यह किस्सा देवानंद का है वो इमरजेंसी के बाद के दिन थे और देश में इंदिरा गांधी के खिलाफ था जनता पार्टी इंदिरा गांधी को आगामी चुनाव में मजा चखाना चाहती थी जो लोग इमरजेंसी के दौरान जेलों में बंद कर दिए गए थे वह सब एकजुट हो चुके थे इस बीच एक और नाम सुर्खियों में था और वह नाम था सदाबहार अभिनेता देवानंद का जिनकी पार्टी इस चुनाव में इंदिरा गांधी को चुनौती देने की तैयारी में थी ।
इंदिरा गांधी के काल में जब इमरजेंसी लगी थी तब देवानंद पर भी बैन लगाया गया था दरअसल हुआ यूं कि देवानंद के कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल ना होने से नाराज होकर उन पर हुकूमत ने बैन लगा दिया देवानंद इस बात से बहुत नाराज हो गए और गुस्से में आकर इंदिरा गांधी को मजा चखानी के लिए इमरजेंसी के विरोध में अपनी एक राजनीतिक पार्टी बना ली देवानंद के सहयोगी रहे मोहन चूरीवाला ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि देव साहब दरअसल इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने से खफा थे और उसी समय उन्हें एक राजनीतिक कार्यक्रम में कांग्रेस ने बुलाया लेकिन नाराज देवानंद ने कार्यक्रम में आने से मना कर दिया।
इसका नतीजा यह हुआ कि देवानंद की फिल्मों और गानों पर बैन लगा दिया गया दूरदर्शन और विविध भारती में देव साहब के गाने और फिल्में बैन कर दी गई देवानंद ने उस समय के सूचना और प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्ल से मुलाकात की और कहा कि वह लोकतंत्र में रहते हैं और क्या उन्हें अपने मन के मुताबिक चलने का कोई हक नहीं है विद्या चरण शुक्ल ने देवानंद से तो कुछ नहीं कहा मगर इस गुस्से का असर यह हुआ कि देव साहब के दिल्ली से बंबई पहुंचने से पहले ही उन पर लगा बैन हटा लिया गया।
बावजूद इसके इमरजेंसी के प्रकरण से नाराज होकर देवानंद ने इंदिरा गांधी के विरोध में राजनीतिक पार्टी नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया का गठन कर लिया पार्टी बनाने के पीछे उनकी सोच थी कि देश भर से लोग उनसे जुड़ेंगे उनकी मदद से देश में एक नई व्यवस्था बनेगी लेकिन जल्दी ही देव साहब को यह एहसास हो गया कि उनके पास चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय है और मन चाहे उम्मीदवार की कमी भी उन्हें खल रही थी इसलिए उन्होंने राजनीति छोड़ दी और फिर खत्म हो गई और धीरे-धीरे देव साहब का गुस्सा भी ।