भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे दौर की हिंदी फिल्मों की एक ऐसी नायिका और फिल्म निर्माता की जिसने अपने शानदार और यादगार काम के जरिए हिंदी सिनेमा के इतिहास में महिलाओं के सम्मान और इज्जत को चार चांद लगाए। तेरी झोली डालू सब हिंदी सिनेमा की इस महिला फिल्म निर्माता ने अपने कठिन परिश्रम और कड़ी मेहनत के चलते पूरी दुनिया में महिलाओं के वजूद को बेहद [संगीत] मजबूत किया तो वहीं महिला केंद्रित सुपरहिट फिल्में बनाकर हिंदी सिनेमा के साथ-साथ पूरे हिंदुस्तान में महिलाओं के प्रति एक क्रांति की आग लगा दी। बीतेना बीते ना रहना।
लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म निर्माता की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि 16 साल की कच्ची उम्र में पहले से शादीशुदा और अपने से 30 साल बड़े हिंदी सिनेमा के गायक से हो गया इनको प्यार और उसी प्यार की खातिर यह फिल्म निर्माता बन गई उस अधी उम्र के गायक की नाजायज प्रेमिका। और दोस्तों आप क्या यह भी जानते हैं कि यह हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी फिल्म निर्माता थी जिन्होंने समाज मर्यादा और लोकलाज की इज्जत को जूते की नोक पर रखकर 40 साल तक एक बदनाम रिश्ते को पूरी दुनिया से छिपाकर अंधकार में रखा। आई कैन नेवर फॉरगेट। वंडरफुल बस वंडरफुल और दोस्तों इस नायिका और निर्माता की जिंदगी में ऐसी क्या मजबूरी थी कि इनको अपने पिता से ही करनी पड़ी शादी और क्यों इस शादी ने उड़ा दी बड़े-बड़े अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और राजनेताओं की नींद। पीपल कीपौड़ी से गुजरे जो डोली।
दोस्तों जिस लड़की ने कभी भी अपने मां-बाप का सम्मान नहीं किया, क्यों उसी लड़की को अपने जीवन में आगे चलकर मिली उनके कर्मों की ऐसी सजा कि यह अभिनेत्री हो गई बिस्तर से भी उठने के लिए मोहताज। क्यों इस फिल्म निर्माता की हो गई ऐसी हालत कि अपने अंतिम दिनों में बीमारी के इलाज के लिए इस महिला निर्माता को झेलनी पड़ी वह गरीबी और लाचारी जिसको दोस्तों आज हम अपने शो में बात करने जा रहे हैं हिंदी सिनेमा की एक ऐसी महिला फिल्म निर्माता की जिसने महिलाओं के सम्मान और इज्जत को मजबूत करने के लिए ऐसी फिल्में बना डाली जिनको आज तक पूरी दुनिया में याद किया जाता है। तरस आ गया हमारे पर। तरस आ गया हमारे पर।
लेकिन दोस्तों जिस महिला ने अपनी फिल्मों के जरिए दूसरी महिलाओं को तो मजबूती दी लेकिन यह खुद अपनी जिंदगी में कोई भी जायज रिश्ता नहीं बना पाई। और जिंदगी भर एक दूसरी औरत और नाजायज रिश्ते की मार झेलती रहीं। जी हां, हम बात कर रहे हैं महिला क्रांति को आग देने वाली फिल्म निर्माता और मशहूर एक्टर गुरुदत्त की भांजी कल्पना लाजमी की। दिल हुम करे घबराए। कौन है कल्पना लाजमी? कहां से आई थी? क्या थी इनकी बदनाम और दर्दनाक की कहानी? यह सब मैं आपको बताऊंगी।
उससे पहले जान लेते हैं इनके शुरुआती जीवन के बारे में। ओ मोरी चंद्रमा तेरी नमस्कार आप सभी का स्वागत है बॉलीवुड [संगीत] नवेल के इस एपिसोड में। मोरी चंद्रमा कल्पना लाजमी का जन्म 31 मई साल 1954 को बंबई में हुआ था। इनके पिता का नाम गोपी लाजमी था जो इंडियन नेवी में एक ऑफिसर थे।
वहीं इनकी मां ललिता लाजमी में एक मशहूर चित्रकार थी। तो वहीं भारतीय हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और फिल्म निर्माता गुरुदत्त इनके सगे मामा थे। ओजले दरेजों [संगीत] में पायल के छन छन कल्पना बचपन से ही और बच्चों की तरह बिल्कुल नहीं थी।
वो हमेशा और बच्चों से अलग, चुपचाप, चिड़चिड़ी और गुस्से में रहती थी। जिसकी वजह से कल्पना का कोई भी दोस्त नहीं था। वह हमेशा अकेले बैठी रहती और छोटी सी उम्र में ना जाने क्या-क्या सोचती [संगीत] रहती। कल्पना को इस तरह देखकर उनकी मां ललिता को उनकी चिंता होती थी और कुछ जानकारों का तो यह भी कहना था कि उनके इन चिड़चिड़े और गुस्सैल व्यवहार के पीछे उनके पिता का ज्यादा पीना माना गया था। धीरे-धीरे समय गुजरा और कल्पना ने अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और साल 1971 उन्होंने बंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से साइकोलॉजी की पढ़ाई की। कल्पना जब लगभग 17 साल की थी तो अपनी इस कच्ची उम्र में उनको प्यार हो गया। प्यार तो हुआ।
लेकिन एक ऐसे इंसान से हुआ जिसके साथ उनके रिश्तों को उनका परिवार बिल्कुल भी मंजूर नहीं कर सकता था। और कुछ हुआ भी ऐसा ही जब उनकी मां को इस रिश्ते के बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी बेटी को खूब समझाया नरमी से सख्ती से लेकिन मां की किसी भी बात का उनके ऊपर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने अपने इस फैसले को कायम रखा। कौन है वो बदमाश? कहां रहता है? क्या नाम है उसका? चल बेटी तू अभी चल मेरे साथ। मैं उसका पीरूंगी। उसका गला घोट दूंगी। कल्पना जब 22 साल की थी तो एक दिन उनको एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता जाना पड़ा।
पूरे एक सप्ताह के लिए कल्पना के शादी में जाने के बाद दो दिन बाद जब उनकी मां किसी काम से कल्पना के कमरे में गई तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन निकल गई। उनकी मां ने देखा कि कल्पना के सारे कपड़े गायब थे। यह सब देखकर उनकी मां को सोचने में जरा भी देर नहीं लगी कि कल्पना किसी शादी में नहीं बल्कि वह अपना घर छोड़कर अपने प्रेमी के पास कोलकाता चली गई। ज्यादा देर ना करते हुए उनकी मां और उनका भाई देवदास भी कल्पना का पता लगाकर सीधे कोलकाता पहुंच गए।
उनको घर वापस लाने के लिए उन्होंने देखा कि कल्पना अपने प्रेमी के जूतों को पॉलिश कर रही थी और उसके बाद उनको पहना भी रही थी। आखिर कल्पना के यह प्रेमी कौन थे? हिंदी सिनेमा के संगीत में उनका रुतबा था। यह हम आपको आगे बताएंगे। एंड आई प्रॉमिस यू आई विल नेवर एवर लीव यू। कल्पना और उनकी मां जब कोलकाता में प्रेमी के घर मिले तो मां बेटी के बीच काफी बहस हुई।
लेकिन कल्पना अपने प्रेमी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। लिहाजा वो अपनी बेटी को छोड़कर वापस आ गई। यह वो पल था जब कल्पना और उनकी मां ललिता का रिश्ता जिंदगी भर के लिए टूट गया। कल्पना अपने प्रेमी के साथ उनके घर में ही रहने लगी थी। वह भी एक नाजायज रिश्ते में जिसको समाज में कभी कोई सम्मान नहीं मिलने वाला था। कल्पना 60 और 70 के दशक में ऐसा कदम उठा रही थी जो कि वक्त के लिहाज से बहुत बड़ी बात थी। कल्पना के इस नाजायज रिश्ते पर वहां के लोग थूकते थे। पर कल्पना को कोई फर्क नहीं पड़ता था। कल्पना जिंदगी में कुछ करना चाहती थी, कुछ बनना चाहती थी।
महान फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल कल्पना के दूर के मामा लगते थे और कल्पना भी हिंदी सिनेमा के लिए कुछ करना चाहती थी। लिहाजा वो श्याम बेनेगल के साथ जुड़ गई। जहां कल्पना ने मंडी जैसी फिल्मों में एक सहायक निर्देशन तो कभीकॉस्ट्यूमर डिजाइनर के तौर पर काम किया।
हम इधरों का बातें गुफ्तगू है। इसके अलावा कल्पना डॉक्यूमेंट्री फिल्मों पर भी काम करने लगी और इन्हीं सब में काम करने के बाद उस तजुर्बे को लेकर साल 1984 में कल्पना ने अपनी पहली फिल्म बनाई एक पल। बजरेगी बाली सी छोरिया गेहूं जैसी गोरिया। [संगीत] इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, फारूक शेख जैसे दिग्गज अभिनेता अभिनेत्री थे। कालिया से [संगीत] गुजरे जो डोली इस फिल्म की कहानी ने हर तरफ हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया।
इस फिल्म की हर जगह काफी प्रशंसा हुई। फिर क्या था? पहली फिल्म की कामयाबी ने कल्पना को हिम्मत दे दी। [संगीत] पीपल की पौड़ी से गुजरे [संगीत] जोड़ो। इसके बाद कल्पना लाजमी ने रुदाली दरमियान दमन क्यों चिंगारी जैसी कई महिला केंद्रित फिल्में बनाई जिनको पूरी दुनिया में लोगों का काफी प्यार मिला। तो हमारी तरह यहीं पर बनेगी। सच-सच के लाली कूद कर कहां जा रही थी? रुदाली फिल्म कल्पना के लिए काफी खास रही। इस फिल्म के लिए डिंपल कबाड़िया को नेशनल अवार्ड मिला और कल्पना को दुनिया भर में लोकप्रियता। एक बूंद कभी पानी की। कल्पना लाजमी की फिल्मों की एक बड़ी खासियत होती थीउनके प्रेमी खुद उनके लिए बेहद खूबसूरत और संगीत से सजी गीत का निर्माण करते थे। जिनको लोग आज तक पसंद करते चले आए हैं। दिल हुम करे lघबराए कल्पना लाजमी ने अपने निर्देशन में साल 2005 में आखिरी फिल्म [संगीत] चिंगारी को बनाया था। ओम आई क्लीम चामुंड देवी जय ओम आईक्लीम चामुंड देवी जय और इस फिल्म के बाद कल्पना लाजमी ने फिल्मों को बनाना बंद कर दिया और इसके पीछे का कारण था उनका नाजायज रिश्ता।
दरअसल उनके प्रेमी की हालत खराब रहने लगी। वह बीमार रहने लगे थे। कल्पना उनकी देखभाल में लग गई दिन रात। वह हर पल अपने प्रेमी के पास रहना चाहती थी। उनकी तमारदारी के लिए और इसी वजह से कल्पना ने अपना शानदार फिल्मी सफर अपने प्रेमी के लिए कुर्बान कर दिया। कैसी तबीयत है उसकी? हकीम जी ने कहा है डरने की कोई बात नहीं।
सुबह तक ठीक हो जाएंगे। और जब आया साल 2009 तो एक बहुत बड़ा बवाल हुआ। हुआ कुछ यूं कि कल्पना के जो प्रेमी थे, वो ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे टहल रहे थे। एक गीत को गुनगुनाते हुए क्योंकि कल्पना के प्रेमी एक बहुत बड़े गायक थे। लोग उनके दीवाने थे। लिहाजा नदी के किनारे अपने चहेते गायक को देखकर लोगों की भीड़ वहां आ गई। लोग उनसे बात करने लगे।
उनको छूने की कोशिश करने लगे और इस सब से वह काफी असहज होने लगी। यह सब देखकर कल्पना अपने प्रेमी और पब्लिक के बीच एक दीवार बनके खड़ी हो गई और पब्लिक को रोकने लगी। लोग इस सबसे गुस्सा हो गए और उन्होंने कल्पना से पूछ लिया कि तुम हो कौन और किस हक से हमको रोक रही हो मिलने से इस बात पर कल्पना ने चिल्लाकर कहा बीवी हूं मैं इनकी जेटिया मानु इंसल्ट को से के भूपेंद्र एगवा हाथ धोरी प्या मूर शी इज माय वाइफ कल्पना का यह जवाब सुनकर वहां सभी लोग सन रह गए सभी के पैरों तले जमीन निकल गई क्योंकि जिस शख्स और गायक को कल्पना अपना अपना पति बता रही थी वो और कोई नहीं बल्कि महान गायक संगीतकार डॉ भूपेंद्र हजिका थे।
जी हां वही भूपेंद्र हजिका जिनको भारत रत्न सम्मान से नवाजा गया है। दिल हुम करे घबराए। दरअसल [संगीत] इतने सालों से कल्पना अपना सब कुछ छोड़कर एक नाजायज रिश्ते में जिनके साथ रह रही थी वो भूपेंद्र हजारी का ही थे।
भूपेंद्र हजारीिका पहले से ही शादीशुदा थे। साथ ही वह दो संतानों के पिता भी थे। और इन सब बातों के बाद भी कल्पना उस दौर में लिबिन में रह रही थी। इस रिश्ते में बहुत कुछ ऐसा था जो किसी भी नजर से जायज नहीं था। इस रिश्ते में सबसे दिलचस्प बात यह कि भूपेंद्र हजारी का कल्पना लाजमी से तकरीबन 30 साल बड़े थे। एक चीज जो था इतना बड़ा एज गैप होने से भी तथापि दादर और मूर एस्थेटिक वैल्यूस एक ही असिल अब आपको पता चला कि जब 16 साल की कल्पना लाजमी को 86 साल के भूपेंद्र दास से मोहब्बत हुई तो उनकी मां क्यों इस रिश्ते के खिलाफ हो गई थी?
और दूसरी एक और वजह थी और इनको इस परिवार में कल्पना के पिता के रूप में देखा जाता था। लेकिन किसको पता था जिसको कल्पना के पिता के समान समझा जाता था वो ही आगे चलकर कल्पना के पति बन जाएंगे। आई एम सो लकी कि मुझे भगवान ने चुना भूपेंद्र के सेवा के लिए। भूपेंद्र हजिका और कल्पना के परिवार के रिश्ते पहले सेही थे। कल्पना के चाचा आत्माराम जो हिंदी सिनेमा के फिल्म निर्माता थे ।
उनकी भूपेंद्र हजिका से दोस्ती थी। जिसके बाद धीरे-धीरे भूपेंद्र हजिका की दोस्ती कल्पना के पिता से भी हो गई। कल्पना की मां ललिता लाजमी अपने एक इंटरव्यू में बताती हैं कि कल्पना के पिता ने अपने बच्चों को कहा था कि भूपेंद्र हजिका बिल्कुल मेरे जैसे [संगीत] हैं। जैसे मैं तुम्हारा पिता हूं। ठीक वैसे ही भूपेंद्र भी तुम्हारे पिता [संगीत] जैसे ही हैं और तुम उनको हमेशा बड़े पापा कहकर बुलाया करो।
कल्पना के और भूपेंद्र हजिका के रिश्तों को इसलिए भी परिवार हजम नहीं कर पा रहा था। परिवार के साथ-साथ जिसको भी इस रिश्ते की भनक लगी। सभी ने कल्पना की खूब फजीहत की। हालांकि कुछ लोगों को अभी भी यह लगता था कि कल्पना और भूपेंद्र शादीशुदा नहीं है। लेकिन इस घटना और लड़ाई के बाद यह भेद सबके सामने आ गया कि कल्पना और भूपेंद्र हज़ारिका ने मंदिर में चोरी छिपे शादी भी कर ली थी।
कुछ जानकारों की मानें तो शादी का सुझाव खुद भूपेंद्र दा का था। वैसे तो 80 के दशक तक भूपेंद्र हजारीिका कल्पना को लोगों के सामने अपनी असिस्टेंट और मैनेजर के तौर पर परिचय दिलाया करते थे। लेकिन शायद भूपेंद्र और कल्पना दोनों [संगीत] ही भूल गए थे कि ऐसे नाजायज रिश्ते कभी दुनिया की नजरों से नहीं छिपते थे। भूपेंद्र हजारीिका भी कल्पना के पिता की तरह ही खूब शराब पिया करते थे और इसकी वजह से उनको काफी दिक्कतों का सामना करना होता था और वह आए दिन काफी बीमार रहने लगे थे और कल्पना उनकी दिनरा सेवा किया करती थी। लेकिन शायद भगवान अब भूपेंद्र हजिका की सांसों की डोर खींचने का फैसला कर चुका था और साल 2011 5 नवंबर को भूपेंद्र हजिका ने इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ दिया था। हां।
आई लॉस्ट हिम 4:37, माय ब्रदर, माय लवर, माय हस्बैंड, माय फ्रेंड, माय मेंटर, माय गाइड। भूपेंद्र दा दुनिया से क्या गए मानो कल्पना की तो दुनिया ही उजड़ गई थी। अभी तक वो भूपेंद्र दा की बीमारी को ठीक कर रही थी। लेकिन उनके जाने के बाद वो खुद बीमार रहने लगी। हालत ज्यादाखराब हुई तो डॉक्टरी जांच पड़ताल में पता चला कि उनको हो गया है। कल्पना की [संगीत] जिंदगी धीरे-धीरे उनके हाथों से फिसलती हुई दिखने लगी। कल्पना को ठीक रखना था लिहाजा उनकी किडनी को निकाल दिया गया।
लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था। कल्पना को अभी और तकलीफ मिलना बाकी थी। एक में तो दूसरी किडनी में कैंसर की वजह से इनफेक्शन हो गया। लिहाजा अब कल्पना की दूसरी किडनी को भी निकाल दिया गया। जिसके बाद कल्पना की हालत बद से बदतर हो गई। अब कल्पना को जिंदा रहने के लिए एक हफ्ते में चार-चार बार कराना पड़ता था और यह इलाज काफी महंगे साबित हो रहे थे और अब कल्पना का वो वक्त भी आ गया जब इनके पास अपने इलाज के पैसे नहीं बचे क्योंकि कल्पना ने अपने सारे पैसे उस वक्त भूपेंद्र दा के इलाज और देखभाल में लगा दिए थे। जिंदगी की मार और लाचारी के दुख से गुजर रही कल्पना पल-पल मरमर रही थी। लेकिन शायद यह कल्पना के ही अच्छे रिश्ते थे कि अभी भी इंसानियत जिंदा थी। कल्पना एक मशहूर फिल्म निर्माता थी। बड़े-बड़े अभिनेता, अभिनेत्री, फिल्म निर्माता इनके अच्छे दोस्त थे। लिहाजाइनके इलाज का सलमान खान, करण जौहर, डिंपल कपाड़िया, रवीना टंडन, सोनी राजदान, महेश भट्ट, जावेद अख्तर, शबाना आजमी, आलिया भट्ट, रोहित शेट्टी, आमिर खान, नीना गुप्ता जैसे बड़े-बड़े स्टार्स ने पूरा खर्चा उठा लिया। आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान इनकी अच्छी दोस्तों में से एक थी। वो ही हमेशा कल्पना के साथ रही थी। दुख दर्द और लाचारी से घिरी कल्पना का यह हाल हो गया था कि वह अब सिर्फ बिस्तर पर ही पड़ी रहती थी और उनकी ऐसी हालत में भी उनका एक ही सपना था कि अपने प्रेमी भूपेंद्र हजिका पर एक किताब लिखना और उन्होंने बड़ी हिम्मत के साथ भूपेंद्र हजिका एस आई न्यू हिम के नाम किताब को लिखा भी। इस किताब में कल्पना ने अपने और भूपेंद्र के 45 सालों तक बने रिश्तों को बड़ी बेबाकी के साथ दुनिया के सामने रखा। एंड आई प्रॉमिस यू आई विल नेवर एवर लीव यू।
इस किताब की लॉन्चिंग के लिए बड़ी बेताब थी। लेकिन इसे किस्मत का अंधकार कहिए या दुर्भाग्य [संगीत] कि कल्पना इस किताब के उद्घाटन में शामिल नहीं हो पाई। क्योंकि कल्पना तो बिस्तर से उठ ही नहीं पाती थी। और इस किताब की लॉन्चिंग के ठीक एक हफ्ते बाद दुख दर्द और जिंदगी के पल-पल में खुद को मरते देख रही कल्पना ने भी 23 सितंबर साल 2018 को इस दुनिया से अपना मुंह मोड़ लिया और वो भी [संगीत] हमेशा हमेशा के लिए अपने प्रेमी के पास चली गई। रब से प्यारा है पिया। कल्पना को अपने और भूपेंद्र के साथ बने रिश्ते में हमेशा नुकसान ही हुआ था।
16 साल की उम्र में अपने 30 साल बड़े पहले से शादीशुदा इंसान से प्यार किया। उनसे रिश्ता बनाया। दुनिया से बुराई ली, गालियां खाई और भूपेंद्र हजिका के परिवार के द्वारा भी खूब कोसी गई थी। कल्पना अपना फिल्मी सफर भी बर्बाद कर चुकी थी। लेकिन कल्पना ने कभी किसी की नहीं सुनी थी। लेकिन जिनके लिए कल्पना ने इतना सब सहा था वही भूपेंद्र हजिका का नाम कई और महिलाओं के साथ भी जोड़ा गया था। कहा जाता है कि कल्पना ने अपने प्रेम संबंध की खातिर अपनी जिंदगी को नरक बना लिया था।
अपने अंतिम दिनों में कल्पना दर्द से बहुत ज्यादा तड़पी थी। तिल तिल मौत को अपने पास आते देखा था। कल्पना ने कुल मिलाकर कल्पना को उनके प्यार ने ही तबाह कर दिया था। दोस्तों, यह कल्पना की बदनसीब किस्मत थी कि सब कुछ खोकर भी कुछ भी हासिल नहीं हुआ उनको।