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प्लास्टिक सर्जरी के बाद मुमताज का चेहरा देखकर दहल गए थे लोग? ऐसा क्या हुआ था?

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दो घूंट मुझे भी पिला दे शराबी दे फिर होता है क्या खूबसूरत है तू तू हूं मैं भी हंसी तुझसे ना देख आज हम एक ऐसी हीरोइन की कहानी लेकर आए हैं जो राजेश खन्ना को चोर समझ कर ऐसे बात करती है। तू क्यों बे ये घर क्या तेरे बाप की धर्मशाला है जो टांगे फैला कर छोड़ा था? धावे में कुछ नहीं मिला तो यहां घुसाया है। सोचा अंधे मां-बाप का बेटा घर नहीं है। मौका अच्छा है क्यों? इस हीरोइन का एक सुपरहिट गाना जिसमें शमी कपूर के साथ ऐसे हिलते हुए डांस करती है। आजकल तेरे में प्यार करते हर जबान पर और लोग इस गाने को आज भी मजे लेकर सुनते हैं। सबको मालूम है और सबको खबर हो गई। वह इतनी खूबसूरत थी कि आज भी लोग उनके गाने के वीडियोस देखकर अपना आंख सेकते हैं। दुनिया में लोगों को धोखा कभी हो जाता है। इस हीरोइन के फिल्मी गाने ऐसे थे कि आजकल रील्स में बॉयफ्रेंड अपने गर्लफ्रेंड के लिए इस्तेमाल करता है। गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर गोरा रंग दो दिन में ढल जाएगा। राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, शमी कपूर और भी लाखों लोग इस हीरोइन के दीवाने थे। तो हम बात कर रहे हैं सबसे खूबसूरत हीरोइनों में से एक रही मुमताज की। हुई बाबू दिल लहरी बाबू हाय भगवान गया। आखिर क्यों उन्हें हनुमान की हीरोइन कहा जाता था? क्यों मुमताज को मर्दाना हीरोइन कहा गया? कैसे 60 और 70 के दशक के सारे बॉलीवुड एक्टर्स उनको पाने के लिए मरते थे। किसी का सजना जवानी पे जोर नहीं। क्यों अपने करियर के ऊंचाइयों पर पहुंचकर मुमताज अचानक से रातोंरात लाइमलाइट से दूर हो गई? मुमताज के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे राज है जिन्हें आप जानकर हैरान रह जाएंगे। आज मुमताज कहां है और किस हालत में है? जानेंगे और भी बहुत कुछ। आप बस दिल थाम कर बैठ जाइए और इस वीडियो को एक लाइक कर दीजिए। तो चलिए शुरू करते हैं मुमताज की कहानी। जाने मुझे ऐसे देखा तूने कैसे के होने लगे जी। [संगीत] मुमताज का जन्म 31 जुलाई 1947 को मुंबई में हुआ था। मुमताज का पूरा नाम मुमताज अंसारी है।

उनके पिता का नाम था अब्दुल सलीम असकारी और मां का नाम था शादी हबीब अघा जो ईरानी थी। मुमताज जब एक साल की थी तभी उनके पिता ने उनकी मां को तलाक दे दिया था। इसलिए मुमताज का बचपन अपनी नाना-नानी के पास ही बीता। परिवार की हालत ऐसी थी कि दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिलता था। तो मुमताज की मां ने मुमताज को बचपन से ही नाटक और नृत्य के लिए फिल्मों में काम ढूंढने लगी ताकि उनके पैसों से घर में दो वक्त का खाना आ सके। 1958 में आई फिल्म सोने की चिड़िया में केवल 12 साल की मुमताज ने पहली बार एक बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। उनका काम फिल्म मेकर को अच्छा लगा तो मुमताज को चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम मिलने लगा। [संगीत] बाल कलाकार बनकर काम किया। मुमताज ने बचपन से ही सपोर्टिंग किरदार निभाए और यह सिलसिला उनकी जवानी तक चलता रहा। मुमताज तो बड़ी हो चुकी थी लेकिन अभी भी उन्हें साइड किरदार ही मिलते थे और वह सालों तक सिर्फ एक साइड कलाकार बनकर ही रही। मुझे भी पिला दे शराबी देख फिर होता है क्या? उन्होंने फिल्म राम और श्याम मैं शादी करने चला। मेरे सनम, खानदान और हमराज जैसी कई फिल्मों में एक सपोर्टिंग एक्ट्रेस का किरदार निभाया था। यह वह समय था जब कुश्ती और पहलवानी में दारा सिंह ने देश दुनिया में झंडे गाड़ दिए थे। वह इतने फेमस हो गए थे कि उन्हें फिल्मों का ऑफर भी मिलने लगा था। हे बॉय। लेकिन समस्या यह थी कि कोई भी बड़ी हीरोइन दारा सिंह के साथ काम नहीं करना चाहती थी। इसी समय कुछ फिल्म मेकर की नजर मुमताज पर पड़ी और उन्होंने मुमताज से दारा सिंह की हीरोइन बनने को कहा। मुमताज भी तैयार हो गई क्योंकि मुमताज को लीड हीरोइन नहीं मिल रही थी और दारा सिंह को तो हीरोइन से मतलब था। फिर चाहे वह कोई भी हो। जाने जाना यूं ना देखो आज नफरत से मुझे। इस तरह 1963 में दारा सिंह की फिल्म फौलाद में पहली बार मुमताज हीरोइन बनी। उमतवार साजना और ऐसी बनी कि फिर इस जोड़ी ने फिल्मों की लाइन लगा दी थी जिनमें फौलाद वीर भीमसेन हरकुलस सिकंदर एआम तार्जन कम्स टू दिल्ली और डाकू मंगल सिंह जैसी लगभग 16 फिल्में आई और मुमताज को तारा सिंह की हीरोइन कहा जाने लगा। मैं एक हिंदुस्तानी लड़की हूं। एक बार जिसका हाथ थाम लिया जिंदगी भर उसी का साथ देना पड़ता है। तो ठीक है। मुझे कोई ऐतराज नहीं। क्या बात है सर। क्या बात है सर। यह सभी फिल्में स्टंट फिल्में होती थी जिनमें मुमताज मारधाड़ करती हुई और स्टंट करती हुई नजर आती थी। इसलिए मुमताज को स्टंट हीरोइन भी कहा जाने लगा था। दारा सिंह एक पहलवान थे तो उनकी फिल्मों को भी इतनी पहुंच लोगों तक नहीं मिलती थी और उनकी फिल्मों को बी ग्रेट फिल्म भी कहा जाता था।

अच्छाई तो सिर्फ अच्छों से की जाती है। तो क्या मैं बुरी हूं? हम बुरी तो नहीं। आप काफी अच्छी हैं। हे रहा नहीं जाता। तड़प ही ऐसी है ना। मुमताज लगभग 20 फिल्मों में हीरोइन बन चुकी थी। जिनमें से 16 फिल्में हिट थी। लेकिन लोगों की नजरों में वो अब भी नहीं बन पाई थी। लोग उसे बी ग्रेड हीरोइन, स्टंट हीरोइन और मर्दाना हीरोइन तक कहने लगे थे। लेकिन अब धीरे-धीरे दारा सिंह के साथ काम करके मुमताज सबकी नजरों में आ चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद दूसरा कोई भी डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्मों में हीरोइन नहीं बनाना चाहता था। इसलिए मुमताज लगातार सपोर्टिंग किरदार ही निभाती रही। जिनमें फिल्म मेरे सनम में भी मुमताज दिखाई दी थी। यह है रेशमी जुल्फों का अंधेरा। एक्टर राजकुमार और धर्मेंद्र की फिल्म काजल में भी मुमताज दिखाई दी। 1965 में आई फिल्म दो दिल, जिसमें मुमताज सिर्फ एक गाने के लिए चर्चित हुई, और यह गाना था राम-राम जपना पराया माल अपना। लेकिन एक सेकंड भराया माल अपना तू समझा हां नहीं तू समझा नहीं 1966 में भी एक मूवी आई जिसका नाम था यह रात फिर ना आएगी और इस मूवी की हीरोइन थी शर्मिला टैगोर लेकिन मुमताज ने भी सपोर्टिंग किरदार निभाया था और इस फिल्म में काम करते हुए शर्मिला टैगोर के साथ उनका झगड़ा भी हो गया था। क्या बात कर रहा है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। इसी साल मनोज कुमार की एक बेहतरीन फिल्म आई सावन की घटा और इस फिल्म की हीरोइन भी शर्मिला टैगोर ही थी। लेकिन मुमताज को जब लोगों ने इस गाने में देखा आज कोई प्यार से दिल की बातें उस समय इस गाने ने और मुमताज की खूबसूरती ने ऐसा तहलका मचाया कि फिल्म की हीरोइन से ज्यादा मुमताज की चर्चा हुई। बाप का नाम 1967 में पहली बार मुमताज ने मेन हीरोइन के तौर पर काम किया। फिल्म का नाम था वो कोई और होगा। हालांकि यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप हो गई और इसी साल उन्हें दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म आई राम और श्याम और यही वह पहली फिल्म बनी जो सही मायने में मुमताज को एक हीरोइन बनाया। रंगीली मौसम वेगा पिया बिन था फीका फीका। इसमें उन्होंने एक सेकंड हीरोइन का किरदार निभाया था। लेकिन पहली बार ना सिर्फ मुमताज की एक्टिंग को पसंद किया गया बल्कि उन्हें दूसरे हीरोइन जितना इज्जत भी दिया गया और राम और श्याम ही वह फिल्म बनी जिसके बाद मुमताज को एक हीरोइन के तौर पर फिल्म मिलने लगी थी। इसके बाद मनोज कुमार की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म आई पत्थर के सनम जिसमें मनोज कुमार एक तरफ वाहिदा रहमान से यह कह रहे थे महबूब मेरे तू है तो दुनिया कितनी हंसी है तो वहीं दूसरी तरफ मुमताज के साथ भी रोमांटिक गाने गा रहे थे ये मतवाली चाल झुक जाए फूलों की डाल और यह मूवी भी लाजवाब थी। इसके बाद फिल्म हमराज आई और यह फिल्म भी बॉलीवुड की एक बेहतरीन फिल्म बनी जिसे आज भी लोग पसंद करते हैं। इसके बाद जितेंद्र की फिल्म आई बूंद जो बन गई मोती और इस फिल्म में जितेंद्र के साथ मुमताज की जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद शमी कपूर की एक फिल्म आई ब्रह्मचारी। आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जबान पर और इस फिल्म का यह गाना इतना बड़ा हिट हुआ कि आज भी लोग इसे ओल्ड इज गोल्ड कह कर सुनते हैं और यह फिल्म बेहतरीन थी जिसका हर गाना लाजवाब था फिर चाहे यह गाना हो चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी गाड़ी में निकली अपनी सवारी या फिर यह हमें काले हैं तो क्या हुआ दिल वाले हैं 1969 में एक फिल्म आई थी दो रास्ते, जिसमें शशि कपूर को साइन किया गया था। लेकिन शशि कपूर ने यह कहकर मना कर दिया कि अगर मुमताज इस फिल्म की हीरोइन होगी तो वह इस फिल्म में काम नहीं करेंगे। सर, पहले इन्होने हटा दीजिए। क्यों? हां सर हटा दीजिए। मैं मां-बाप का इकलौता बेटा हूं। अगर मुझे बिजली का करंट लग गया तो। उनका कहना था कि मुमताज कोई बड़ी हीरोइन नहीं है। इसके बाद राजेश खन्ना ने इस फिल्म में काम किया और जब राजेश खन्ना ने मुमताज से यह कहा इन्हें देखकर जी रहे हैं सभी। तो इस गाने ने मुमताज को घर-घर तक पहुंचा दिया था। यह फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई कि रातोंरात मुमताज को बड़ी हीरोइन बना दिया और इस फिल्म के गानों की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम लगती है। किसी का सजना जवानी पे जोर नहीं फिल्म का हर गाना बेहतरीन था और खासकर यह वाला तेरी चुनरी लहराई बरसात हो गई। इसके बाद अगली फिल्म राजेश खन्ना के साथ आई। फिल्म का नाम था बंधन और इस फिल्म में भी राजेश खन्ना के साथ मुमताज की जोड़ी खूब जमी। इसके बाद धर्मेंद्र की फिल्म आई आदमी और इंसान। हर खुशी इत्तेफाक है। और यह फिल्म हिट रही। इसके बाद मुमताज एक बार फिर से राजेश खन्ना की हीरोइन बनी। फिल्म का नाम था सच्चा और झूठा। सज के आएंगे भूले राजा भैया राजा बजाएगा बाजा और इस फिल्म ने भी मुमताज को खूब चर्चित किया। इस फिल्म के गाने भी बेहतरीन थी। जिंदगी में भी मेरी आ जाओ बीत जाए ना यह। 1970 में आई परदेसी और यह फिल्म भी हिट रही। इसके बाद आई खिलौना और मुमताज की यह फिल्म एक यादगार फिल्म बन गई जिसे आज भी मुमताज की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जाता है। हमें फुर्सत नहीं मिलती। इसके बाद हमजोली आई। इस फिल्म में मुमताज एक आइटम सॉन्ग में नजर आई और इस गाने में वो इतनी खूबसूरत लग रही थी कि इस गाने को शूट करने आए लोगों की रातों की नींद उड़ गई। जाने मुझे ऐसे देखा तूने कैसे के होने लगी जी में टिक टिक टिक टिक जितेंद्र के साथ भी मुमताज की जोड़ी खूब जमी और हर दूसरी फिल्म में दोनों एक साथ दिखाई देने लगे थे। फिल्म हिम्मत में भी जितेंद्र और मुमताज की जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद भी मुमताज की कई फिल्में आती रही जिनमें कुछ हिट हुई और कुछ फ्लॉप जिनमें मां और ममता मेला कठपुतली चाहत और उपासना जैसी कई बेहतरीन फिल्में शामिल रही और मुमताज सबसे महंगी हीरोइन वाली लिस्ट में शामिल हो गई। आजकल तेरे मेरा प्यार करते हर जबान पर 1971 में मुमताज देवांद की हीरोइन बनी। मूवी आई तेरे मेरे सपने और यह फिल्म भी गजब की थी जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।

उसके बाद अगली फिल्म फिर देवानंद के साथ आई। हरे राम हरे कृष्णा। कांचा रे कांचा रे प्यार मेरा सा। और शायद ही कोई होगा जिसने यह फिल्म ना देखी हो। और यह वही फिल्म थी जिससे जीनत अममान ने बॉलीवुड में कदम रखा था और देवानंद ने उसे अपनी बहन मानकर यह गाया था। एक हजारों में मेरी बहना है। वो अलग बात है कि बाद में देवानंद अपनी इसी बहन के प्यार में पड़ गए और यह कहने लगे चाहे मेरी जान जाए चाहे मेरा दिल जाए। 1972 में एक बार फिर से राजेश खन्ना ने मुमताज को अपनी हीरोइन बनाया और मूवी आई दुश्मन और इस मूवी ने भी सफलता के झंडे गाड़ दिए। यह वह समय था जब लोग राजेश खन्ना को पर्दे पर देखने के लिए पागल थे और राजेश खन्ना के लिए लोगों का जुनून सिर चढ़कर बोलता था। फिल्म से जुड़ा एक किस्सा भी कमाल का था। एक बार शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना को चोट लग गई थी और जब मूवी के प्रमोशन के लिए राजेश खन्ना काम कर रहे थे तो उनके सिर पर एक पट्टी बंधी हुई थी। इससे लोग इतना दुखी हुए कि लोग अपना सिर फोड़ कर खुद डॉक्टर के पास पट्टी बनवाने के लिए चले जाते थे। लोगों ने इसे फैशन बना लिया था और हर कोई अपने सिर पर पट्टी बांधकर घूमने लगा था। राजेश खन्ना ने जो स्टारडम देखा है उसे आज तक किसी दूसरे एक्टर ने ना तो देखा है और ना ही कभी देख पाएगा। इसके बाद मुमताज राजेंद्र कुमार की हीरोइन बनी। फिल्म आई तांगे वाला। बड़ा आया डब्बा हटाने वाला। देख मैं कह देती हूं पहले मेरा आटा पीसेगा फिर ज्वार फिर बाजरा उसके बाद मक्का। बस और मुमताज का जुबली कुमार के साथ काम करने का सपना भी पूरा हो गया। थक जाए। कोई बात नहीं तेरे मन की गली तो खिल जाएगी। इसके बाद भी शरारत, प्यार दीवाना, गोमती के किनारे, धड़कन जैसी कई बेहतरीन फिल्में आई और इसके बाद मुमताज फिरोज खान की हीरोइन बनी। फिल्म का नाम था अपराध और इसमें भी मुमताज की हर किसी ने तारीफ की और फिल्म के गाने भी बड़े हिट हुए। हुए जो मेरे मेरा सब कुछ तुम्हारा हुआ और इस फिल्म में मुमताज ने पहली बार बिकनी पहनी थी और उनके बिकनी पर भी बड़ा विवाद हुआ। कुछ लोगों ने अपनी आंखें से की तो कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति का अपमान बताया। लेकिन कुछ भी हो इससे मुमताज को तो फायदा ही फायदा हुआ और वह सुर्खियों में आ गई थी। इसके बाद राजेश खन्ना की एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म आई अपना देश। दुनिया में लोगों को धोखा कभी हो जाता है। इस फिल्म में मुमताज एक अलग ही लुक में दिखाई दी। फिल्म के गाने भी बड़े हिट हुए और खासकर मूवी का यह गाना तो हर किसी का पसंदीदा बन गया था। सुनिए जी उन पे भी जादू कभी हो जाता है। गाने का बैकग्राउंड म्यूजिक ही लोगों को थिरकने के लिए मजबूर कर देता था। फिर जितेंद्र ने मुमताज से कहा रूप तेरा माना और यह फिल्म भी सुपरहिट रही। 1973 में मुमताज अमिताभ बच्चन की हीरोइन बनी। फिल्म का नाम था बंधे हाथ और इसमें भी मुमताज का काम जनता को बेहद पसंद आया। कहां और अमिताभ बच्चन को भी इस फिल्म से बहुत फायदा हुआ क्योंकि उस समय पर अमिताभ बच्चन कोई बहुत बड़े एक्टर नहीं हुआ करते थे। अजी हम कलाकारों का क्या ठिकाना? जहां रात हुई वहीं आशियाना। इसके बाद धर्मेंद्र फिल्म लोफर में नजर आए और शायद ही कोई ऐसा होगा जो मुमताज और धर्मेंद्र की यह फिल्म ना देखी हो और अगर फिल्म ना भी देखी हो मगर इसके गाने तो हर किसी ने सुनी ही होंगी। खूबसूरत है तुम भी हसीन। फिल्म का हर गाना एवर ग्रीन था। फिर चाहे यह गाना हो आज मौसम बड़ा बेईमान है। इसके बाद एक बार फिर धर्मेंद्र के साथ ही मुमताज झील के उस पार भी दिखाई दी और यह फिल्म भी बेहतरीन रही जिसके कुछ गाने बड़े हिट हुए थे। चल चले दिल करे चल कर किसी का इंतजार। 1974 में शशि कपूर की फिल्म आई चोर मचाए शोर और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। यह भी सोचने वाली बात है कि जिस हीरोइन को नीचा दिखाकर शशि कपूर ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था, तो वहीं इस फिल्म में शशि कपूर मुमताज को अपनी हीरोइन बनाने के लिए जिद पर आ गए थे। ले जाएंगे, ले जाएंगे, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे।

साथ ही साथ उन्होंने मुमताज के साथ रोमांस भी किया था। इसके बाद मुमताज ने एक बार फिर से राजेश खन्ना का हाथ पकड़ा। फिल्म आई आपकी कसम और राजेश खन्ना के साथ मुमताज की जोड़ी बहुत जमती थी और ऑडियंस भी दोनों को देखना पसंद करते थे। सुनो कहा अरे कहा कुछ हुआ क्या? और फिल्म का यह गाना तो आज भी सावन के महीने में लोग YouTube के हिस्ट्री से निकालकर पूरा महीना सुनते हैं। जय जय शिव शंकर काटा लगे ना शंकर के प्याला तेरे नाम का। दोनों साथ में शूटिंग कर ही रहे थे तो सोचा कि क्यों ना एक और हो जाए। तो अगली फिल्म भी साथ में आई रोटी और जब उन्होंने मुमताज से यह कहा तेरे रंग में इतना घुमा कर। तो हर कोई मुमताज की खूबसूरती पर मर मिटा और रोटी मुमताज की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक बनी। 1975 में मुमताज ने राजेश खन्ना के साथ फिल्म प्रेम कहानी की और इसमें भी राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी ने देखने वालों की लाइन लगा दी और इस फिल्म का भी हर गाना बेहतरीन था। प्रेम कहानी में एक लड़का होता है। एक लड़की होती है। अरे कहना क्या चाहते हो? लोगों ने इसे इतना पसंद किया कि फिल्म के साथ-साथ इस जोड़ी को भी सुपरहिट बना दिया। 1976 में रीना रॉय नागिन बनी और इस मल्टीस्टारर फिल्म में मुमताज ने फिरोज खान की हीरोइन का किरदार निभाया। 1977 में मुमताज ने आखिरी बार राजेश खन्ना के साथ काम किया था। फिल्म आई थी आईना और इस मूवी के बाद एक लंबे समय के लिए मुमताज ने फिल्मों से दूरी बना ली। जाने मुझे ऐसे देखा तूने कैसे के होने लगी जी। टिक यह वो समय था जब मुमताज अपने करियर के पीक पर चल रही थी और उनके सामने फिल्मों की लाइन लगी हुई थी। लेकिन फिर भी अचानक से मुमताज ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया और सब कुछ छोड़छाड़ के उन्होंने ऐसा क्यों किया इसकी चर्चा हम आगे करेंगे। इसके बाद मुमताज ने लगभग 13 साल बाद फिल्मों में वापसी की। लेकिन इस बार हीरोइन बनकर नहीं बल्कि हीरोइन की मां बनकर आई थी। ओह मम्मा बहुत भूख लगी है। कुछ खानावा-वाना बनाओ। अच्छा बाबा अभी लकी हूं। 1990 में आई फिल्म आंधिया और यही मुमताज की आखिरी फिल्म थी। इसके बाद मुमताज ने हमेशा के लिए फिल्मों से सन्यास ले लिया और दोबारा कभी भी किसी फिल्म में काम नहीं किया और अब हम बात करेंगे मुमताज की पर्सनल लाइफ की। मुमताज ने अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत दारा सिंह के साथ की थी। दोनों ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया। धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियां भी बढ़ने लगी थी और मुमताज दारा सिंह के प्यार में पड़ गई। दोनों के अफेयर की चर्चाएं भी खूब उड़ी, लेकिन दोनों का रिश्ता मंजिल तक नहीं पहुंच पाया। आप काफी अच्छी हैं। चलिए मैं आपको राजमहल पहुंचा दूं। मुमताज की बहन ने दारा सिंह के छोटे भाई से शादी कर ली थी और इस तरह मुमताज दारा सिंह की साली बन चुकी थी। श्मी कपूर ने भी मुमताज को शादी के लिए प्रपोज किया था। और मुमताज ने भी हां कर दिया था। लेकिन दूसरी लड़कियों को अपनी फिल्मों में नंगा-नाच करवाने वाला कपूर परिवार एक बात पर अड़ा रहा कि उनके घर की बहू बेटियां कभी भी फिल्मों में काम नहीं करेगी। तो उस समय कपूर ने मुमताज को शादी के लिए अपना करियर छोड़ने को कहा। लेकिन मुमताज ने उनकी यह शर्त नहीं मानी और शमी कपूर से दूरी बना ली। बॉलीवुड के बड़े फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर यश चोपड़ा भी मुमताज के दीवाने हुआ करते थे, और मुमताज से शादी करना चाहते थे। यश चोपड़ा के भाई बी आर चोपड़ा अपने भाई का रिश्ता लेकर मुमताज के घर पर भी गया था।

लेकिन मुमताज के घर वालों को यह रिश्ता पसंद नहीं आया और उन्होंने शादी के लिए मना कर दिया। जिसके बाद मुमताज को और भी बड़े-बड़े एक्टर्स ने प्रपोज किया था और हर कोई उनसे शादी करना चाहता था। लेकिन मुमताज का दिल आया एक अफ्रीकन पर जो युगांडा देश का रहने वाला था। जो भारतीय मूल के ही निवासी थे जिसका नाम था मयूर मधवानी जो युगांडा में बिजनेसमैन था और अपने करियर के पीक पर अचानक से मुमताज ने मयूर से शादी कर ली और फिल्मों में काम करना छोड़ दिया। जब उनकी शादी की खबर लोगों ने सुनी तो लोग सड़कों पर उतर गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुमताज जिस होटल में शादी रच रही थी, उसके बाहर लोगों की इतनी भीड़ हो गई थी कि पूरा होटल का स्टाफ डर गया था। मुमताज की एक झलक देखने के लिए लोग होटल के गेट और खिड़कियां तोड़कर अंदर घुसने लगे थे और मुमताज को अपना शादी का मंडप छोड़कर भागना पड़ा। वाह क्या एक्टिंग कर रहा है। मुमताज का घर भी बड़ा चर्चित रहा क्योंकि वह घर मुमताज का नहीं बल्कि मीना कुमारी का था। मुमताज ने मीना कुमारी की एक फिल्म में काम किया था जिसके लिए उन्हें ₹3 लाख की फीस मिलनी थी। लेकिन मीना कुमारी को गले का कैंसर हो गया और वह फीस नहीं दे पाई और जब वह बीमार हुई तो उन्होंने मुमताज को अपना बंगला उसके फीस के बदले में दे दिया और इस तरह मीना कुमारी का बंगला हो गया मुमताज का। जब राजेश खन्ना को कैंसर हो गया था तो वह ज्यादातर घर पर ही रहते थे, और वह किसी से बातचीत नहीं करते थे। मगर एक दिन जब मुमताज उनसे मिलने आई, तो राजेश खन्ना का दिल खिल उठा और दोनों घंटों तक हंस-हंस कर बातें करते रहे। लेकिन जब राजेश खन्ना को यह पता चला कि मुमताज को भी कैंसर है तो वह फूट-फूट कर रोने लगे। के सफर में गुजर है जो मजा। उस जमाने में मुमताज को ब्यूटी विद गोल्डन हार्ट भी कहा गया था। चेहरे हमेशा धोखा देते हैं। कहो तो अंदर आ जाओ। फिल्म बंधे हाथ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को मुमताज की कार बहुत पसंद आ गई थी। यह वो समय था जब अमिताभ बच्चन अपना नाम बना रहे थे और मुमताज एक बड़ी हीरोइन थी। वह अपनी Mercedes कार से शूटिंग पर आती थी और अमिताभ बच्चन के पास एक खटारा एंबेसडर कार हुआ करता था। तो अमिताभ बच्चन अक्सर उनकी कार के पास खड़े होकर देखते रहते थे। और जब मुमताज को यह पता चला कि अमिताभ बच्चन को उनकी कार बहुत ज्यादा पसंद है तो उन्होंने अमिताभ बच्चन को अपनी Mercedes की चाबी दे दी और खुद अमिताभ बच्चन की खटारा लेकर चली गई। भाई मुमताज से जुड़ा एक इंटरेस्टिंग फैक्ट यह भी था कि मुमताज अपने लिए ऑरेंज कपड़ों को लकी मानती थी। इसलिए वह ज्यादातर ऑरेंज सूट या साड़ी में काम करती थी। यह भी कहा जाता था कि अगर किसी फिल्म में मुमताज ने ऑरेंज कलर का कपड़ा पहनकर बारिश में भींग लिया तो समझो वहां फिल्म सुपरहिट हो गई।

इसके अलावा ब्रह्मचारी मूवी का एक गाना बड़ा चर्चित हुआ। आजकल मेरे प्यार के चलते हर जुबान पर है। गाने में मुमताज को साड़ी पहनकर डांस करना था। लेकिन वह साड़ी में डांस नहीं कर पा रही थी। तो मुमताज के लिए अलग से जीप वाली साड़ी बनाई गई थी। बाद में यह जीप वाली साड़ी इतनी फेमस हुई कि इसे मुमताज की साड़ी ही कहा जाने लगा और औरतें अपनी अच्छी खासी साड़ी को जीप वाली साड़ी में कन्वर्ट करवा रही थी। एक समय ऐसा था जब मुमताज टॉप की हीरोइन थी और हर दूसरी हीरोइन उनसे जलती थी। दूसरी कई हीरोइन मुमताज को अपना सौतन कहने लगी थी क्योंकि मुमताज के आने से उनका काम भी छीन गया था और उनके पतियों की भी पहली पसंद मुमताज बन गई थी। इसलिए वह सभी हीरोइनों की सौतन बन गई थी। चली जाओ यहां से। चली जाऊंगी। मुझे मेरे श्याम की तस्वीर दे दो। इसे अपने पास रखने का तुम्हें कोई अधिकार नहीं। इधर लाओ, भागो मत। छोड़ो इसे। मैं कहती हूं छोड़ो। जिनमें से सबसे बड़ा नाम शर्मिला टैगोर का था। शर्मिला टैगोर के साथ उनकी दुश्मनी पूरी जिंदगी भर रही। दोनों अपने आप को बेहतर समझती थी और हमेशा एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगी रहती थी। यह भी तो हो सकता है। कि शायद किसी पागलखाने से भागकर आई हो। और दोनों एक दूसरे से ऐसे नफरत करती थी कि जवानी चली गई लेकिन उनकी नफरत कम नहीं हुई और आज भी दोनों एक दूसरे को अपना दुश्मन ही मानती है। मुमताज ने शादी के बाद बॉलीवुड से हमेशा के लिए दूरी बना ली थी और अपना चमकता हुआ फिल्मी करियर छोड़कर लंदन में बस गई थी। उनके वहां दो बेटियों का जन्म हुआ था। हालांकि शादी के कुछ समय बाद मयूर का मुमताज से मन भर गया और उसने बाहर मुंह मारना शुरू कर दिया था। क्या बात कर रहा है? मतलब जिस हीरोइन के लिए भारत में लोग लाइन में सदियों से खड़े थे तो वहीं उनके पति को घर की मुर्गी दाल बराबर लगने लगी थी और उन्होंने किसी दूसरी औरत से संबंध बना लिया था। लेकिन मुमताज मां बन चुकी थी और अपने बच्चों की जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती थी। इसलिए वह सब कुछ सहती रही और आखिरकार मयूर को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और वह अपने परिवार के पास वापस लौट आए। अब मुमताज अपने पति के साथ लंदन में रहती है और कभी कबभार भारत की भी यात्रा करती है। तो यह थी बॉलीवुड की क्वीन कहे जाने वाली मुमताज की स्टोरी। आपको यह स्टोरी कैसी लगी? आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताइए। साथ ही इस वीडियो को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल भी ना भूलें। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। थैंक यू सो मच। जो दिल की तड़पना चांदी उसी से मेरा प्यार हो गया। हाय

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