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ब्रश करते वक्त कभी न करें ये गलती…5 साल के बच्चे के साथ हुआ दर्दनाक हादसा

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भोपाल में एक ऐसा हादसा हुआ जो हर परिवार के लिए एक अलार्म है। यहां टूथब्रश करते समय उसका एक टुकड़ा टूट कर बच्चे के गले में फंस गया। अगर उसे अस्पताल पहुंचाने में थोड़ी भी देर होती तो उसकी जान खतरे में पड़ जाती।

देखिए lसुबह सूरज की पहली किरण के साथ जब एक मासूम बच्चा हाथ में टूथब्रश थामता है तो माता-पिता खुश होते हैं कि बच्चा हेल्दी हैबिट्स को अपना रहा है। लेकिन सोचिए अगर वही मामूली सा दिखने वाला प्लास्टिक का टुकड़ा अचानक बीच में चटक जाए और मौत का एक नुकीला खंजर बनकर उस अबोध के गले में फंस जाए तो मंजर कितना खौफनाक होगा।

मुंह के भीतर टूटने वाला वो छोटा सा प्लास्टिक का टुकड़ा एक ऐसा अदृश्य और बन जाता है जो पलक झपकते ही सांसों की डोर को हमेशा के लिए काट सकता है। यह दिल दहला देने वाला वाक्य भोपाल में हुआ। जब एक 5 वर्षीय मासूम सुबह ब्रश कर रहा था।

टूथब्रश का अगला हिस्सा टूट गया और झटके के साथ बच्चे के मुंह से होते हुए सीधे उसके गले की गहराइयों में जाकर फंस गया। पल भर में खुशियों वाला घर चीख पुकार में बदल गया।

ब्रश का टूटा हुआ हिस्सा गले के एक बेहद नाजुक और संवेदनशील हिस्से में जाकर इस कदर लॉक्ड हो गया कि मासूम को असहनीय और तीखा दर्द होने लगा। हालत यह हो गई कि बच्चे के मुंह से आवाज निकलना बंद हो गई। वो कुछ भी निगलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। उसकी सांसे उखड़ने लगी।

राजधानी भोपाल में हमीदी अस्पताल के डॉक्टर की सूझबूझ से 5 वर्षीय बच्चे की जो है जान बचाई गई। यदि हम बात कहें तो बच्चा जब ब्रश कर रहा था तब ब्रश अचानक टूट जाता है और उसके गले में जाकर अटक जाता है। मां-बाप सीधे जो है उसे हमी अस्पताल लाते हैं। लेकिन डॉक्टर प्रशासन की टीम तत्काल फैसला लेती है और बच्चे के गले का ऑपरेशन करती है और उसे सुरक्षित जो टुकड़ा फंसा हुआ था उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकालती है। बच्चे को इस तरह तड़पता देख बदहवास परिजन बिना एक पल गवाए उसे लेकर फौरन अस्पताल भागे।

अस्पताल में डॉक्टर ने जैसे ही बच्चे की नाजुक हालत देखी वो तुरंत अलर्ट मोड में आ गए। शुरुआती जांच में डॉक्टर को अंदाजा हो गया कि मामला बेहद पेचीदा है और जरा सी भी लापरवाही या देरी बच्चे के जीवन पर भारी पड़ सकती है। मॉर्निंग में तो ब्रश करते ये सब लोग तो खेल रहा था तो उस टाइम में मुंह के अंदर ही वो ब्रश करते-करते टूट के इतनी गंदी तरीके से गया था कि तालू के पीछे चला गया था और जाके ऐसा आड़ा टूटा था। टूटने की वजह से आड़ा हो के उसका एक पहना पार्ट टॉन्सिल में घुस गया था और दूसरा पार्ट तालू के पीछे चला गया। नाक के पीछे चला गया था तो आड़ा हो के हो गया था तो वो ना मुंह बंद करके निगल पा रहा था थूक बाहर निकल रहा था उसका और बहुत ही दयनीय स्थिति छोटा बच्चा था वो मुख बर था बोल नहीं सकता था ईएनटी यानी कान नाक और गला रोग विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला।

जब बच्चे के गले का परीक्षण किया गया तो मेडिकल रिपोर्ट में जो बात सामने आई उसने डॉक्टर को भी चिंता में डाल दिया। टूथब्रश का नुकीला और टूटा हुआ टुकड़ा गले के भीतर एक ऐसे हिस्से में फंसा हुआ था जहां से शरीर की मुख्य नसे और भोजन की नली गुजरती है। गले के भीतर का हिस्सा संवेदनशील टिश्यू और धमनियों से घिरा होता है। जब कोई न्यूक्लियली प्लास्टिक जैसी वस्तु वहां फंसती है तो सबसे पहला और सबसे बड़ा खतरा एयरवेज ब्लॉकेज नली के बंद होने का होता है। गंभीरता को देखते हुए ईएनटी की कोर टीम ने बिना वक्त गवाए तत्काल इमरजेंसी ऑपरेशन करने का बड़ा फैसला लिया।

ऑपरेशन थिएटर की पत्तियां जल उठी और डॉक्टर की उंगलियां उस मासूम की जिंदगी को सुरक्षित वापस [संगीत] लाने की जद्दोजहद में जुट गई। एक मामूली सी चूक से अंदरूनी नसें कट सकती थी जिससे भारी आंतरिक ब्लीडिंग का खतरा था। लेकिन मेडिकल की टीम ने बड़े ही कुशलता से इस ऑपरेशन को पूरा कर लिया। वो ऐसा फंसा था कि ना जो खाने की नली, सांस की नली सब लॉक हो रहा था उसके साथ। तो नॉर्मली ऑपरेशन करने के लिए हमको बेहोश करना पड़ता है। तो हम बेहोश ही कैसे करते हैं? वो तो वो फॉरेन बॉडी जो चीज था वो वहीं फंसा हुआ था।

तो उसकी वजह से सबसे चैलेंजिंग पार्ट था बेहोश करना बच्चे को। तो पहले दवा दे के देखा असेस करके क्लियर करके सूजन कम करके फिर उसके बाद उन्होंने उसमें जगह बनाके बड़े अच्छे से ट्यूब डाला। तो वह ट्यूब डालने की वजह से हमारे लिए फिर बहुत शांति हो गई। फिर हम अपने आराम से उसको निकाल पाए।

अगर अस्पताल पहुंचने में थोड़ी सी भी देर हो जाती तो टूथब्रश का टुकड़ा भोजन नली को पूरी तरह से फाड़ सकता था या श्वास तंत्र को पूरी तरह चौक कर सकता था। इससे ना केवल शरीर के भीतर खतरनाक फैल सकता था बल्कि अधिक खून बहने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती। लेकिन डॉक्टर्स की विशेषज्ञता और सटीक प्रक्रिया से अंततः मासूम की जान बचा ली गई। डॉक्टर ने सावधानी से उस टूथब्रश के टुकड़े को बिना किसी अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाए सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

छोटे बच्चे क्या करते हैं कि उनका ध्यान बहुत आसानी से भटक जाता है। तो वो खेल भी रहे होते हैं, किसी से बात भी कर रहे होते हैं। ब्रश भी मुंह में होता है, टीवी भी देख रहे होते हैं। इतने में धक्का लग जाता है तो बच्चा गिर जाता है। गिरने के कारण से बच्चे को ये पेंसिल, ब्रश ये सब मुंह में अगर होते हैं तो वो तालू को फाड़ देते हैं। तो उससे बहुत होता है।

तो यह ध्यान रखें कि खेलना और कुछ दूसरा काम इकट्ठा ना करें। एक टाइम पे एक ही काम करना चाहिए बच्चे को। यह घटना एक सबक है कि कभी भी छोटे बच्चों को ब्रश करते समय अकेला ना छोड़ें। इसके अलावा बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टूथब्रश की गुणवत्ता से कभी समझौता ना करें और अगर कोई अनहोनी होती है तो तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं।

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