इंदिरा गांधी के दिमाग में उस वक्त क्या रहा होगा जब उनके निजी सुरक्षा गार्ड ने उनकी तरफ बंदूक तानी होगी देश की इकलौती ऐसी प्रधानमंत्री जिनके प्रधानमंत्री रहते हुए उनका कत्ल कर दिया गया उनके ही आवास में कत्ल हुआ 31 अक्टूबर 1984 की कहानी कई लोगों ने अलग-अलग ढंग से देश को सुनाई यह भी बताया गया कि कैसे उनको एम्स ले जाया गया बीबीसी ने उनकी मौत की खबर का ऐलान किया ज्ञानी जैल सिंह जो उस वक्त के प्रेसिडेंट थे वह बाहर थे कैसे आए बंगाल के दौरे पर थे वेस्ट बंगाल के प्रणव मुखर्जी के साथ उनके बेटे राजीव गांधी वह कैसे आए मेरी दिलचस्पी यह जानने में थी कि 31 अक्टूबर 1984 की सुबह मिसेस गांधी के लिए कैसे शुरू हुई होगी क्या उनका उस दिन की दिनचर्या थी क्या बातें की और सबसे बड़ा सवाल जो मेरे जहन में हमेशा रहा वह यह कि इंदिरा गांधी ने उस दिन बुलेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं पहनी थी इन सवालों के जवाब खोजे हमने कई किताबों के जरिए और यह कहानी
अब आपके सामने पेश कर रहे हैं सुबह के 9 बजे जब सतवंत सिंह इंदिरा गांधी के हत्यारे ने उनकी तरफ गोलियां बरसाई मगर इंदिरा गांधी तो सुबह 6:00 बजे उठ जाती थी 6:00 से 9:00 के बीच क्या हुआ अमेरिका के राष्ट्रपति का जिक्र क्यों आया उनके डॉक्टर ने मेकअप पर क्या टिप्पणी की और वही सवाल जिसका मैंने पहले जिक्र किया जिसको लेकर देश में कई कि मदं दियां गढ़ी गई कि आखिर उस रोज इंदिरा गांधी ने बुलेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं पहनी थी इंदिरा रोज सुबह 6:00 बजे सोकर उठ जाती थी योग और दूसरी एक्सरसाइज करती और फिर ठंडे पानी से नहाती यह पूरी जो दिनचर्या थी उनकी उनके जो योग गुरु थे जिनके साथ कई अलग-अलग ढंग से भी बतक हों में उनका नाम जोड़ा गया धीरेंद्र ब्रह्मचारी वह साधु जो पहले तो नेहरू को योग सिखाता था और उसके बाद इंदिरा को वह साधु जिसको इंदिरा की मौत के बाद प्रधानमंत्री आवास से राजीव गांधी ने भगा दिया था धीरेंद्र ब्रह्मचारी के मुताबिक योग होता ठंडे पानी से स्नान होता
स्नान के बाद इंदिरा अपना परिधान चुनती है उस दिन के लिए रैली में जाना है कैबिनेट की मीटिंग है संसद है आज का दिन कुछ खास था आज मशहूर एक्टर और टीवी प्रेजेंटर पीटर उत् सिनोव को इंदिरा का इंटरव्यू करना था पीटर ने 9:30 बजे का वक्त मुकर्रर किया था इसके लिए इंटरव्यू इंदिरा गांधी का घर एक सबदर्जन रोड उसके ठीक बगल में इंदिरा गांधी का दफ्तर एक अकबर रोड वहां पर यह इंटरव्यू होना था इंदिरा ने इस मौके के लिए साड़ी चुनी केसरिया रंग की और उस पर काले रंग का बॉर्डर था फिर उन्होंने नाश्ता निपटाया हमेशा की तरह एक अ सिकी ब्रेड एक आधा बॉयल्ड अंडा फल दूध वाली कॉफी इसके बाद इंदिरा के पर्सनल स्टाफ की महिला आकर उनका टच अप करने लगी तभी उनके डॉक्टर कृष्णा प्रसाद माथुर भी आ गए 1966 में इंदिरा मर्तबा पीएम बनी थी तब से डॉक्टर माथुर हर दिन उनके पास आते थे स्वास्थ्य की जांच करने मगर इंदिरा का स्वास्थ्य राजनीत में आने के बाद हमेशा बहुत अच्छा रहा शरीर पर कभी अतिरिक्त चर्बी नहीं खाने को लेकर किसी भी किस्म की लापरवाही नहीं इसलिए साट पार करने के बाद भी उनको बुढ़ापे वाली ज्यादातर बीमारियां नहीं हुई थी मगर प्रोटोकॉल था इसलिए डॉक्टर माथुर को आना ही था वोह आते और दोनों इधर-उधर की बातें करते 31 अक्टूबर को डॉक्टर माथुर ने इंदिरा से अमेरिका की मशहूर मैगजीन टाइम के एक आर्टिकल का जिक्र किया इसके मुताबिक उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन इंटरव्यू के पहले मेकअप से परहेज करते थे जब डॉक्टर यह बोले तो इंदिरा का मेकअप चल रहा था उन्होंने डॉक्टर माथुर की बात का प्रतिवाद करते हुए कहा कि
मैगजीन में झूठ लिखा है रीगन मेकअप भी करते हैं और कान में एक यर पीस भी लगाते हैं जब किसी मुश्किल सवाल के जवाब में वह हटक हैं तो बैकरूम में मौजूद उनके सहयोगी जवाब सु जाते हैं डॉक्टर माथु और इंदिरा की इस जानकारी पर ित हो गए खिलखिला का दौर खत्म हुआ क्योंकि इंटरव्यू का वक्त हो चला था इंदिरा एक सफदरजंग के घर से निकली पैदल क्योंकि उनके घर की दीवार से दफ्तर की दीवार लगी थी एक अकबर रोड बीच में एक गलियारा बस उसी को पार करना था इंदिरा आधे रास्ते ही पहुंची काली सैंडल में उनकी चाल थमी नहीं थी एक तरफ आंचल लहरा रहा था दूसरी तरफ उनका लाल कसीदा कारी वाला झोला पीछे पीछे दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल मैडम के ऊपर छाता ताने हुए उनसे कुछ फीट पीछ इंदिरा के निजी सचिव राजेंद्र कुमार धवन यानी कि आर के धवन उनके ठीक पीछे एक चपरासी और एक दरोगा इंदिरा अभी लकड़ी के उस छोटे गेट तक पहुंची ही थी कि सामने से दरोगा बे अंत सिंह नमूद हुआ बे अंत पिछले 9 साल से उनके सुरक्षा हमले का हिस्सा था कई बार साथ में विदेश भी गया था कुछ महीने पहले उसे पीएम की सिक्योरिटी से एडवाइजर और रॉ चीफ आरन काव के कहने पर हटा दिया गया था लेकिन बेयत ने सीधे मैडम से अपील की
धवन साहब और इंदिरा ने उनके ट्रांसफर ऑर्डर कैंसिल करा दिए इंदिरा का कहना था कि मुझे अपने सिख सुरक्षाकर्मियों पर पूरा भरोसा है भरोसे का सवाल इसलिए उठ रहा था क्योंकि पाच महीने पहले ही ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ था इंदिरा ने बेयत को देखा और समझ गई कि अब सरदार जी नमस्ते करेंगे इंदिरा ने बेयत के नमस्कार की मुद्रा में आने से पहले ही हाथ मोड़ लिए मगर बेयत ने हाथ मोड़े नहीं बल्कि तान दिए सर्विस रिवॉल्वर समेत इंदिरा के पास शायद आधा या एक सेकंड रहा होगा भा चीखी क्या कर रहे हो तब तक गोली की तेज आवाज ने आसमान चीर दिया एकएक करके पांच गोलियां पॉइंट ब्लैंक रेंज से अभी सन्नाटा घास पर पसरा भी नहीं था इंदिरा का शरीर थमा नहीं था कि तभी एक और सुरक्षा में तैनात सिपाही उनकी तरफ लपका 22 साल का सतवंत सिंह जो आतंकवादियों का उन दिनों केंद्र बन गए गुरदासपुर से आता था आज उसने दस्त का बहाना कर भी हिस्से में अपनी ड्यूटी लगवा ली थी गोलियों की आवाज सुन वह करीब आया और अपनी स्टेन गन घास पर गिर चुकी इंदिरा की तरफ तान दी उसके हाथ बंदूक पर कमजोर पड़ रहे थे
पसीने के चलते मगर तभी बेयन सिंह चीखा ओए चला गोली सतवन ने मैगजीन की 25 की 25 गोलियां प्रधानमंत्री की दिशा में दाग दी आज इंदिरा गांधी ने बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं पहनी थी उन्हें लगा कि कौन सा बाहर है घर और दफ्तर ही रहना है उन्हें लगा कि जैकेट पहनने से कैमरे के सामने वह अच्छी नहीं दिखेंगी उन्हें लगा कि अपने सुरक्षाकर्मियों के बीच वह पूरी तरह सुरक्षित हैं सब लोग यहीं रह गए सब लगा हुआ यही रह गया इंदिरा को सोनिया गांधी और धवन एम्स ले गए जहां डॉक्टर कुछ घंटों तक नाकामयाब कोशिश करते रहे इंदिरा का ब्लड ग्रुप था ओ नेगेटिव ब्लड कम था लोगों से अपील की गई आधे घंटे में इतने लोग आ गए कि अस्पताल के दरवाजे बंद करने पड़े पर कोई फायदा नहीं हुआ बंगाल में चुनावी दौरे पर गए बेटे राजीव गांधी को खबर कर दी गई मौत की एक मौत और हुई थी उस दिन उस आदमी की जिसने इंदिरा को मारा था बेयत सिंह फायरिंग के ठीक बाद उसने अपनी पिस्तौल फेंक दी बोला मुझे जो करना था मैंने कर दिया बाहरी गारद में तैनात आईटीबीपी के जवानों ने उसे दबोच लिया था सतबंदे बाद में खबर आई कि बिंत ने भागने की हथियार छीनने की कोशिश की उसी धरपकड़ में उसे गोली लग गई और वह मौके पर ही मारा गया सतवंत और एक और साजिश करने वाले शख्स केहर सिंह को कुछ बरस बाद फांसी दी गई कैसी होती है जिंदगी कुछ होने से पहले सब सामान्य चलता है योग कह कहे कदम ताल कैसी होती है जिंदगी एक शख्स मरता है कुछ लोगों की सनक और नफरत के चलते फिर हजारों शख्स मरते हैं उस एक शख्स की मौत का कथित बदला लेने के लिए यह मेरा भारत है गुस्से से भरा खुद के लिए औरों के लिए तब भी अब भी यह इंदिरा गांधी की मौत की कहानी है बार-बार बताया जाता है कि कैसे अपनी मौत से कुछ रोज पहले भुवनेश्वर की रैली में उन्होंने यह बात कही थी कि मेरे जिस्म का खून का आखिरी कतरा भी इस देश एकता काम आएगा यह कैसे अफसोस की बात है कि इंदरा यह बात कर ही थी और उनकी मौत के बाद देश में भयावह दंगे हुए एक
और किस्सा एक और पॉलिटिकल बद कही लेकर आपके बीच फिर हाजिर होंगे लगातार बने रहिए द llantop.com के साथ और एक बात और यह पूरा किस्सा जो आपने सुना वह हाल ही में जगर नोट बुक से प्रकाशित हुई मशहूर जर्नलिस्ट सागरिका घोष की किताब इंदिरा इंडियाज मोस्ट पावरफुल प्राइम मिनिस्टर से लिया गया है उसके ज्यादातर बरे उस किताब से लिए गए हैं अगर आपको किताब दिलचस्प लगे और किताबें दिलचस्प आपको लगनी ही चाहिए वह हमेशा आपको एक बेहतर इंसान बनाने में मददगार होती हैं तो आप यह किताब खरीद सकते हैं और भी किताबें खरीदिए किताबें खरीदिए नरेंद्र मोदी बार-बार कहते हैं कि किताबें लोगों को तोहफे में दीजिए नरेंद्र मोदी की भी एक किताब आ रही है इस साल के आखिरी में उसका भी उनके समर्थकों को खासा इंतजार है आप इंतजार करिए अगले पॉलिटिकल किस्से का हम जुटते हैं अपनी तैयारियों में बने रहिए ललन टॉप के साथ अगर facebook’s के लिए डिस्कशन के लिए खबरों के लिए हमारे पेज को लाइक करिए अगर [संगीत]