अब तक आपने टॉप कंपनियों में नौकरी पाने के लिए लाखों लोगों को कोशिश करते हुए देखा होगा। लेकिन सोचिए यही कंपनी आपको नौकरी छोड़ने के बदले लाखों रुपए देने लगे तो जी हां Google अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले पैसे देने की तैयारी कर रहा है। कंपनी इसे वॉलंटरी एग्जिट पैकेज कह रही है। यानी कर्मचारी खुद नौकरी छोड़ेंगे और बदले में कंपनी उन्हें मोटी रकम देगी।
सवाल है कि आखिर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां ऐसा क्यों कर रही है? क्या एआई की रेस में अब इंसानों की नौकरियों का गणित बदल रहा है? दरअसल Google अपने खर्चों को कम करने के लिए कुछ देशों में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रहा है। इसे सीवियरेंस पैकेज या वॉलंटरी एग्जिट पैकेज कहा जा रहा है। आसान भाषा में समझे तो कंपनी कर्मचारियों को कह रहा है कि अगर वह अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ना चाहते हैं तो बदले में उन्हें एडिशनल बेनिफिट भी दिए जाएंगे। रर्स की रिपोर्ट के मुताबिक Google ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में यह प्रोग्राम शुरू किया है।
हालांकि कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि कितने कर्मचारियों ने इस ऑफर को एक्सेप्ट कर लिया है। Google के एक प्रवक्ता ने रॉइर्स से इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि जून में इसे दूसरे देशों तक बढ़ाने से पहले 2025 की शुरुआत में ही कुछ टीमों के लिए ऐसे प्रोग्राम शुरू किए गए थे। लेकिन यह ऑफर Google के सभी कर्मचारियों के लिए नहीं है। कंपनी के एआई रिसर्च डिवीजन डीप माइंड और Google क्लाउड को इस प्रोग्राम से बाहर रखा गया है।
इसकी वजह यह है कि इन दोनों विभागों में कंपनी को अभी और कर्मचारियों की जरूरत है। Google अपने एआई और क्लाउड बिजनेस को मजबूत करने पर काम कर रही है। यानी एक तरफ कंपनी कुछ क्षेत्रों में कर्मचारी की संख्या घटाने और कामकाज को व्यवस्थित करने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ एआई जैसे अहम क्षेत्रों में निवेश और भर्ती जारी रखना चाहती है। Google की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट एआई पर अपना खर्च बढ़ा रही है। ऐसे में कंपनी के सामने चुनौती है कि एआई में भारी निवेश के साथ-साथ दूसरे खर्चों को भी कंट्रोल किया जाए। इस प्रोग्राम का असर स्विट्जरलैंड में दिखने भी लगा है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक वहां कर्मचारियों को जून में यह ऑफर दिया गया था और इसे एक्सेप्ट करने वाले लोगों ने अगस्त में कंपनी छोड़ना शुरू कर दिया। स्विट्जरलैंड में Google के करीब 5000 कर्मचारी हैं।
ज़रिक में कंपनी का बड़ा इंजीनियरिंग सेंटर भी है। यहां एग्जिट पैकेज के तहत हर साल की नौकरी के बदले 1 महीने की सैलरी देने का प्रस्ताव था। हालांकि मैक्सिमम 12 महीने की सैलरी तक ही पेमेंट किया जाना था। बताया जा रहा है कि करीब 50 कर्मचारियों वाली एक टीम में से चार लोगों ने यह ऑफर एक्सेप्ट कर लिया है। हाल ही में Microsoft ने भी भारत समेत चार देशों में करीब 60 हजार कर्मचारियों को वॉलंटरी एग्जिट ऑफर दिया है। कंपनी के कुल 2.23 लाख कर्मचारी में मतलब 23000 कर्मचारियों में से करीब 27% इसके दायरे में आ सकते हैं।
ये ऑफर अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और कनाडा में चुनिंदा विभागों के लेवल 70, 70 या उससे नीचे के कर्मचारियों के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी की नौकरी जाएगी। कर्मचारी चाहे तो ऑफर एक्सेप्ट कर सकते हैं। कंपनी की चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमिन के मुताबिक इसका मकसद कर्मचारियों को अपनी मर्जी से कंपनी छोड़ने का विकल्प देना और कामकाज में बदलाव करना है। इस ऑफर को एक्सेप्ट करने वाले कर्मचारी दिसंबर के आखिर में कंपनी छोड़ेंगे। हालांकि हर कर्मचारी को मिलने वाली रकम का खुलासा नहीं किया गया है।
यानी Google और Microsoft जैसे बड़े टेक दिग्गज एक तरफ एआई पर अरबों डॉलर खर्च रहे हैं तो दूसरी तरफ अपने कर्मचारी और खर्चों को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहे हैं। हालांकि वॉलंटरी एग्जिट ऑफर और सीधे नौकरी से निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन इन फैसलों में एक सवाल जरूर उठता है कि क्या एआई के दौर में टेक कंपनियों में नौकरियों का भविष्य बदल रहा है।