सकती है। कई लोग इस डर से सीपीआर शुरू नहीं करते कि उनसे कुछ गलत ना हो जाए, बोनस ना क्रैक हो जाए। लेकिन अगर कोई इंसान अचानक बेहोश हो गया है और नॉर्मल तरीके से सांस नहीं ले रहा, मसलन हाफ रहा है तो तुरंत मदद बुलाना और सीपीआर शुरू करना बहुत जरूरी होता है। अब इन सबके बीच हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में एक बहुत बड़ा गैप यानी बहुत बड़ा डिफरेंस होता है।
अक्सर हम इन दोनों ही कंडीशंस को एक जैसा मानते हैं। जबकि इसमें बहुत बड़ा मेडिकल फर्क भी है। हार्ट अटैक तब आता है जब दिल की नसों में ब्लॉकेज के कारण खून का बहाव रुक जाता है। वहीं कार्डियक का अरिस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी है। इसमें दिल की धड़कन अचानक बेतरतीब हो जाती है और दिल शरीर में खून पंप करना पूरी तरीके से बंद कर देता है। हालांकि यह भी सच है कि हार्ट अटैक के कारण जो हृदय की इलेक्ट्रिकल कार्य प्रणाली है वह प्रभावित हो सकती है जो आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का रूप ले सकती है। तो कार्डियक अरेस्ट का सबसे ज्यादा जोखिम किसको होता है? जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका है या जिनके परिवार में दिल की बीमारियों का इतिहास रहा है, वह इसके ज्यादा शिकार हो सकते हैं।
इसके अलावा दिल का आकार बढ़ना, जन्मजात, हृदय दोष और कोोनरी आर्टरी डिजीज इसके मेन कारण है। हमारी खराब जीवन शैली भी इसी खतरे को बुलाती है। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ता मोटापा, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, डायबिटीज, धूम्रपान की आदत, शारीरिक रूप से एक्टिव ना रहना, बढ़ती उम्र इसके बहुत बड़े कारण हैं। अब इमरजेंसी वाली कंडीशन में आपको क्या करना है? जब किसी का दिल धड़कना बंद कर दे, तो दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में हर एक सेकंड कीमती होता है। बेहतर हो फ्रैक्शन ऑफ सेकंड जो प्राइमरी सेकंड है वहीं से आपका काम शुरू हो जाए। अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, उसकी सांस रुक जाए तो घबराइए नहीं बल्कि तुरंत यह कदम उठाइए जैसे मदद बुलाइए। सबसे पहले स्थानीय इमरजेंसी सेवाओं या एंबुलेंस को कॉल कीजिए। सीपीआर शुरू कर दीजिए। मेडिकल टीम के पहुंचने तक बिना रुके मरीज की छाती के बीच में जोर से और तेजी से दबाव डालते रहिए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन कहता है कि 1 मिनट में 100 से 120 बार छाती को दबाना चाहिए। एईडी का इस्तेमाल जो है उसको करना बहुत जरूरी है।
अगर आसपास किसी मॉल या सार्वजनिक जगह पर एईडी मशीन मौजूद है तो उसका इस्तेमाल कीजिए बेहतर। उसे खरीद कर रख लीजिए।