भाई साहब पेट्रोल के प्राइस को लेकर आपका बेवकूफ तो बनाया ही जा रहा है लेकिन साथ-साथ उसके ऊपर आपकी जेब साइड से भी काटी जा रही है। जो E20 पेट्रोल आपको इस वक्त ₹12 प्रति लीटर मिल रहा है वो आपकी जेब केवल दाम के नाम पर नहीं काट रहा। वो काट रहा है इस तरीके से भी कि जब यह E20 पेट्रोल आपकी मोटरसाइकिल गाड़ी में जाएगा तो गाड़ी कम माइलेज देगी। गाड़ी के पार्ट जल्दी खराब होंगे। इंजन में ज्यादा डैमेज होगा और आपकी जेब दो तरफा सरकार के द्वारा काट ली जाएगी। सरकार ने दावा किया था कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से देश का बड़ा फायदा होगा।
पेट्रोल का इंपोर्ट कम होगा और तो और जो हमारे किसान हैं उनका भी बड़ा फायदा होगा। साथ ही आम लोगों को सस्ते में पेट्रोल भी मिल सकता है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। लेकिन हुआ उसके उल्टा। पेट्रोल के प्राइसेस लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं। वो भी 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले तेल का। और अगर आप 95 ऑक्टेन, 90 ऑक्टेन या 75 ऑक्टेन डलवाएंगे तो उसके दाम और भी ज्यादा होंगे। ऑक्टेन यानी कि नॉन इथेनॉल ब्लेंडिंग वाला तेल। दुनिया भर में भी इथेनॉल ब्लेंडिंग वाला तेल बेचा जाता लेकिन वो तेल काफी सस्ते में बेचा जाता है क्योंकि उसमें 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग तो है ही जिसका फायदा सीधे तौर पर सरकार और तेल कंपनियों को मिलता ही है। अब ये इथेनॉल क्या बला है? इथेनॉल एक डेरिवेटिव होता है कुछ फसलों का जैसे गेहूं, गन्ना या फिर मक्का एक तरीके की अल्कोहल होती है जिसको हम पेट्रोल में मिक्स करते हैं
जिससे पेट्रोल की डेंसिटी सेम बनी रहती है और उपयोगिता में भी कुछ खास फर्क नहीं आता है। लेकिन फर्क पड़ता है आपकी गाड़ी पर। डॉक्टर एसपी ने बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट को शेयर करते हुए उसके की पॉइंट्स लिखे हैं। ई20 पेट्रोल से क्या-क्या नुकसान हो रहा है आपकी गाड़ी में और आपकी जेब पर यह बताया है। डॉक्टर एसपी लिखती है ई20 पेट्रोल फोर्स स्कैम एक्सपोज 50% प्री 2023 पेट्रोल व्हीकल्स नाउ गजलिंग मोर फ्यूल्स माइलेज क्रैश आफ्टर ई20 मैंडेट 50% से ज्यादा 2023 से पुराने व्हीकल अब ज्यादा तेल का कंजमशन कर रहे हैं और माइलेज कम दे रहे हैं। यानी कि एनवायरमेंट का भारी नुकसान तेल का ज्यादा कंजमशन हेंस जो वादा किया गया था कि तेल के इंपोर्ट घटेंगे ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा क्योंकि माइलेज ही गिर जाएगी तो तेल आपको ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ेगा। औसतन 5 से 10% ज्यादा तेल इस्तेमाल होने वाला है। उसके अलावा 29% ओनर्स फेसिंग इंजन डैमेज लीकेज ओवर हीटिंग साइंस। इथेनॉल ईट्स रबर एंड ओल्ड पार्ट्स। इथेनॉल जो करता है वो
असल में मोटा-मोटी वही है जो पानी लोहे के साथ करता है। इथेनॉल से आपकी पेट्रोल की टंकी में जंग जल्दी लगेगा। इथेनॉल से आपके जो रबर गैस्केट्स हैं उनकी लाइफ घट जाती है। यानी कि लीकेज हो सकती है। रबर गैस्केट्स यानी जो दो पाइप्स को जोड़ने के लिए बीच में वॉशर लगाया जाता है। वॉशर लगाया जाता है वो रबर का होता है और वो जल्दी गल जाता है इथेनॉल की वजह से। अब आप जरा सोचिए कि माइलेज भी कम, पैसा भी ज्यादा, ऊपर से मेंटेनेंस का खर्चा भी ज्यादा। उसके ऊपर क्या होता है? लो एनर्जी डेंसिटी यू पे मोर फॉर लेस। ऑफिशियल्स लेड विद फेक वन टू 6% पावर ड्रॉप क्लेम। आपकी गाड़ी का इंजन इथेनॉल वाले तेल से कम पावर जनरेट करता है। फिर वही बात कि ज्यादा तेल खर्च करना पड़ेगा। अगर ये तमाम बातें मान ली जाए और तमाम बातें सही साबित होती हैं तो नितिन गडकरी के वो तमाम वादे झूठे साबित होते हैं। वो तमाम वादे भ्रामक साबित होते हैं जो उन्होंने इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े हुए किए थे। इथेनॉल ब्लेंडिंग से पैसा कम खर्च होगा।
इथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों का फायदा होगा वगैरह-वगैरह वाले वादे। अब नुकसान किसका हो रहा है? सामान्य उस व्यक्ति का जो व्यक्ति रोजाना अपनी मोटरसाइकिल से ऑफिस जाता है। रैपिडो जेप्टो Zomato में डिलीवरी करता है। बाइक टैक्सी चलाता है या फिर जो फील्ड वर्क करते हैं हमारे मेडिसिन के एमआर लोग और हमारे जो सेल्समैन है किताबों की बिक्री करते हैं ये तमाम लोग उनकी जेब पर बड़ा फटका पड़ सकता है। क्योंकि मेजर पार्ट्स इथेनॉल युक्त पेट्रोल से खराब हो सकते हैं और ज्यादातर गाड़ियां आज भी आज भी E20 कंपैटिबल नहीं है। इसके अलावा नितिन गडकरी साहब कह रहे हैं कि हम E20 को बढ़ा के E30 E40 E50 तक भी जाना चाहते हैं। यानी कि आपको वही दाम में वही 102 ₹103 के दाम में 50% तेल मिलेगा और 50% इथेनॉल मिलेगा। अगर फायदा हो भी रहा है तो सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा है या फिर निजी तेल कंपनियों को हो रहा है। वो फायदा आम जनता तक पहुंच नहीं पा रहा है। जाहिर सी बात है पेट्रोल से तो सस्ता ही होगा इथेनॉल।
जब आप हमें 20% इथेनॉल ही बेच रहे हैं तो इथेनॉल मिलाने के बाद दाम तो कम कीजिए। लेकिन नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं होता हुआ नजर आ रहा। इसके अलावा दिस इजंट द ग्रीन पॉलिसी। इट इज फोर्स स्कैम ऑफ 80% ऑफ इंडियास फ्लट वेकअप। यह कोई ग्रीन प्लान नहीं है। यह कोई पोल्यूशन को कम करने का या फिर तेल पर कंजमशन कम करने का प्लान नहीं है। यह असल में मुनाफा बनाने का प्लान है और मुनाफा जो बना रहे हैं उनकी जेबें भर रही हैं। लेकिन वो जेब काटी जा रही है सामान्य नागरिकों की। नितिन गडकरी जी से बड़ी उम्मीदें थी कि वे एक समय पर कहे जाते थे कि भारत सरकार के बेस्ट परफॉर्मिंग मिनिस्टर हैं। जो उन्होंने हाईवेज पे काम किया। जिस तरीके के क्वालिटी हाईवेज भारत को बना करके दिए लेकिन उस हाईवेज पर चलने वाली गाड़ियों की क्वालिटी ही कम हो जाएगी तो फिर तेल कंजम्पशन कम कैसे होगा साहब बढ़ेगा ही ना इस पूरी खबर के बारे में आपके क्या विचार हैं कमेंट सेक्शन में बताइएगा जरूर इस तरह की और भी खबरों को देखते रहने के लिए बोलता हिंदुस्तान को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा बहुत-बहुत शुक्रिया