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भारतीयों की मौत पर ईरान दुखी अमेरिका को दे दी खुली धमकी!

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद सामने आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध टालने को लेकर एक बड़ी डील लगभग तय हो चुकी है। लेकिन ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों के बाद ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अभी किसी भी तरह का अंतिम समझौता नहीं हुआ है और इस तरह की खबरें सिर्फ अटकलें हैं।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सरकारी समाचार एजेंसी के जरिए कहा कि ईरान ने अब तक किसी भी समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी रेडलाइंस पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। बघई ने अमेरिका पर बातचीत के दौरान बार-बार अपना रुख बदलने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पहले ही सहमति बन चुकी थी। लेकिन अमेरिकी पक्ष लगातार अपनी शर्तें बदलता रहा जिसकी वजह से समझौते की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ईरानी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि क़तर और पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हॉर्मूस जलडमरू मध्य की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के लिए पूरी तरह अमेरिका जिम्मेदार है। दरअसल इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस के ओवेल ऑफिस से दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार समाधान निकाल लिया है। ट्रंप ने कहा था कि समझौते के दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस समझौते के तहत ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकेगा। ट्रंप ने दावा किया था कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हार्मोन जलडमरू मध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। लेकिन ईरान ने इस दावे को भी खारिज [संगीत] कर दिया है। इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और हालिया कारवाइयों की वजह से हॉर्मोन क्षेत्र पहले से अधिक असुरक्षित हो गया है। इस बीच एक और बड़ा विवाद सामने आया है। ईरान ने अमेरिका पर भारतीय वाणिज्यिक जहाजों

पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी अपने बयान में इस्माइल भगाई ने कहा कि हाल ही में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए अमेरिकी हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इन घटनाओं को सशस्त्र डकैती और राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती तक करार दिया। ईरानी प्रवक्ता ने दावा किया कि इन हमलों में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और भारत सरकार तथा भारतीय जनता के प्रति अपनी सहानुभूति जताई। बघाई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वैश्विक शांति, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को खतरे में डालने वाली अमेरिकी कारवाइयों के लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं ओमान के पास भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए हमले को लेकर भारत ने भी कड़ा रोख अपनाया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि क्रू वाले तीसरे जहाज एमटी जलवीर पर भी हमला हुआ है। हालांकि जहाज पर सवार सभी 20 भारतीय नागरिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी है। भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अमेरिकी राजदूत को तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमले तुरंत बंद होने चाहिए। कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के दावों, सैन्य कारवाइयों की धमकियों, हरमूस की सुरक्षा और भारतीय जहाजों पर हमलों के आरोपों ने मिडिल ईस्ट के हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कूटनीति सफल होती है या क्षेत्र एक नए संकट की ओर बढ़ता है।

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