मोदी के खिलाफ कॉकरोचों ने दिल्ली में काटा बवाल मोदी विरोध में भगवान के खिलाफ भी निकाली भड़ास कॉकरोचों की हरकत पाकिस्तानी को नहीं हुई बर्दाश्त मोदी विरोधियों से भिड़ गए पाकिस्तानी दानिश कनेरिया जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। देश की राजधानी दिल्ली के जंतरमंतर में विरोध प्रदर्शन कर रहे कॉकरोचों ने आंदोलन के नाम पर किस तरह से हिंसा और अराजकता का माहौल बनाया पूरा देश देख रहा है। किस तरह से पेपर लीक के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन को मोदी विरोध का अड्डा बनाया गया पूरा देश देख रहा है और किस तरह से कॉकरोचों के मंच से देवी देवताओं का अपमान किया गया.
वो भी पूरे देश ने देखा। लेकिन इसके बावजूद कुछ सनातनी हिंदुओं ने भले ही मौन साध लिया हो मगर एक पाकिस्तानी हिंदू का खून खौल उठा क्योंकि वो रहता भले ही इस्लामिक देश पाकिस्तान में हो मगर दिल से और धर्म से सनातनी है। इसीलिए सनातन विरोधियों से लेकर मोदी विरोधियों तक सबकी क्लास लगा डाली। मातरम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के लिए 70 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलकर 250 से भी ज्यादा विकेट लेने वाले दिग्गज सनातनी क्रिकेटर दानिश कनेरिया किसी परिचय के मोहताज नहीं है। शोएब अख्तर, वसीम अकरम, शाहिद अफरीदी जैसे खिलाड़ियों के साथ खेल चुके दानिश कनेरिया रहते भले ही पाकिस्तान में हो लेकिन सनातन धर्म के लिए आज भी उनका दिल धड़कता है।
इसीलिए राजधानी दिल्ली के जंतरमंतर में जब स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने मोदी विरोध में मां सीता का अपमान किया तो दानिश कनेरिया को बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए एक ट्वीट में लिखा मैं परेशान हूं क्योंकि भारत में हर विरोध प्रदर्शन का तरीका एक जैसा ही लगता है। भगवान राम को अपशब्द कहना, भारत माता को अपशब्द कहना, पीएम मोदी को अपशब्द कहना, पीएम मोदी की दिवंगत मां को अपशब्द कहना, ब्राह्मणों को अपशब्द कहना, हिंदुत्व को अपशब्द कहना, कोई चर्चा नहीं, कोई समाधान नहीं। सिर्फ नारे, अपशब्द और हंगामा। बात यहीं खत्म नहीं होती। जो लोग जेंजी के दम पर भारत को नेपाल बनाने का ख्वाब दिल में पाल कर बैठे हैं।
ऐसे मोदी विरोधियों को भी पाकिस्तानी दानिश कनेरिया ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा विपक्ष इस गलतफहमी में जी रहा है कि एक दिन में भारत में नेपाल जैसे हालात बना देंगे। अभी तक यूएस के साथ कोई ट्रेड डील भी साइन नहीं हुई है। लेकिन कुछ किसान दिल्ली को ब्लॉक करने के लिए पहले से ही तैयार हैं। यह एक सर्कस बनता जा रहा है। जब इतने सारे लोग पहले प्रोटेस्ट करने और बाद में फैक्ट्स वेरीफाई करने को तैयार हो तो कोई देश कैसे तरक्की कर सकता है। पाकिस्तानी होने के बावजूद दानिश कनेरिया भी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि जब देश की जनता बात बातबात पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतर जाएगी, हिंसा और अराजकता फैलाएगी, तो कोई देश कैसे तरक्की कर सकता है। लेकिन यह बात शायद कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक और विपक्ष नहीं समझ रहा।
इसीलिए कभी संसद कच के दौरान बवाल मचाया जाता है तो कभी विरोध प्रदर्शन के नाम पर प्रधानमंत्री आवास के पास जाकर हंगामा किया जाता है। ऐसे लोगों को सीएम योगी ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा कि छात्रों को बदनाम करने के लिए सपा कांग्रेस के गुंडों ने संसद घेर कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने की बेशर्मी की। याद रखना इनकी संवेदना किसी गरीब के प्रति नहीं, किसी किसान के प्रति नहीं, किसी गरीब परिवार के प्रति नहीं है। इनकी संवेदना माफियाओं के प्रति होती थी। आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त है, गुंडा मुक्त है, अपराधियों से मुक्त है, उपद्रव से मुक्त है, कर्फ्यू से मुक्त है। ये समाजवादी पार्टी को कैसे स्वीकार्य हो सकता है? कांग्रेस इसको कैसे स्वीकार कर सकती है? क्योंकि उन्होंने तो प्रदेश में कर्फ्यू दिया था। उन्होंने प्रदेश में दंगे दिए थे। उन्होंने प्रदेश में उपद्रव दिए थे। उन्होंने प्रदेश में लूटखसोट दिया था। उन्होंने प्रदेश में अराजकता दी थी। और उसी अराजकता का शिकार बनाने के लिए इनके द्वारा लगातार शरारतें की जा रही हैं। लगातार शरारतें की जा रही हैं। लगातार कभी वह जाति जाति को भड़काने का काम करते हैं। कभी किसानों को भड़काने का काम करते हैं। कभी युवाओं को भड़काने का काम करते हैं और कभी छात्रों को भड़काने का काम करते हैं।
आपने देखा होगा कैसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गुंडे दिल्ली में संसद सत्र का घेराव करने का काम किए। कैसे घेराव किया? कैसे तोड़फोड़ कराए छात्रों को बदनाम करने के लिए। एक तरफ जहां कॉकरोचों की भीड़ संसद कच करती है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष प्रधानमंत्री आवास के पास जाकर विरोध प्रदर्शन करता है। अब यह मोदी सरकार को अस्थिर करने की दो तरफ़ा साजिश है या कुछ और यह तो आप अच्छी तरह से जानते हैं। लेकिन जिस तरह से पाकिस्तानी दानिश कनेरिया ने भी मोदी विरोधी इस विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाया है। उससे मोदी विरोधी पत्रकार आरफ़ा खानम जैसे बौखला गए और यहां तक कह दिया कि यह पाकिस्तानी हमारे देश के अंदरूनी मामलों में दखल क्यों दे रहा है? जिस पर दानिश कनेरिया ने भी तंज मारते हुए लिखा तो मुझे लगा कि आप पाकिस्तान की तरफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऐसा लगा कि आप पाकिस्तान के पक्ष में बोल रही थी। चुनिंदा रिपोर्टिंग अच्छी बात नहीं है। आरफा यह तंज देखकर समझ सकते हैं कि पाकिस्तानी दानिश भी जानते हैं कि आरफा खानम किस तरह से रिपोर्टिंग करती हैं।
वैसे यह कोई नई बात नहीं है। आरफा खानम पर मोदी विरोधी पत्रकारिता करने के आरोप लगते रहे। वैसे कॉकरोचों के इस आंदोलन पर आप किसके साथ हैं? पाकिस्तानी दानिश कनेरिया के या फिर बात पर मोदी सरकार का विरोध करने वाली आरफा खानम के साथ? अपनी राय हमें कमेंट कर जरूर बताएं। साथ ही सीएम योगी ने विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देते हुए क्या कुछ कहा वह भी सुन लीजिए। जब प्रधानमंत्री मोदी जी और माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने देश के अंदर सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी नागरिकता अधिनियम का कानून पास किया और इस कानून के तहत था कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार से कोई भी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन अगर भारत के अंदर आया है 5 साल पहले आ चुका है तो उसको भारत की नागरिकता दी जाएगी। भारत के अंदर सम्मानजनक ढंग से उसको बसने की सुविधा दी जाएगी।
तो कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इनके अन्य सेुलर दलों ने विरोध किया। मुस्लिम संगठन विरोध में आए। लंबे समय तक इनके द्वारा आंदोलन किया गया। आप मुझे बताओ बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान के अंदर हिंदुओं पर, सिखों पर अत्याचार होगा, बौद्धों पर अत्याचार होगा, जैनियों पर अत्याचार होगा। कहां जाएगा वो व्यक्ति? कहां जाएगा? अरे इसी हिंदुस्तान में तो आएगा। और मोदी जी ने यही किया। लेकिन इन्होंने उसका विरोध किया। बांग्लादेश में हिंदुओं के कत्लेआम पर, दलितों के कत्लेआम पर यह सभी दल मौन थे। किसी का मुंह नहीं खुल रहा था। पाकिस्तान में जब कत्लेआम होता है इनका मुंह बंद हो जाता है। लोग कुछ नहीं बोलते। देश के अंदर कहीं हिंदू विरोधी दंगे होते थे। ये सभी दल मौन हो जाते थे।
कांग्रेस के समय में जब कश्मीर में हिंदुओं का कत्लेआम होता था। कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम होता था। इनका मुंह बंद हो जाता था। लेकिन जब उन हिंदुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण की बात मोदी सरकार ने की तो इन लोगों ने उसके विरुद्ध कितना नेगेटिव नैरेटिव सेट करने का प्रयास किया उसके खिलाफ धरना प्रदर्शन आंदोलन तोड़फोड़ आगजनी ये सब करने का प्रयास किया था और यह वहां तो दिल्ली में तो क्या ही इन्होंने यूपी में भी देश के अलग-अलग राज्यों में भी तोड़फोड़ करने का प्रयास किया था जब उसमें विफल हो गए उसके बाद इन्होंने किसानों को शुरू किया। किसानों को भड़काना शुरू किया।
किसानों का आंदोलन पंजाब से, हरियाणा से लोगों को बहका-बहका करके लाते थे। भड़काते थे। वहां भी जब किसानों की समझ में आया कि नहीं यह लोग भड़काने का काम कर रहे हैं। गलत दिशा दे रहे हैं। फिर इन्होंने युवाओं को भड़काना शुरू किया। दलितों को वंचितों को भड़काना शुरू किया। और जब उसमें भी फेल हो गए। अब छात्रों को इन्होंने अपना निशाना बनाना शुरू किया।