Cli

नाना पाटेकर के भाई ने बताया बरसो पुराना दर्दनाक सच, जानकर रो पड़ेंगे।

Uncategorized

इस समय हम पुणे में मौजूद हैं और हम उस जगह पर मौजूद हैं जहां पर बॉलीवुड के सुपरस्टार नाना पाटेकर का कुछ ही समय बाद अंतिम संस्कार वहां पर होगा। देखिए यह फार्म हाउस है नाना पाटेकर का डोंजेवाड़ी में डोंजे नाम की ये जगह है। इसे वाड़ी भी कहा जाता है। यहां पर उनका यह आलीशान फार्म हाउस है। काफी बड़ा फार्म हाउस है। आगे जाकर एक किला है सिंहगढ़।

उसके पैरों तले यह फार्म हाउस यहां पर है। कई एकड़ों में फैला हुआ यह फार्म हाउस है और यहां पर नाना पाटेकर रहा करते थे। कल जब नाना पाटेकर गोवा में थे तो उनके बेटे मल्हार वो यहीं रहने के लिए थे और नाना पाटेकर के जाने की दुखद खबर मल्हार को इसी फार्म हाउस में रहते हुए मिली थी। मैं यहां पर आपको दिखाना चाहता हूं कि देखिए अंतिम संस्कार की जो तैयारी है वो इसी फार्म हाउस के बाहर या नाना पाटेकर की जगह है। वहां पर अंतिम संस्कार की तैयारी यहां पर शुरू है।

पुलिस प्रशासन हो, स्थानीय प्रशासन हो वो यहां पर पूरी तरीके से काम में जुटा हुआ नजर आ रहा है। यह देखिए यहां पर काम किया जा रहा है और यहीं पर नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को रखा जाएगा और उसको यहां पर मुख्नि दी जाएगी। काम फिलहाल कुछ ही देर में यहां पर खत्म हो जाएगा। दूरदराज इलाकों से लोग यहां पर फिलहाल पहुंच रहे हैं और यहां पर नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए ज्यादा से ज्यादा भीड़ उमड़ने की यहां पर उम्मीद जताई जा रही है। बताया जाता है राजनीतिक जगत से भी हस्तियां यहां पर पहुंचने वाली है। देख सकते हैं कि यहां पर भी निर्माण कार्य चल रहा है। नाना पाटेकर अपना ज्यादातर समय इसी डोंजे में यहां पर बिताते थे और यहीं रहकर अपनी खेती का काम भी करते थे। यहीं से निकलकर महाराष्ट्र के दौरे पर भी जाते थे और महाराष्ट्र के किसानों से हो या वो कनेक्ट करते थे या फिर पानी का काम हो या फिर कोई भी खेती से जुड़ा काम हो, किसानों से बातचीत वो लगातार यहां पर करते थे। आप कहां से आए हैं?

हम पुणे से ही हैं। पुणे से क्या कहेंगे नाना नहीं है आज सबके बीच? अच्छे थे। हम अच्छे थे हम आए थे पहली बार भी इधर पहले भी एक दो बार आके गए हम नाना के साथ बहुत बार आते थे जाते थे अच्छे थे नाना अच्छा सबका अच्छा सोचते थे हम आप क्या कहेंगे यही बताइए आपको याद कुछ है नाना किसी नहीं नहीं हमें भी आते थे दो तीन बार आए यहां अच्छा कभी उनका प्रोग्राम विराम कुछ अटेंड किया था भाषण सुना था कभी सुना अभी पुणे में सुना है दो तीन बार इनको पुणे में दो-तीन बार भाषण उन्होंने सुना था किसान है.

लोग हैं नाना की याद यहां पर बता बता रहे हैं कि किस तरीके से नाना यहां पर लोगों के बीच रहते थे। किसान ने याद भी बताई कि गणपति में मुंबई के उनके छोटे घर में जाते थे। लेकिन नाना का दिल बड़ा था। नाना हमेशा उनका स्वागत करते थे। साल 2001 से नाना पाटेकर के पड़ोसी श्रीकांत महाले हमारे साथ मौजूद है। यहां पर बात करने के लिए। 2001 से कह सकते हैं कि आपकी वो पड़ोसी रही। दोस्ती भी होगी।

आपकी 25 साल हो गए आज ना लॉकडाउन में हम मेरा पूरा फैमिली और उनका फैमिली लॉकडाउन में इधर ही थी हम उनको वो बुलाते थे खाना खाने को मेरे यहां भी बहुत बार आए बस मेरे बच्चों को बहुत प्यार करते थे हम क्योंकि मेरी मिसेज गुजर गई 2013 को तो मेरे को नाना ने इतना आधार दिया नहीं तो मैं खड़ा होना ही मुश्किल हुआ था अच्छा इतना मेरे बुरा हाल हुआ था बच्चे बहुत छोटे थे और कोई नहीं था पीछे लेकिन नाना ने बड़े भाई जैसे मुझे आधार दिया अब लॉकडाउन कह करीब एक साल तक लॉकडाउन चला था। तो क्या-क्या थे? क्या क्या-क्या करते थे आप वो बताइए। खुल के हमें बताइए। वो टाइम अदर टाइम में क्या होता है ये लोग आते हैं ना इधर इधर फार्म हाउस या रिसोर्ट वगैरह में तो बाहर निकले कभी तो तकलीफ देते थे बच्चे लोग फोटो निकालो फोटो निकालो। इसलिए बाहर नहीं निकलते थे। लॉकडाउन में वो चांस नहीं था। लॉकडाउन में फ्री थे एकदम। लॉकडाउन में देखो कोई प्रॉब्लम नहीं था। तो हमें मेरे को और बच्चों को हमेशा बुलाते थे इधर आओ जाओ खाना खाने को। बच्चों को बोलते थे मेरे को टीवी पे सेट करके दो। ये दिन नहीं जाता है। इतना सेट करके दो। नाना को खाने में क्या पसंद था?

मटन ज्यादा पसंद करते थे क्या? मटन खुद बनाते भी थे हमने सुबह। बनाते थे मटन लेकिन डेली नहीं खाते थे कभी। लेकिन बनाने में उनके जैसा कुक नहीं कोई फैंटास्टिक कुक। बैंगन के बैंगन के पकोड़े कभी सुने हैं क्या आपने? नहीं। वो नाना बना देते हैं। मैंने खाए हुए माटी, खेती और किसान को लेकर भी नाना ने बहुत काम किया है। बहुत मतलब कैसे आपको क्या बताऊं? उनका उन्होंने खुद के इतने पैसे डाल के ये नाम फाउंडेशन में बच्चों को ले जा के काम किया और जितना भी किसान है उनको कितना हेल्प किया देखो लातूर से लोग आए हैं अभी वो देखा कि नहीं अभी लातूर से लोग आए हैं लातूर से हां बीड़ से लोग आए अभी वहां वहां का ही दौरा था उनका कल का भीड़ में महाराष्ट्र में फिलहाल आकाल की स्थिति है तो उनका मार्गदर्शन जरूरी था बहुत जरूरी था वो शिंद साहब को भी बोले कुछ करो यार कुछ करो वो तो बोले नहीं हम कर ही रहे हैं नाम फाउंडेशन नाम फाउंडेशन किसी की राह नहीं देखता था। वो जितना बने सब गांव को इकट्ठा करके उन लोगों का जेसीबी वगैरह लेके उसमें डीजल भर के खुद ही चालू कर देते थे। आपके लिए कितना बड़ा दुख है? एक 25 साल पुराना दोस्त बड़ा भाई गया मेरा। एक बड़ा भाई गया और कुछ वो सब मेरे को तो बड़ा भाई नहीं है लेकिन वो बड़ा भाई गया।

इतना बड़ा स्टार था। प्यारा था यार। नहीं उन स्टार का कोई रूल नहीं।लेकिन कभी हां ये नहीं था। इल्म नहीं था। बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं। स्टार सिंपल सिंपल सिंपल। जमीन से जुड़ा हुआ है। वही कुर्ता वही गमछा बस मिट्टी पे कभी भी चप्पल नहीं पहनने की। ऐसे पैदल चलते थे वहां पूरे फार्म हाउस में 22 एकड़ का फार्म हाउस है। 22 एकड़ लेकिन वैसे ही चलते थे। तो ये थे श्रीकांत महाले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *