वह दिन जब बॉलीवुड के बादशाह की आंखों में आंसू आ गए। सोचिए एक ऐसा इंसान जिसकी एक मुस्कान पर पूरा देश झूम उठता था। जिसकी फिल्म रिलीज होने पर सिनेमाघरों के बाहर मेला लग जाता था। हम बात कर रहे हैं राजेश खन्ना की। बॉलीवुड के उस पहले सुपरस्टार की जिसे लोग प्यार से काका बुलाते थे। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक ऐसा किस्सा छुपा है जिसमें यही सुपरस्टार एक दिन सबके सामने रो पड़ा था और वजह थी उसकी अपनी जिद बात है। साल 1969 से 1971 के बीच की। इस दौर में राजेश खन्ना का नाम ही कामयाबी की गारंटी बन गया था। 15 फिल्में 15 हिट ऐसा रिकॉर्ड शायद ही किसी और एक्टर के नाम रहा हो। इस कामयाबी के पीछे एक और नाम जुड़ा था
, किशोर कुमार। दोनों की जोड़ी इतनी हिट हुई कि फिल्म इंडस्ट्री में बिना कहे एक नियम बन गया। अगर हीरो राजेश खन्ना हैं तो गाना किशोर कुमार ही गाएंगे। हे ओ मेरे [गाना गाने की आवाज़] दिल के चैन निर्माता निर्देशक बस इतना पूछते काका गाना किसकी आवाज में होगा और जवाब पहले से तय होता। इस बीच मोहम्मद रफी जिनकी आवाज ने दशकों तक बॉलीवुड पर राज किया था। धीरे-धीरे किनारे होने लगे। जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे फिल्मों की पेशकश कम होती गई।
फिर आई एक फिल्म हाथी मेरे साथी। संगीत दे रहे थे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल। फिल्म की कहानी में एक बेहद भावुक मोड़ आता है। जहां राजेश खन्ना का सबसे करीबी साथी हाथी दम तोड़ देता है। इस सीन के लिए एक गीत बनना था नफरत की दुनिया को छोड़कर। राजेश खन्ना ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक कह दिया गाना किशोर कुमार से गवाया जाए। लेकिन इस बार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उनका तर्क था मस्ती और रोमांस के लिए किशोर दा बेमिसाल हैं। मगर यहां मामला एक ऐसे दर्द का है जिसे सिर्फ मोहम्मद रफी की आवाज ही सही मायने में उतार सकती है। बात इतनी बढ़ गई कि राजेश खन्ना ने धमकी दे दी। अगर रफी गाएंगे तो वह फिल्म ही छोड़ देंगे।
जवाब में संगीतकार जोड़ी ने भी साफ कह दिया अगर रफी साहब नहीं गाएंगे तो फिल्म से वह खुद हट जाएंगे। आखिरकार दबाव इतना बढ़ा कि राजेश खन्ना को झुकना पड़ा। शायद अपने पूरे करियर में पहली और आखिरी बार रफी साहब स्टूडियो पहुंचे। माइक थामा और जैसे ही गाना शुरू हुआ कमरे का माहौल बदल गया।
ऐसा लगा जैसे बरसों की खामोशी, बरसों की उपेक्षा सब कुछ उनकी आवाज में उतर आया हो। शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना को रोने के लिए किसी ट्रिक की जरूरत नहीं पड़ी। रफी साहब की आवाज ने खुद-ब खुद उनकी आंखों में आंसू ला दिए। नफरत की दुनिया को छोड़ के प्यार की दुनिया में जो सुपरस्टार सिर्फ एक आवाज का कायल था वो उस दिन दूसरी आवाज के सामने नतमस्तक हो गया। बाद में खुद राजेश खन्ना ने माना कि उस गाने में जो असर रफी साहब ने पैदा किया वैसा शायद कोई और गायक नहीं कर पाता। क्या यह टक्कर यहीं खत्म हो गई? नहीं। आगे चलकर संगीतकार आर डी बर्मन ने एक और दिलचस्प प्रयोग किया। एक ही गाने को रफी साहब और किशोर दा दोनों से अलग-अलग गवाया। उस मुकाबले की कहानी फिर कभी