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क्या अमरीश पुरी की वजह से शुरू हुआ था सनी देओल का डाउनफॉल?

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द लेजेंड्री अमरीश पुरी शोम शोम श्याम ओो शाह तहलका श्याम श्याम श्याम श्याम शाम गदर के टाइम कहानी सुनाने गया अचानक उठ गए उठ के बोले एक मिनट आता हूं गाय फिर कहानी सुनी फिर बोले फिर एक मिनट आता हूं मेरा हाथ पकड़ लिया बोले कहां आ जा रहे बोले आंसू पोंछने आ जा रहा था सनी देओल का गदर के बाद जो करियर थोड़ा डाउनफॉल में गया उसकी एक बड़ी वजह यह भी थी कि उन्हें उनके पास सब अमरीश पुरी नहीं थे हर फिल्म में सनी देओल के पिता अमरीश पुरी कौन सा कमरा मिला? नहीं मिला। निकम्मे हो तुम लोग विलन अमरीश पुरी छोड़ दे सकीनों को। एक बार छोड़ कर देख लिया। गिरी हुई गिरे हुए वो लोग होते हैं जो अपने घर में पली हुई लड़की का बलात्कार करते हैं। मैंने सुना पैसों को लेके वो भी बड़े सख्त हैं। बहुत सारी फिल्मों में एक्टर से ज्यादा फीस उनकी होती है। अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों में एक वॉइस ओवर करना था। उनका फोन आया। अनिल मैं आज वॉइस ओवर कर रहा हूं। चार पांच तरीके से वॉइस ओवर कर दिए। तो मैंने उनको बोला सर आपकी फीस कितनी? बोले यार अनिल शर्मा छी छी छी। अमरी जी के बिना तो इंडस्ट्री आधी अधूरी हो गई है। मोगंबो पुश हुआ नाउ टेल अस समथिंग अबाउट अमरीश पुरी द लेजेंड्री अमरीश पुरी आज की पीढ़ी जो नई जजी होगी शायद अमरीश पुरी साहब से इतनी वाकिफ ना हो लेकिन जिन्होंने फिल्में देखी हैं 80 90 70 80 90 के दशक की 2000 के दशक की वो जानते हैं कि अमरीश पुरी के मायने क्या थे स्क्रीन पर आने में शोम शोम शाम और शाह तहलका अमरीश पुरी

जी तो अमरीश पुरी जी थे साहब बड़े मतलब इतने कमाल के इंसान और इतने टाइम के पंक्चुअल और कररेक्टर को ऐसे पकड़ते थे डायरेक्टर के पीछे पड़ जाते थे जब तक उनको कररेक्टर समझ नहीं आता था जब तक पूरी तरह वो नहीं समझ पाते थे वो आपको एक दफे नहीं 10 दफे नहीं 100 दफे आपसे पूछते थे अमरीश पुरी जी का ऐसा था ओवर सिंसियर आदमी तहलका में मैंने उनको साइन किया था और तहलका में मैंने एक कररेक्टर किया था। मैं पिक्चर शूट कराया था मनाली में काफी 15 20 दिन 30-40 दिन की शूटिंग कराया था विलेन का नहीं था क्योंकि विलेन पहले मेरे मन में था कि कोई नया कररेक्टर लूंगा विलेन के लिए लेकिन शूट नहीं हो रहा था। फिर फाइनली जब मैंने शूटिंग करके आया तो फिर मैं फाइनली अमरीश जी के पास गया। अमरीश जी को बोला अरे यार तुम तो मेरे बिना पूरी फिल्म शूट करा आए होए। अब मेरे क्या फिल्म में रोल है? मैंने कहा सर इस फिल्म में जो रोल है आपका ऐसा होगा ही नहीं। उनको रशेस दिखाए। रशेस दिखाने के बाद फिर मैंने करैक्टर सुनाया। वो इतने ओवर एक्साइटेड हो गए। अब रोज मेरे पास आते हैं, बैठते हैं। बातें करते हैं हम ऐसा करेंगे, ऐसा करेंगे, ऐसा करेंगे, सर पे यह लगाएंगे, यह करेंगे। मैंने कहा ऐसा है इन आंखों पे ये करेंगे। फिर मैंने उनको कहा कि मैं आपसे एक गाना गवाना चाहता हूं। बोले अरे गाना मैं मैंने कहा सर मैं सुनाया आप गाना अच्छा गाते हो जरा गा के दिखाओ। अरे तो कुंदललाल सहगल का कुछ उन्होंने मुझे गा के सुनाया। तो कुंदललाल सहगल को बहुत अच्छा गाते थे वो। उनको पुराने जमाने के थे। तो मैंने फिर अनु मलिक को बुलाया। अनु मलिक को बोला कि भाई एक गाना बनाते हैं शोम शोम शाम उशा ऐसा एक शब्द आ गया मेरे दिमाग में उनका एक तकिया कलाम जैसा फिर अनु मलिक ने वहीं बैठ के वो गाना बनाया फिर अमरीश जी ने वो गाना गाया तो आज तक देखो वो शोम शोम शामा शाह उनका आज तक अमर हो गया है आज भी इतना मैं तो YouTube चैनल पे इतना देखता हूं इतना रील्स मैं देखता हूं कि पूछो मत जगह-जगह आता रहता है वो एंड गदर के टाइम पे मुझे याद है मैं कहानी सुनाने गया था तो कहानी सुना रहा था मैं उन्हें तो कहानी सुने अचानक उठ गए उठ के बोले एक मिनट आता हूं आए अंदर से बाहर आते हैं आए फिर कहानी सुने फिर बोले फिर एक मिनट आता हूं फिर आ गए फिर आ गए

मैंने कहा ये आ रहे हैं जा रहे हैं कर क्या रहे हैं बहुत मेरा हाथ पकड़ लिया बोले बहुत कमाल है बोले कहां आ जा रहे थे बोले आंसू पोंछने आ जा रहा था बोले मजाक में बोले अगर अगर आंसू दिखा देता तुझे तू मेरा प्राइस अदा कर देता। मैंने सुना पैसों को लेके वो भी बड़े सख्त थे। पैसों के ले अच्छी कीमत लेते थे मेरी। अच्छी कीमत लेते थे। उन्होंने कीमत अच्छी ली और वही बोले बहुत सारी फिल्मों में एक्टर से ज्यादा फीस उनकी होती। हां बोले अगर मैं आंसू तेरे को दिखा देता प्राइस खत्म होने के बाद बोले तू तो मेरा प्राइस आधा कर देता। हंस के तो बहुत अच्छे। पर ऐसा भी नहीं था। मुझे देखो मुझे याद है। अमरीश जी का पैसों का था। पैसों का हर एक्टर का होता है। लेकिन अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों में मेरे को एक वॉइस ओवर करना था। उन दिन उनकी तबीयत काफी खराब थी। तो मैंने अमरीश जी को बोला सर आपका वॉइस ओवर चाहिए। अमरीश जी बोले कि यार मेरे से तबीयत ठीक नहीं है। पर तू वेट कर कब रिलीज है पिक्चर? कब रिलीज है। फिर एक दिन उनका फोन आया के अनिल अपने असिस्टेंट को भेज दे। मैं आज वॉइस ओवर कर रहा हूं। मैंने भेज दिया। वॉइस ओवर कर दिया उन्होंने। वॉइस ओवर उन्होंने चार मैं उस दिन आ नहीं पा रहा था। मैं कहीं मिक्सिंग में बिजी था। उनका अचानक फोन आ गया तो बोले तू आने की जरूरत नहीं मैं कर दूंगा। चारप दफे उन्होंने चारप तरीके से वॉइस ओवर कर दिया भेजा। तो मैंने उनको बोला सर आपकी फीस कितनी? बोले यार अनिल शर्मा इतनी दोस्ती का क्या फायदा कि वॉइस ओवर का भी पैसा लूं मैं। तेरी फिल्म है यार मेरी फिल्म है। पैसे नहीं लिए। और तो ऐसा भी नहीं था कि वो पैसे के लिए बहुत वो थे और मेरे अमरीश जी लास्ट अब तुम्हारे ह लास्ट उन्होंने प्रीमियर अटेंड किया था अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का जब पिक्चर में नहीं थे फिर भी वो मेरे को प्रीमियर में विश करने आए और आके लिपटे मेरे को तेरे को सिर्फ विश करने आया हूं पता नहीं यार अब ऐसा लफ्ज निकला उनके मुंह से और विश करके निकल गए उसके दो दिन के बाद चार दिन के बाद कुछ दिनों के बाद ही वो नहीं रहे उनको लगता था। तबीयत उनकी खराब थी। उनको लगता था कि शायद अब वो नहीं रहेंगे। उनको यह लगने लगा था। मुझे याद है? बहुत छोटा सा था मैं तब बहुत तकलीफ हुई थी हम लोगों को रमशरी साहब चले गए। तो मतलब देखिए मेरे प्रीमियर पे आए मेरा ये वो सब मतलब बहुत ही मैं ही वास द मोस्ट लवेबल पर्सन। मैं कोई एडिटोरियल पढ़ रहा था कि सनी देओल का गदर के बाद जो करियर थोड़ा डाउनफॉल में गया उसकी एक बड़ी वजह यह भी थी कि उन्हें उनके पास सब अमरीश पुरी नहीं थे। अगर आप सनी देओल की पुरानी फिल्में देखेंगे राजकुमार संतोषी का जितनी पुरानी फिल्में हैं हर फिल्म में सनी देओल के पिता अमरीश पुरी विलेन अमरीश पुरी जब जबजब सनी देओल के सामने अमरीश पुरी आते थे तो वो जो दो जॉइंट्स की टक्कर होती थी देखो उस दिन लार्जर देन लाइफ सिनेमा बना हमको इतना अफसोस है आज गदर टू हम बना रहे थे हमने कैसे अमरीश जी को मिस किया कैसे किया अमरीश जी के बिना तो इंडस्ट्री आधी अधूरी हो गई है दो लोग गदर के ऐसे लोग हैं अ एक्चुअली गदर से तीन लोग चले गए अमरीश पुरी चले गए विवेक शौक चला गया और आनंद बखशी चले गए आनंद बख्शी साहब और अमरीश पुरी इंडस्ट्री के दो ऐसे पिलर्स थे कि इन दोनों की वजह से इंडस्ट्री ने इतना खोया है इतना लॉस हुआ है इंडस्ट्री का कि यह कभी पूरा हो ही नहीं सकता बक्शी साहब वो गाने वो बोलते मकड़े ओ हो हो हो बखशी साहब का एक किस्सा सुनाता हूं। आनंद आपको उत्तम सिंह जी ने एक धुन बनाई। गानों का शौक है आपको बता रहा हूं। उत्तम जी ने एक धुन बनाई। वो धुन उन्होंने मुझे कुछ वर्निंग्स के साथ सुनाई। मुझे वो धुन नहीं समझ आ रही थी। वर्निंग नहीं समझ आ रहे थे। शायद वो वर्निंग नहीं समझ आ रहे थे।

मुझे वो कहानी में सूट नहीं हो रहे थे। पर उत्तम जी मुझे बोले यह धुन बहुत अच्छी है। इसको ले लो। मैंने कहा उत्तम जी कुछ और एक दो धुन सुनाओ। मैं वो धुन लेके अपने घर पहुंचा। कैसेट होता था घर में मैंने मेरी पत्नी को उनको म्यूजिक का शौक है। क्लासिकल जानती है वो। तो कोलकाता से हैं तो वहां का वैसे ही म्यूजिक का काफी वो है। तो मैंने सुनाई मुझे बोली धुन बहुत अच्छी है। इस धुन को छोड़ो मत। अरे मैंने कहा तुम अभी नया-नया ब्याह करके आई हो। तुमको क्या मालूम सिनेमा क्या है यार? छोड़ो जाने दो। हमको सिखा रही हो। तो बोले नहीं देखी मैं कह रही हूं ये धुन मत छोड़ो। बहुत अच्छी धुन है। कहा ठीक है। उत्तम जी के पास फिर मैं कहा गया उत्तम जी कोई दूसरी धुन। उत्तम जी ने दूसरी धुन सुनाई। तीसरी धुन सुनाई। पर उत्तम जी बोले नहीं यह धुन नहीं छोड़ना। मैं बोला उत्तम जी यार आप समझ नहीं आ रहा यार। पहला गाना गदर का रिकॉर्ड होने जा रहा है और आप तो बोले बखशी साहब आ रहे हैं स्विट्जरलैंड गए छुट्टियों से वह लिखेंगे गाने तो उनके पास चलकर सुनाएंगे तो फाइनली बक्शी साहब आए तो बक्शी साहब के पास मैं गया उत्तम जी गए तो मैं बोला ये ऐसेसे फिल्म बना रहा हूं गदर एक प्रेम का था बोले अच्छा क्या फिल्म है और मैंने कहा देखो उत्तम जी ने एक धुन बना दी है मेरे पीछे पड़े हो धुन को ले लो अच्छी है और मेरी बीवी भी बोलती है अच्छी है पर मुझे बिल्कुल नहीं जम रही उत्तम जी सामने बैठे। उत्तम जी हंसने लगे और बोले अनिल शर्मा इसकी धुन बाद में सुनता हूं। पहले तू अपनी कहानी सुना। बखशी साहब को मैंने कहानी सुनाई दो घंटा गदर की। बखशी साहब का रो-रो के बुरा हाल। सिगरेट जला बशी वो आनंद बक्शी का स्टाइल लिया था मैंने अक्षय कुमार को। अब तुम्हारे वाले वतन में सिगरेट पीते थे। हां। ऐसे पीते अच्छा वही मैंने अक्षय कुमार से मैं क्या क्लास में सिगरेट पी रहे थे? ऐसे पीते थे आनंद बक्षी तो ऐसे सिगरेट पीते जाए आंसू आते जाएं तो 2 घंटे के बाद मुझे बोले तेरी फिल्म ये मुगले आजम है बहुत बड़ी हिट है बक्शी साहब का रिएक्शन अरे मेरे मन में सोचा वेलकम यार ये ऐसे ही बोल रहे हैं

यार पिक्चर हिट है पर मुगले आजम मुगले आजम है यार हम कहां मुगलेआम के एम तक नहीं पहुंच के पांव तक नहीं पहुंच सकते मुगले आजम मदर इंडिया शोले ये हमारे जीवन की सबसे बड़ी फिल्म है। वहां तक हम कहां पहुंच सकते हैं? इच्छा जरूर है वहां तक पहुंचने की और वही सोच के यह फिल्म हम बना रहे हैं। गदर हम यही सोच के बना रहे हैं वहां तक पहुंचे। मगर हो या नहीं है ये तो बक्शी साहब ने बोल दिया बड़ी कृपा की इन्होंने लेकिन लगा कि नहीं है वो कहां होगा यार? तो बोले उत्तम अब तू धुन सुना। उत्तम ने धुन सुनाई। बिना वर्डिंग्स के धुन सुनी ऐसे सिगरेट जलाई। बाथरूम गए आए। बोले अनिल शर्मा जैसे तेरी ये मुगले आजम है ना ऐसे ये धुन भी मुगले आजम की है। अब तू जा उत्तम तू भी जा कल 4:00 बजे मिलेंगे हम। दूसरे दिन 4:00 बजे हम पहुंचे। 4:00 बजे हम पहुंचे। उन्होंने कहा बक्शी साहब ने बोला देखो ऐसा है अनिल शर्मा तू डायरेक्टर है प्रोड्यूसर है तेरे को मैं तीन चार मुखड़े नहीं सुनाऊं तो तुझको लगेगा मैंने कोई काम ही नहीं किया तू मुझे पैसे ही नहीं देगा तो पहला यह मुखड़ा सुन मुखड़ा बड़ा अच्छा था

धुन पे फिर दूसरा मुखड़ा सुन वो भी बड़ा अच्छा था बोले लेकिन अभी एक मुखड़ा सुना रहा हूं जो इस फिल्म में होना चाहिए जो इस फिल्म का मुखड़ा है सुन और तेरी सबसे आखिरी सिचुएशन पे सुना रहा हूं जब बच्चा सारंगी लेके गाता है और मां बेहोश पड़ी हुई है। सुन उड़ जा काले कावा तेरे उन्होंने सुनाया ओ घर आजा परदेसी जैसे ही गाया मेरे को तो एकदम विजुअल दिख गया बेटा गा रहा है मां आज कैसे जिंदगी अरे मैंने कहा बक्शी साहब के पांव चूले मैंने कहा ये तो कमाल गाना हो गया बख्शी साहब ये तो कमाल गाना है बोले अब और सुन उसके उन्होंने 16 अंतरे लिखे हुए थे बोले तेरे को दो तो ऐसे ही सुनाए थे पर यही होना चाहिए तेरी इसी सिचुएशन पे ये इस सिचुएशन पे ये सिचुएशन पे ये और वो गाना वो धुन थी उड़ जा काले कामा की क्योंकि उन्होंने मुझे रॉन्ग वर्डिंग के साथ सुना दिया था तो मेरे दिमाग में वही खटकता था नहीं समझ आ रहा था वो डायरेक्टर को नहीं समझ आ रहा था धुन मुझे खींचती थी लेकिन फिर भी मुझे लगता था कुछ दूसरी हो जाए दूसरी हो जाए और ये थे बक्शी साहब ग्रेट उड़ा गा ले गामा गाना है उस पिक्चर में तो उसका सारा श्रेय मैं उत्तम सिंह आनंद बखशी को देता हूं।

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