Cli

मोबाइल पर ये मैसेज आए तो मत करना क्लिक, मार्केट में आया नया फ्रॉड,उड़ा देगा पैसे।

Uncategorized

अगर आज आपके मोबाइल पर गैस बिल, आरटीओ चालान, बिजली कनेक्शन, बैंक केवाईसी अपडेट या किसी सरकारी सेवा के नाम पर कोई लिंक या एपीके फाइल आती है तो बिना सोचे समझे उस पर क्लिक मत कीजिए और एकदम चौकन्ने हो जाइए क्योंकि आपकी यह छोटी सी गलती आपके सालों की मेहनत की कमाई को कुछ ही मिनटों में उड़ा सकती है।

देश भर में फैले अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का अहमदाबाद ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस रैकेट के कथित मुख्य टेक्निकल मास्टरमाइंड और डेवलपर पूर्णानंद उर्फ़ मुकेश तिवारी, उसके सहयोगी विकास दास और सीताराम मंडल समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब सवाल है कि कैसे काम करता था यह साइबर नेटवर्क? यह जान लीजिए।

जांच में सामने आया कि पूर्णंद ऐसा खतरनाक सॉफ्टवेयर और टेलीग्राम आधारित सिस्टम तैयार करता था जिसे विकास दास देश भर के करीब 400 साइबर फ्रॉड गैंग को हर महीने लगभग ₹12,000 किराए पर उपलब्ध कराता था। वहीं सीताराम मंडल का काम फर्जी डेबिट क्रेडिट कार्ड, डोमेन और अन्य डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराना था ताकि ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके और पुलिस की नजरों से बचाया जा सके। पूरे गिरोह का खुलासा तब हुआ जब अहमदाबाद के एक नागरिक को साबरमती गैस लिमिटेड के नाम पर एक फर्जी एपीके फाइल भेजी गई। जैसे ही पीड़ित ने वह फाइल डाउनलोड की अपराधियों ने उसके मोबाइल का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और उसके बैंक खाते से करीब ₹670 निकाल लिए गए। ऐसा ही मामला दिल्ली में भी सामने आया।

एक महिला के मोबाइल पर गैस कनेक्शन बंद होने का फर्जी संदेश आया और सहायता के लिए एक नंबर पर कॉल करने को कहा गया। महिला ने जैसे ही उस नंबर पर संपर्क किया ठगों ने WhatsApp के जरिए एक एपीके फाइल भेज दी। फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया और बैंक खाते व क्रेडिट कार्ड से करीब ₹64,000 निकाल लिए गए।

यही इस पूरे साइबर फ्रॉड का सबसे खतरनाक हिस्सा है। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसी फर्जी एपीके फाइल इंस्टॉल करता है तो क्या होता है यह [संगीत] देखिए। मोबाइल का रिमोट कंट्रोल साइबर अपराधियों के पास पहुंच जाता है। वो स्क्रीन देख सकते हैं, ओटीपी पढ़ सकते हैं। एसएमएस एक्सेस कर सकते हैं। बैंकिंग ऐप ऑपरेट कर सकते हैं। यहां तक कि SBI YO कैश जैसी सेवाओं का दुरुपयोग कर एटीएम से भी पैसे निकाल सकते हैं।

यानी मोबाइल आपके हाथ में होता है, लेकिन उसका कंट्रोल किसी और के पास चला जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी की रकम सीधे अपने बैंक खातों में नहीं डालते थे। वह उस पैसे से ऑनलाइन महंगे मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, गिफ्ट कार्ड और अन्य कीमती सामान खरीदते थे। बाद में इन्हें कम कीमत पर बेचकर नगद पैसा हासिल किया जाता था ताकि डिजिटल ट्रेल मिटाई जा सके और पुलिस तक असली रकम का पता ही ना पहुंचे। अब पुलिस यहां तक कैसे पहुंची आप यह भी जानिए।

सेल ने आईएमईआई नंबर, डिलीवरी एड्रेस, डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन ट्रेल की जांच शुरू की। जांच के दौरान शाहीन बाग के एक फर्जी पते से अहम सुराग मिला। पता चला कि वहां काम करने वाला एक युवक कमीशन लेकर साइबर ठगों के लिए पार्सल रिसीव करता था और उन्हें कोलकाता भेज देता था। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने कोलकाता और झारखंड में छापेमारी कर गिरोह के कई अहम सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह चार अलग-अलग टीमों में काम करता था। उन टीमों में पहली टीम लोगों को फर्जी एसएमएस और कॉल के जरिए जाल में फंसाती थी। दूसरी टीम एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करती थी। तीसरी टीम ऑनलाइन खरीदे गए महंगे सामान को अलग-अलग जगहों से रिसीव करती थी और चौथी टीम उन सामानों को बेचकर ठगी के पैसों को नगदी में बदल देती थी।

यानी हर सदस्य का अलग रोल और पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था। पुलिस कारवाही के दौरान 20 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टेबलेट, सोने के सिक्के, सोने के आभूषण, चांदी का सिक्का, ₹00 नगद और ठगी के पैसों से खरीदी गई Tata Harriियर कार बरामद की गई है। अब इन डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। जिससे देश भर में हुई अन्य ठगी के मामलों का भी खुलासा होने की उम्मीद है। अब लापरवाही नहीं डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

यह खबर सिर्फ एक की गिरफ्तारी नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है जो बिना सोचे समझे मोबाइल पर आए किसी लिंक मैसेज या एपीके फाइल पर भरोसा कर लेते हैं। आज अपराधी लेकर नहीं आते। वह आपके मोबाइल की स्क्रीन पर एक मैसेज बनकर आते हैं। याद रखिए कोई भी सरकारी विभाग, गैस कंपनी, बैंक, आरबीआई या पुलिस आपको WhatsApp पर एपीके फाइल डाउनलोड करने कभी नहीं कहती है। अगर कोई लिंक एपीके, क्यूआर कोड या एनी डेस्क जैसी ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहे तो तुरंत सतर्क हो जाइए। एक क्लिक और आपकी पूरी जमा पूंजी खत्म कर सकती है। डिजिटल इंडिया तभी सुरक्षित रहेगा जब हर नागरिक डिजिटल रूप से जागरूक होगा। ठग तकनीक से जीतना चाहते हैं लेकिन उन्हें आपकी समझदारी ही हरा सकती है। निष्पक्ष मतलब [संगीत]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *