पाकिस्तान की लापरवाही अब एक बड़े खतरे में बदलती दिख रही है। एक ऐसा खतरा जो सिर्फ उसकी सरहदों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत समेत पूरे एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। दरअसल पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों में लगातार हो रही जंगलों की कटाई, बढ़ती आबादी का दबाव और बिना प्लानिंग के हो रहा निर्माण। वहां के नाजुक हिमालय इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा रहा है। जब पेड़ कटते हैं
और जमीन का संतुलन बिगड़ता है तो बर्फ टिक नहीं पाती। ग्लेशियर तेजी से पिघलती है और अब यही हो रहा है। क्लाइमेट चेंज पहले से ही इस संकट को बढ़ा रहा है। ऊपर से इंसानी लापरवाही आग में घी डालने जैसा काम कर रही है। इसी बीच इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेंस डेवलपमेंट की स्नो अपडेट रिपोर्ट 2026 ने हालात की गंभीरता और साफ कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में इस सर्दी नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान बर्फबारी सामान्य से 27.8% कम रही। यह पिछले 24 सालों में सबसे कम है
और लगातार चौथा साल है जब यहां बर्फ एवरेज से कम गिरी है। हिंदूकुश हिमालय जिसे एशिया का वाटर टावर कहा जाता है। करीब 3500 कि.मी. तक फैला हुआ है। अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार तक। यह क्षेत्र अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान इन आठ देशों में फैला है और करीब 55,000 स्क्वायर कि.मी. के ऊंचे पर्वतीय इलाकों को कवर करता है। यही वो इलाका है जहां की बर्फ और ग्लेशियर करीब 200 करोड़ लोगों की पानी की जरूरत पूरी करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि सर्दियों में गिरने वाली बर्फ अब जमीन पर पहले जितनी देर तक टिक नहीं पा रही। यानी जो बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर नदियों को साल भर पानी देती थी,
वह अब जल्दी खत्म हो रही है। इसका सीधा असर गंगा और सिंधु जैसे नदियों पर पड़ सकता है। आंकड़े तो और भी चिंता बढ़ाते हैं। मकांग बेसिन में बर्फ का कवर 59.5% तक घट गया है। तिब्बती पठार में 47.4स और सालवीन बेसिन में 41.8% की गिरावट आई है। वहीं सिंधु और हेलमंद नदियों में करीब 18% की कमी दर्ज की गई है। यानी पाकिस्तान की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सिंधु नदी में भी पानी कम होने का खतरा है। क्रायोस्फीयर साइंटिस्ट फारूक आजम के अकॉर्डिंग हिंदुकुश हिमालय में बर्फ बने रहने की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में नदियों में पानी का फ्लो कम होगा जिससे खेती, बिजली और ड्रिंकिंग वाटर सप्लाई [संगीत] पर सीधा असर पड़ेगा। एक अहम बात यह भी है कि इन नदियों में आने वाले पानी का औसत 23% हिस्सा बर्फ पिघलने से आता है। जबकि पश्चिमी बेसिन में यह आंकड़ा 70 से 80% तक पहुंच जाता है। सिर्फ सिंधु नदी में ही करीब 40% पानी बर्फ के पिघलने से मिलता है। ऐसे में अगर बर्फ कम गिरेगी और जल्दी खत्म होगी तो सूखे का खतरा बढ़ना [संगीत] तय है।
खासतौर पर तब जब मसून कमजोर पड़े। पाकिस्तान में हो रही एनवायरमेंटल डैमेज अब एक रीजनल क्राइसिस [संगीत] बनती जा रही है। इसका असर भारत ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान, नेपाल, [संगीत] भूटान, बांग्लादेश, चीन और म्यांमार जैसे देशों पर भी पड़ेगा। अगर अभी भी हालात नहीं संभले तो आने वाले वक्त में पानी को लेकर बड़ी जंग छिड़ सकती है। इस खबर पर फिलहाल इतना ही। बाकी तमाम खबरों को जानने के लिए देखते रहिए india.com। क्या हुआ विनीत यार? इतना परेशान क्यों है? अरे यार जिस रास्ते से आता हूं उसपे इतने बड़े-बड़े खड्डे हो रखे हैं। रोज मेरी बाइक उसमें लड़ती है और रोज 1000-500 का खर्चा आ जाता है। कोई खबर में ही नहीं दिखा रहा है। तो अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि कई बार हमारे आसपास बहुत कुछ होता है लेकिन वो खबर नहीं बन पाती। लेकिन आप पिन न्यूज़ के साथ आप बस अपनी वीडियो बनाइए और ऐप पर अपलोड कर दीजिए। तो आज ही पिन न्यूज़ डाउनलोड करें और अपनी आवाज़ सब तक पहुंचाइए। तो यार मैं भी वीडियो बना के फिर शेयर कर दूं? हां, पहले एप तो डाउनलोड कर फिर शेयर करना।