एक और दिल्ली में जंतर मंतर में प्रदर्शन चल रहा है तो दूसरी और दिल्ली के प्रधानमंत्री आवास विभाग राहुल गांधी ने भी प्रदर्शन शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने सरकार से अपनी तीन शर्ते रखी थी
प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना और फिर हिरासत में लिए जाने के बाद भी राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक के खिलाफ सरकार की घेराबंदी जारी रखी है। बुधवार को राहुल गांधी ने सरकार के सामने 3 डिमांड रख दी हैं। उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर निशाना भी साधा है।
राहुल गांधी ने कहा कि सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? हमारे छात्रों ने आखिर किया क्या है? सुरक्षा बल उन पर हथियार ताने खड़े हैं। उन्होंने क्या गलत किया है? वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, अपनी मांगें रख रहे हैं, और वे देश से अपना हक मांग रहे हैं। वे बस इतना कह रहे हैं कि देश के छात्र होने के नाते, हम एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था के हकदार हैं, जो निष्पक्ष हो। बच्चों ने आत्महत्या तक कर ली है। हमारे छात्र बहुत ज्यादा तनाव से गुजरते हैं और आखिर में उन्हें बताया जाता है कि पेपर लीक हो गया है।
राहुल गांधी ने कहा कि एक परीक्षा पर परिवारों का उतना ही खर्च होता है, जितना सरकार का पूरा शिक्षा बजट है। भारत सरकार सभी टैक्स इकट्ठा करने के बाद हमारे बच्चों के भविष्य पर पैसा खर्च करती है। वह पैसा शिक्षा बजट में जाता है, जो 1.4 लाख करोड़ रुपये है। वहीं दूसरी तरफ हर साल NEET परीक्षा देने वाले परिवार भी लगभग इतनी ही रकम यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह उन परिवारों के साथ सरासर लूट है, और कुछ नहीं। फिर, जब आप उनसे यह पैसा वसूल लेते हैं, तो आप उन्हें बताते हैं कि पेपर लीक हो गया है या सिस्टम में गड़बड़ी है। तो यही वह वजह है कि हमारे युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
राहुल गांधी की पहली शर्त यह है किपहली और पूरी तरह से जायज मांग यह है कि धर्मेंद्र प्रधान , जो शिक्षा मंत्री के तौर पर नाकाम रहे हैं और जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं उन्हें उनके पद से हटा दिया जाए। यह 100% जायज मांग है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने भारत और दुनिया को दिखा दिया है कि वे इस सिस्टम को चलाने में अक्षम हैं। एक के बाद एक परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं।
दूसरी मांग यह है कि जिन लोगों ने भी हमारे छात्रों पर हाथ उठाया चाहे आदेश देने वाले हों या उसे अंजाम देने वाले, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
तीसरी बात यह है कि जो व्यक्ति इस पूरे सिस्टम को चला रहा है, जो अंततः इन सबके लिए जवाबदेह है, उसमें इतनी शालीनता होनी चाहिए कि वह छात्रों से जो कुछ हुआ है, उसके लिए माफी मांगे।