बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी जिंदगी से जुड़े कई पहलू फिर चर्चा में हैं। करीब पांच दशक तक हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नाना का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था।
फिल्मों में आने से पहले उन्होंने आर्थिक तंगी देखी, फिल्मी पोस्टर पेंट किए और थिएटर में अपनी पहचान बनाई। उनके पिता टेक्सटाइल पेंटिंग और छोटे कारोबार से जुड़े थे। अब उनके निधन के बाद एक सवाल फिर चर्चा में है- नाना पाटेकर किस जाति से थे? उनके पिता क्या करते थे और उनका बचपन कैसा गुजरा? कौन-सा मलाल नाना को अंदर ही अंदर खाए जा रहा था? आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े ये पहलू…
नाना पाटेकर किस जाति से थे?नाना पाटेकर ने एक पुराने इंटरव्यू में अपनी पत्नी नीलकांति पाटेकर की जाति का जिक्र करते हुए खुद को मराठा बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी ब्राह्मण हैं, जबकि वह खुद मराठा हैं। यह बयान उनके पुराने इंटरव्यू में प्रकाशित हुआ था। हालांकि, नाना बाद के सालों में जाति की पहचान को लेकर अलग नजरिया भी जाहिर करते रहे। उन्होंने कहा था कि उनकी मां ने उन्हें सिखाया था कि उनकी जाति ‘इंसान’ और धर्म ‘मानवता’ है। इसलिए नाना की जाति को लेकर सबसे सटीक बात यह है कि उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में खुद को मराठा बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने जातिगत पहचान को महत्व नहीं देने की बात भी कही
नाना पाटेकर की पत्नी का नाम नीलकांति पाटेकर है। नाना के मुताबिक, नीलकांति ब्राह्मण परिवार से थीं और बैंक में अधिकारी के पद पर काम करती थीं। दोनों की मुलाकात थिएटर से जुड़ाव के दौरान हुई थी। नीलकांति नौकरी के साथ थिएटर में भी दिलचस्पी रखती थीं। उस समय नाना की कमाई बेहद कम थी। उन्हें थिएटर के एक शो के लिए करीब 50 रुपये मिलते थे, जबकि नीलकांति की मासिक तनख्वाह करीब 2,500 रुपये थी। नाना ने बताया था कि नीलकांति ने उन्हें पैसे की चिंता किए बिना अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों ने 1978 में शादी की। नाना ने अपने करियर के शुरुआती संघर्ष में पत्नी के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया था।
नाना पाटेकर के पिता क्या करते थे?नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग और कपड़े के कारोबार से जुड़े थे। नाना के एक पुराने इंटरव्यू के मुताबिक, उनके पिता मुंबई में रहते थे, जबकि नाना अपनी मां और भाइयों के साथ मुरुड में पले-बढ़े। नाना के पिता को थिएटर और तमाशा पसंद था। नाना जब गांव में नाटक करते थे, तो उनके पिता मुंबई से उन्हें देखने गांव तक पहुंचे थे। नाना ने बताया था कि बचपन में उन्हें लगता था कि उनके पिता उनके बड़े भाई को ज्यादा प्यार करते हैं। लेकिन जब उनके पिता उनका ‘वाल्मीकि’ नाटक देखने मुंबई से गांव पहुंचे, तो उनकी यह गलतफहमी दूर हुई।