पूरी दुनिया इस समय एक संकट से गुजर रही है। संकट ऐसा है कि जो दूर तक जिसका प्रभाव हमारे जीवन में पड़ेगा। देश की अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति भी नाजुक होती चली जा रही है क्योंकि पश्चिम एशिया का जो संघर्ष है भले ही वो आपको थमा हुआ नजर आ रहा हो लेकिन उसके जो पीछे वैश्विक स्थिति है वो लगातार चरमराती जा रही है। ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं?
इसके पीछे सबसे बड़ा रीजन है हार्वेज स्टेट का बंद होना और पश्चिम एशिया में जंग के स्थिति बनी रहना जो कि अभी तक ईरान और अमेरिका के बीच में कोई बीच का ऐसा कोई रास्ता निकलता हुआ नहीं दिख रहा जिसमें हम लोग यह कह सके कि भाई आने वाले इतने दिनों में यह युद्ध खत्म हो जाएगा क्योंकि ईरान अपनी जिद पर आ रहा है।
अमेरिका अपनी जिद पर आ रहा है और यही कारण है कि इस पूरे रीजन पर अभी भी अशांति के बादल लगातार मंडरा रहे हैं। भले ही आपको लग रहा होगा कि यहां पर गोले बारूद वाली खबरें नहीं आ रही है। ईरान और अमेरिका एक दूसरे को जंग नहीं कर रहे हैं, लड़ाई नहीं कर रहे। लेकिन इनडायरेक्टली दोनों के बीच में जारी है। कभी कुवैत पर होता है तो कभी लेबनान पर अटैक होता है। यानी कि कोई भी आप एक ये नहीं कह सकते कि ये चीजें पूरी तरह से बंद हो गई और इसी के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जो है दूसरी या तीसरी बार इस बात को बोल चुके कि यह संकट बड़ा है। संकट बड़ा है। सबको एकजुट होकर ही इससे निकलना होगा।
और इसके पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा था कि किसी भी तरह आप कम डीजल पेट्रोल की खपत हो। पब्लिक में जो ट्रांसपोर्ट है उस पर उस पर आप यकीन करें। उस पर आप चलें। इस तरह की चीजें पहले भी कही गई थी और अब फिर जो है वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बैठक की। बैठक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद यानी कि पीएमईएसी यानी कि इकोनॉमिक एडवाइज़री काउंसिल ऑफ द प्राइम मिनिस्टर की थी। इसमें दिग्गज इकोनॉमिस्ट पॉलिसी एक्सपर्ट ये सब लोग शामिल थे। अक्सर ये मीटिंग होती है मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन के बीच इसने देश को इकोनमिक ग्रोथ को बनाए रखने पर चर्चा हुई कि कैसे हम इस सिचुएशन से बेहतर कर सकते हैं। बैठक में क्या-क्या हुआ हम आपको बताते हैं।
पीएम मोदी ने आज पीएमईएसी की बैठक की और उसकी पूरी अध्यक्षता की। इस बैठक में जानेमाने इकोनॉमिस्ट और पॉलिसी एक्सपर्ट शामिल हुए। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी टेंशन समेत दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने की एक स्ट्रेटजी बनाई।
परिषद ने बदलती वैश्विक आर्थिक स्थिति की समीक्षा की। इसमें एनर्जी का मार्केट, महंगाई का प्रेशर, सप्लाई चेन में ब्रेक और बिजनेस का जो प्रभाव है उसको उस पर रुकावट इन सब जो बिंदुओं पर हम उन्होंने बातचीत की, ध्यान दिया और बताया कि हम कैसे इस समय की स्थिति से निकल सकते हैं क्योंकि आगे बहुत घना अंधेरा है। आप यकीन मानिए प्रधानमंत्री जिस बात को बार-बार कह रहे हैं आप उसकी समझ सकते हैं कि आगे आने वाले जो कुछ महीने हैं वो पूरी दुनिया के लिए केवल अकेला भारत इसमें शामिल नहीं है। पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़े आर्थिक संकट जैसा यह आगे आने वाले महीने होंगे। जो इस ग्रुप के इस काउंसिल के मेंबर्स थे। उन्होंने भारत की मैकोनमिक स्थिरता और भू राजनीतिक घटनाक्रमों के संभावित असर का विश्लेषण किया। घरेलू आर्थिक गतिविधियों को सुरक्षित रखने के लिए एक खास उपायों की ज़रूरत पर उन्होंने ज़ोर दिया है। चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित किया। जिसमें ऊर्जा के बुनियादी ढांचे, न्यूक्लियर एनर्जी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में रणनीतिक निवेश की वकालत की।
लोगों से ईंधन बचाने, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाने के लिए और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करने का उन्होंने आग्रह किया है। बैठक में भारत के निवेश माहौल को बेहतर बनाने, कंप्लायंस के बोझ को कम करने, सर्विस डिस्ट्रीब्यूशन में सुधार और उत्पादकता यानी कि प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए सुधारों पर जोर दिया गया है। मोदी ने इकॉनमी की बुनियादी मजबूती के लिए दीर्घकालिक उपायों की जरूरत को दोहराया ताकि वैश्विक जो स्थिति है जो संकट है उससे जो है भारत कहीं उसमें फंस ना जाए और उससे बहुत तेजी से हम उससे उभ पाए।
जो मेंबर्स थे उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जो बाहरी अनिश्चितताएं यानी कि जो कुछ चल रहा है दुनिया में उसके बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था निवेश और विकास के लिए मजबूत अवसर प्रदान कर रही है। पीएम मोदी ने सतर्कता और सक्रिय नीतिगत उपायों पर जोर दिया और कहा कि वैश्विक जो भी रुकावटें हैं इससे निपटने के लिए भारत की विकास यात्रा को बनाए रखने के लिए निरंतर हम लोगों को कुछ ना कुछ सुधार करते रहने होंगे। पीएमईएसी की बैठक इस सहमति के साथ संपन्न हुई कि भारत के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर जो है वो आर्थिक सुधार, रणनीतिक निवेश और वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। मिडिल ईस्ट में जंग के हालात के बाद में चाहे वह यूरोप हो या पश्चिम एशिया हो, पूरी दुनिया पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। हॉर्मोन्स के बाद में तेल की लागत भी भयंकर बढ़ी है। तेल की कीमतें बढ़ी है। गैस की कीमतें बढ़ी है।
इससे इन्फ्लेशन बढ़ रहा है। जितना इन्फ्लेशन रेट आपके कंट्री का बढ़ेगा, आपकी सीधा असर जो है वो आपकी जीडीपी में करेगा।
इन सब चीजों को देखते हुए पीएम मोदी ने इन तमाम अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक की और कहा कि आखिरकार वो कौन से विकल्प हो सकते हैं जिस पर हम काम करें और इस ऐसी जो विभत्स और भयंकर स्थिति पूरे विश्व में बनी हुई है।
उससे भारत कैसे बच सकता है और इन सब चीजों को लेकर पीएम मोदी ने कुछ अपील भी की और आगे उन्होंने बताया कि भाई आर्थिक सुधार के मामले में भारत किन कदमों के साथ किन पॉइंट्स को आगे लेकर बढ़ेगा ताकि इसका असर पड़ेगा तो है ये तो तय है लेकिन उसका असर कम से कम हमारे ऊपर पड़े।