एक ऐसा ताज जिसे दुनिया की सबसे खूबसूरत और आत्मविश्वासी महिलाओं में से एक को दिया जाता है। एक ऐसा मंच जहां पहुंचना ही किसी भी लड़की के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है। और फिर उसी मंच पर भारत का नाम रोशन करके जब कोई महिला अपने देश लौटती है तो लोगों को लगता है कि अब उसके लिए जिंदगी आसान हो गई होगी। फिल्मों के दरवाजे खुल जाएंगे। बड़े-बड़े निर्माता उसके पीछे होंगे और कामयाबी कदम चूमेगी। लेकिन असल जिंदगी में कहानी इतनी सीधी नहीं होती क्योंकि मिस यूनिवर्स का ताज सिर पर रखने के बाद असली परीक्षा शुरू होती है। दुनिया आपको खूबसूरत मान चुकी होती है। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री आपसे यह साबित करने को कहती है कि आप सिर्फ खूबसूरत नहीं है बल्कि अभिनय भी कर सकती हैं। और यही परीक्षा लारा दत्ता के सामने भी थी। जिस लड़की ने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया, उसे कुछ ही समय बाद बॉलीवुड की उस दुनिया में उतरना था, जहां हर शुक्रवार किसी कलाकार का भविष्य बदल सकता था। जहां एक फिल्म आपको रातोंरात स्टार बना सकती है और दूसरी फिल्म आपकी सारी मेहनत पर सवाल खड़े कर सकती है। लारा दत्ता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कभी उन्हें बॉलीवुड की ग्लैमरस हीरोइन के तौर पर देखा गया। कभी कॉमेडी फिल्मों में उनकी तारीफ हुई, कभी उनकी फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया और कभी लगातार असफलताओं ने उनके करियर की रफ्तार रोक दी। निजी जिंदगी में भी उनके रिश्ते चर्चा में रहे और शादी के बाद उन्होंने खुद को एक अलग भूमिका में ढाला। लेकिन इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें वापस जाना होगा उस दौर में जब लारा दत्ता सिर्फ एक लड़की थी और मिस यूनिवर्स तो दूर बॉलीवुड का हिस्सा बनने का सपना भी अभी भविष्य की बात था। 16 अप्रैल 1978 को गाजियाबाद में लारा दत्ता का जन्म हुआ। उनका परिवार एयरफोर्स से जुड़ा हुआ था। उनके पिता एयरफोर्स में अधिकारी थे और मां एंग्लो इंडियन पृष्ठभूमि से आती थी। लारा की दो बहनें भी हैं और परिवार में अनुशासन का माहौल रहा। लारा का बचपन गाजियाबाद में ज्यादा समय नहीं बीता। परिवार बाद में बेंगलुरु चला गया और उनकी परवरिश वहीं हुई। बेंगलुरु भी ही उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ लारा के मन में एक अलग दुनिया बस चुकी थी। उन्हें मॉडलिंग पसंद थी।
उनके सामने उस समय कई रास्ते थे। परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए एक सुरक्षित और पारंपरिक करियर भी चुना जा सकता था। लेकिन लारा ने ग्लैमर की दुनिया को चुना। कॉलेज के दिनों में उन्होंने मॉडलिंग शुरू की और धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि यह सिर्फ उनका शौक नहीं है। वो इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकती हैं। यहीं से शुरू हुआ प्रतियोगिताओं का दौर। 1995 में लारा ने ग्लैड्रैक्स मेगा मॉडल इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और विजेता बनी। यह उनके लिए पहली बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। लेकिन लारा की महत्वाकांक्षा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी। 1997 में उन्होंने मिस इंटरकॉन्टिनेंटल का खिताब जीता। अब उनका नाम मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में तेजी से पहचाना जाने लगा था। लेकिन उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अभी बाकी थी। साल 2000 यह साल भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। उसी साल प्रियंका चोपड़ा ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीता। दिया मिर्जा ने मिस एशिया पैसिफिक का ताज हासिल किया और लारा दत्ता ने मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया। एक ही साल में भारत की तीन अलग-अलग युवा महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भारत का नाम चमका दिया था। लेकिन लारा की उपलब्धि अपने आप में ऐतिहासिक थी। मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में दुनिया के अलग-अलग देशों से प्रतिभागी आई थी। हर प्रतियोगी खूबसूरत थी। हर किसी के पास आत्मविश्वास था और हर कोई अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहा था। ऐसे में भारत की तरफ से आई लारा दत्ता ने सिर्फ अपनी खूबसूरती के दम पर यह ताज नहीं जीता। प्रतियोगिता में उनके आत्मविश्वास और जवाब देने के तरीके ने भी लोगों का ध्यान खींचा और जब आखिरकार विजेता के रूप में उनका नाम घोषित हुआ तो भारत में जश्न का माहौल था। एक साधारण मॉडल से अंतरराष्ट्रीय स्तर की ब्यूटी क्वीन बनने तक का सफर पूरा हो चुका था। अब लारा के पास पहचान थी, प्रसिद्धि थी और सबसे महत्वपूर्ण चीज थी बॉलीवुड के दरवाजे तक पहुंच। लेकिन बॉलीवुड में आने से पहले ही दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने उन पर नजर डाल ली थी। लारा ने तमिल फिल्म अरस सच्चे में काम किया। हालांकि फिल्म बनने और रिलीज होने के बीच काफी समय लग गया और इसीलिए यह उनके करियर की शुरुआत के तौर पर बाद में दर्शकों के सामने आई। लेकिन लारा को पता था कि अगर उन्हें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी पहचान बनानी है तो हिंदी फिल्मों में खुद को स्थापित करना जरूरी होगा और फिर आया अंदाज। यह फिल्म उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसी फिल्म से उनका बॉलीवुड करियर बड़े स्तर पर शुरू हुआ। फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा थे। कहानी एक प्रेम त्रिकोण के इर्द-गिर्द घूमती थी
और दोनों अभिनेत्रियों के सामने अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती थी। यहां एक दिलचस्प बात यह भी थी कि लारा और प्रियंका दोनों ही ब्यूटी पैजेंट से आई थी। प्रियंका मिस वर्ल्ड थी और लारा मिस यूनिवर्स। यानी एक ही फिल्म में दो अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी क्वीन आमने-सामने थी। फिल्म रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे पसंद किया। अंदाज ने लारा को एक मजबूत शुरुआत दी। उनकी खूबसूरती पहले से चर्चा में थी। लेकिन अब लोग उन्हें अभिनेत्री के रूप में भी देखने लगे थे। यह उनके करियर का पहला बड़ा मोड़ था। लेकिन लारा के लिए सबसे मुश्किल काम था अपनी पहली फिल्म की सफलता को आगे बनाए रखना। क्योंकि बॉलीवुड में डेब्यू सफल होना एक बात है और कई सालों तक टिके रहना। दूसरी बात अंदाज के बाद लारा ने अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया। मुंबई से आया मेरा दोस्त में उन्होंने एक बिल्कुल अलग तरह का किरदार निभाया। यहां वो उस ग्लैमरस छवि से दूर थी जिसके लिए उन्हें पहचाना जाता था। उन्होंने एक ग्रामीण लड़की का किरदार निभाया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई। लेकिन लारा के लिए यह किरदार इसलिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह साबित करना चाहती थी कि वह सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाएं नहीं कर सकती। इसके बाद मस्ती आई। मस्ती में लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय, आफताब शिवदासानी, रितेश देशमुख और कई कलाकार नजर आए। फिल्म की कॉमेडी और कहानी ने दर्शकों को खूब मनोरंजन दिया और फिल्म सफल रही। लारा के करियर में मस्ती इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इस फिल्म ने उन्हें एक अलग तरह की लोकप्रियता दी। अब उन्हें सिर्फ मिस यूनिवर्स या ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में नहीं देखा जा रहा था। वो कॉमेडी भी कर सकती थी। लेकिन इसके बाद उनके सामने फिर वही समस्या खड़ी हुई जो बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों के सामने आती है। अच्छी शुरुआत के बाद लगातार अच्छी स्क्रिप्ट मिलना आसान नहीं होता। 2004 में बर्दाश्त जैसी फिल्म आई। इसमें बॉबी देओल के साथ लारा नजर आई। फिल्म में एक्शन और ड्रामा था और लारा ने अपनी भूमिका निभाने की कोशिश की। इसके बाद कई मल्टीस्टारर फिल्में आई। आन, ऐलान और इंसान जैसी फिल्मों में लारा नजर आई। लेकिन इन फिल्मों में उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद उनके नाम और शुरुआती लोकप्रियता को देखते हुए की जा रही थी। एक के बाद एक फिल्मों के औसत प्रदर्शन ने उनके करियर की रफ्तार को प्रभावित किया। 2005 में जुर्माई। यह एक सस्पेंस थ्रिलर थी और इसमें लारा ने बॉबी देओल के साथ काम किया। फिल्म को समीक्षकों से मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली और बॉक्स ऑफिस पर भी यह उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सकी। लेकिन लारा के करियर की खास बात यह थी कि वह लगातार काम कर रही थी। फिल्में सफल हो या असफल वह इंडस्ट्री में बनी हुई थी। इसके बाद काल जैसी फिल्म आई। फिल्म में अजय देवगन, जॉन अब्राहिम, विवेक ओबेरॉय, ईशा देओल और लारा दत्ता जैसे कलाकार थे। बड़े कलाकारों के बावजूद फिल्म को वह सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद की गई थी। लेकिन इसी दौरान लारा का नाम बड़े-बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ता रहा। 2005 में नो एंट्री आई। यह फिल्म लारा दत्ता के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हुई। फिल्म में सलमान खान, अनिल कपूर, फरदीन खान, बिपाशा बसू, ईशा देओल और लारा दत्ता जैसे कलाकार थे। कॉमेडी से भरपूर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। लारा के लिए यह फिर एक बड़ा मौका था। इसके बाद उन्होंने दोस्ती, फ्रेंड्स फॉर एवर में भी काम किया। फिल्म में अक्षय कुमार और बॉबी देओल जैसे कलाकार थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सफलता नहीं बन पाई लेकिन लारा लगातार बड़े कलाकारों के साथ काम करती रही और फिर आया 2006 यह साल उनके करियर के लिए एक बार फिर महत्वपूर्ण साबित हुआ। फिल्म थी भागमभाग। अक्षय कुमार, गोविंदा, परेश रावल, राजपाल यादव, लारा दत्ता और कई बड़े कलाकारों से सजी इस फिल्म ने दर्शकों को खूब हंसाया। लारा ने इस फिल्म है कॉमेडी की और फिल्म की पूरी स्टार कास्ट के बीच अपनी जगह बनाए रखी। भागमभाग की सफलता ने लारा को फिर से दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया। इसके बाद झूम बराबर झूम आई। फिल्म में अभिषेक बच्चन, बॉबी देओल, प्रीति जिंटा और लारा दत्ता जैसे कलाकार थे। फिल्म को लेकर उम्मीदें काफी थी लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई। लारा के करियर में यही सिलसिला चलता रहा। कभी हिट, कभी औसत, कभी फ्लॉप। लेकिन उनका नाम लगातार फिल्मों में बना रहा। फिर आया पार्टनर, सलमान खान, गोविंदा, कैटरीना कैफ और लारा दत्ता जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई। फिल्म की कॉमेडी, गाने और कलाकारों की केमिस्ट्री ने इसे बॉक्स ऑफिस पर सफल बना दिया। लारा ने इस फिल्म में सलमान खान के साथ काम किया और उनके करियर में यह भी एक महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई।
लेकिन इसके बाद उनके सामने एक नई चुनौती थी। बॉलीवुड की नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही थी। नई अभिनेत्रियां इंडस्ट्री में प्रवेश कर रही थी। कई अभिनेत्रियां अलग तरह के किरदार चुन रही थी और दर्शकों की पसंद भी बदल रही थी। लारा को भी अपने करियर में बदलाव करना पड़ा। 2009 में बिल्लू आई। इस फिल्म में उन्होंने इरफान खान की पत्नी का किरदार निभाया। यह भूमिका उनकी पिछली ग्लैमरस भूमिकाओं से काफी अलग थी। यहां लारा को एक साधारण ग्रामीण महिला के रूप में देखा गया। उनके लिए यह साबित करने का एक और मौका था कि वह सिर्फ ग्लैमरस किरदारों तक सीमित नहीं है। इसके बाद डून और डिस्टर्ब जैसी फिल्में आई। फिर 2009 में ब्लू आई। इस फिल्म में अक्षय कुमार, संजय दत्त, जायद खान और लारा दत्ता लारा एक ग्लैमरस भूमिका में थी और फिल्म को लेकर काफी चर्चा भी हुई। हालांकि फिल्म उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस सफलता हासिल नहीं कर पाई। लेकिन लारा की स्क्रीन प्रेजेंस की चर्चा जरूर हुई। 2010 में उनके करियर को एक और बड़ी फिल्म मिली हाउसफुल। फिल्म में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, दीपिका पादुकोण, लारा दत्ता, अर्जुन रामपाल और कई बड़े कलाकार थे। फिल्म कॉमेडी पर आधारित थी और दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया। लारा ने रितेश देशमुख के साथ स्क्रीन शेयर की और फिल्म की सफलता ने उनके करियर को फिर एक मजबूत मौका दिया। यही वो दौर था जब लारा ने सिर्फ अभिनय ही नहीं बल्कि फिल्म निर्माण की तरफ भी रुचि दिखाई। मनोरंजन की दुनिया में उनका सफर अब केवल अभिनेत्री तक सीमित नहीं था। इसके बाद डॉन 2 जैसी बड़ी फिल्म में भी वो नजर आई। शाहरुख खान स्टारर इस फिल्म में लारा का किरदार मुख्य भूमिका में नहीं था। लेकिन इतनी बड़ी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनना अपने आप में महत्वपूर्ण था। समय आगे बढ़ा और लारा धीरे-धीरे मुख्य अभिनेत्री से सपोर्टिंग भूमिकाओं की तरफ बढ़ने लगी। लेकिन यह उनके लिए अंत नहीं था बल्कि उनके करियर का दूसरा चरण था। उन्होंने डेविड, सिंग इज ब्लिंग, अजहर और वेलकम टू न्यूयॉर्क जैसी फिल्मों में काम किया। उन्होंने बेलबॉटम जैसी फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। फिर सिनेमा के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफार्म का दौर आया। वेब सीरीज ने कई ऐसे कलाकारों को दोबारा मौके दिए जिनके लिए फिल्मों में पहले जैसी मुख्य भूमिकाएं नहीं बची थी। लारा ने भी इस बदलाव को अपनाया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफार्म पर अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और यह दिखाया कि वह सिर्फ एक दौर की अभिनेत्री बनकर नहीं रहना चाहती। अब अगर उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो यह हिस्सा भी हमेशा से चर्चा में रहा है। मॉडलिंग के शुरुआती दिनों में उनका नाम कैली दर्जी के साथ जुड़ा। दोनों लंबे समय तक रिश्ते में रहे और कई सालों तक एक दूसरे के साथ रहे। उस दौर में लारा का संघर्ष चल रहा था और कैली भी मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। दोनों का रिश्ता लंबे समय तक चला लेकिन आखिरकार यह रिश्ता खत्म हो गया। लारा के जीवन में इसके बाद डीनो मोरिया का नाम आया। डिनो उस दौर के लोकप्रिय मॉडल और अभिनेता थे। मॉडलिंग के दिनों से ही लारा और डिनो एक दूसरे को जानते थे और बाद में उनके रिश्ते की खबरें भी सामने आई। लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चला। डिनो मोररिया का नाम बाद में बिपाशा बसु के साथ जुड़ा और दोनों की जोड़ी बॉलीवुड की चर्चित जोड़ियों में शामिल हो गई। लारा के जीवन में इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता महेश भूपति के साथ आया। महेश भूपति भारत के जाने-माने टेनिस खिलाड़ी रहे हैं। लारा और महेश की मुलाकात काम से जुड़े संपर्कों के दौरान हुई और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी। दोनों के रिश्ते की खबरें सामने आने लगी। उस समय महेश भूपति की पहली शादी श्वेता जयशंकर से हो चुकी थी। बाद में महेश और श्वेता अलग हो गए और इसके बाद लारा के साथ उनके रिश्ते की चर्चा और तेज हो गई। यह रिश्ता मीडिया के लिए इसलिए भी बड़ा विषय था क्योंकि इसमें एक मशहूर अभिनेत्री और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी का नाम जुड़ा था। आखिरकार 2011 में लारा दत्ता और महेश भूपति ने शादी कर ली।
मिस यूनिवर्स से बॉलीवुड अभिनेत्री बनने वाली लारा अब एक नई भूमिका में प्रवेश कर चुकी थी। पत्नी की भूमिका और कुछ समय बाद मां की भूमिका। 2012 में लारा और महेश की बेटी सायरा का जन्म हुआ। मां बनने के बाद लारा ने अपने करियर को पूरी तरह खत्म नहीं किया। उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स में काम जारी रखा। उनकी जिंदगी अब पहले जैसी नहीं थी। एक समय उनका पूरा ध्यान मॉडलिंग और फिल्मों पर था। अब परिवार भी उनकी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ विवादों में भी लारा का नाम आया। उनके पति महेश भूपति ने एक समय फिल्म इंडस्ट्री में लारा के साथ कथित तौर पर हुए अनुचित व्यवहार को लेकर बयान दिया था। ऐसी खबरों ने काफी चर्चा बटोरी। लेकिन इन मामलों में अलग-अलग रिपोर्ट और बयान सामने आते रहे हैं। इसलिए इन्हें निश्चित तथ्य के रूप में देखने के बजाय उस समय की मीडिया रिपोर्टों और संबंधित लोगों के बयानों के संदर्भ में ही समझना ज्यादा सही है। लारा की निजी जिंदगी को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आती रही हैं। उनके रिश्तों को लेकर मीडिया ने अलग-अलग दावे किए। लेकिन हर दावा सच हो यह जरूरी नहीं। किसी भी अभिनेत्री की निजी जिंदगी को लेकर सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि उसकी जिंदगी का एक हिस्सा हमेशा कैमरों और मीडिया की नजर में रहता है। एक रिश्ता खत्म होता है तो खबर बनती है। नई दोस्ती होती है तो खबर बनती है। शादी होती है तो खबर बनती है और जब परिवार बढ़ता है तब भी खबर बनती है। लारा दत्ता ने भी इस दौर को देखा। लेकिन उनकी कहानी को सिर्फ उनके रिश्तों से समझना उनके पूरे सफर के साथ न्याय नहीं होगा। क्योंकि जिस महिला ने 2000 में मिस यूनिवर्स का खिताब जीता था उसने अगले दो दशकों में मनोरंजन की दुनिया के कई अलग-अलग रूप देखे। मॉडलिंग, ब्यूटी पैजेंट, बॉलीवुड, कॉमेडी, ग्लैमरस भूमिकाएं, गंभीर किरदार, सपोर्टिंग रोल, वेब सीरीज और फिर परिवार। यह एक लंबा सफर है। एक ऐसा सफर जिसमें शुरुआत बहुत चमकदार थी, लेकिन आगे का रास्ता हमेशा आसान नहीं रहा। लारा दत्ता के करियर की सबसे बड़ी खासियत शायद यही है कि उन्होंने असफलताओं के बाद भी इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला नहीं किया। उन्होंने भूमिकाएं छोटी होने पर भी काम किया। उन्होंने नए प्लेटफार्म पर काम किया। उन्होंने बदलते समय के साथ खुद को ढाला और यही किसी कलाकार की असली पहचान होती है। क्योंकि स्टारडम हमेशा एक जैसा नहीं रहता। एक दौर में आपका नाम पोस्टर पर सबसे ऊपर होता है। फिर समय बदलता है। पोस्टर पर आपका नाम छोटा हो जाता है। लेकिन अगर आप काम करते रहते हैं तो दर्शक आपको पूरी तरह भूलते नहीं है। लारा दत्ता ने इसी तरह अपनी जगह बनाए रखी। मिस यूनिवर्स का ताज उनके सिर पर आज भी
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लेकिन उनके करियर की असली कहानी उस ताज के बाद शुरू होती है। क्योंकि ताज जीतना एक रात की उपलब्धि हो सकती है। लेकिन दो दशक तक अपनी पहचान बनाए रखना लगातार मेहनत मांगता है। लारा दत्ता की जिंदगी में भी ऐसे दौर आए जब उन्हें शायद लगा होगा कि करियर उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं जा रहा। लेकिन उन्होंने खुद को एक ही छवि में पैद नहीं किया। उन्होंने कॉमेडी की। उन्होंने ड्रामा किया। उन्होंने ग्लैमरस किरदार निभाए। उन्होंने साधारण महिलाओं के किरदार निभाए। उन्होंने बड़े सितारों के साथ काम किया। उन्होंने छोटे लेकिन महत्वपूर्ण किरदार स्वीकार किए और फिर डिजिटल प्लेटफार्म का हिस्सा बनी। यही वजह है कि आज लारा दत्ता को सिर्फ 2000 की मिस यूनिवर्स कह देना, उनकी कहानी को बहुत छोटा कर देना होगा। वो उस पीढ़ी की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने मॉडलिंग और ब्यूटी पैजेंट से निकलकर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने की कोशिश की और बदलते दौर के साथ खुद को ढालते हुए लंबे समय तक इंडस्ट्री में बनी रही। उनकी जिंदगी हमें एक और चीज समझाती है। सफलता जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही शांत होता है। जब लारा के सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज रखा गया। तब दुनिया ने सिर्फ उनकी जीत देखी। लेकिन उस जीत तक पहुंचने के पीछे सालों की मेहनत थी। फिर जब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा तब दुनिया ने उनकी पहली फिल्म की सफलता देखी। लेकिन उसके बाद आने वाली असफलताओं का बोझ शायद सिर्फ लारा ही समझ सकती थी। फिर जब उनकी निजी जिंदगी में रिश्ते आए तब मीडिया ने उन रिश्तों को सुर्खियों में बदल दिया। लेकिन किसी रिश्ते के अंदर क्या हुआ? यह सिर्फ उस रिश्ते में शामिल लोग ही जानते हैं। और शायद यही वजह है कि किसी भी सेलिब्रिटी की जिंदगी को समझते समय हमें खबर और सच्चाई के बीच अंतर जरूर याद रखना चाहिए। आज लारा दत्ता अपने जीवन के उस दौर में है जहां उन्हें किसी को यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि वह कौन है। एक समय वह मॉडल थी। फिर ब्यूटी क्वीन बनी। फिर मिस यूनिवर्स बनी। फिर बॉलीवुड अभिनेत्री बनी। फिर पत्नी और मां बनी और समय के साथ उन्होंने खुद को डिजिटल दुनिया के लिए भी तैयार किया। उनका सफर पूरी तरह परफेक्ट नहीं रहा। कई फिल्में नहीं चली। कई भूमिकाएं याद नहीं रही। कई बार उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। लेकिन उनकी कहानी की खूबसूरती शायद इसी में है कि उन्होंने हर मोड़ के बाद खुद को दोबारा खड़ा किया। और शायद किसी कलाकार की असली जीत यही होती है ना कि उसकी हर फिल्म हिट हो ना कि उसका नाम हर पोस्टर पर सबसे ऊपर हो बल्कि यह कि इतने सालों बाद भी लोग उसके सफर के बारे में जानना चाहें। लारा दत्ता की कहानी में एक लड़की का सपना है। एक ब्यूटी क्वीन की ऐतिहासिक जीत है। एक अभिनेत्री का संघर्ष है। एक महिला की निजी जिंदगी है। एक पत्नी और मां की जिम्मेदारियां हैं। और सबसे बढ़कर एक ऐसे कलाकार की कहानी है जिसने समय के साथ अपने लिए नई जगह तलाशने की कोशिश की। 2000 में जब उन्होंने मिस यूनिवर्स का ताज पहना था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि आने वाले वर्षों में उनका सफर इतना लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा होगा।
लेकिन जिंदगी हमेशा वही नहीं होती जो हम शुरुआत में सोचते हैं। कभी वह हमें हमारी मंजिल तक सीधे पहुंचाती है और कभी रास्ते में इतने मोड़ देती है कि पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि हर मोड़ ने हमें कुछ ना कुछ सिखाया। लारा दत्ता की जिंदगी भी ऐसे ही मोड़ों से बनी कहानी है। गाजियाबाद से बेंगलुरु तक। मॉडलिंग से अंतरराष्ट्रीय मंच तक, मिस यूनिवर्स से बॉलीवुड तक, बड़े पर्दे से डिजिटल प्लेटफार्म तक और एक अभिनेत्री से एक परिवार की जिम्मेदार महिला तक। यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि मनोरंजन की दुनिया में कैमरा जब तक चलता रहता है कहानी भी चलती रहती है और लारा दत्ता की कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस लड़की ने कभी दुनिया के सामने भारत का नाम रोशन करने के लिए मंच पर कदम रखा था उसने बाद में उसी आत्मविश्वास को अपने लंबे फिल्मी सफर में भी बनाए रखने की कोशिश की। उनकी जिंदगी में सफलता भी आई, असफलता भी आई, रिश्ते भी आए, विवाद भी आए, परिवार भी बना और करियर ने भी कई करवटें ली। लेकिन हर दौर में एक चीज कायम रही। लारा दत्ता का नाम। आज भी जब भारतीय सिनेमा के उन चेहरों की बात होती है जिन्होंने ब्यूटी पैजेंट से निकलकर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई तो लारा दत्ता का नाम जरूर लिया जाता है और शायद यही किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है कि वक्त गुजर जाए दौर बदल जाए नई पीढ़ियां आ जाए लेकिन आपका नाम लोगों की यादों से पूरी तरह मिटे नहीं लारा दत्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ताज से शुरू हुई कहानी जिसने उन्हें पूरी दुनिया में पहचान दी। एक फिल्म से शुरू हुआ सफर जिसने उन्हें बॉलीवुड में जगह दी। और फिर वर्षों की मेहनत ने उस पहचान को एक लंबे करियर में बदल दिया। तो यह थी लारा दत्ता की कहानी। एक ऐसी लड़की की कहानी जिसने पहले दुनिया के सबसे बड़े सौंदर्य मंच पर भारत का नाम रोशन किया। और फिर फिल्मों की उस चमकदार लेकिन मुश्किल दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक जरूर करें। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसी ही बॉलीवुड की अनसुनी रोचक और डॉक्यूमेंट्री स्टाइल कहानियों के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। क्योंकि बॉलीवुड की हर चमकती तस्वीर के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी होती है जो पर्दे पर कभी दिखाई नहीं देती।