दिल्ली के जंतरमंतर से उठी एक आवाज ने देश की राजधानी से लेकर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ 36 दिनों तक चले आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीप के अचानक फिर से सुर्खियों में हैं। जंतरमंतर पर 1 महीने से अधिक चले इस लंबे और थका देने वाले आंदोलन के बाद छात्रों की मांगे तो पूरी हो गई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ प्रदर्शन भी समाप्त हो गया। लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे अभिजीत दीपके अभी तक घर नहीं लौटे हैं। बताया जा रहा है कि आंदोलन के दौरान दिनरा सक्रिय रहने की वजह से अभिजीत की सेहत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों की जांच में उन्हें टाइफाइड की पुष्टि हुई है। जिसके बाद वह अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर उनके अस्पताल से तस्वीर साझा कर स्वास्थ्य की जानकारी दी है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट छत्रपति संभाजी नगर में अभिजीत दीपके के घर पहुंचे और उनके माता-पिता से मुलाकात की। शिरसाट ने यह भी साफ किया है कि वह दीप के परिवार को पिछले 25 सालों से जानते हैं। लेकिन आंदोलन के दौरान वह जानबूझकर उनसे मिलने नहीं गए ताकि युवाओं के इस निष्पक्ष संघर्ष को कोई राजनीतिक रंग ना दिया जा सके। अभिजीत दीपके के पिताजी या तो उसकी माताजी इनसे मेरे कई सालों के संबंध है। पुराने संबंध है हमारे रिलेशंस है। लेकिन पॉलिटिक्स में ऐसे बीच के वक्त में मैं इसलिए नहीं आया कि उसका कोई बवाल आर अलग तरीके से कर सकता था। इन्होंने कुछ दबाव डाले क्या? इन्होंने कुछ उनको उचकाए क्या? ऐसा कुछ भी बोल सकते थे। इसलिए वो जो मूवमेंट थी वो मूवमेंट छोड़ने के बाद में आज उनको मिलने के लिए आया। परिवार से मिलने के बाद संजय सिरसाट ने कहा कि वह खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से मिलकर अभिजीत को आधिकारिक सरकारी सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध करेंगे। शिरसाट ने यह भी कहा कि अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसपर्क में मास्टर करने वाले अभिजीत दीपके को विदेश में नौकरी का भी ऑफर मिला था। लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर देश लौटने और छात्रों की आवाज उठाने का रास्ता चुना। अभी जो उनसे बातचीत हुई ना वो फैमिली ऐसी है कि उनको अब आज भी नहीं लगता कि मेरा बेटे का नाम इतना बड़ा हुआ है या तो मेरा बेटा इतना ऊंचाई पे गया है। वो ये उनकी भावनाएं देखो कैसी है। वो बोलते अगर चार दिन और लेट हो जाता ना तो मेरा बेटा उधर कंपनी में काम को रहता था। उसको अच्छा सा जॉब लगाता। यह होती है मां-बाप की भावना। यह होती है मां-बाप की सोच। लेकिन वह आया एक बच्चों के हक के लिए लड़ा। उसमें उसने सक्सेस पा लिया। केंद्र सरकार ने भी उनको सपोर्ट किया। रिजाइन वगैरह वो जो जो डिमांड थी वो सब मान्य किए। ये सब होने के बाद आज मैं आज उनको आके मिलने के बाद उनकी भावना जो मेरे प्रति है या तो अभिजीत दीपके के प्रति है उन्होंने यहां व्यक्त भी की है। इसलिए राजकारण पॉलिटिक्स ही अलग चीज होती है और रिलेशन अलग होते हैं। उसके वजह से ही आज मैं उनको मिलने के लिए आया हूं। अभिजीत दीपके के पिता ने भी मंत्री सिरसाट का गर्मजशी से स्वागत किया। वो मंत्री बाद में पहले मेरे परिवार जैसे हैं। ऐसे में वो जो भी सोचेंगे वो दीपके के लिए बेहतर ही होगा। ये हमारे लिए मंत्री बाद में पहले हमारे रिलेटिव जी हां तो मैं यही सोच रहा था कि सर फोन क्यों नहीं कर रहे? इधर लेकिन अभिजीत के घर ना पहुंचने और आंदोलन के बाद पैदा हुए माहौल को देखते हुए उनके परिवार ने सुरक्षा की चिंता जताई है। परिजनों को आशंका है कि अभिजीत की जान को खतरा हो सकता है। कुल मिलाकर जंतरमंतर का प्रदर्शन भले ही थम गया हो लेकिन अभिजीत दीपके की सेहत, उनकी सुरक्षा और उनके इस कदम ने देश भर में एक नई बहस और राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। एबीपी गंगा खबर आपकी जुबां आपकी